पाकिस्तान में करीब 38 लाख हिंदू रहते हैं. वहां रहने वाले अधिकांश हिंदू सामाजिक भेदभाव और आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हैं, लेकिन इन परिस्थितियों के बीच कुछ ऐसे नाम भी सामने आए हैं, जिन्होंने न केवल अपना अलग मुकाम बनाया बल्कि ऐशो-आराम और शोहरत से भरी जिंदगी भी जी है. इन्हीं में से एक नाम है संगीता, जिन्हें परवीन रिजवी के नाम से भी जाना जाता है. ये पाकिस्तान की सबसे अमीर हिंदू महिला हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये साल का 39 करोड़ रुपये कमाती हैं
संगीता का जन्म 14 जून 1958 को कराची में हुआ था. उनका असली नाम संगीता है, जबकि फिल्म जगत में उन्हें परवीन रिजवी के नाम से पहचान मिली. उन्होंने 1969 में कोह-ए-नूर फिल्म में बाल कलाकार के रूप में अपना करियर शुरू किया. आधिकारिक डेब्यू 1971 में रियाज शाहिद की फिल्म ये अमन से हुआ. बचपन से ही फिल्मी माहौल में पली-बढ़ीं संगीता ने अभिनय, निर्देशन और निर्माण तीनों क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई.
संगीता का फिल्मी करियर
संगीता का फिल्मी करियर 45 साल से भी लंबा रहा है. उन्होंने बतौर अभिनेत्री, निर्देशक और निर्माता 120 से अधिक फिल्मों में काम किया. 1976 में उन्होंने सोसाइटी गर्ल का निर्देशन किया, जो सुपरहिट साबित हुई. उनकी चर्चित फिल्मों में निकाह, मुट्ठी भर चावल, ये अमन और नाम मेरा बदनाम शामिल हैं. फिल्म और टेलीविजन उद्योग में योगदान के लिए 2022 में पाकिस्तान सरकार ने उन्हें प्राइड ऑफ परफॉर्मेंस अवॉर्ड से सम्मानित किया.
संगीता का फैमिली बैकग्राउंड
संगीता की पारिवारिक पृष्ठभूमि भी फिल्मी जगत से जुड़ी रही. उनकी मां मेहताब रिजवी शो बिजनेस में सक्रिय थीं. उनकी बहन नसरीन रिजवी, जिन्हें फिल्मों में कविता नाम से जाना जाता था, पाकिस्तान की जानी-मानी अभिनेत्री रहीं. संगीता ब्रिटिश-अमेरिकी बॉलीवुड अभिनेत्री जिया खान की मौसी भी थीं. जिया खान का 2013 में मुंबई में निधन हो गया था. लंबे और सफल करियर से संगीता ने न केवल नाम और शोहरत कमाई बल्कि उन्हें पाकिस्तान की सबसे अमीर हिंदू महिला के रूप में भी जाना जाता है. उनकी संपत्ति, आलीशान जीवनशैली और सामाजिक प्रभाव ने उन्हें पाकिस्तान के प्रभावशाली व्यक्तियों में शुमार कर दिया है.
वरुण धवन और जाह्नवी कपूर स्टारर रोमांटिक कॉमेडी सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी, दशहरे पर 2 अक्टूबर को ऋषभ शेट्टी अभिनीत कांतारा: चैप्टर 1 के साथ सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी. जहां कांतारा चैप्टर 1 देश और दुनिया भर में धूम मचा रही है तो वहीं सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी की शुरुआत तो अच्छी हुई थी लेकिन दूसरे ही दिन ये बॉक्स ऑफिस पर लुढ़क गई. चलिए जानते हैं वरुण धवन और जाह्नवी कपूर की फिल्म ने फ्राइडे को दूसरे दिन कितना कलेक्शन किया है?
सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी ने दूसरे दिन कितनी की कमाई? सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी का निर्देशन शशांक खेतान ने किया है और इसमें वरुण धवन, जाह्नवी कपूर, रोहित सराफ और सान्या मल्होत्रा ने अहम रोल प्ले किया है. इस फिल्म की कमाई पर कांतारा चैप्टर 1 से क्लैश होने का असर पड़ा है लेकिन इसने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर 9.25 करोड़ रुपये के कलेक्शन के साथ अच्छी ओपनिंग की. हालांकि, क्रिटिक्स और दर्शकों से इतना अच्छा रिस्पॉन्स मिलने के बाद, दूसरे दिन, शुक्रवार को फिल्म की कमाई में भारी गिरावट देखने को मिली है.
सैकनिल्क की अर्ली ट्रेंड रिपोर्ट के मुताबिक सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी ने रिलीज के दूसरे दिन 5.25 करोड़ का कलेक्शन किया है.
इसी के साथ सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी की दो दिनों की कुल कमाई अब 14.50 करोड़ रुपये हो गई है.
सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी बजट वसूलने से कितनी दूर सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी की कमाई पर बेशक कांतारा चैप्टर 1 से क्लैश का असर पड़ा है बावजूद इसके ये फिल्म करारे नोट छाप रही है. इस फिल्म का बजट 60 करोड़ रुपये है और इसने दो दिन में 13 करोड़ का कलेक्शन कर लिया है. मेकर्स को उम्मीद है कि शनिवार और रविवार को फिल्म के कलेक्शन में तेजी आएगी और ये अपने बजट को वसूलने के करीब पहुंच जाएगी. अब देखन वाली बात होगी कि कांतारा चैप्टर 1 के आगे सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी वीकेंड पर कैसा परफॉर्म कर पाती है.
आजकल के समय में चोरी और धोखाधड़ी इतनी ज्यादा बढ़ गई है, जिसके कारण ज्यादातर लोग किसी पर आसानी से भरोसा नहीं कर पाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा गांव है, जहां पर दुकान या कोई भी चीज सिर्फ ईमानदारी के भरोसे पर चलती है। अगर आपको भी इस बात पर यकीन नहीं हो रहा है, तो यह आर्टिकल आपके लिए खास हो सकता है। क्योंकि आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां पर दुकानों में ताले नहीं लगाए जाते हैं और इसके बाद भी यहां पर कभी चोरी नहीं होती है।
दुकानों पर नहीं लगते हैं ताले
भारत देश में एक ऐसा गांव है, जहां पर दुकान तो हैं, लेकिन इन दुकानों पर कोई दुकानदार नहीं है और न ही दुकानों पर ताला लगता है। इसके बाद भी लोग ईमानदारी के साथ दुकान से जरूरत का सामान लेकर पैसा रखकर चले जाते हैं। वैसे तो इस जमाने में ऐसा गांव या शहर मिलना काफी मुश्किल है। जहां पर दुकान तो हैं, लेकिन दुकानदार नहीं हैं और दुकानों पर ताले भी नहीं हैं। भारत के नागालैंड के खोनोमा गांव अपने भरोसे और विश्वास के लिए पूरे भारत में फेमस है।
नागालैंड का खोनोमा गांव
नागालैंड के खोनोमा गांव पूरे भारत में ईमानदारी के लिए फेमस है। इस गांव में बिना दुकानदार के सालों से दुकानें लगी हुई हैं। जहां पर आप अपनी जरूरत के हिसाब से सामान खरीद सकते हैं। हालांकि यह फ्री नहीं है आपने जितने का सामान लिया है, उतने पैसे दुकान पर रखकर जा सकते हैं। गांव का कोई भी दूसरा व्यक्ति उन पैसों को नहीं छुएगा और न ही कोई धोखा देकर ज्यादा सामान लेकर जाएगा।
