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Health Update:बिना थके लंबे समय तक फिट रहने के 5 स्मार्ट टिप्स, ऐसे बनाएं फिटनेस आदत

फिट रहना सिर्फ कुछ दिनों तक कड़ी एक्सरसाइज करने का नाम नहीं है। असली चुनौती अपनी फिटनेस रूटीन को लंबे समय तक बनाए रखना है। अक्सर लोग शुरुआत में काफी उत्साह के साथ जिम या वर्कआउट शुरू करते हैं, लेकिन कुछ समय बाद थकान, व्यस्त शेड्यूल या मोटिवेशन की कमी के कारण इसे छोड़ देते हैं।

हालांकि, फिट रहने के लिए हर दिन खुद को पूरी तरह थकाने की जरूरत नहीं होती। सही प्लानिंग, पर्याप्त आराम और छोटे-छोटे बदलाव आपकी फिटनेस जर्नी को आसान और टिकाऊ बना सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे 5 स्मार्ट तरीके, जिनकी मदद से आप बिना जरूरत से ज्यादा थके अपनी फिटनेस पर लगातार काम कर सकते हैं।

1. ज्यादा मेहनत नहीं, नियमितता पर दें ध्यान

हर वर्कआउट में खुद को पूरी तरह थका देना जरूरी नहीं है। शरीर की ऊर्जा हर दिन एक जैसी नहीं रहती। कुछ दिनों में आप ज्यादा एक्टिव महसूस कर सकते हैं, जबकि कभी हल्का वर्कआउट करना ही बेहतर विकल्प हो सकता है।

ऐसे दिनों में हल्की एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग, योग या थोड़ी देर पैदल चलना भी आपकी रूटीन को बनाए रखने में मदद कर सकता है। फिटनेस में लंबे समय तक अच्छे परिणाम पाने के लिए लगातार एक्टिव रहना कुछ दिनों तक जरूरत से ज्यादा मेहनत करने से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

2. वर्कआउट के साथ रिकवरी को भी दें महत्व

फिटनेस का मतलब सिर्फ एक्सरसाइज करना नहीं है। शरीर को मजबूत और एक्टिव बनाए रखने के लिए रिकवरी भी उतनी ही जरूरी है। पर्याप्त नींद, पानी की सही मात्रा और संतुलित डाइट शरीर को वर्कआउट के बाद रिकवर करने में मदद करती है।

अगर आप नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करते हैं, तो डाइट में पर्याप्त प्रोटीन शामिल करना भी जरूरी है। जरूरत पड़ने पर कुछ लोग प्रोटीन सप्लीमेंट का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसे संतुलित और पौष्टिक भोजन का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

3. बड़े लक्ष्य की जगह छोटे टारगेट तय करें

फिटनेस का कोई बड़ा लक्ष्य हासिल करने में समय लग सकता है। उदाहरण के लिए, अगर आपका लक्ष्य वजन कम करना या मसल्स बनाना है, तो तुरंत परिणाम मिलने की उम्मीद आपको निराश कर सकती है।

इसलिए बड़े लक्ष्य को छोटे हिस्सों में बांटें। जैसे सप्ताह में चार दिन एक्सरसाइज करना, रोजाना कुछ हजार कदम चलना या धीरे-धीरे अपनी स्ट्रेंथ बढ़ाना।

जब आप छोटे लक्ष्य पूरे करते हैं तो आपका आत्मविश्वास बढ़ता है। यही छोटी उपलब्धियां आपको लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।

4. ऐसी एक्टिविटी चुनें जिसका आपको आनंद मिले

अगर आपको एक्सरसाइज करना बोझ जैसा लगता है, तो लंबे समय तक रूटीन बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। इसलिए अपनी पसंद की फिजिकल एक्टिविटी को फिटनेस प्लान में शामिल करें।

