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Sports News:दिल्ली की लड़कियों ने दिखाया दम, देशभर की 25 टीमों को पछाड़कर खिताब अपने नाम किया; फाइनल में गुड़गांव को हराया

54वीं केंद्रीय विद्यालय राष्ट्रीय स्पोर्ट्स मीट 2024-25 में लॉन टेनिस के बालिका वर्ग में दिल्ली की टीम चैंपियन बनी है. इस प्रतियोगिता का आयोजन 16-20 सितंबर तक दिल्ली के आरके खन्ना अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम में किया गया. इला पाण्डेय के नेतृत्व में दिल्ली की टीम चैंपियन बनी, जबकि गुड़गांव की टीम उपविजेता रही.

दिल्ली के खिलाड़ी शुरू से लेकर अंत तक चैंपियन खिलाड़ियों की तरह खेले, इसी बलबूते टीम ने ट्रॉफी जीती. कौशाम्बी की बेटी इला पाण्डेय दिल्ली की कप्तान रहीं, उन्होंने अपनी टीम के लिए ट्रॉफी रिसीव की. एकल प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में इला पाण्डेय और जयपुर रीजन की इशिका बनावत ने सुपरटाई ब्रेकर तक लड़ाई लड़ी, लेकिन अंत में दिल्ली की कप्तान इला पाण्डेय को 7-6 के अंतर से करीबी शिकस्त झेलनी पड़ी. इला पाण्डेय एकल प्रतियोगिता में उपविजेता रहीं.

दिल्ली के आरके खन्ना अंतर्राष्ट्रीय टेनिस स्टेडियम में आयोजित केंद्रीय विद्यालय राष्ट्रीय स्पोर्ट्स मीट 2024-25 की लॉन टेनिस प्रतियोगिता में देशभर से 26 अलग-अलग रीजन की टीमों ने हिस्सा लिया. इस कम्पटीशन में दिल्ली रीजन की खिलाड़ियों ने सबसे ज्यादा जीत दर्ज करके ओवरऑल चैंपियन होने का तमगा हासिल किया.

कप्तान इला पाण्डेय ने खासा प्रभावित किया, जो दिल्ली के गोल मार्केट केंद्रीय विद्यालय की छात्रा हैं. इला, कौशाम्बी के ग्राम सभा निधियावां की निवासी हैं. दिल्ली की कप्तान रहीं इला पाण्डेय राष्ट्रीय स्तर की टेनिस प्लेयर हैं और दिल्ली में टेनिस कोच कुलदीप शर्मा से टेनिस की ट्रेनिंग ले रही हैं.

इला भारत की उभरती हुई टेनिस खिलाड़ी हैं, जिन्होंने पिछले साल जर्मनी के पाइने में अंतर्राष्ट्रीय टेनिस कोच सासा नेनसेल से तीन महीने तक ट्रेनिंग ली थी. इसी टेनिस अकादमी में स्पेन की फेमस खिलाड़ी जेसी फेरेरो भी ट्रेनिंग ले चुकी हैं.

UN में ट्रंप की तारीफ करते रहे, वहीं ऑपरेशन सिंदूर से हुए जख्मों की बात भी उठाते रहे पाक पीएम शहबाज

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को अपना संबोधन दिया. इस दौरान पाकिस्तान के पीएम ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ, ऑपरेशन सिंदूर को लेकर झूठे दावों और कश्मीर को लेकर गीदड़भभकियों के अलावा कुछ भी प्रासंगिक बात नहीं कही.

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर शरीफ ने दावा किया कि अगर डोनाल्ड ट्रंप ने बीच में हस्तक्षेप न किया होता तो दक्षिण एशिया में भीषण युद्ध छिड़ जाता. उन्होंने यहां तक कह दिया कि पाकिस्तान ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करता है. शरीफ ने कहा कि ट्रंप के शांतिप्रिय शख्स हैं और पाकिस्तान की तरफ से उन्हें नोबेल पुरस्कार के लिए नामित करना एक छोटा सा अभिवादन भर ही है.

