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संवाद से समाधान तक : डॉ. राजेश्वर सिंह का “आपका विधायक-आपके द्वार”अभियान बना ग्रामीण सशक्तिकरण की मिसाल, 138वां शिविर मोहिनीखेड़ा में सम्पन्न- स्वास्थ्य, शिक्षा और युवाओं की ऊर्जा से सजा एक नया अध्याय

लखनऊ : सरोजनीनगर विधानसभा के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने साप्ताहिक जनसंपर्क अभियान “आपका विधायक – आपके द्वार” के तहत रविवार को 138वां शिविर ग्राम पंचायत मखदूमपुर कैंथी (मजरा मोहिनीखेड़ा) में आयोजित किया।

यह शिविर केवल समस्याएं सुनने का मंच नहीं था, बल्कि “संवाद, सेवा और समाधान” का ऐसा जीवंत उदाहरण बना जिसने ग्रामीण जीवन में नई ऊर्जा और विश्वास का संचार किया।

गांव-गांव जनसंवाद: लोकतंत्र की जड़ों तक पहुंचता संवाद

‘आपका विधायक – आपके द्वार’ अभियान अब सरोजनीनगर के जनजीवन का हिस्सा बन चुका है। हर रविवार एक नए गांव में पहुंचकर डॉ. सिंह सीधे जनता से संवाद करते हैं और मौके पर ही समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करते हैं।

इस बार के शिविर में 34 ग्रामीणों की समस्याएं दर्ज की गईं – जिनमें सड़क निर्माण, नाली सफाई, प्रधानमंत्री आवास योजना, पेंशन, किसान सम्मान निधि, विद्युत कनेक्शन और राजस्व प्रकरण जैसी जनहित से जुड़ी मुद्दे प्रमुख रहे। डॉ. सिंह ने सभी मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा – “यह शिविर सिर्फ जनसंपर्क नहीं, बल्कि जनता के बीच भरोसे का सेतु है। हमारा लक्ष्य है कि हर गांव की समस्या गांव में ही सुलझाई जाए।”

अपोलो हॉस्पिटल के सहयोग से नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर – ग्रामीणों को मिला भरोसे का उपचार

स्वास्थ्य सेवा को गांव के द्वार तक पहुंचाने के उद्देश्य से अपोलो हॉस्पिटल लखनऊ के सहयोग से एक निःशुल्क हेल्थ एंड विजन कैंप आयोजित किया गया। इस शिविर में दर्जनों ग्रामीणों ने स्वास्थ्य जांच कराई। बुजुर्गों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधा प्रदान की गई, जिनमें ब्लड प्रेशर, शुगर, नेत्र परीक्षण, सामान्य जांच और फ्री काउंसलिंग शामिल रही। नेत्र जांच के बाद 50 ग्रामीणों को दृष्टि सुधारक चश्मे वितरित किए गए।

ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें पहली बार गांव में इतने बड़े स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों से जांच कराने का अवसर मिला। डॉ. सिंह ने कहा – “स्वस्थ नागरिक ही राष्ट्र की असली शक्ति हैं। हमारा प्रयास है कि कोई भी व्यक्ति इलाज के अभाव में पीड़ा न सहे – स्वास्थ्य सेवा अब गांव की चौपाल तक पहुंचे।”

‘गांव की शान’ पहल – मेधावी छात्रों को मिला सम्मान, शिक्षा में प्रेरणा का नया अध्याय

शिविर के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले चार मेधावी विद्यार्थियों को ‘गांव की शान’ पहल के अंतर्गत सम्मानित किया गया।
इनमें हाईस्कूल वर्ग के रोहन (64%), अमन (60%), तथा इंटरमीडिएट वर्ग के सूरज कुमार (66%) और खुशबू (61%) शामिल रहे।

उन्हें साइकिल, घड़ी और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
इस मौके पर डॉ. सिंह ने कहा – “ग्रामीण प्रतिभा भारत की असली पूंजी है। हमें उन्हें शहर की रोशनी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की ज्योति देनी है।” ग्रामीणों ने इसे एक प्रेरक कदम बताया, जिससे गांव के अन्य बच्चों में शिक्षा के प्रति रुचि और प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ेगी।

