Home Blog Page 550

‘रामायण’ की अभिनेत्री ने अमिताभ बच्चन की पत्नी बनकर बनाई थी पहचान, आज गुजर रही हैं इस हालात से

रामानंद सागर की ‘रामायण’ में नजर आने वाला हर किरदार बेहद खास है। इसकी स्टार कास्ट ने अपनी एक्टिंग से लोगों के दिलों में अलग छाप छोड़ है। इतना ही नहीं सभी कलाकारों ने ऑनस्क्रीन रामायण के पात्रों को अपने दमदार अभिनय से अमर कर दिया। इस धारावाहिक में काम करने वाले कई कलाकार दुनिया को अलविदा कह चुके हैं।  लेकिन, एक एक्ट्रेस ऐसी भी थीं जिन्होंने अपने पति की मौत के बाद एक्टिंग की दुनिया को अलविदा कह दिया। हम बात कर रहे हैं सिनेमा जगत में भी अपना नाम कमाने में कामयाब रही पद्मा खन्ना कीं। टेलीविजन स्क्रीन के अलावा बॉलीवुड और भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में काम कर चुकी एक्ट्रेस पद्मा की जिंदगी में एक वक्त ऐसा आया जब वह सबकुछ छोड़ अमेरिका में शिफ्ट हो गईं।

अमिताभ बच्चन की हीरोइन थीं डांसिंग क्वीन

‘रामायण’ में कैकेयी का किरदार निभाकर पद्मा खन्ना घर-घर में मशहूर हो गईं। वह कभी सिनेमा की बेहतरीन अदाकारा और डांसिंग क्वीन हुआ करती थीं। कई फिल्मों में नजर आ चुकी पद्मा ने फिल्म ‘सौदागर’ में अमिताभ बच्चन की पत्नी का किरदार निभाया था। इतना ही नहीं वह 1972 में आई ‘पाकीजा’ में मीना कुमारी की डबल बॉडी भी बन चुकी हैं। दरअसल, शूटिंग के बीच ही मीना कुमारी की तबीयत खराब हो गई थी। उस दौरान बचा हुआ शूट पद्मा ने पूरे किए थे। साल 1973 में रिलीज हुई ‘गद्दार’ में पद्मा खन्ना के साथ नागार्जुन, प्राण, विनोद खन्ना और योगिता बाली भी थे। इस मूवी को IMDb पर 8.3 रेटिंग मिली है। एक्ट्रेस की ये फिल्म IMDb लिस्ट में नंबर 1 पर है।

पद्मा खन्ना अभी कहां है?

अपने अभिनय, डांस और किरदार से लाखों दिलों पर राज करने वाली पद्मा खन्ना कई फिल्मों में बतौर कैबरे डांसर मशहूर हुई थीं। पद्मा खन्ना ने साल 1986 में फिल्म डायरेक्टर जगदीश सिदाना से शादी के बाद, उन्होंने अभिनय से संन्यास ले लिया और अमेरिका चली गईं। अब वह न्यू जर्सी के इसेलिन में इंडियनिका डांस अकादमी नाम से एक डांस स्कूल चलाती हैं। वहां वह अपने बच्चों नेहा और अक्षर के साथ जिंदगी बिता रही हैं। पति के निधन के बावजूद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में कमबैक का नहीं सोचा और विदेश में ही रह रही हैं।

अगर आप गुजरात घूमने का प्लान बना रहे हैं तो इन जगहों की सैर जरूर करें, ट्रिप बन जाएगी यादगार

गुजरात घूमने जा रहे लोगों के लिए जरूरी है कि वह वहां के फेमस टूरिस्ट स्पॉट घूमने जरूर जाएं। क्योंकि जब भी आप किसी जगह पर घूमने के लिए जाते हैं। तो सबसे पहले आपके दिमाग में वही लोकेशन आती हैं। जिनके बारे में वह शहर जाना जाता है। गुजरात में कई ऐसी जगहें हैं, जिसको देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। ऐसे में अगर आप इन फेमस जगहों पर घूमने नहीं जाते हैं, तो आपको यकीनन अफसोस होगा। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको गुजरात की कुछ फेमस जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं। ऐसे में आपको गुजरात की इन फेमस जगहों पर घूमने जरूर जाना चाहिए।