आप जिम जाने के अलावा योग, साइक्लिंग, डांस, स्विमिंग या तेज चलने जैसी गतिविधियां भी चुन सकते हैं। जब कोई एक्टिविटी आपकी लाइफस्टाइल का हिस्सा बन जाती है, तो उसे नियमित रूप से करना आसान हो जाता है।

5. शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें

फिटनेस के दौरान अपने शरीर की प्रतिक्रिया को समझना बेहद जरूरी है। अगर लगातार थकान, कमजोरी या मांसपेशियों में दर्द महसूस हो रहा है, तो हो सकता है कि शरीर को आराम और रिकवरी की जरूरत हो।

ऐसी स्थिति में जरूरत से ज्यादा ट्रेनिंग करने के बजाय आराम, नींद और सही खानपान पर ध्यान देना बेहतर हो सकता है। किसी भी फिटनेस सप्लीमेंट को अपनी रूटीन में शामिल करने से पहले उसकी जरूरत और उपयुक्तता को समझना चाहिए। सप्लीमेंट्स नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और पर्याप्त आराम की जगह नहीं ले सकते।

फिटनेस को बनाएं लंबी अवधि की आदत

फिटनेस कोई कुछ दिनों या एक महीने का टारगेट नहीं है। यह एक ऐसी आदत है जिसे लंबे समय तक बनाए रखने की जरूरत होती है। इसलिए हर दिन खुद को थकाने के बजाय अपने शरीर की क्षमता के हिसाब से ट्रेनिंग करें और रिकवरी को भी पर्याप्त समय दें।

छोटे लक्ष्य, नियमित एक्सरसाइज, संतुलित खानपान और पर्याप्त आराम धीरे-धीरे आपकी लाइफस्टाइल में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। सबसे अच्छी फिटनेस रूटीन वही है जिसे आप लंबे समय तक लगातार और बिना अनावश्यक दबाव के जारी रख सकें।

Amroha News: अमरोहा में शिक्षक और कार्यालय सहायक निलंबित, लापरवाही पर BSA ने की सख्त कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में शिक्षा विभाग ने अनुशासनहीनता और सरकारी कामकाज में लापरवाही के आरोप में बड़ी कार्रवाई की है। बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) डॉ. मोनिका ने एक प्रभारी शिक्षक और एक कार्यालय सहायक को निलंबित कर दिया है। दोनों कर्मचारियों पर सरकारी कर्मचारी आचरण नियमों का पालन नहीं करने और सौंपे गए दायित्वों में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए गए हैं।

दो कर्मचारियों के निलंबन की कार्रवाई के बाद बेसिक शिक्षा विभाग में हलचल बढ़ गई है। विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि सरकारी कार्यों में उदासीनता और अनुशासन से समझौता नहीं किया जाएगा।

प्रभारी शिक्षक पर लगे कई आरोप

धनौरा विकासखंड के संविलियन विद्यालय तोमड़ा में प्रभारी अध्यापक के पद पर तैनात इकबाल सिंह के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है।

विभागीय स्तर पर उनके खिलाफ सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। इसके अलावा विभागीय कामकाज में अपेक्षित रुचि नहीं लेने और अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से पूरा नहीं करने की बात भी सामने आई है।

विभाग ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके आचरण से शिक्षा विभाग की छवि प्रभावित हुई। इन्हीं शिकायतों और आरोपों को गंभीरता से लेते हुए बीएसए की ओर से निलंबन का निर्णय लिया गया।

कार्यालय सहायक पर भी गिरी गाज

शिक्षा विभाग की कार्रवाई सिर्फ प्रभारी अध्यापक तक सीमित नहीं रही। गंगेश्वरी विकासखंड स्थित खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कार्यरत कार्यालय सहायक राहुल कुमार को भी निलंबित किया गया है।

राहुल कुमार पर भी सरकारी कर्मचारी आचरण नियमों के उल्लंघन का आरोप है। विभाग के अनुसार, वह अपने दायित्वों को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं बरत रहे थे और विभागीय कार्यों में उदासीनता दिखाई गई।