युवा सशक्तिकरण की नई पहल – खेल, संगठन और आत्मविश्वास का संगम

ग्रामीण युवाओं को संगठित रखने और उनकी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के लिए शिविर में 89वां गर्ल्स यूथ क्लब गठित किया गया।
क्लब को कैरम, फुटबॉल, वॉलीबॉल, बैडमिंटन जैसी खेल सामग्रियां प्रदान की गईं।

डॉ. सिंह ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा- “युवा शक्ति किसी भी समाज की धड़कन होती है। जब ये शक्ति संगठन और संस्कार के साथ चलती है, तब परिवर्तन स्वतः होता है।” इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण युवतियों में आत्मविश्वास, टीमवर्क और फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। ग्रामीणों ने युवाओं के लिए ऐसी पहल को “सकारात्मक सामाजिक निवेश” बताया।

प्रबुद्धजनों का सम्मान – समाज के सहयोगियों को मिली पहचान

कार्यक्रम के दौरान गांव के प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी सम्मानित किया गया। सम्मानित व्यक्तियों में वरिष्ठ भाजपा नेता संजय लोधी, मंडल उपाध्यक्ष अनुपम पंडित, सेक्टर संयोजक राधेश्याम तिवारी, मनोज कुमार, राम शंकर गौतम, मुकेश शर्मा, वृज किशोर रावत, सोहन लाल प्रजापति, दिनेश गौतम और रमेश रावत सहित अनेक ग्रामवासी शामिल रहे।

सभी को अंगवस्त्र एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
यह सम्मान ग्रामीण समाज के उस वर्ग को समर्पित था जो “कार्यकर्ता से अधिक कर्तव्यनिष्ठ नागरिक” की भूमिका निभा रहे हैं।

‘मां तारा शक्ति निःशुल्क रसोई’- सेवा और संवेदना की मिसाल

शिविर के समापन पर सभी ग्रामीणों के लिए ‘मां तारा शक्ति नि:शुल्क रसोई’ के माध्यम से पौष्टिक और ताजा भोजन की व्यवस्था की गई।
इस रसोई में सैकड़ों ग्रामीणों ने प्रसाद स्वरूप भोजन ग्रहण किया।

डॉ. सिंह ने कहा -“सेवा तभी सार्थक होती है जब उसके साथ संवेदना जुड़ी हो। ‘मां तारा शक्ति रसोई’ हमारी इस भावना का साकार रूप है।” यह रसोई अभियान अब सरोजनीनगर क्षेत्र में गरीबों, मजदूरों और वृद्धों के लिए भोजन की सुरक्षा का भरोसा बन चुकी है।

‘आपका विधायक – आपके द्वार’ अभियान: लोकतंत्र को जनसेवा का वास्तविक रूप

‘आपका विधायक – आपके द्वार’ अभियान, सरोजनीनगर के विकास का ऐसा अध्याय बन चुका है जिसने जनसंपर्क को जनविश्वास में बदल दिया है।
अब तक 138 शिविरों के माध्यम से हजारों ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान हुआ है – जिनमें बिजली, आवास, पेंशन, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसे क्षेत्र प्रमुख रहे हैं। इस अभियान ने यह संदेश दिया है कि लोकतंत्र केवल विधानभवन तक सीमित नहीं, बल्कि चौपाल, खेत, गलियों और पंचायतों तक जीवंत है। यह अभियान विकास, संवाद और संवेदना – तीनों को एक सूत्र में बांधता है।

जनता के बीच से उठती जनसेवा की नई परंपरा

मखदूमपुर कैंथी का यह शिविर ग्रामीण विकास की उस यात्रा का प्रतीक बना जिसमें सरकार की नीतियां और जनता की जरूरतें एक ही मंच पर आ मिलीं। स्वास्थ्य से शिक्षा, खेल से संस्कार – हर पहल में डॉ. राजेश्वर सिंह का दृष्टिकोण स्पष्ट था: “समृद्ध गांव, सशक्त समाज।”

‘आपका विधायक – आपके द्वार’ अब केवल एक जनसंपर्क कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि सरोजनीनगर के विकास का जनआंदोलन बन चुका है।
जनता का उत्साह, प्रशासन की तत्परता और नेतृत्व की संवेदना – तीनों मिलकर इस क्षेत्र को उत्तर प्रदेश का मॉडल विधानसभा क्षेत्र बनाने की दिशा में अग्रसर हैं।

