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रामरथ ने रचा स्वर्णिम इतिहास: डॉ. राजेश्वर सिंह की अयोध्या यात्रा पहुँची 50वें पड़ाव पर, सेवा से सिद्धि तक- बुजुर्गों के श्रवण कुमार’ बने विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह, “रामरथ-श्रवण अयोध्या यात्रा” बनी श्रद्धा, सेवा और समरसता का प्रतीक

‘रामरथ’ ने रचा स्वर्णिम इतिहास: डॉ. राजेश्वर सिंह की अयोध्या यात्रा पहुँची 50वें पड़ाव पर, सेवा से सिद्धि तक- बुजुर्गों के ‘श्रवण कुमार’ बने विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह, ‘रामरथ-श्रवण अयोध्या यात्रा’ बनी श्रद्धा, सेवा और समरसता का प्रतीक
‘रामरथ’ ने रचा स्वर्णिम इतिहास: डॉ. राजेश्वर सिंह की अयोध्या यात्रा पहुँची 50वें पड़ाव पर, सेवा से सिद्धि तक- बुजुर्गों के ‘श्रवण कुमार’ बने विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह, ‘रामरथ-श्रवण अयोध्या यात्रा’ बनी श्रद्धा, सेवा और समरसता का प्रतीक
‘रामरथ’ ने रचा स्वर्णिम इतिहास: डॉ. राजेश्वर सिंह की अयोध्या यात्रा पहुँची 50वें पड़ाव पर, सेवा से सिद्धि तक- बुजुर्गों के ‘श्रवण कुमार’ बने विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह, ‘रामरथ-श्रवण अयोध्या यात्रा’ बनी श्रद्धा, सेवा और समरसता का प्रतीक
  • सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की ‘रामरथ-श्रवण अयोध्या यात्रा’ ने 50वां पड़ाव पूरा कर इतिहास रचा।
  • इस निःशुल्क सेवा के तहत अब तक 7,000 से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या दर्शन कराए जा चुके हैं।
  • यात्रा की शुरुआत 2022 में डॉ. सिंह ने अपनी माता स्वर्गीय श्रीमती तारा सिंह की स्मृति में की थी।
  • बुजुर्गों ने कहा – “हमारे विधायक नहीं, हमारे श्रवण कुमार हैं डॉ. राजेश्वर सिंह।”
  • यह यात्रा श्रद्धा, सेवा और सामाजिक समरसता का सशक्त प्रतीक बन चुकी है।

लखनऊ : सरोजनीनगर विधानसभा के भाजपा विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह द्वारा संचालित “रामरथ-श्रवण अयोध्या यात्रा” ने जनसेवा, श्रद्धा और सामाजिक समरसता के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। गुरुवार को लखनऊ के आशियाना सेक्टर स्थित जगदम्बेश्वर महादेव मंदिर से इस यात्रा का 50वां चरण प्रारंभ हुआ, जिसमें दो विशेष बसों के माध्यम से सेकंड इनिंग सीनियर सिटीजन क्लब के लगभग 120 वरिष्ठ नागरिकों को अयोध्या धाम के दर्शन कराए गए।

इस निःशुल्क यात्रा ने न केवल हजारों श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान किया है, बल्कि यह सरोजनीनगर की पहचान बन चुकी है- एक ऐसी पहल जिसने भक्ति को सेवा से और आस्था को आत्मीयता से जोड़ा है।

यात्रा की शुरुआत और उद्देश्य : सेवा में निहित श्रद्धा का संदेश

इस सेवा का शुभारंभ 27 सितंबर 2022 को डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपनी माता स्वर्गीय श्रीमती तारा सिंह जी की पावन स्मृति में किया था। तब से अब तक यह यात्रा 7,000 से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम के दर्शन करा चुकी है। इनमें वरिष्ठ नागरिक, महिलाएँ, छात्र-छात्राएँ, प्रशिक्षणार्थी, वृद्धाश्रमों के बुजुर्गजन और समाज के सभी वर्गों के लोग शामिल हैं।

