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स्टाइलिश ‘क्राइम मास्टर’ निकला पूर्व कमिश्नर का बेटा, जानें फिल्मों में अपनी एंट्री कैसे की

बॉलीवुड में एक से बढ़कर एक खूंखार विलेन्स ने दर्शकों को खौफ में डाला है. लेकिन एक विलेन ऐसा है जिसका स्टाइल और चार्म किसी हीरो से भी बढ़कर है. बात कर रहे हैं एक्टर राहुल देव की. दिल्ली के पूर्व कमिश्नर का ये बेटा कैसे बना बॉलीवुड का स्टाइलिश, चार्मिंग लेकिन बेहद खूंखार विलेन, आज जानिए कहानी राहुल देव की.

पूर्व कमिश्नर के बेटे हैं राहुल देव

27 सितंबर को राहुल देव अपना जन्मदिन मनाते हैं. मॉडलिंग से शुरुआत कर सिल्वर स्क्रीन तक अपनी एक्टिंग और स्टाइलिश अंदाज को साबित कर चुके राहुल देव के लाखों फैन्स हैं. साल 1968 में दिल्ली में पैदा हुए राहुल देव के पिता दिल्ली के पूर्व कमिश्नर रह चुके हैं. राहुल देव की पूरी पढ़ाई दिल्ली में हुई है.

‘चैंपियन’ से शुरू हुआ फिल्मी करियर

राहुल देव ने मॉडलिंग में नाम कमाने के बाद एक्टिंग के बारे में सोचा और फिर एक्टिंग स्कूल भी गए. जहां उनकी मुलाकात सुजीत कुमार के बेटे जतिन से हुई और उन्होंने एक्टर को ‘चैंपियन’ के ऑडिशन की जानकारी दी. बस फिर क्या था राहुल ने ऑडिशन पास किया और फिल्म में विलेन का रोल हासिल कर लिया. फिल्म में वो सनी देओल और मनीषा कोइराला के साथ नजर आए. इसके लिए एक्टर को फिल्मफेयर बेस्ट विलेन का अवॉर्ड मिला.

कई भाषाओं में फिल्में कर चुके हैं राहुल

राहुल देव ने अपनी एक्टिंग के दम पर सिर्फ हिंदी ही नहीं बल्कि कई भाषाओं की फिल्मों में दमदार किरदार निभाए हैं. राहुल देव ने तमिल, मलायलम, पंजाबी और मराठी, बंगाली फिल्मों में भी काफी काम किया है. उनकी निजी जिंदगी की बात करें तो उनकी वाइफ का कैंसर की वजह से निधन हो गया था. इसके बाद राहुल देव ने अकेले ही अपने बेटे की परवरिश की.

मुग्धा गोडसे संग है एक्टर का अफेयर

राहुल देव और मुग्धा गोडसे के अफेयर पर भी बॉलीवुड में कई बार सुर्खियां बन चुकी हैं. दोनों की उम्र के बीच करीब 18 साल का अंतर है और इसकी काफी चर्चा की जाती है. हालांकि दोनों की बॉन्डिंग काफी स्पेशल है और दोनों ही इस रिश्ते को बखूबी स्वीकार भी करते हैं.

‘आई लव मोहम्मद’ विवाद के बीच, एकता कपूर ने अजमेर दरगाह पर चढ़ाई चादर

फिल्म और टीवी सीरियल्स की चर्चित प्रोड्यूसर एकता कपूर ने राजस्थान के अजमेर शहर में स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर पहुंची. यहां उन्होंने जुमे की नमाज के वक्त दरगाह पर चादर चढ़ाई और 16 अक्टूबर को रिलीज हो रही अपनी नई फिल्म वृषभ की कामयाबी के लिए दुआएं की. एकता कपूर अपनी सभी फिल्मों और टीवी सीरियल्स के रिलीज होने से पहले अजमेर शरीफ की दरगाह पर आती हैं और यहां चादर चढ़ा कर उसकी कामयाबी के लिए मन्नत मांगती हैं. वह फिल्म के प्रिंट की एक कॉपी भी दरगाह को अर्पित करती हैं।.