जीएसटी बचत उत्सव से लेकर विजयदशमी तक : विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने सरोजनीनगर में साझा किया ‘रामत्व और राष्ट्र निर्माण’ का संदेश, व्यापारियों के बीच पहुँचे सरोजनीनगर विधायक, साझा किया मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों और जीएसटी राहत का संदेश

जीएसटी बचत उत्सव से लेकर विजयदशमी तक – डॉ. राजेश्वर सिंह ने सरोजनीनगर में साझा किया ‘रामत्व और राष्ट्र निर्माण’ का संदेश, व्यापारियों के बीच पहुँचे सरोजनीनगर विधायक, साझा किया मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों और जीएसटी राहत का संदेश
जीएसटी बचत उत्सव से लेकर विजयदशमी तक – डॉ. राजेश्वर सिंह ने सरोजनीनगर में साझा किया ‘रामत्व और राष्ट्र निर्माण’ का संदेश, व्यापारियों के बीच पहुँचे सरोजनीनगर विधायक, साझा किया मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों और जीएसटी राहत का संदेश
जीएसटी बचत उत्सव से लेकर विजयदशमी तक – डॉ. राजेश्वर सिंह ने सरोजनीनगर में साझा किया ‘रामत्व और राष्ट्र निर्माण’ का संदेश, व्यापारियों के बीच पहुँचे सरोजनीनगर विधायक, साझा किया मोदी सरकार के आर्थिक सुधारों और जीएसटी राहत का संदेश
  • सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने विजयदशमी पर व्यापारियों संग जीएसटी सुधारों और बचत उत्सव का संदेश साझा किया।
  • अर्जुनगंज में ‘विनायक मोबाइल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स’ का उद्घाटन कर स्थानीय व्यापारियों से संवाद किया।
  • विजयदशमी पर लखनऊ के विभिन्न स्थलों पर रामलीला व रावण दहन कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता की।
  • एलडीए कॉलोनी व तेलीबाग में 40 लाख रुपये से अधिक के विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया।
  • डॉ. सिंह ने कहा- “रावण आज भी आतंकवाद, जातिवाद और विभाजनकारी प्रवृत्तियों के रूप में जीवित है; संगठित भारत ही अजेय बनेगा।”

लखनऊ: विजयदशमी के पावन अवसर पर सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र एक बार फिर धार्मिक, सांस्कृतिक और विकासपरक गतिविधियों से सराबोर रहा। यहाँ के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह न केवल रामलीला और रावण दहन के मंचों पर सक्रिय रहे, बल्कि व्यापारिक वर्ग के बीच पहुँचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए जीएसटी सुधारों की उपलब्धियों और लाभों को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि “जीएसटी व्यवस्था ने व्यापार को पारदर्शिता, सरलता और स्थिरता दी है। इससे न केवल व्यापारी वर्ग को लाभ हुआ है बल्कि आमजन के लिए भी बचत और सहजता का माहौल बना है।”

अर्जुनगंज और आशियाना में व्यापारियों से संवाद

वृहस्पतिवार को डॉ. राजेश्वर सिंह अर्जुनगंज पहुँचे, जहाँ उन्होंने अर्जुनगंज युवा मोर्चा मंडल अध्यक्ष प्रीतम मिश्रा के प्रतिष्ठान ‘विनायक मोबाइल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स’ का उद्घाटन किया।
इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्रीय व्यापारियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि, “व्यापारी समाज अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, मोदी सरकार ने उनके हितों की रक्षा और सुविधाओं के विस्तार के लिए ठोस सुधार किए हैं। जीएसटी का सरलीकरण इन्हीं प्रयासों का परिणाम है।”

इसके बाद शुक्रवार को विधायक ने आशियाना क्षेत्र के व्यापारियों से भी संवाद किया। उन्होंने ‘मंशा टी स्टॉल’ पर स्थानीय नागरिकों संग चाय की चुस्कियाँ लीं और ‘आकाश कचौड़ी भंडार’ पर दही बड़ों का स्वाद लेते हुए लोगों से आत्मीय बातचीत की।
व्यापारियों ने ‘शुभम ज्वेलर्स’ पर विधायक का भव्य स्वागत किया। इस दौरान डॉ. सिंह ने कहा कि “सरोजनीनगर के बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का विकास हमारी प्राथमिकता है, यहाँ हर व्यापारी आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभा रहा है।”

विजयदशमी पर्व पर धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय सहभागिता