इन आरोपों के आधार पर विभाग ने उनके खिलाफ भी निलंबन की कार्रवाई की है।

BSA ने दिया सख्त संदेश

बीएसए डॉ. मोनिका ने कार्रवाई के बाद साफ किया कि शिक्षा विभाग में अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ काम करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि विभागीय कामकाज में किसी भी तरह की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने निर्धारित दायित्वों का जिम्मेदारी से निर्वहन करना होगा। यदि कोई कर्मचारी अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही करता है या विभागीय नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा विभाग में बढ़ी सख्ती

अमरोहा में एक साथ दो कर्मचारियों के निलंबन से शिक्षा विभाग में चर्चा तेज हो गई है। विभाग की इस कार्रवाई को कर्मचारियों के लिए सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

बीएसए ने संकेत दिया है कि विभागीय अनुशासन को बनाए रखने के लिए आगे भी जांच और कार्रवाई का सिलसिला जारी रह सकता है। ऐसे में सरकारी स्कूलों और शिक्षा कार्यालयों में तैनात कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर विभाग की निगरानी और सख्त होने की संभावना है।

Coriander Water Benefits: ब्लोटिंग और पाचन में मिल सकती है राहत, जानें सही तरीका

भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाले कई मसाले सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं। धनिया भी ऐसा ही मसाला है, जिसका इस्तेमाल लंबे समय से भोजन में किया जाता रहा है। धनिये के बीजों को पानी में भिगोकर या उबालकर पीने का चलन भी कई जगहों पर है।

अगर आपकी डाइट और लाइफस्टाइल संतुलित नहीं है, तो गैस, पेट फूलना और अपच जैसी परेशानियां हो सकती हैं। ऐसे में कुछ लोग धनिये के पानी को अपनी डेली रूटीन में शामिल करते हैं। हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज या शरीर को “डिटॉक्स” करने वाला चमत्कारी पेय नहीं समझना चाहिए।

धनिये के बीजों में क्या होता है?

धनिये के बीजों में कई तरह के पोषक तत्व और पौधों से मिलने वाले कंपाउंड पाए जाते हैं। इनमें कुछ मात्रा में विटामिन और मिनरल्स के साथ एंटीऑक्सीडेंट गुण वाले यौगिक भी मौजूद होते हैं।

हालांकि, धनिये के पानी से मिलने वाले पोषक तत्वों की मात्रा इस बात पर निर्भर करती है कि कितने बीज इस्तेमाल किए गए हैं और उन्हें किस तरीके से तैयार किया गया है। इसलिए इसे संतुलित डाइट का विकल्प नहीं माना जा सकता।

1. पाचन से जुड़ी परेशानी में मददगार हो सकता है

धनिये के बीजों का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से पाचन से जुड़ी परेशानियों के लिए किया जाता रहा है। कुछ लोगों को इसका सेवन गैस, पेट फूलने या हल्की अपच जैसी समस्याओं में आरामदायक लग सकता है।

अगर खाना खाने के बाद अक्सर पेट भारी या फूला हुआ महसूस होता है, तो पर्याप्त पानी पीने और संतुलित भोजन के साथ धनिये के पानी को एक सामान्य घरेलू विकल्प के तौर पर लिया जा सकता है।

2. एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर

धनिये में ऐसे पौधों से मिलने वाले यौगिक पाए जाते हैं जिनमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण देखे गए हैं। एंटीऑक्सीडेंट शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में भूमिका निभाते हैं।

लेकिन सिर्फ धनिये का पानी पीने से शरीर के सभी विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं, ऐसा दावा वैज्ञानिक रूप से सही नहीं माना जाना चाहिए। शरीर में लिवर और किडनी जैसे अंग प्राकृतिक रूप से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं।