‘वृषभ’ की कामयाबी के लिए मांगी दुआ

दरगाह के खादिम सैय्यद इमरान चिश्ती ने उन्हें ज़ियारत कराई और सैय्यद गुलफ़ाम चिश्ती ने उन्हें दरबार का तबर्रुक यानी प्रसाद भेंट किया. हज़रत ख्वाजा गरीब नवाज के आस्ताना शरीफ में एकता कपूर करीब 15 मिनट तक रहीं. यहां उन्होंने फिल्म ‘वृषभ’ की कामयाबी के साथ ही घर परिवार की खुशहाली को लेकर भी मन्नत का धागा बांधा.दरगाह पर चढ़ाए जाने वाली चादर को उन्होंने अपने सिर पर रखा हुआ था. एकता कपूर आज अजमेर दरगाह पर तब पहुंची हैं जब देश के कई हिस्सों में ‘आई लव मोहम्मद’ को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है.

कब रिलीज होगी मोहनलाल की फिल्म ?

एकता कपूर की फिल्म ‘वृषभ’ 16 अक्टूबर को एक साथ हिंदी के अलावा तमिल, मलयालम, कन्नड़ और तेलुगु में रिलीज हो रही है. इस फिल्म में मोहनलाल, शनाया कपूर, ज़हरा एस खान, रोशन मेका व अन्य कलाकारों ने प्रमुख भूमिका निभाई है.

‘नागिन 7’ ला रही हैं एकता कपूर

बता दें कि इस फिल्म के अलावा एकता कपूर अपने पॉपुलर शो ‘नागिन’ को लेकर भी चर्चा में हैं. वो इसके 7वें सीजन के साथ वापसी कर रही हैं. हाल ही में इसका एक प्रोमो भी रिलीज हुआ था. हालांकि इसमें भी नागिन का फेस रिवील नहीं किया गया. शो जल्द ही टीवी पर टेलीकास्ट होने वाला है.

HIV drug India: भारत तैयार करेगा एचआईवी की सबसे किफायती दवा, 35 लाख की जगह अब मात्र कुछ हजार रुपये में हो सकेगा इलाज

भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. दुनिया भर में एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस-एड्स) के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं में अब भारत सबसे सस्ती दवा उपलब्ध कराने जा रहा है. जो दवा अमेरिका में लगभग 35 लाख रुपये में मिलती है, वही अब भारत में सिर्फ 3,300 रुपये में उपलब्ध होगी. चलिए आपको इसके बारे में विस्तार से बताते हैं कि यह दवा कब और किसे मिलेगी.

गरीब और विकासशील देशों को सबसे बड़ा फायदा

इस नई दवा के बाजार में आने से सबसे ज्यादा लाभ गरीब और विकासशील देशों के मरीजों को होगा. जहां अब तक महंगी दवाएं खरीदना मुश्किल था, वहां के लिए यह दवा जीवन रक्षक साबित होगी. भारत पहले से ही जेनेरिक दवाओं के उत्पादन में दुनिया का बड़ा केंद्र है और अब एचआईवी की इस दवा को बनाकर एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है.

क्या है खासियत?

यह दवा अमेरिका, कनाडा, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में पहले से इस्तेमाल हो रही ब्रांडेड दवा का ही जेनेरिक वर्जन है. ब्रांडेड दवा की कीमत इतनी ज्यादा है कि सामान्य मरीजों के लिए इसे खरीदना लगभग असंभव है. लेकिन भारत में बने इस जेनेरिक वर्जन की कीमत इतनी कम है कि इसे हर जरूरतमंद तक पहुंचाया जा सकेगा.

कब से मिलेगी यह दवा?

स्वास्थ्य एक्सपर्ट के मुताबिक, यह दवा बाजार में 2027 तक बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराई जाएगी. अनुमान है कि इस सस्ती दवा से करोड़ों लोगों को नई जिंदगी मिलेगी और एड्स के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को मजबूती मिलेगी.

भारत में एचआईवी की स्थिति

स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग 25.4 लाख लोग एचआईवी से संक्रमित हैं. इनमें से हर साल करीब 68 हजार लोग नए मरीजों के तौर पर जुड़ जाते हैं. वहीं 2023-24 में देश में करीब 35,870 लोगों की मौत एचआईवी से संबंधित बीमारियों के कारण हुई. यह आंकड़े बताते हैं कि भारत में एचआईवी अभी भी बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है.