शरीफ ने खोखला दावा करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का जवाब देने के दौरान पाकिस्तान बेहतर स्थिति में था, लेकिन ट्रंप के कहने पर सीजफायर करना पड़ा. बकौल शरीफ ‘अगर ट्रंप बीच में न आते तो दक्षिण एशिया में युद्ध तय था. हम मानते हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप ने शांति की दिशा में बड़ी भूमिका निभाई है और उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए.’

शरीफ ने ऑपरेशन सिंदूर का भी रोया रोना
शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक के बाद एक कई झूठे दावे किए. उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान ने मई में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करते हुए उसके 7 जेट मार गिराए. फिलिस्तीन में कथित तौर पर इजरायली हमलों में मारी गई 7 साल की बच्ची हिंदरजाब की मौत का उदाहरण देते हुए दावा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी पाकिस्तान में एक 6 साल के बच्चे की मौत हुई थी. उन्होंने कहा कि हमने भी अपने कंधें पर मासूम के ताबूत उठाए हैं.  शरीफ ने कहा कि ताबूत जितने छोटे होते हैं, वह असल में उतने ही भारी होते हैं.

फिर से अलापा वही पुराना राग
शरीफ ने अपने भाषण की शुरुआत कुरान की आयत से की और कहा कि आज की दुनिया पहले से कहीं ज्यादा जटिल हो गई है, जहां अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन और आतंकवाद बड़ी चुनौतियां हैं. उन्होंने भारत पर पहलगाम हमले की अंतरराष्ट्रीय जांच से बचने और पाकिस्तान पर हमले करने का आरोप लगाया. अपने भाषण में शरीफ ने बार-बार भारत पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि भारत सिंधु जल संधि का पालन नहीं कर रहा और पानी रोकना पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध की घोषणा है. साथ ही उन्होंने दोहराया कि पाकिस्तान कश्मीरियों के साथ खड़ा है और जनमत संग्रह की मांग करता है.

आतंकवाद के मुद्दे पर भी शरीफ ने किए झूठे दावे
शरीफ ने आतंकवाद की निंदा की और कहा कि पिछले दो दशकों में पाकिस्तान ने 90,000 जानें खोई हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान में आतंकवाद भारत और अन्य देशों की मदद से पनप रहा है. उन्होंने टीटीपी, बीएलए और ‘फितना-ए-हिंदुस्तान’ जैसी आतंकी संगठनों का नाम लिया.

Safe Medicine For Pregnant Women: प्रेग्नेंसी में किन दवाओं से करें परहेज? पैरासिटामोल विवाद के बीच जानें जरूरी सावधानियां

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक बयान देकर दुनिया भर में हलचल मचा दी. उन्होंने दावा किया कि आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली दर्द और बुखार की दवा पैरासिटामोल (Tylenol) गर्भावस्था में बच्चे में ऑटिज्म और एडीएचडी (Attention Deficit Hyperactivity Disorder) का खतरा बढ़ा सकती है. ट्रंप के इस बयान के बाद गर्भवती महिलाओं में डर फैल गया और सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई.

हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूरोपियन मेडिसिन्स एजेंसी (EMA) और ब्रिटेन की स्वास्थ्य एजेंसियों ने ट्रंप के दावे को खारिज कर दिया है. WHO की पूर्व चीफ साइंटिस्ट डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि पैरासिटामोल गर्भवती महिलाओं के लिए अब भी सबसे सुरक्षित दवा है. उन्होंने साफ कहा कि इस बारे में कोई नया वैज्ञानिक सबूत सामने नहीं आया है.

प्रेग्नेंसी में किन दवाओं से बचना चाहिए?

डॉक्टरों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को किसी भी दवा का सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए. कई दवाएं भ्रूण के विकास पर बुरा असर डाल सकती हैं. आइए जानें वे दवाएं जिन्हें प्रेग्नेंसी में भूलकर भी नहीं लेना चाहिए –

इबुप्रोफेन  और डाइक्लोफेनाक – ये दवाएं दर्द और सूजन में ली जाती हैं लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान लेने से बच्चे के हार्ट और किडनी पर असर पड़ सकता है.