जानिए भारत का पहला ग्रीन विलेज
इस गांव के बारे में जानकर हैरान रह गए होंगे। कई रिपोर्ट्स की मानें, तो इस गांव में सालों से ईमानदारी के भरोसे पर रह रहे हैं। नागालैंड के इस अनोखे गांव यानी की खोनोमा गांव को भारत का पहला ग्रीन विलेज भी कहा जाता है। जोकि ईमानदारी के लिए फेमस है। यह गांव अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए पूरे भारत में फेमस है।
नहीं हुई चोरी और न कोई गुनाह
बता दें कि इस गांव की ईमानदारी पूरे भारत में जानी जाती है। यहां पर इतने सालों से दुकानों में ताला नहीं लगता है। लेकिन इसके बाद भी यहां पर न तो आज तक चोरी हुई और न कोई गुनाह हुआ है। इस गांव के लोगों में आज भी इतनी ईमानदारी है कि लोग जितने का सामान खरीदते हैं, उतने पैसे दुकान में जमा कर देते हैं।
सहारा के वाइस प्रेसिडेंट ओ.पी. श्रीवास्तव पर कानूनी शिकंजा, कर्मचारियों व निवेशकों को कब मिलेगा न्याय ? सहारा समूह के खिलाफ कार्रवाई तेज करने व सहारा शहर में बुलडोजर चलाने की मांग, शनिवार को विभागीय अल्टीमेटम का आखिरी दिन, लखनऊ स्थित सहारा शहर व नोएडा के मीडिया ऑफिस में कर्मचारी सीएम योगी से न्याय की आश में अब भी धरने पर, यहाँ पढ़ें पूरी खबर
ओ.पी. श्रीवास्तव पर गिरफ्तारी वारंट के बावजूद कार्रवाई न होना यह साबित करता है कि सहारा साम्राज्य अब भी पैसों और रसूख के बल पर कानून को चुनौती दे रहा है।
सिद्धार्थनगर कोर्ट का भगोड़ा घोषित करने और संपत्ति कुर्की का आदेश सहारा प्रबंधन पर कानून का सबसे बड़ा वार है।
गोमतीनगर स्थित सहारा सिटी पर प्रशासन की सीलिंग और बुलडोजर की तैयारी, साम्राज्य के पतन की शुरुआत मानी जा रही है।
निवेशकों ने चेताया – जब तक हर एक पैसा वापस नहीं मिलता, सहारा के किसी भी अधिकारी या परिवारिक सदस्य को बख्शा नहीं जाएगा।
सहारा शहर का ढहता गौरव अब उस लालच और धोखे का प्रतीक बन गया है, जिसने लाखों निवेशकों के सपने लूट लिए।
रिपोर्ट : शिवसागर सिंह चौहान, लखनऊ | True News UP
लखनऊ: देशभर के लाखों निवेशकों की गाढ़ी कमाई अब न्याय की राह पर लौटने लगी है। वर्षों से कानूनी जटिलताओं में उलझे सहारा समूह के खिलाफ हाल में हुई कार्रवाइयों ने एक बार फिर उम्मीद की किरण जगाई है। सहारा इंडिया के डिप्टी मैनेजिंग वर्कर ओ.पी. श्रीवास्तव के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट और उनके भगोड़ा घोषित किए जाने के बाद निवेशक अब यह मान रहे हैं कि लंबे समय से रुकी न्याय प्रक्रिया अब निर्णायक दौर में पहुंच रही है। लेकिन वहीं इस बात से चिंता भी व्याप्त है कि आखिर इतनी भ्रष्टाचारी समूह का प्रमुख जिम्मेदार होने के बावजूद अब तक गिरफ़्तारी क्यों नहीं की जा रही है, कहीं स्थानीय जिम्मेदारों ने कोई सेटिंग तो नहीं कर ली है।
ओ.पी. श्रीवास्तव पर बढ़ा कानूनी दबाव, लेकिन पैसे व रसूख के चलते नहीं हो रही गिरफ्तारी
लखनऊ के अलीगंज कोतवाली में सहारा समूह के एक पूर्व अधिकारी दंपति ने वेतन न दिए जाने का गंभीर आरोप लगाते हुए ओ.पी. श्रीवास्तव के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके अलावा, सिद्धार्थनगर की अदालत ने उन्हें भगोड़ा घोषित कर उनकी संपत्ति कुर्क करने का आदेश जारी किया है। अदालत के आदेश के बाद स्थानीय प्रशासन ने उनके खिलाफ कार्यवाही की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कार्रवाई सहारा समूह के शीर्ष प्रबंधन पर गिरने वाले कानूनी शिकंजे की गंभीरता को दर्शाती है।