3. पानी पीने की आदत बढ़ाने में मदद

धनिये के बीजों से तैयार पानी कुछ लोगों के लिए सादा पानी पीने का एक अलग विकल्प हो सकता है। पर्याप्त पानी पीना शरीर में हाइड्रेशन बनाए रखने के लिए जरूरी है।

धनिये के पानी को किसी खास बीमारी का इलाज मानने के बजाय इसे हाइड्रेशन और संतुलित डाइट के हिस्से के तौर पर देखना बेहतर है।

4. एसिडिटी में राहत मिलना व्यक्ति पर निर्भर

धनिये के पानी को कई घरेलू नुस्खों में एसिडिटी और पेट की गर्मी से राहत के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कुछ लोगों को इससे आराम महसूस हो सकता है, लेकिन हर व्यक्ति में इसका असर एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है।

अगर आपको बार-बार सीने में जलन, खट्टी डकार, पेट दर्द या एसिडिटी की शिकायत रहती है, तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

5. यूरिनरी हेल्थ के लिए क्या दावा है?

धनिये के बीजों को पारंपरिक तौर पर पेशाब से जुड़ी कुछ परेशानियों के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन UTI यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन होने पर धनिये का पानी इलाज का विकल्प नहीं है।

पेशाब में जलन, बार-बार पेशाब आना, तेज दर्द, बुखार या पेशाब में खून जैसे लक्षण हों तो मेडिकल जांच जरूरी है। संक्रमण होने पर उचित उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए।

धनिये का पानी कैसे बनाएं?

धनिये का पानी बनाने के लिए बहुत ज्यादा मात्रा में बीज इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं है।

  • करीब 1-2 चम्मच धनिये के बीज लें।
  • इन्हें एक गिलास पानी में रातभर भिगोकर रख सकते हैं।
  • सुबह पानी को छानकर सामान्य तापमान या हल्का गुनगुना करके पिया जा सकता है।
  • धनिये के बीजों को हल्का कूटकर दाल, सब्जी या सूप में मसाले के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?

हर घरेलू नुस्खा हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है। अगर आपको किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी है, आप नियमित दवाएं लेते हैं या कोई पुरानी बीमारी है, तो रोजाना किसी हर्बल ड्रिंक का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइट एक्सपर्ट से सलाह लेना बेहतर है।

निष्कर्ष

धनिये के बीज एक सामान्य किचन स्पाइस हैं और इन्हें संतुलित डाइट में शामिल किया जा सकता है। धनिये का पानी कुछ लोगों के लिए पाचन और हाइड्रेशन के लिहाज से उपयोगी हो सकता है, लेकिन इसे ब्लोटिंग, एसिडिटी, UTI या किसी अन्य बीमारी का पक्का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।

बेहतर स्वास्थ्य के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, पानी और संतुलित खानपान को प्राथमिकता देना सबसे जरूरी है।

Offbeat Monsoon Destinations: बारिश में सुकून चाहिए तो Meghalaya और Arunachal के इन गांवों का करें रुख

मानसून का मौसम आते ही पहाड़ों और गांवों की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। बारिश के बाद हरियाली, बादलों से ढके पहाड़, झरने और ठंडी हवाएं शहर की भागदौड़ से दूर कुछ समय बिताने का बेहतरीन मौका देती हैं।

अगर आप इस मानसून में किसी लोकप्रिय और भीड़भाड़ वाले टूरिस्ट स्पॉट की बजाय शांत और कम एक्सप्लोर की गई जगह की तलाश में हैं, तो नॉर्थ-ईस्ट के कुछ गांव आपके लिए शानदार विकल्प हो सकते हैं। मेघालय का मावल्यान्नॉन्ग, नागालैंड का खोनोमा और अरुणाचल प्रदेश की जीरो वैली प्रकृति, स्थानीय संस्कृति और सुकून का बेहतरीन अनुभव दे सकते हैं।

मावल्यान्नॉन्ग, मेघालय

मेघालय का मावल्यान्नॉन्ग अपनी साफ-सफाई और प्राकृतिक सुंदरता के लिए काफी मशहूर है। मानसून में यहां की हरियाली और भी निखर जाती है। बारिश के बाद पेड़-पौधे, रास्ते और आसपास का प्राकृतिक वातावरण बेहद आकर्षक नजर आता है।

यहां आपको स्थानीय खासी संस्कृति और गांव की जीवनशैली को करीब से समझने का मौका भी मिलता है।

मावल्यान्नॉन्ग में क्या देखें?