टेट्रासाइक्लिन – यह एक एंटीबायोटिक है जो गर्भ में पल रहे बच्चे की हड्डियों और दांतों के विकास को प्रभावित कर सकती है.

आइसोट्रेटिनॉइन– इसे आमतौर पर पिंपल्स की दवा के तौर पर दिया जाता है. लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए यह बेहद खतरनाक है और बच्चे में जन्मजात विकार का कारण बन सकती है.

कुछ एंटी-एपिलेप्टिक दवाएं – मिर्गी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं में से कुछ भ्रूण में जन्म दोष और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं बढ़ा सकती हैं.

हार्मोनल दवाएं–  बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी हार्मोनल दवा लेना गर्भ में पल रहे शिशु के लिए खतरा पैदा कर सकता है.

पैरासिटामोल विवाद पर भारतीय  की राय

भारतीय डॉक्टरों ने भी साफ कहा है कि ट्रंप का दावा वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है. कोचीन के डॉ. राजीव जयरामन ने बताया कि स्वीडन में 24 लाख बच्चों पर हुए एक अध्ययन में यह पाया गया कि पैरासिटामोल से ऑटिज़्म या अन्य न्यूरो-डेवलपमेंटल डिसऑर्डर का खतरा नहीं बढ़ता.

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर गर्भवती महिलाएं तेज बुखार में पैरासिटामोल न लें तो इससे मां और बच्चे दोनों के लिए खतरा हो सकता है. बुखार गर्भस्थ शिशु के विकास को नुकसान पहुंचा सकता है. ट्रंप के बयान ने भले ही हलचल मचा दी हो, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वैज्ञानिक आधार पर यह दावा सही नहीं है. पैरासिटामोल डॉक्टर की सलाह से प्रेग्नेंसी में सुरक्षित रूप से ली जा सकती है. हां, अन्य दवाओं के मामले में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है. गर्भवती महिलाओं को चाहिए कि किसी भी तरह का दर्द, बुखार या संक्रमण होने पर खुद से दवा न लेकर डॉक्टर से परामर्श करें. सही दवा और सही समय पर इलाज से न केवल मां का स्वास्थ्य सुरक्षित रहता है बल्कि बच्चे का भी विकास सही ढंग से होता है.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Empty Stomach Drink for Kids: सुबह खाली पेट बच्चों को क्या दें? इससे वजन रहेगा संतुलित और दिनभर एनर्जी बनी रहेगी

 बच्चों की सेहत और एनर्जी विकास के लिए बहुत जरूरी है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि empty stomach drink for kids उनकी सेहत और वजन नियंत्रण में कितनी मदद कर सकते हैं? डॉ. इमरान पटेल बताते हैं कि सुबह-सुबह बच्चों को सही पेय देना उनके पाचन तंत्र को एक्टिव करता है, एनर्जी देता है और मोटापे को भी रोकता है.

गुनगुना पानी

गुनगुना पानी पीना बच्चों के लिए सबसे सरल और प्राकृतिक उपाय है. यह digestion को सुधारता है और शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है

    • 1 गिलास गुनगुना पानी रोज सुबह
    • इसमें थोड़ी बूंद नींबू डाल सकते हैं
    • पेट साफ और हल्का महसूस होगा
    • गुनगुना पानी बच्चों के metabolism को बढ़ाता है और वजन नियंत्रित रखने में मदद करता है

फलों का जूस

बच्चों को खाली पेट फलों का जूस देना उनके लिए एनर्जी बूस्ट के रूप में काम करता है

    • संतरा, सेब या तरबूज का जूस
    • बिना शुगर के ही पीने दें
    • vitamins and minerals से भरपूर होने के कारण शरीर मजबूत रहता है
    • फलों का जूस बच्चों के immunity system को भी मजबूत बनाता है और दिनभर उन्हें ताजगी महसूस होती है

दूध या दही

    • बच्चों को सुबह-सुबह ध या दही देना भी लाभकारी है
    • calcium and protein से हड्डियां मजबूत होती हैं
    • दही से पाचन सुधरता है
    • दूध में हल्का हल्दी मिलाकर भी पिलाया जा सकता है, यह इम्यूनिटी बढ़ाता है