निवेशकों ने भी मांग उठाई है कि ओ.पी. श्रीवास्तव की पैतृक संपत्ति को नीलाम किया जाए ताकि उनसे बकाया राशि की वसूली हो सके। उनका कहना है कि सहारा समूह की बुनियादी संपत्तियाँ निवेशकों के पैसों से बनाई गई हैं, इसलिए जब तक हर निवेशक को एक-एक पैसा वापस नहीं मिलता, किसी भी अधिकारी या परिवारिक सदस्य को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
सहारा समूह पर लगे गंभीर आरोप, अब साम्राज्य ढहाने की तैयारी
सहारा समूह पर पिछले कई वर्षों से यह आरोप लगते रहे हैं कि उसने निवेशकों से जुटाई गई हजारों करोड़ रुपये की राशि का दुरुपयोग किया। देशभर के छोटे-बड़े शहरों और गांवों में काम करने वाले एजेंट्स के ज़रिए समूह ने लाखों निवेशकों से पैसा जुटाया था, लेकिन अधिकांश को अब तक उनका रिटर्न नहीं मिल सका। कई वर्षों तक मामला अदालतों में लंबित रहा, और इसी दौरान समूह ने अपनी अचल संपत्तियों, कंपनियों और विभिन्न प्रोजेक्ट्स में पैसों का हेरफेर किया – यह बात SEBI और न्यायालय की रिपोर्टों में भी दर्ज है।
हालांकि, केंद्र सरकार ने निवेशकों के लिए ‘सहारा रिफंड पोर्टल’ शुरू किया है, जिसके ज़रिए आंशिक रिफंड जारी किया जा रहा है, परंतु यह प्रक्रिया बेहद धीमी है और अभी भी लाखों निवेशक अपने पैसों का इंतज़ार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सहारा समूह की संपत्तियों की बिक्री नहीं होती, तब तक निवेशकों को पूरी धनराशि मिलना मुश्किल है।
गोमतीनगर स्थित सहारा शहर पर प्रशासनिक कार्रवाई, चलेगा बुलडोजर
लखनऊ के गोमतीनगर स्थित सहारा शहर (Sahara City) में प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए खाली कराने का आदेश दिया है। नगर निगम और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने समूह को पहले ही नोटिस देकर परिसर खाली करने की अंतिम समय-सीमा तय की थी, जो अब समाप्त हो चुकी है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यदि निर्धारित समय में भवन खाली नहीं किया गया तो नगर निगम स्वतंत्र रूप से सीलिंग और कब्ज़ा प्रक्रिया शुरू करेगा।
यह कार्रवाई संकेत देती है कि अब सहारा का साम्राज्य धीरे-धीरे कानूनी नियंत्रण में आने लगा है। सहारा भवन, जो कभी सुब्रत राय सहारा का प्रतीक माना जाता था, आज उस पूरे आर्थिक तंत्र की गिरती स्थिति का गवाह बन चुका है, जिसने कभी करोड़ों आम लोगों को “सपनों का सहारा” देने का वादा किया था।
बड़े सवाल – जवाब कौन देगा?
निवेशकों के बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि जब समूह के वरिष्ठ अधिकारी ओ.पी. श्रीवास्तव पर गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है, तो सुब्रत राय की पत्नी स्वप्ना राय और अन्य शीर्ष प्रबंधन सदस्य अब तक जांच और गिरफ्तारी से बाहर क्यों हैं? क्या इनके खिलाफ कार्रवाई रोकने के पीछे कोई राजनीतिक या आर्थिक समझौता है, या फिर उच्च स्तर पर “मांडवाली” की स्थिति बनी हुई है?