  • लिविंग रूट ब्रिज की प्राकृतिक संरचना देखें
  • बांस से बने स्काई व्यू पॉइंट का अनुभव लें
  • आसपास के छोटे झरनों और हरियाली को एक्सप्लोर करें
  • स्थानीय खासी संस्कृति और ग्रामीण जीवन को करीब से जानें

मानसून के दौरान यहां का मौसम काफी सुहावना हो सकता है, लेकिन बारिश के कारण रास्तों पर फिसलन की स्थिति भी बन सकती है।

खोनोमा, नागालैंड

प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण में रुचि रखने वाले यात्रियों के लिए खोनोमा एक खास जगह हो सकती है। नागालैंड का यह गांव अपने प्राकृतिक वातावरण, पहाड़ी इलाकों और स्थानीय संस्कृति के लिए जाना जाता है।

बारिश के मौसम में आसपास की पहाड़ियां और सीढ़ीनुमा खेत हरियाली से भर जाते हैं। बादलों से घिरे पहाड़ और शांत वातावरण इस जगह को मानसून ट्रिप के लिए आकर्षक बनाते हैं।

खोनोमा में क्या करें?

  • गांव की गलियों में पैदल घूमकर स्थानीय जीवन देखें
  • सीढ़ीनुमा खेती और पहाड़ी परिदृश्य को एक्सप्लोर करें
  • नागा संस्कृति और स्थानीय परंपराओं को करीब से जानें
  • नेचर वॉक और बर्ड वॉचिंग का आनंद लें

अगर आपको शांत जगहों पर घूमना और प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद है, तो खोनोमा आपकी ट्रैवल लिस्ट में शामिल हो सकता है।

जीरो वैली, अरुणाचल प्रदेश

अरुणाचल प्रदेश की जीरो वैली अपनी खूबसूरत प्राकृतिक वादियों और अपतानी संस्कृति के लिए जानी जाती है। मानसून के दौरान यहां धान के खेतों में हरियाली छा जाती है और पहाड़ों पर हल्का कोहरा पूरे इलाके को बेहद खूबसूरत बना देता है।

यह जगह सिर्फ प्रकृति प्रेमियों के लिए ही नहीं, बल्कि स्थानीय जनजातीय संस्कृति को समझने की इच्छा रखने वाले यात्रियों के लिए भी खास है।

जीरो वैली में क्या करें?

  • हरे-भरे धान के खेतों के बीच समय बिताएं
  • अपतानी समुदाय के पारंपरिक गांवों को एक्सप्लोर करें
  • पहाड़ी रास्तों और आसपास के प्राकृतिक नजारों का आनंद लें
  • स्थानीय बाजारों में घूमकर क्षेत्रीय खानपान का स्वाद लें

मानसून में यहां का मौसम बेहद आकर्षक हो सकता है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में बारिश के कारण यात्रा की परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं।

मानसून ट्रिप पर निकलने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

नॉर्थ-ईस्ट के पहाड़ी इलाकों में बारिश के दौरान मौसम कभी भी बदल सकता है। इसलिए यात्रा पर जाने से पहले कुछ जरूरी तैयारियां करना बेहतर रहेगा।

  • अपने साथ रेनकोट और अच्छी क्वालिटी की छतरी रखें।
  • फिसलन वाले रास्तों के लिए मजबूत ग्रिप वाले जूते पहनें।
  • यात्रा से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी जरूर लें।
  • स्थानीय प्रशासन और गांवों के नियमों का सम्मान करें।
  • पहाड़ी इलाकों में शाम जल्दी हो सकती है, इसलिए दिन की रोशनी में यात्रा पूरी करने की कोशिश करें।
  • प्लास्टिक और अन्य कचरा खुले में न फेंकें।
  • प्राकृतिक स्थलों और स्थानीय पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से बचें।

मानसून में नॉर्थ-ईस्ट क्यों है खास?