यह यात्रा उन लोगों के लिए एक अवसर बन चुकी है, जो आर्थिक, स्वास्थ्य या पारिवारिक कारणों से कभी अयोध्या नहीं जा पाए थे। यात्रा के हर चरण में डॉ. सिंह की समर्पित टीम भोजन, जलपान, प्रसाद, चिकित्सा सहायता और यात्रा सुविधा का संपूर्ण प्रबंधन करती है। अयोध्या में जहाँ बसें नहीं पहुँच पातीं, वहाँ श्रद्धालुओं को बैटरी रिक्शा से रामलला, हनुमानगढ़ी और सरयू तट तक दर्शन कराए जाते हैं, ताकि हर श्रद्धालु की भक्ति यात्रा पूर्ण और आत्मिक रूप से संतोषप्रद हो।

‘श्रवण कुमार’ की भूमिका में विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह

इस सेवा यात्रा ने सरोजनीनगर के सामाजिक परिवेश को गहराई से प्रभावित किया है।
यहाँ के बुजुर्गजन गर्व से कहते हैं-

“हमारे विधायक नहीं, हमारे श्रवण कुमार हैं डॉ. राजेश्वर सिंह।”

डॉ. सिंह ने इस यात्रा के माध्यम से यह प्रमाणित किया है कि राजनीति केवल पद का नहीं, बल्कि सेवा-संकल्प का माध्यम हो सकती है।
लगातार 50 यात्राओं का संचालन केवल आयोजन नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है — जो यह दर्शाता है कि सेवा में जब श्रद्धा जुड़ती है, तो वह साधना बन जाती है, और भक्ति में जब करुणा मिलती है, तो वह समाज को जोड़ देती है।

यात्रा के भाव और सामाजिक संदेश

‘रामरथ-श्रवण अयोध्या यात्रा’ केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह सामाजिक एकता और मानवीयता का उत्सव है।

1. धर्म और समाज सेवा का समन्वय

इस यात्रा ने यह सिखाया है कि धर्म केवल पूजा या अनुष्ठान नहीं, बल्कि सेवा, सम्मान और सहानुभूति का विस्तार है।
डॉ. सिंह का मानना है कि –

“श्रद्धा तभी सार्थक है, जब वह किसी के चेहरे की मुस्कान और किसी के जीवन की राहत बन जाए।”

2. वृद्धों का सम्मान और सामाजिक एकता

यह यात्रा बुजुर्गों के लिए आध्यात्मिक संतोष के साथ-साथ समाज में सम्मान और अपनत्व का माध्यम बनी है।
इससे युवाओं में सेवा भावना जागृत हुई है और पीढ़ियों के बीच भावनात्मक सेतु मजबूत हुआ है।

3. सद्भावना और समरसता का प्रतीक

‘रामरथ यात्रा’ में हर वर्ग, हर समुदाय, हर क्षेत्र के लोग सम्मिलित होते हैं।
यह “सबका साथ, सबका विश्वास, सबको तीर्थ” के मूल मंत्र को साकार करती है।
यह यात्रा वास्तव में “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की आत्मा को अभिव्यक्त करती है।

‘सेवा में श्रद्धा’ – डॉ. राजेश्वर सिंह की दृष्टि

डॉ. सिंह का मानना है –

“रामकाज कीन्हे बिनु मोहि कहाँ विश्राम।” “यह यात्रा केवल आस्था का नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का माध्यम है। हर यात्रा में नए श्रद्धालु जुड़ते हैं, नई कहानियाँ जन्म लेती हैं और समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलती है।”

उनके अनुसार, “रामरथ यात्रा सेवा के माध्यम से साधना है, जहाँ हर मुस्कुराता चेहरा हमारी प्रेरणा है और हर बुजुर्ग का आशीर्वाद हमारी शक्ति।”

यात्रा के 50वें पड़ाव का महत्व

50वीं यात्रा केवल एक आँकड़ा नहीं, बल्कि सेवा के सतत संकल्प का प्रतीक है।
यह दर्शाता है कि जब जनप्रतिनिधि सेवा को अपने कार्य का आधार बना लेता है, तब राजनीति का स्वरूप लोककल्याण का पर्याय बन जाता है।
डॉ. राजेश्वर सिंह की यह पहल लखनऊ की सीमाओं से आगे बढ़कर प्रदेशभर के जनसेवकों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।