विजयदशमी और रावण दहन के पावन पर्व पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने लखनऊ के विभिन्न स्थलों पर आयोजित रामलीला और दशहरा मेलों में सम्मिलित होकर जनता को धर्म, मर्यादा और एकता के पथ पर चलने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि “विजयदशमी केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि यह अधर्म, अन्याय और विभाजनकारी प्रवृत्तियों के खिलाफ जन-संकल्प का दिवस है। रावण आज भी हमारे समाज में हिंसा, आतंकवाद, जातिवाद और विघटन के रूप में जीवित है, जिसे हमें मिलकर समाप्त करना होगा।”

1. सरसवां – अर्जुनगंज मंडी स्थल पर ‘शक्ति रामलीला मंचन समिति’ का आयोजन

डॉ. सिंह ने कहा कि “रावण केवल एक पौराणिक पात्र नहीं बल्कि असत्य, अहंकार और अत्याचार का प्रतीक है। आज ये ताकतें धर्मांतरण, मातृशक्ति विरोध और सनातन संस्कृति के विरुद्ध सक्रिय हैं। हमें श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर इन्हें परास्त करना होगा।” उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे “रामत्व” के पथ पर चलें और राष्ट्र को संगठित कर एक अजेय भारत का निर्माण करें।

2. वृंदावन योजना सेक्टर-8B – त्र्यंबकेश्वर महादेव प्रांगण में गरबा नाइट

यहाँ माँ दुर्गा की आराधना के पश्चात डॉ. सिंह ने कहा कि “दुर्गा पूजा और विजयदशमी का संदेश यही है कि अहंकार और अन्याय का अंत निश्चित है। आज का रावण जातिवाद, घुसपैठ और समाज को तोड़ने वाली शक्तियों के रूप में मौजूद है, जिन्हें हमें मिलकर समाप्त करना होगा।”

3. तेलीबाग – विनायकी तालाब स्थित पर्वतीय रामलीला समिति का आयोजन

पर्वतीय समाज द्वारा आयोजित 40वें रामलीला मंचन में डॉ. सिंह ने इस समाज की सांस्कृतिक भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि “पर्वतीय समाज सीमाओं का प्रहरी होने के साथ-साथ संस्कृति का भी संवाहक है।” उन्होंने यहाँ रामलीला मंच के लिए टीन शेड निर्माण की घोषणा की और कहा कि “संस्कृति की रक्षा ही राष्ट्र की रक्षा है।”

4. एलडीए कॉलोनी सेक्टर-F – 38वां दशहरा मेला

इस अवसर पर डॉ. सिंह ने कहा कि “विजयदशमी हमें अपने भीतर छिपे वासना, लोभ, क्रोध और अहंकार रूपी रावण का अंत करने की प्रेरणा देती है।”
उन्होंने ₹10 लाख की लागत से बने बहुउद्देशीय कक्ष का लोकार्पण किया और रेनवॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का शिलान्यास भी किया।
उन्होंने कहा कि “जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा हमारे भविष्य की रक्षा के समान है, इस दिशा में हम निरंतर कार्य कर रहे हैं।”

5. जय जगत पार्क, सेक्टर-D, एलडीए कॉलोनी – 47वां दशहरा मेला

यहाँ डॉ. सिंह ने 20 लाख रुपये की लागत से बनने वाले रामलीला मंच का शिलान्यास किया और कहा कि “अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण हमारी पाँच शताब्दियों की तपस्या का फल है। यह स्थल आने वाली पीढ़ियों के लिए भक्ति, संस्कृति और राष्ट्र चेतना का केंद्र बनेगा।”

6. सेक्टर-B, एलडीए कॉलोनी – संस्कार चैरिटेबल ट्रस्ट का 7वां दशहरा मेला

यहाँ डॉ. सिंह ने मंच को और भव्य बनाने के लिए ₹10 लाख की लागत से नए मंच निर्माण का शिलान्यास किया और अतिरिक्त ₹10 लाख देने की घोषणा भी की।
उन्होंने कहा कि “धार्मिक आयोजनों में हमारी सांस्कृतिक जड़ें बसती हैं, और इन्हीं के संरक्षण से समाज संगठित होता है।”

डॉ. राजेश्वर सिंह का प्रेरक संदेश

विधायक ने अपने सभी संबोधनों में युवाओं से आह्वान किया कि वे श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लें और राष्ट्र को संगठित एवं अजेय बनाने में अपनी भूमिका निभाएँ।
उन्होंने कहा –