कई निवेशकों ने अदालत से मांग की है कि समूह के सभी पदाधिकारी और परिवारिक सदस्य जिनके नाम पर संपत्तियाँ हैं, उनकी जवाबदेही तय की जाए। क्योंकि जब जनता का पैसा डूबा है, तो जिम्मेदारी भी केवल निचले अधिकारियों की नहीं, बल्कि शीर्ष नेतृत्व की भी बनती है।
निवेशकों की उम्मीद और सरकार से अपेक्षा
देशभर में लाखों परिवार हैं जिन्होंने सहारा में अपनी जीवनभर की कमाई लगाई थी। किसी ने बच्चों की शिक्षा के लिए, तो किसी ने शादी या मकान के लिए इस समूह में निवेश किया। आज भी बहुत से निवेशक ऐसे हैं जो 10 से 15 साल बाद भी अपना मूलधन वापस पाने की राह देख रहे हैं।
सरकार ने सहारा रिफंड पोर्टल की शुरुआत कर एक सकारात्मक कदम ज़रूर उठाया है, पर जब तक समूह की देशभर में फैली संपत्तियों की कुर्की और नीलामी नहीं होती, तब तक वास्तविक राहत मिलना संभव नहीं लगता। निवेशक चाहते हैं कि कोर्ट और सरकार मिलकर सहारा की सभी संपत्तियों का एक पारदर्शी ऑडिट करें और उन्हें बेचकर निवेशकों का पैसा वापस लौटाएं।
न्याय की प्रक्रिया धीमी, पर उम्मीद जिंदा है
भले ही अदालतों में मामले वर्षों से लंबित हैं, पर अब प्रशासनिक स्तर पर हो रही गतिविधियों ने न्याय की प्रक्रिया को फिर से जीवित कर दिया है। ओ.पी. श्रीवास्तव के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट, सहारा भवन खाली कराने की प्रक्रिया और अदालतों के निर्देश – ये सभी संकेत देते हैं कि न्याय भले देर से मिले, लेकिन अब उससे बच पाना मुश्किल होगा।
अगर सरकार, अदालतें और जांच एजेंसियां मिलकर पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई करें, तो आने वाले महीनों में निवेशकों को उनके गाढ़े परिश्रम का पैसा वापस मिल सकता है। सहारा समूह की संपत्तियों की बिक्री से प्राप्त राशि को अगर सही तरीके से सहारा-सेबी खाते में जमा किया जाए, तो यह मामला देश के आर्थिक इतिहास में न्याय और जवाबदेही की मिसाल बन सकता है।
सहारा समूह की गिरती साख अब एक चेतावनी बन चुकी है कि आम जनता के विश्वास के साथ खेलना कितना खतरनाक हो सकता है। ओ.पी. श्रीवास्तव की गिरफ्तारी और सहारा भवन पर कार्रवाई ने यह साबित किया है कि कानून के जाल से कोई कितना भी ताकतवर क्यों न हो, आखिरकार उसे जवाब देना ही पड़ता है।
निवेशक अब यह संदेश देना चाहते हैं- “हमारे पैसे से बनी इमारतें अगर ढह रही हैं, तो अब हमारी उम्मीदें नहीं। जब तक हर परिवार को उसका हक़ नहीं मिलता, हमारी आवाज़ नहीं रुकेगी।”
✍️ शिवसागर सिंह चौहान मुख्य सम्पादक | True News UP 🌐 www.truenewsup.com 📱 +91 7379041257 ✉️ info@truenewsup.com
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और अनहेल्दी लाइफस्टाइल बीमारियों का सबसे बड़ा कारण बन गया है। हर अक्सर समय बचाने या सुविधा के चक्कर में तला-भुना, प्रोसेस्ड या बाहर का खाना ज्यादा खाते हैं। लेकिन क्या आप जानती हैं कि अनहेल्दी खाने का सीधा और बुरा असर पड़ता है। जिस कारण हमें कई तरह की बीमारियां घेर लेती हैं। इनमें वजन बढ़ना, पेट से जुड़ी समस्याएं और पोषक तत्वों की कमी शामिल है। इसलिए हेल्दी और अच्छी डाइट लेना चाहिए। आज हम आपको एक ऐसी ही सब्जी के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अद्भुत गुणों भरपूर है। इस सब्जी का नाम लौकी है।