हर्बल पानी

कुछ हर्बल पानी जैसे coriander water या fennel water बच्चों को सुबह देना भी फायदेमंद है

    • पाचन को सुधारता है
    • बच्चों को ताजगी और एनर्जी महसूस होती है

सुबह-सुबह खाली पेट बच्चों को सही पेय देना उनकी सेहत, पाचन और वजन नियंत्रण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. गुनगुना पानी, फलों का जूस, दूध या दही और हर्बल पानी उन्हें दिनभर एनर्जी देते हैं और मोटापे से भी बचाते हैं. डॉ. इमरान पटेल के सुझाव अनुसार, यह छोटे-छोटे बदलाव बच्चों के जीवन में बड़ा फर्क डाल सकते हैं. सही पोषण और सही समय पर सही पेय देकर आप अपने बच्चों की सेहत को लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

World lung day: शरीर के ये संकेत बताते हैं कि फेफड़ों में भर गया है पानी, देर किए बिना कराएं जांच

 हमारे शरीर के लिए फेफड़े उतने ही जरूरी हैं, जितना जीवन के लिए ऑक्सीजन. जब फेफड़े स्वस्थ रहते हैं तो शरीर में ऊर्जा बनी रहती है, लेकिन जब इनमें समस्या आने लगती है तो पूरा शरीर प्रभावित हो जाता है. दरअसल आज के दिन पूरी दुनिया (World lung day) विश्व लंग दिवस के रूप में मना रही है. इसलिए आज हम आपको फेफड़ों में भरे हुए पानी के संकेत के बारे में बताएंगे.

डॉ. अरविन्द कुमार बताते हैं कि कई बार फेफड़ों में पानी भरने लगता है, जिसे मेडिकल भाषा में Pulmonary Edema कहा जाता है. यह स्थिति गंभीर हो सकती है और समय रहते इलाज न कराने पर जानलेवा भी साबित हो सकती है. इसलिए जरूरी है कि हम इसके शुरुआती संकेतों को पहचानकर समय पर डॉक्टर से जांच करवाएं.

लगातार सांस फूलना और थकान

अगर आपकी सांस बार-बार फूलती है तो ये लक्षण नजर आते हैं

    • चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर अत्यधिक थकान
    • लेटते ही सांस लेने में कठिनाई
    • ये लक्षण इस बात का संकेत हो सकते हैं कि फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा हो रहा है

पैरों और टखनों में सूजन

फेफड़ों में पानी भरने की स्थिति में शरीर का रक्त संचार प्रभावित होता है. इसकी वजह से पैरों और टखनों में सूजन आने लगती है

    • पैरों का फूलना
    • जूते तंग लगने लगना
    • यह संकेत हृदय और फेफड़ों दोनों की सेहत से जुड़े हो सकते हैं।

लगातार खांसी और बलगम

अगर आपको बार-बार खांसी आ रही है और उसके साथ झागदार या गुलाबी बलगम निकल रहा है तो इसे हल्के में न लें

    • रात में खांसी का बढ़ जाना
    • सीने में भारीपन या दर्द
    • ये लक्षण भी Pulmonary Edema का संकेत हो सकते हैं

नींद में समस्या और बेचैनी

फेफड़ों में पानी भरने से नींद प्रभावित होती है

    • सोते समय बार-बार जागना
    • तकियों का सहारे के बिना नींद न आना
    • ये लक्षण इस बात की ओर इशारा करते हैं कि फेफड़े सही से काम नहीं कर रहे हैं

फेफड़ों में पानी भरने की समस्या यानी Pulmonary Edema को नज़रअंदाज करना खतरनाक हो सकता है. सांस फूलना, पैरों में सूजन, लगातार खांसी और नींद में दिक्कत जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. साथ ही World Lung Day पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि अपने फेफड़ों की सेहत के प्रति जागरूक रहेंगे और समय-समय पर जरूरी जांच कराएंगे.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.