“रावण आज भी हिंसा, आतंकवाद, जातिवाद, सांस्कृतिक विघटन और राष्ट्रविरोधी प्रवृत्तियों के रूप में मौजूद है। श्रीराम और माँ दुर्गा के आदर्श हमें सिखाते हैं कि संगठित होकर हम किसी भी बुराई का अंत कर सकते हैं। आज ज्ञान, शिक्षा और तकनीक ही वह शक्ति है जिससे हमारी युवा पीढ़ी भारत को विश्वगुरु बना सकती है।”

विकास, संस्कृति और संवाद – डॉ. सिंह की बहुआयामी पहल

इस प्रकार विजयदशमी के अवसर पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने जहाँ एक ओर विकास कार्यों की सौगात दी, वहीं संस्कृति, धर्म और राष्ट्र चेतना के पथ पर जनजागरण का संदेश भी दिया।
उनकी यह पहल स्पष्ट करती है कि सरोजनीनगर विधानसभा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से भी जागरूक क्षेत्र बन रहा है।

विजयादशमी पर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने किया शस्त्र पूजन : कहा – सच्चा क्षत्रिय वही जो राष्ट्र, धर्म और समाज के लिए जिए, ज्ञान और तकनीक हैं आज की सबसे बड़ी तलवारें, वैचारिक व डिजिटल हमलों से निपटने को समाज को रहना होगा एकजुट

विजयादशमी पर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने किया शस्त्र पूजन : कहा – सच्चा क्षत्रिय वही जो राष्ट्र, धर्म और समाज के लिए जिए, ज्ञान और तकनीक हैं आज की सबसे बड़ी तलवारें, वैचारिक व डिजिटल हमलों से निपटने को समाज को रहना होगा एकजुट
विजयादशमी पर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने किया शस्त्र पूजन : कहा – सच्चा क्षत्रिय वही जो राष्ट्र, धर्म और समाज के लिए जिए, ज्ञान और तकनीक हैं आज की सबसे बड़ी तलवारें, वैचारिक व डिजिटल हमलों से निपटने को समाज को रहना होगा एकजुट
विजयादशमी पर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने किया शस्त्र पूजन : कहा – सच्चा क्षत्रिय वही जो राष्ट्र, धर्म और समाज के लिए जिए, ज्ञान और तकनीक हैं आज की सबसे बड़ी तलवारें, वैचारिक व डिजिटल हमलों से निपटने को समाज को रहना होगा एकजुट

लखनऊ। विजयादशमी का पर्व भारतीय संस्कृति में विजय, धर्म, और सत्य के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इसी पवित्र अवसर पर सरोजनीनगर के लोकप्रिय विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने वीरता, परंपरा और राष्ट्रभक्ति का संगम प्रस्तुत करते हुए गुरुवार को सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, विशाल खंड, गोमतीनगर में आयोजित शस्त्र पूजन समारोह में हिस्सा लिया।
यह समारोह भारतीय क्षत्रिय समाज और लोक अधिकार मंच सिविल सोसायटी के तत्वावधान में बड़े ही भव्य और सांस्कृतिक रूप से गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ।

डॉ. सिंह ने परंपरागत वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच तलवार, धनुष-बाण, त्रिशूल और अन्य प्रतीकात्मक शस्त्रों का पूजन किया। समारोह स्थल पर उपस्थित सैकड़ों लोगों ने इस दृश्य को गर्व और श्रद्धा के भाव से देखा। यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना को प्रबल करने वाला भी था।

संरक्षक के रूप में सम्मान : संगठन ने सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

समारोह के दौरान भारतीय क्षत्रिय समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल सिंह गहलोत ने विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह को संगठन का संरक्षक (Patron) घोषित करते हुए सम्मानित किया।
उन्होंने कहा कि डॉ. सिंह के व्यक्तित्व में वैचारिक नेतृत्व, संगठन क्षमता और राष्ट्रसेवा का अद्भुत संतुलन है, जो युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत है।
इस अवसर पर डॉ. सिंह को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंट कर अभिनंदन किया गया।

“सच्चा क्षत्रिय वही जो राष्ट्र और धर्म की रक्षा करे” – डॉ. सिंह

अपने विस्तृत संबोधन में डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि क्षत्रियत्व केवल तलवार चलाने या युद्ध लड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक जीवन दर्शन है। उन्होंने कहा –