आगे की दिशा : यात्रा अनवरत जारी रहेगी

डॉ. सिंह ने कहा कि यह यात्रा निरंतर जारी रहेगी, ताकि अधिकाधिक श्रद्धालु विशेषकर वरिष्ठ नागरिक और महिलाएँ इस पावन सेवा से लाभान्वित हो सकें।
उन्होंने कहा कि –

“यह केवल यात्रा नहीं, सरोजनीनगर परिवार की आध्यात्मिक परंपरा बन चुकी है। जब तक समाज में श्रद्धा और सेवा का भाव रहेगा, ‘रामरथ’ चलता रहेगा।”

श्रद्धा, सेवा और समाज का समागम

‘रामरथ-श्रवण अयोध्या यात्रा’ ने यह सिद्ध किया है कि राजनीति का सर्वोच्च रूप जनसेवा है और जनसेवा का श्रेष्ठतम रूप आस्था से प्रेरित समाज सेवा है।
डॉ. राजेश्वर सिंह की यह पहल सरोजनीनगर ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए “सेवा में समर्पण और श्रद्धा में सादगी” का अद्भुत उदाहरण बन गई है।

डॉ.राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से की मुलाकात, लखनऊ को भारत की सबसे स्मार्ट और हरित राजधानी बनाने हेतु सौंपा विस्तृत नीति-पत्र, राजधानी लखनऊ के सर्वांगीण विकास को लेकर विधायक डॉ. सिंह का दूरदर्शी प्रस्ताव- “Capital Transformation Policy Note”

डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से की मुलाकात, लखनऊ को भारत की सबसे स्मार्ट और हरित राजधानी बनाने हेतु सौंपा विस्तृत नीति-पत्र, राजधानी लखनऊ के सर्वांगीण विकास को लेकर विधायक डॉ. सिंह का दूरदर्शी प्रस्ताव- "Capital Transformation Policy Note"
डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से की मुलाकात, लखनऊ को भारत की सबसे स्मार्ट और हरित राजधानी बनाने हेतु सौंपा विस्तृत नीति-पत्र, राजधानी लखनऊ के सर्वांगीण विकास को लेकर विधायक डॉ. सिंह का दूरदर्शी प्रस्ताव- "Capital Transformation Policy Note"
डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से की मुलाकात, लखनऊ को भारत की सबसे स्मार्ट और हरित राजधानी बनाने हेतु सौंपा विस्तृत नीति-पत्र, राजधानी लखनऊ के सर्वांगीण विकास को लेकर विधायक डॉ. सिंह का दूरदर्शी प्रस्ताव- "Capital Transformation Policy Note"
  • डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से मुलाकात कर लखनऊ को भारत की सबसे स्मार्ट और हरित राजधानी बनाने हेतु विस्तृत नीति-पत्र सौंपा।
  • नीति-पत्र में जलभराव, ट्रैफिक, कचरा प्रबंधन, प्रदूषण और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थायी समाधान योजनाएँ प्रस्तुत की गईं।
  • मुख्यमंत्री से “High-Level Capital Development Review Committee” गठित करने का अनुरोध किया गया, जो हर तीन माह में परियोजनाओं की समीक्षा करेगी।
  • प्रमुख प्रस्तावों में एआई आधारित ट्रैफिक सिस्टम, वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट विस्तार, गोमती नदी पुनर्जीवन 2.0 और ग्रीन लखनऊ मिशन 2030 शामिल हैं।
  • डॉ. सिंह ने मीडिया कर्मियों के लिए राज्य स्तरीय कल्याण कोष और सरोजनीनगर की लंबित परियोजनाओं के शीघ्र निस्तारण की भी मांग की।