गिर राष्ट्रीय उद्यान

गिर राष्ट्रीय उद्यान भारत के फेमस उद्यानों में से एक है। इसको देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं। गिर राष्ट्रीय उद्यान एशिया में सिंहों का एकमात्र निवास स्थान माना जाता है। यहां पर आप सफारी का भी आनंद ले सकते हैं। वहीं इस उद्यान में आपको कई तरह के प्रजातियों वाले जीव देखने को मिलेंगे। ऐसे में गुजरात आने के बाद आपको यहां जरूर आना चाहिए।

सोमनाथ मंदिर

आपको सोमनाथ मंदिर के भी दर्शन के लिए जाना चाहिए। यह भारत के प्राचीन और ऐतिहासिक शिव मंदिरों में से एक है। भगवान शिव के भक्त दूर-दूर से इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। यह मंदिर शिव के बारह ज्योतिर्लिगों में से एक है। अरब सागर के तट पर स्थिति यह मंदिर खूबसूरत होने के साथ चमत्कारी भी माना जाता है। बताया जाता है कि सोमनाथ मंदिर में सच्चे मन से दर्शन करने वाले लोगों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह परिवार के साथ घूमने के लिए अच्छी जगहों में से एक है।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी

बता दें कि सरदार वल्लभ भाई पटेल की 182 मीटर ऊंची भव्य प्रतिमा देश की सबसे बड़ी प्रतिमाओं में से एक है। साल 2018 में पीएम मोदी ने इसका उद्घाटन किया था। यह गुजरात का फेमस टूरिस्ट स्पॉट है। यहां का सुंदर नजारा काफी आकर्षित करता है। ऐसे में आप यदि गुजरात आ रहे हैं, तो आपको यहां आना अच्छा लगेगा।

पाकिस्तान में अब सूखे का खतरा बढ़ता जा रहा है, पाकिस्तानी नेता ने सिंधु जल संधि के निलंबन को ‘जल बम’ करार दिया

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है। भारत ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया ही है। साथ ही पाकिस्तान के कई एयरबेस को भी तबाह कर दिया। इसके पहले भारत ने सिंधु जल संधि के निलंबित कर दिया। इसके बाद से पाकिस्तान में खलबली मची हुई है। पाकिस्तान में इसे ‘वाटर’ बम तक कहा जा रहा है।

वाटर बम को निष्क्रिय करने की अपील

भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने का उल्लेख करते हुए पाकिस्तान के एक विपक्षी नेता ने शुक्रवार को सरकार से देश में अकाल से बचने के लिए ‘वाटर बम’ को ‘निष्क्रिय’ करने का आग्रह किया है।

पानी को लेकर युद्ध जैसी भविष्यवाणियां

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के सीनेटर अली जफर ने सीनेट को बताया, ‘पानी की कमी हम पर थोपा जा रहा युद्ध है। 21वीं सदी में पानी को लेकर युद्ध लड़े जाने की भविष्यवाणियां सच साबित हो रही हैं।’

अकाल का करना पड़ सकता है सामना

उन्होंने कहा, ‘अगर हम जल के अपने मुद्दों को हल नहीं करते हैं, तो हमें अकाल का सामना करना पड़ सकता है। सिंधु हमारी जीवन रेखा है। यह वास्तव में हमारे ऊपर लटका एक ‘वाटर बम’ है, जिसे हमें निष्क्रिय करना होगा।’

पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए थे 26 लोग

पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के एक दिन बाद, भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई दंडात्मक कदमों की घोषणा की थी। इसमें सिंधु जल संधि (IWT) को निलंबित करना भी शामिल है। इस आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे।

नागासाकी की बजाय जापान के इस शहर पर गिराया जाना था एटम बम; जानिए क्यों बदला गया लक्ष्य