सरकार के प्रयास

भारत सरकार एचआईवी रोकथाम और इलाज के लिए पहले से कई कार्यक्रम चला रही है. मरीजों को मुफ्त जांच, परामर्श और दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक देश से एचआईवी/एड्स को पूरी तरह समाप्त किया जा सके.

दुनिया को कितना होगा फायदा

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी UNAIDS के मुताबिक, एचआईवी के इलाज के लिए सस्ती और सुलभ दवाओं की उपलब्धता ही इस महामारी को खत्म करने की दिशा में सबसे अहम कदम है. भारत ने पहले भी टीबी और अन्य बीमारियों की सस्ती दवाएं बनाकर दुनिया को राहत दी है और अब एचआईवी के क्षेत्र में यह कदम वैश्विक स्तर पर मिसाल बनेगा.

भारत द्वारा बनाई जा रही यह जेनेरिक दवा न केवल देश के लाखों मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित होगी, बल्कि गरीब और विकासशील देशों में भी स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देगी. जहां अब तक 35 लाख रुपये की दवा खरीदना नामुमकिन था, वहीं अब सिर्फ 3,300 रुपये में इसका इलाज संभव हो पाएगा. यह कदम भारत को स्वास्थ्य क्षेत्र में विश्व नेता के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा पड़ाव माना जा रहा है

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

India vs Sri Lanka Super Four, IND vs SL 1st Innings Highlights: फाइनल से पहले टीम इंडिया का धमाका, श्रीलंका को रौंदकर जड़े 202 रन; अभिषेक, सैमसन और तिलक ने दिखाया जलवा

2025 एशिया कप में टीम इंडिया का धमाका शुक्रवार को भी जारी रहा. श्रीलंका के खिलाफ सुपर-4 के आखिरी मुकाबले में भारतीय टीम ने 202 रन बना डाले. श्रीलंका के खिलाफ भी अभिषेक शर्मा अपने चिर परिचित अंदाज में खेले. उन्होंने सिर्फ 31 गेंद में 61 रनों की धुआंधार पारी खेली. संजू सैमसन ने 23 गेंद में 39 और तिलक वर्मा ने 34 गेंद में नाबाद 49 रन बनाए. 2025 एशिया कप में पहली बार किसी टीम ने 200 रनों का आंकड़ा पार किया. वहीं टी20 एशिया कप का यह दूसरा सबसे बड़ा स्कोर भी है.

टॉस हारकर पहले बैटिंग करने उतरी टीम इंडिया की शुरुआत अच्छी नहीं रही. ओपनर शुभमन गिल फ्लॉप रहे. वह तीन गेंद में सिर्फ चार रन ही बना सके. वहीं कप्तान सूर्यकुमार यादव का भी बल्ला नहीं चला. सूर्या 13 गेंद में 12 रन बनाकर पवेलियन लौटे.

अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा और संजू सैमसन चमके 

अभिषेक शर्मा ने एशिया कप में अपना चौथा अर्धशतक जड़ा. अभिषेक ने सिर्फ 31 गेंद में 61 रनों की पारी खेली. इस दौरान उनके बल्ले से 8 चौके और 2 छ्क्के निकले. तिलक वर्मा 34 गेंद में 49 रनों पर नाबाद रहे. उन्होंने 4 चौके और एक छक्का लगाया. वहीं संजू सैमसन ने 23 गेंद में 39 रनों की पारी खेली. सैमसन ने एक चौका और 3 छक्के जड़े.

हार्दिक पांड्या श्रीलंका के खिलाफ फिर फ्लॉप 

हार्दिक पांड्या सिर्फ दो रन बनाकर आउट हुए. श्रीलंका के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल में उनका बल्ला हमेशा खामोश रहा है. श्रीलंका के खिलाफ 13 टी20 पारियों में हार्दिक पांड्या 12.5 की औसत से सिर्फ 150 रन ही बना सके हैं. इस दौरान उनका सर्वाधिक स्कोर 29 रन रहा है.