लखनऊ : राजधानी लखनऊ को भारत की सबसे सुव्यवस्थित, तकनीकी रूप से उन्नत, स्वच्छ और पर्यावरण-संवेदनशील राजधानी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सरोजनीनगर विधानसभा के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी से भेंट कर एक विस्तृत नीति-पत्र (Policy Note) सौंपा।

इस नीति-पत्र में लखनऊ के सर्वांगीण और सतत विकास के लिए दीर्घकालिक योजनाएँ, तकनीकी नवाचार, नागरिक सहभागिता और पारदर्शी शासन के समन्वित मॉडल को रेखांकित किया गया है।

‘Capital Transformation Policy Note’ का मुख्य उद्देश्य

डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा प्रस्तुत नीति-पत्र का मूल उद्देश्य लखनऊ को भारत की सर्वश्रेष्ठ स्मार्ट, हरित और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन राजधानी के रूप में विकसित करना है।
यह दस्तावेज़ केवल अवसंरचना (Infrastructure) के विकास पर नहीं, बल्कि नागरिक जीवन की गुणवत्ता में सुधार पर केंद्रित है।

इसमें लखनऊ की प्रमुख नागरिक समस्याओं-

  • लगातार बढ़ते जलभराव,
  • ट्रैफिक जाम,
  • कचरा प्रबंधन की जटिलताएँ,
  • प्रदूषण नियंत्रण, तथा
  • स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता —
    के स्थायी और तकनीकी समाधान प्रस्तुत किए गए हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि “लखनऊ के विकास की रूपरेखा अब पारंपरिक दृष्टिकोण से हटकर, टेक्नोलॉजी, ट्रांसपेरेंसी और ट्रस्ट के तीन स्तंभों पर आधारित होनी चाहिए।”

मुख्यमंत्री से की ‘High-Level Capital Development Review Committee’ गठन की सिफारिश

बैठक के दौरान डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री जी से आग्रह किया कि राजधानी लखनऊ की परियोजनाओं की गति और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक “High-Level Capital Development Review Committee” का गठन किया जाए।

उन्होंने सुझाव दिया कि इस समिति की अध्यक्षता मुख्य सचिव करें और इसमें लखनऊ विकास प्राधिकरण, नगर निगम, पुलिस, ट्रैफिक, लोक निर्माण विभाग, ऊर्जा विभाग, जल निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और शहरी विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हों।

यह समिति प्रत्येक तीन माह में राजधानी की सभी प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा करे और अपनी रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को प्रस्तुत करे।
इस व्यवस्था से जवाबदेही, समयबद्ध क्रियान्वयन और योजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी।

नीति-पत्र के मुख्य प्रस्ताव : ‘स्मार्ट लखनऊ – सतत भविष्य’ की दिशा में कदम

डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा सौंपे गए नीति-पत्र में कई व्यवहारिक, अभिनव और भविष्योन्मुखी प्रस्ताव शामिल किए गए हैं, जो लखनऊ को एक मॉडल कैपिटल सिटी के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखते हैं। इनमें प्रमुख हैं –

1. एआई-आधारित ड्रेनेज और ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली

सिंगापुर और लंदन मॉडल के आधार पर लखनऊ में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से संचालित स्मार्ट ड्रेनेज एवं ट्रैफिक प्रबंधन प्रणाली लागू करने का प्रस्ताव है। यह प्रणाली वर्षा जल निकासी, ट्रैफिक फ्लो और सड़क जाम की स्थिति को रीयल-टाइम सेंसर और डिजिटल मॉनिटरिंग नेटवर्क के माध्यम से नियंत्रित करेगी। इससे जलभराव और जाम की समस्या में उल्लेखनीय कमी आएगी।

2. शिवरी वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट का विस्तार और ‘स्वच्छ लखनऊ पॉइंट्स’ योजना

वर्तमान में कार्यरत शिवरी वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट की क्षमता 700 MT/Day है, जिसे 1200 MT/Day तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। साथ ही, ‘स्वच्छ लखनऊ पॉइंट्स’ नागरिक पुरस्कार योजना शुरू करने की सिफारिश की गई है, जिसके तहत नागरिकों को कचरा पृथक्करण, स्वच्छता और रीसाइक्लिंग में योगदान के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