द्वितीय विश्व युद्ध के अंतिम चरण में, 6 और 9 अगस्त 1945 को अमेरिका ने जापान के दो शहरों, ‘हिरोशिमा और नागासाकी’ पर परमाणु बम गिराकर इतिहास की सबसे भीषण तबाही मचाई थी। हिरोशिमा पर “लिटिल बॉय” और नागासाकी पर “फैट मैन” नामक बम गिराए गए, जिसमें लाखों लोग मारे गए और दोनों शहर राख में तब्दील हो गए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सबसे पहले नागासाकी अमेरिका का निशाना नहीं था? दूसरा परमाणु बम असल में जापान के एक अन्य शहर पर गिराया जाना था लेकिन आखिरी वक्त में अमेरिका का निशाना बदल गया और उस शहर की जगह नागासाकी को तबाह कर दिया गया।

ये शहर था अमेरिका का पहला निशाना

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, अमेरिका ने जापान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने के इरादे से परमाणु बमों का इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी। हिरोशिमा पर पहला बम गिराने के बाद, दूसरा निशाना तय किया गया और वह टारगेट था जापान का कोकुरा शहर। कोकुरा उस समय जापान का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक शहर था, जहां बड़े पैमाने पर गोला-बारूद और हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियां थीं। अमेरिका की रणनीति थी कि कोकुरा पर हमला करके जापान की सैन्य शक्ति को और कमजोर किया जाए। इसके लिए 9 अगस्त 1945 को बी-29 बॉम्बर विमान “बॉक्स कार” को “फैट मैन” बम के साथ कोकुरा की ओर रवाना किया गया।

कैसे बदला निशाना

9 अगस्त की सुबह, जब बी-29 विमान कोकुरा के ऊपर पहुंचा, तो वहां का मौसम खराब था। आसमान में घने बादल और धुआं छाया हुआ था, जिसके कारण पायलट मेजर चार्ल्स स्वीनी को टारगेट साफ तौर पर दिखाई नहीं दे रहा था। अमेरिकी सेना के नियमों के अनुसार, परमाणु बम को केवल विजन के आधार पर ही गिराया जाना था, ताकि सटीक निशाना लगाया जा सके। कई चक्कर लगाने के बाद भी जब कोकुरा पर हमला संभव नहीं हुआ, तो विमान में ईंधन की कमी होने लगी। ऐसे में, स्वीनी को दूसरा विकल्प चुनना पड़ा और वह विकल्प था नागासाकी।

बम गिरने से 74,000 लोग मारे गए

नागासाकी उस समय अमेरिका की सूची में वैकल्पिक निशाना था। यह एक बंदरगाह शहर था और औद्योगिक रूप से भी महत्वपूर्ण था, लेकिन कोकुरा की तुलना में कम प्राथमिकता वाला लक्ष्य था। मौसम की वजह से कोकुरा को निशाना बनाना संभव नहीं हुआ, और आखिरकार सुबह 11:02 बजे “फैट मैन” बम नागासाकी पर गिरा दिया गया। इस हमले में लगभग 74,000 लोग मारे गए, और शहर का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो गया।

क्योटो भी था निशाने पर, लेकिन बच गया

यह जानकर हैरानी होगी कि अमेरिका ने शुरुआत में जापान के क्योटो शहर को भी निशाने की सूची में शामिल किया था। क्योटो उस समय जापान की सांस्कृतिक राजधानी थी, जहां कई विश्वविद्यालय, उद्योग, और ऐतिहासिक धरोहरें थीं। लेकिन अमेरिकी युद्ध मंत्री हेनरी स्टिम्सन ने क्योटो को सूची से हटवा दिया। कारण था उनका निजी लगाव। स्टिम्सन ने अपनी पत्नी के साथ क्योटो में हनीमून मनाया था और इस शहर से उनकी कई यादें जुड़ी थीं। उनकी जिद के कारण क्योटो की जगह नागासाकी को सूची में शामिल किया गया। इस तरह, एक हनीमून की याद ने क्योटो को तबाही से बचा लिया, लेकिन नागासाकी को इसकी कीमत चुकानी पड़ी।