लौकी की सिर्फ सब्जी नहीं बल्कि स्वादिष्ट हलवे, पौष्टिक रायते और लाजवाब कोफ्ते के रूप में भी खाया जाता है। लेकिन लौकी का जूस बनाया जाता है। लौकी का जूस हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है। बता दें कि लौकी में 90% से ज्यादा पानी पाया जाता है। इसलिए लौकी को गर्मियों की हाइड्रेटिंग सब्जी मानी जाती है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जोकि शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि रोजाना 15 दिनों तक खाली पेट लौकी का जूस पीने से सेहत में किस तरह के बदलाव दिख सकते हैं।
पेट होगा सही और डाइजेशन भी दुरुस्त होगा
लौकी के जूस का फायदा डाइजेशन पर प़ड़ता है। इसमें कैलोरी की मात्रा कम होती है और यह घुलनशील और अघुलनशील फाइबर से भरपूर होता है। फाइबर आपके पेट को लंबे समय तक भरा रखता है। इससे आप ज्यादा खाने से बचते हैं। फाइबर की मौजूदगी की वजह से लौकी का जूस आसानी से पेट को साफ करता है।
खाली पेट लौकी का जूस पीने से गैस, कब्ज और एसिडिटी जैसी डाइजेशन से संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। यह जूस पेट की आंतरिक परत को शांत करके पेट में एक्स्ट्रा एसिड को बेअसर करता है। लौकी का जूस शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है और डाइजेशन दुरुस्त होता है। यह जूस डाययूरेटिक के रूप में भी काम करता है, जोकि किडनी को साफ करने में सहायता करता है।
लौकी का जूस हेल्थ के लिए नहीं बल्कि स्किन के लिए भी काफी अच्छा होता है। क्योंकि स्किन का स्वास्थ्य आंतरिक स्वास्थ्य का आईना होता है। लौकी का जूस स्किन पर भी पॉजिटिव असर डालता है। लौकी में 90% से अधिक पानी होता है। खाली पेट इस जूस का सेवन करने से शरीर में पानी की कमी नहीं होती है। पर्याप्त हाइड्रेशन स्किन की इलास्टिसिटी बनाए रखने के साथ स्किन को हेल्दी दिखाने में मदद करता है। जब बॉडी से टॉक्सिंस बाहर निकलते हैं और डाइजेशन में सुधार होता है।
लौकी का जूस स्किन को अंदर से साफ करने के साथ ग्लोइंग बनाता है। यह जूस मुंहासे और अन्य स्किन समस्याओं को भी कम करने में मददगार होता है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट स्किन को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं। यह जूस पीने से उम्र बढ़ने के लक्षणों को धीमा करता है और स्किन को जवां बनाए रखने में मदद करता है।
इन बातों का रखें का ध्यान
जूस बनाते समय ताजी लौकी का इस्तेमाल करना चाहिए।
लौकी को काटने से पहले चखकर जरूर देख लें। अगर लौकी कड़वी लगे तो इसका जूस न बनाएं। क्योंकि कड़वी लौकी में हानिकारक यौगिक होते हैं।
लौकी के जूस में चीनी, नमक या ज्यादा मसाले न डालें। हालांकि स्वाद के लिए आप पुदीना, नींबू का रस या फिर अदरक मिला सकती हैं।