मानसून में नॉर्थ-ईस्ट का प्राकृतिक परिदृश्य बेहद खूबसूरत हो जाता है। बारिश के बाद पहाड़ों की हरियाली, धुंध, झरने और ग्रामीण इलाकों की शांत जिंदगी यात्रियों को शहरों की भीड़ से बिल्कुल अलग अनुभव देती है।

मावल्यान्नॉन्ग, खोनोमा और जीरो वैली तीनों जगहों की अपनी अलग पहचान है। अगर आप इस मानसून में प्रकृति, स्थानीय संस्कृति और शांति के बीच कुछ समय बिताना चाहते हैं, तो इन जगहों को अपनी ट्रैवल बकेट लिस्ट में शामिल कर सकते हैं।

Healthy Cooking Oil: Coconut vs Avocado Oil, क्या नारियल और एवोकाडो ऑयल हैं ज्यादा हेल्दी? जानें कौन सा बेहतर

आज के समय में लोग सिर्फ खाने की क्वालिटी ही नहीं, बल्कि खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले तेल को लेकर भी काफी सजग हो गए हैं। सोशल मीडिया पर नारियल तेल और एवोकाडो ऑयल को हेल्दी कुकिंग ऑयल के तौर पर खूब प्रमोट किया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये तेल वास्तव में सरसों, मूंगफली या दूसरे आम कुकिंग ऑयल से बेहतर हैं?

इसका जवाब इतना सीधा नहीं है। किसी एक तेल को सभी लोगों के लिए सबसे अच्छा नहीं कहा जा सकता। तेल का चुनाव उसकी फैटी एसिड प्रोफाइल, खाना पकाने के तरीके, कुल डाइट और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर करना ज्यादा सही रहता है।

हर तेल की होती है अलग न्यूट्रिशन प्रोफाइल

खाने के तेल में मुख्य अंतर उनके फैट के प्रकार और अनुपात को लेकर होता है। कुछ तेलों में सैचुरेटेड फैट ज्यादा होता है, जबकि कुछ में मोनोअनसैचुरेटेड या पॉलीअनसैचुरेटेड फैट की मात्रा अधिक होती है।

इसलिए सिर्फ यह देखकर तेल चुनना कि वह “नेचुरल” या “प्रीमियम” है, पर्याप्त नहीं है। आपकी पूरी डाइट और तेल की कुल मात्रा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

नारियल तेल कितना हेल्दी है?

नारियल तेल में सैचुरेटेड फैट की मात्रा दूसरे कई प्लांट ऑयल्स की तुलना में काफी अधिक होती है। इसकी खासियत यह है कि यह खाना पकाने में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है और इसमें एक अलग स्वाद और खुशबू भी होती है।

कुछ अध्ययनों में नारियल तेल के सेवन को HDL यानी “अच्छे” कोलेस्ट्रॉल में बढ़ोतरी से जोड़ा गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि नारियल तेल हर व्यक्ति के लिए सबसे अच्छा विकल्प है।

क्योंकि इसमें सैचुरेटेड फैट अधिक होता है, इसलिए जिन लोगों का LDL कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है या जिन्हें हृदय रोग का जोखिम है, उनके लिए इसकी मात्रा पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो सकता है।

एवोकाडो ऑयल की क्या खासियत है?