“सच्चा क्षत्रिय वह है जो अन्याय, अधर्म और भय के विरुद्ध खड़ा होता है। जो केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज, राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए जीवन समर्पित कर दे, वही सच्चे अर्थों में क्षत्रिय कहलाता है।” उन्होंने आगे कहा कि आज हर नागरिक को अपने भीतर के क्षत्रिय भाव को जाग्रत करना चाहिए। चाहे वह किसान हो, शिक्षक हो, व्यापारी या छात्र — जब वह सत्य, न्याय और राष्ट्रहित के लिए कार्य करता है, तो वह उसी परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है जिसने इस भूमि को ‘वीरों की धरती’ बनाया।

वर्तमान युग की चुनौतियाँ : सीमाओं से परे वैचारिक और मानसिक युद्ध

डॉ. सिंह ने कहा कि आज भारत को केवल सीमाओं पर पाकिस्तान और चीन जैसे शत्रुओं से नहीं, बल्कि वैचारिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आक्रमणों से भी जूझना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा-

“कुछ शक्तियाँ भारत की आत्मा पर प्रहार कर रही हैं। वे हमारी संस्कृति, परंपरा, परिवार व्यवस्था और धार्मिक सहिष्णुता को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। धर्मांतरण, सांस्कृतिक विघटन और समाज में भ्रम फैलाना उनके हथियार हैं। ऐसे में हमें एकजुट होकर इस मानसिक और वैचारिक युद्ध का मुकाबला करना होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि इस युद्ध में तलवार नहीं, बल्कि जागरूकता, शिक्षा और तकनीक ही हमारे असली शस्त्र हैं।

ज्ञान और तकनीक : आधुनिक युग की सबसे बड़ी तलवारें

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि 21वीं सदी का रणक्षेत्र भले ही दिखने में शांत हो, परंतु असली युद्ध डिजिटल और वैचारिक क्षेत्र में लड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि केवल वर्ष 2024 में भारत पर 20 लाख से अधिक साइबर हमले दर्ज किए गए, जिनमें रक्षा प्रतिष्ठान, परमाणु संयंत्र, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाएँ भी निशाने पर रहीं।

“आज की सबसे बड़ी तलवारें हैं – ज्ञान और तकनीक। जो समाज तकनीक में पीछे रह जाएगा, वह आधुनिक युग के युद्ध में हार जाएगा,”
उन्होंने कहा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इंटरनेट, एआई और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में दक्षता हासिल करें। भारत को ‘सॉफ्ट पावर’ से लेकर ‘साइबर पावर’ तक बनाना युवाओं के ही हाथ में है।

युवा शक्ति और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सरोजनीनगर की पहल

डॉ. सिंह ने कहा कि उनका संकल्प है कि सरोजनीनगर विधानसभा का हर युवा आत्मनिर्भर बने। उन्होंने कहा –

“युवा देश की सबसे बड़ी पूंजी हैं। उन्हें रोजगार के लिए शहरों या विदेशों की ओर पलायन न करना पड़े, इसके लिए अवसर उनके द्वार तक पहुँचाने होंगे।” उन्होंने बताया कि सरोजनीनगर क्षेत्र में डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास केंद्र, महिला उद्यमिता कार्यक्रम और रोजगार सृजन योजनाएँ लगातार चलाई जा रही हैं। इन पहलों का उद्देश्य युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाना और उन्हें स्थानीय स्तर पर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

“एकता ही सबसे बड़ी शक्ति” : वैचारिक और डिजिटल हमलों के विरुद्ध सामूहिक जागरूकता पर जोर

डॉ. सिंह ने कहा कि जिस प्रकार महिषासुर के अत्याचार से देवी दुर्गा की सामूहिक शक्ति ने विजय प्राप्त की, उसी प्रकार आज भी समाज को बिखरने नहीं देना है। उन्होंने कहा कि –

“भारत का अस्तित्व केवल उसकी सीमाओं से नहीं, बल्कि उसके विचारों, संस्कृति और परंपराओं से है। हमें वैचारिक और डिजिटल हमलों के विरुद्ध एकजुट रहना होगा।” उन्होंने बल दिया कि अगर समाज एक दिशा में संगठित होकर काम करे, तो कोई भी बाहरी या आंतरिक शक्ति भारत की एकता को नहीं तोड़ सकती।