हमले की भयावहता

नागासाकी पर गिराया गया “फैट मैन” बम हिरोशिमा के “लिटिल बॉय” से भी ज्यादा शक्तिशाली था। यह बम जमीन से करीब 500 मीटर ऊपर फटा, जिसके कारण आग का एक विशाल मशरूमनुमा गोला आसमान में उठा। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि शहर का 70% औद्योगिक क्षेत्र पूरी तरह नष्ट हो गया। हालांकि, नागासाकी के आसपास पहाड़ों ने तबाही के दायरे को कुछ हद तक सीमित कर दिया, जिसके कारण हिरोशिमा की तुलना में नुकसान कम हुआ। फिर भी, इस हमले ने हजारों लोगों की जिंदगी छीन ली और आने वाली पीढ़ियों पर रेडियेशन का गहरा असर छोड़ा।

क्या कहते हैं इतिहासकार?

कई इतिहासकारों का मानना है कि जापान उस समय पहले ही हार के कगार पर था, और परमाणु बमों का इस्तेमाल शायद जरूरी नहीं था। कुछ का तर्क है कि अमेरिका ने इन हमलों के जरिए अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया और सोवियत संघ को एक संदेश देना चाहता था। वहीं, कुछ का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमन जापान को जल्द से जल्द आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना चाहते थे, ताकि युद्ध को खत्म किया जा सके। इन हमलों के बाद, 15 अगस्त 1945 को जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया, और द्वितीय विश्व युद्ध का अंत हो गया।

पाकिस्तान में आतंकियों को घेरे जाने के बाद दी गई आत्मसमर्पण की चेतावनी, नहीं माने तो तीन मारे गए

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में शुक्रवार को प्रतिबंधित आतंकवादी समूह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के 3 आतंकवादी मारे गए। पंजाब पुलिस के आतंकवाद-रोधी विभाग (CTD) के एक बयान में कहा गया है कि उसे लाहौर से लगभग 325 किलोमीटर दूर मियांवाली जिले में आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में सूचना मिली थी।

मिली थी खुफिया जानकारी

दी गई सूचना में बताया गया था कि ये आतंकवादी रहमानी खेल मोड़ के पास पुलिस चौकियों पर हमला करने की साजिश रच रहे थे। खुफिया जानकारी के आधार पर सीटीडी की टीम ने उनके (आतंकवादियों के) ठिकाने को घेर लिया और आत्मसमर्पण करने को कहा, लेकिन आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी।

दो राइफल और कई कारतूस बरामद

बयान के अनुसार, ‘मुठभेड़ के दौरान तीन आतंकवादी मौके पर ही मारे गए, जबकि उनके 6 साथी भागने में सफल रहे।’ बयान में कहा गया है कि आतंकवादियों के पास से दो राइफल और कई कारतूस बरामद किए गए हैं।

पुलिस चौकियों पर हमला करने की थी साजिश

आतंकवादियों ने पुलिस चौकियों पर हमला करने की साजिश रची थी। फरार आतंकवादियों को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है। नवंबर 2022 में सरकार और टीटीपी के बीच संघर्ष विराम समझौते के टूटने के बाद पाकिस्तान में विशेष रूप से खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में आतंकवादी घटनाओं में वृद्धि देखी गई है।

बन्नू जिले की पुलिस चौकी पर किया था हमला

इसी बीच उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पुलिस ने अपनी चौकी पर गुरुवार रात को एक दर्जन से अधिक भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों के हमले को विफल कर दिया। पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि आतंकवादियों ने बन्नू जिले के मंडन इलाके में जांच चौकी पर हमला किया और उस पर कब्जा करने का प्रयास किया।

आतंकियों को पकड़ने के लिए सर्च अभियान

अधिकारी के अनुसार, पुलिस ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की और हमलों को विफल कर दिया। हमले में एक कांस्टेबल घायल हुआ, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने बताया कि बताया कि हमले के बाद पुलिस ने आतंकवादियों की तलाश में अभियान शुरू कर दिया।