एवोकाडो ऑयल में मोनोअनसैचुरेटेड फैट की अच्छी मात्रा पाई जाती है। इस तरह के फैट को संतुलित डाइट के हिस्से के तौर पर हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है।

इसमें विटामिन E और कुछ एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड भी पाए जाते हैं। इसका स्वाद अपेक्षाकृत हल्का होता है, इसलिए इसे सलाद, ड्रेसिंग और अलग-अलग तरह की कुकिंग में इस्तेमाल किया जा सकता है।

हालांकि, एवोकाडो ऑयल की कीमत कई सामान्य कुकिंग ऑयल की तुलना में ज्यादा हो सकती है। इसलिए इसे खरीदना हर परिवार के लिए जरूरी नहीं है।

क्या सरसों और मूंगफली का तेल खराब है?

बिल्कुल नहीं। सरसों, मूंगफली, तिल, सोयाबीन, सूरजमुखी और राइस ब्रान जैसे तेल भी संतुलित मात्रा में इस्तेमाल किए जाएं तो डाइट में जरूरी फैटी एसिड उपलब्ध करा सकते हैं।

इसलिए केवल इसलिए किसी सामान्य कुकिंग ऑयल को अनहेल्दी नहीं मानना चाहिए क्योंकि वह नारियल या एवोकाडो ऑयल जितना ट्रेंडिंग नहीं है।

कई लोगों के लिए स्थानीय रूप से आसानी से उपलब्ध और बजट में आने वाला तेल ही बेहतर व्यावहारिक विकल्प हो सकता है।

एक ही तेल पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं

डाइट में अलग-अलग तरह के फैट का संतुलन रखना महत्वपूर्ण है। इसलिए कुछ लोग अपनी जरूरत और खाना पकाने के तरीके के अनुसार अलग-अलग तेलों का इस्तेमाल करते हैं।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि आपको हर कुछ दिनों में तेल बदलना ही चाहिए। ज्यादा जरूरी यह है कि कुल तेल का सेवन सीमित रहे और आपकी पूरी डाइट संतुलित हो।

तेल कितना इस्तेमाल करते हैं, यह ज्यादा जरूरी

किसी भी तेल को हेल्दी मानकर जरूरत से ज्यादा खाना सही नहीं है। नारियल तेल, एवोकाडो ऑयल या सामान्य कुकिंग ऑयल—सभी में कैलोरी काफी अधिक होती है।

इसलिए खाना बनाते समय तेल की मात्रा पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। ज्यादा तेल का इस्तेमाल लंबे समय में अतिरिक्त कैलोरी का कारण बन सकता है।

बार-बार तेल गर्म करके इस्तेमाल करने से बचें

एक ही तेल को बार-बार गर्म करके खाना बनाने या तलने में इस्तेमाल करना अच्छी आदत नहीं है। बार-बार गर्म करने से तेल में ऑक्सीडेशन और अवांछित कंपाउंड बनने की संभावना बढ़ सकती है।

इसलिए इस्तेमाल किए गए तेल को बार-बार गर्म करने के बजाय जरूरत के मुताबिक ताजा तेल का इस्तेमाल करना बेहतर है।

तो कौन सा तेल सबसे अच्छा है?

इसका कोई एक जवाब नहीं है। अगर आप सामान्य रूप से स्वस्थ हैं, तो अपनी डाइट, बजट और खाना पकाने के तरीके के अनुसार नारियल, एवोकाडो, सरसों, मूंगफली, तिल या दूसरे उपयुक्त तेलों का सीमित मात्रा में इस्तेमाल कर सकते हैं।

अगर आपको हाई कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो अपने लिए तेल चुनने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन से सलाह लेना बेहतर रहेगा।

नारियल और एवोकाडो ऑयल को सिर्फ ट्रेंड के कारण “सबसे हेल्दी” मानना सही नहीं है। दोनों की अपनी अलग पोषण संबंधी विशेषताएं हैं, लेकिन आम कुकिंग ऑयल भी संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकते हैं।