शस्त्र पूजन का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व

शस्त्र पूजन केवल युद्ध की तैयारी नहीं बल्कि आत्मबल, संयम और न्याय की साधना का प्रतीक है। विजयादशमी के दिन डॉ. सिंह ने मां दुर्गा, भगवान श्रीराम और परशुराम के आशीर्वाद से राष्ट्र की रक्षा और समाज कल्याण की कामना की। उन्होंने कहा कि शस्त्र पूजन हमें स्मरण कराता है कि शक्ति का प्रयोग सदैव धर्म और न्याय की रक्षा के लिए होना चाहिए, न कि किसी के दमन के लिए।

गरिमामय उपस्थिति और सामाजिक समरसता का प्रतीक बना आयोजन

इस अवसर पर मंच पर और सभागार में अनेक सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक क्षेत्र के विशिष्टजन उपस्थित रहे। राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, विधान परिषद सदस्य पवन सिंह चौहान, अंगद सिंह, छेदी सिंह, एस.पी. सिंह, अरविंद कुमार सिंह, प्रदीप सिंह ‘बब्बू’, श्यामपाल सिंह, राज्य महिला आयोग सदस्य एकता सिंह, संयोगिता सिंह, कर्नल ए.के. सिंह, भानु प्रताप सिंह, अखिलेश सिंह, देवेंद्र सिंह सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों ने राष्ट्रगान के साथ एक स्वर में राष्ट्र की एकता, अखंडता और समृद्धि की शपथ ली।

विजयादशमी का संदेश और डॉ. सिंह की प्रेरणा

यह आयोजन केवल एक पारंपरिक शस्त्र पूजन नहीं था, बल्कि यह उस चेतना का प्रतीक था जो भारतीय समाज में अब भी जीवित है – “धर्म की रक्षा ही सच्ची शक्ति है।”
डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने वक्तव्य से यह स्पष्ट किया कि आज के युग में सच्चा योद्धा वही है जो ज्ञान, तकनीक और नैतिकता के माध्यम से समाज को मजबूत करे।
उनका संदेश था कि भारत को न केवल आर्थिक या सैन्य रूप से, बल्कि वैचारिक, सांस्कृतिक और डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनाना ही सच्ची विजयादशमी का अर्थ है।

Gaza Peace Plan: ट्रंप के गाज़ा प्लान पर पाकिस्तान ने क्यों मारा यू-टर्न? जानें इस फैसले के पीछे का जिन्ना कनेक्शन

पाकिस्तान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेश की गई 20 सूत्रीय गाजा शांति योजना से औपचारिक रूप से खुद को अलग कर लिया है.  विदेश मंत्री और उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने राष्ट्रीय सभा में कहा कि अमेरिका का अंतिम प्रस्ताव पाकिस्तान द्वारा समर्थित नहीं है और यह मुस्लिम और अरब देशों के साझा मसौदे का पूर्ण प्रतिनिधित्व नहीं करता.

डार ने साफ किया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने जो 20 बिंदु सार्वजनिक किए हैं, वे हमारे नहीं हैं. हमारे मसौदे में बदलाव किए गए थे. मेरे पास इसका रिकॉर्ड है. उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में राजनीति की कोई गुंजाइश नहीं है.

जानें इसका इतिहास

विदेश मंत्री डार ने बताया कि यह मसौदा 80वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान तैयार किया गया. इस दौरान ट्रंप और आठ देशों पाकिस्तान, जॉर्डन, संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, तुर्की, सऊदी अरब, कतर और मिस्र के विदेश मंत्री शामिल थे. इस मसौदे में तत्काल युद्धविराम, मानवीय सहायता और गाजा में जारी हिंसा रोकने पर खास ध्यान दिया गया था.

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुरुआत में इस योजना का स्वागत किया और टू स्टेट सल्यूशन के लिए समर्थन दोहराया. लेकिन पाकिस्तान में इस समर्थन की तीखी आलोचना हुई. कई लोगों ने इसे “आत्मसमर्पण” बताया और फिलिस्तीनी राज्य के लिए स्पष्ट रोडमैप न होने पर सवाल उठाए.