श्रीलंका के लिए कुल पांच गेंदबाजों ने विकेट निकाले. महीष थीक्ष्णा ने 4 ओवर में 36 रन देकर एक, दुष्मंथा चमीरा ने 4 ओवर में 40 रन देकर एक, वानिंदु हसरंगा ने 4 ओवर में 37 रन देकर एक, दासुन शनाका ने 2 ओवर में 23 रन देकर एक और चरिथ असालंका ने 2 ओवर में 18 रन देकर एक विकेट लिया.

UN में इजरायली पीएम नेतन्याहू ने भाषण दिया, गाज़ा में इसे ‘जबरन’ दिखाया जा रहा था, और हमास को दी गई युद्ध की चुनौती

इजरायल ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए गाजा के निवासियों के मोबाइल फोन और इलाके में लगाए गए लाउडस्पीकरों के जरिए प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का संयुक्त राष्ट्र महासभा का भाषण प्रसारित किया. संबोधन में नेतन्याहू ने वहां बंधक बनाए गए लोगों से सीधे बात की और हमास को चेतावनी देते हुए बंधकों की रिहाई की मांग की.

बताया जा रहा है कि इजरायल की सेना (IDF) ने एक असामान्य अभियान में गाजा के निवासियों के मोबाइल फोन अपने नियंत्रण में लेकर वहां प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए भाषण सीधे उन फोन पर स्ट्रीम किया. इसके साथ ही आईडीएफ ने कई जगहों पर बड़े लाउडस्पीकर भी लगा दिए ताकि भाषण गाजा में सुनाया जा सके.

नेतन्याहू ने बंधकों से सीधे बातचीत का प्रयास किया
अपने भाषण में नेतन्याहू ने 20 जीवित बंधकों के नाम लिए और उन्हें संबोधित किया. उन्होंने कहा, ‘मैं कुछ ऐसा करना चाहता हूं जो मैंने पहले कभी नहीं किया. मैं इस मंच से उन बंधकों से लाउडस्पीकर के जरिए सीधे बात करूंगा.’ उन्होंने बताया कि गाजा के आसपास बड़े लाउडस्पीकर लगाए गए हैं और वे पहले हिब्रू में और फिर अंग्रेजी में अपना संदेश देंगे.

नेतन्याहू ने कहा, ‘यह प्रधानमंत्री नेतन्याहू हैं, जो संयुक्त राष्ट्र से आपसे सीधे बात कर रहे हैं. हम आपको एक पल भी नहीं भूले. इजरायल की जनता आपके साथ है. हम तब तक नहीं रुकेगे जब तक हम आप सभी को घर नहीं लाते.’ उन्होंने आगे कहा कि इजरायली इंटेलिजेंस के खास प्रयासों की वजह से उनके शब्द अब गाजा के मोबाइल फोन पर भी लाइव पहुंच रहे हैं.

हमास को चेतावनी
नेतन्याहू ने हमास नेताओं और बंधकों के कैद रखने वालों से कहा कि वे अपने हथियार डाल दें और सभी बंधकों यानी ‘सभी 48 लोगों’ को तुरंत छोड़ दें. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वे बंधकों को छोड़ देंगे तो उन्हें जीवन मिलेगा, नहीं तो ‘इजरायल उन्हें ढूंढकर खत्म कर देगा.’

IDF ने लगाए लाउडस्पीकर
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने पहले कहा था कि गाजा में भाषण को लाइव चलाने की योजना है, मगर दावा किया कि यह केवल इजरायली सीमा के पार से किया जाएगा. हालांकि, आईडीएफ ने कहा कि कुछ लाउडस्पीकर ट्रक और क्रेन पर लगाकर पट्टी के अंदर सेना की चौकियों तक ले जाया गया, जिनमें कुछ स्थान सीमा से एक किलोमीटर से भी अधिक अंदर थे.

नेतन्याहू के कार्यालय ने इसे ‘जनसंपर्क प्रयास’ बताया और कहा कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से आदेश दिया था कि इस ऑपरेशन से आईडीएफ सैनिकों की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं पहुंचना चाहिए.