3. गोमती नदी पुनर्जीवन 2.0 (Gomti River Revival 2.0)

इस योजना में गोमती नदी की जल गुणवत्ता सुधार हेतु रीयल-टाइम सेंसर सिस्टम, वॉटर क्वालिटी डैशबोर्ड, और ऑक्सीजन पार्कों का निर्माण प्रस्तावित है। साथ ही नदी किनारे जैव विविधता संरक्षण और हरित क्षेत्र के विकास पर भी बल दिया गया है।

4. ग्रीन लखनऊ मिशन 2030

लखनऊ को हरित राजधानी बनाने हेतु ‘ग्रीन लखनऊ मिशन 2030’ प्रस्तुत किया गया है।
इस मिशन के अंतर्गत –

  • 10 अर्बन फॉरेस्ट (Urban Forests),
  • 50 ऑक्सीजन पार्क, तथा
  • रूफ-टॉप गार्डन परियोजनाएँ शुरू की जाएँगी।

यह मिशन नागरिकों, स्कूलों, उद्योगों और संस्थानों की सहभागिता से संचालित होगा, ताकि पर्यावरण संरक्षण एक सामूहिक जनांदोलन बन सके।

5. एआई-आधारित Health Watch Portal और मोबाइल क्लिनिक

राजधानी में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और पहुँच सुधारने के लिए AI आधारित Health Watch Portal विकसित करने का प्रस्ताव है। यह पोर्टल नागरिकों की स्वास्थ्य रिपोर्ट, अस्पताल बेड स्थिति, एम्बुलेंस लोकेशन और रोग प्रबंधन की रीयल-टाइम जानकारी प्रदान करेगा, साथ ही मोबाइल क्लिनिक यूनिट्स के माध्यम से झुग्गी बस्तियों और ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाई जाएँगी।

मीडिया कर्मियों और सरोजनीनगर की विकास परियोजनाओं पर विशेष आग्रह

बैठक के दौरान डॉ. सिंह ने मीडिया कर्मियों के लिए राज्य स्तरीय कल्याण कोष (Media Welfare Fund) गठित करने का भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज का दर्पण हैं और उनके कल्याण के लिए संरचित योजना आवश्यक है, साथ ही उन्होंने सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र की लंबित विकास परियोजनाओं जैसे सड़क, जलनिकासी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और शिक्षा संस्थानों के उन्नयन का विषय भी मुख्यमंत्री जी के समक्ष रखा और शीघ्र निस्तारण का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री की सकारात्मक प्रतिक्रिया और दीपावली शुभकामनाएँ

डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ भी दीं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री जी ने नीति-पत्र में उल्लिखित सभी प्रस्तावों पर अत्यंत सकारात्मक, प्रेरक और व्यवहारिक प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ के सर्वांगीण विकास के लिए ऐसी योजनाएँ नीति-निर्माण में निश्चित रूप से सहायक सिद्ध होंगी और इनके कई पहलुओं पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी।

डॉ. राजेश्वर सिंह का वक्तव्य

“योगी आदित्यनाथ जी के दूरदर्शी, अनुशासित और जन-केन्द्रित नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज सुशासन और विकास का राष्ट्रीय मॉडल बन चुका है। इसी गति और दृष्टिकोण के साथ हम लखनऊ को भी देश की सबसे स्मार्ट और हरित राजधानी बना सकते हैं। यह नीति-पत्र उसी दिशा में एक सशक्त कदम है।”- डॉ. राजेश्वर सिंह, विधायक (170) सरोजिनी नगर, लखनऊ

डॉ. राजेश्वर सिंह का यह पहल न केवल राजधानी लखनऊ के भौतिक विकास की दिशा में एक ठोस योजना प्रस्तुत करता है, बल्कि यह प्रशासनिक पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और नागरिक सहयोग पर आधारित एक “नए लखनऊ मॉडल” की शुरुआत भी करता है। यदि नीति-पत्र के प्रस्तावों को राज्य सरकार द्वारा स्वीकार कर क्रियान्वित किया जाता है, तो लखनऊ निश्चित रूप से आने वाले वर्षों में भारत की सबसे स्मार्ट और सतत राजधानी के रूप में अपनी पहचान बनाएगा।