‘पाकिस्तान और अमेरिकी मसौदे में है अंतर’

विदेश मंत्री डार ने बताया कि पाकिस्तान का मसौदा और अमेरिकी प्रस्ताव कई मामलों में अलग हैं. पाकिस्तान चाहता था कि गाजा से इजरायली सेना पूरी तरह पीछे हटे, जबकि अमेरिकी योजना में बंधकों की रिहाई के साथ चरणबद्ध वापसी का सुझाव दिया गया. डार ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप की समिति ने हमारी मांगों पर खुली बातचीत की. उन्होंने हमें 20 सूत्रीय प्रस्ताव दिया. अगले 24 घंटों में आठ देशों ने अनौपचारिक रूप से मसौदे का आदान-प्रदान किया. हम होटल के कमरों में हार्ड कॉपी का आदान-प्रदान कर रहे थे.”

शुरुआत में सभी विदेश मंत्रियों से संयुक्त हस्ताक्षर लेने की कोशिश हुई, लेकिन सहमति नहीं बन पाई. 29 सितंबर को ट्रंप की इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू से मुलाकात के बाद अमेरिकी 20 सूत्रीय योजना सार्वजनिक कर दी गई.

पाकिस्तान की फिलिस्तीन नीति

डार ने दोहराया कि पाकिस्तान की फिलिस्तीन नीति कायदे-आजम मोहम्मद अली जिन्ना की नीति जैसी ही है और इसमें कभी बदलाव नहीं होगा. पाकिस्तान एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य को अल कुद्स अल शरीफ की राजधानी बनाने का समर्थन करता है. उन्होंने यह भी बताया कि आठ देशों के कुछ प्रस्ताव स्वीकृत किए गए हैं, जबकि कुछ को आगे की बातचीत के लिए रखा गया है.

Snake Enter In Team India Practice Session: भारत-पाकिस्तान मैच से ठीक पहले स्टेडियम में घुसा सांप, मच गई अफरातफरी – जानें पूरा मामला

भारत-पाकिस्तान मैच से पहले एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है. वीमेंस वनडे वर्ल्ड कप 2025 में ये मुकाबला 5 अक्टूबर को खेला जाएगा. भारत-पाकिस्तान के बीच ये मैच श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में होगा. पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मुकाबले से पहले आज शुक्रवार, 3 अक्टूबर की शाम टीम इंडिया कोलंबो के आर प्रेमदास स्टेडियम में प्रैक्टिस कर रही थी. प्रैक्टिस सेशन के दौरान ही अचानक एक सांप खिलाड़ियों के बीच आ गया, जिससे मैदान पर हलचल मच गई.

भारत-पाकिस्तान मैच से पहले स्टेडियम में सांप

भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबले से पहले स्टेडियम में सांप के नजर आने की घटना सामने आई. ये हादसा तब हुआ, जब टीम इंडिया कोलंबो के मैदान पर प्रैक्टिस कर रही थी. भारतीय टीम की प्लेयर्स नेट्स की तरफ जा रही थीं, तभी एक भूरे रंग का सांप मैदान पर नजर आया. इस सांप के बारे में एक मैदानकर्मी ने बताया कि ये एक ‘गरंडिया’ है. ये सांप जहरीला नहीं है और किसी को काटता भी नहीं है. ये केवल चूहे की तलाश में रहता है.

भारतीय टीम की खिलाड़ियों को जब ये सांप मैदान पर नजर आया, तब प्लेयर्स और सपोर्टिंग स्टाफ इस सांप से घबराने की बजाय इसे दिलचस्पी के साथ देखने लगे. सांप की वजह से किसी भी खिलाड़ी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है.

भारत-पाकिस्तान के बीच मुकाबला

वीमेंस ODI वर्ल्ड कप में रविवार, 5 अक्टूबर को भारत-पाकिस्तान के बीच मैच खेला जाएगा. इस बार महिला विश्व कप की मेजबानी भारत कर रहा है, लेकिन पाकिस्तान के सभी मुकाबले श्रीलंका में खेले जाएंगे. वनडे क्रिकेट में भारत और पाकिस्तान की महिला टीमों के बीच कोई ‘राइवलरी’ नहीं है. वनडे में 11 बार दोनों टीमों का आमना-सामना हुआ है और हर बार टीम इंडिया ने पाकिस्तान को हराया है. ODI में एक बार भी पाकिस्तान की टीम भारत पर जीत दर्ज नहीं कर पाई है.