Sports News:ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले विराट कोहली का रिटायरमेंट की अटकलों पर बड़ा बयान

भारतीय क्रिकेट के सुपरस्टार विराट कोहली एक बार फिर सुर्खियों में हैं. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे सीरीज शुरू होने से पहले उनके सोशल मीडिया पोस्ट ने फैंस के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है. पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा जोरों पर थी कि विराट और रोहित शर्मा दोनों का यह ऑस्ट्रेलिया दौरा उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की आखिरी सीरीज हो सकता है. अब विराट ने खुद इन अफवाहों पर बड़ा जवाब दिया है.

 विराट के पोस्ट ने मचाई हलचल

हाल ही में विराट कोहली ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट किया है. उन्होंने लिखा,  “आप असलियत में तब ही असफल हो जाते हैं, जब आप खुद हार मानने का फैसला करते हैं.”

विराट के इस पोस्ट को उनके वनडे करियर के भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है. उन्होंने पहले ही टेस्ट और टी20 क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है, और अब वे सिर्फ वनडे फॉर्मेट में खेल रहे हैं. फैंस और क्रिकेट विशेषज्ञों के बीच यह सवाल उठ रहा था कि क्या 2027 वनडे वर्ल्ड कप तक विराट टीम इंडिया का हिस्सा रहेंगे.

The only time you truly fail, is when you decide to give up.

— Virat Kohli (@imVkohli) October 16, 2025

सेलेक्टर्स और कोच ने भी दी सफाई

इन चर्चाओं के बीच बीसीसीआई चयन समिति के प्रमुख अजीत अगरकर ने भी स्थिति स्पष्ट की है. उन्होंने कहा कि विराट कोहली और रोहित शर्मा दोनों को 2027 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखकर टीम में चुना गया है. अगरकर ने कहा, “जहां तक मुझे पता है, दोनों खिलाड़ियों ने अपने फिटनेस टेस्ट पास कर लिए हैं और वे पूरी तरह फिट हैं. ऐसे में रिटायरमेंट की बात करना अभी जल्दबाजी होगी.”

अगरकर ने यह भी कहा कि विराट और रोहित दोनों टीम इंडिया के लिए अहम हैं और उनके अनुभव की जरूरत भविष्य की बड़ी सीरीज में भी पड़ेगी.

वहीं टीम इंडिया को टेस्ट में वेस्टइंडीज के खिलाफ मिली जीत के बाद मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के भविष्य की जगह वर्तमान पर ध्यान देना जरूरी है. गंभीर ने कहा, “50 ओवर का वर्ल्ड कप अभी ढाई साल दूर है. हमें इस वक्त के प्रदर्शन पर फोकस करना चाहिए. विराट और रोहित दोनों अनुभवी खिलाड़ी हैं और ऑस्ट्रेलिया में उनका अनुभव टीम के बहुत काम आएगा.”

विराट का यह दौरा टीम इंडिया के लिए भी अहम है. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हमेशा से भारत की भिड़ंत रोमांचक रही है, और इस बार टीम का लक्ष्य सीरीज जीतकर 2027 वर्ल्ड कप की तैयारी को मजबूती देना है.

Enamel Care: एक बार खराब हुई तो फिर नहीं लौटेगी मुस्कान, जानें दांतों की इनेमल की देखभाल के तरीके

क्या आप जानते हैं कि आपकी खूबसूरती को बढ़ाने में एक बढ़ा रोल आपकी मुस्कुराहट का भी होता है. ऐसे में इस प्यारी स्माइल को बनाे रखने के लिए जरूरी है स्वस्थ दांतों का होना और इन दांतों की की रक्षा करती है इनेमल. आपने भी इनेमल के बारे में जरूर सुना होगा.

दरअसल, इनेमल हमारे दांतों के ऊपर मौजूद सफेद रंग की एक परत होती है, जो दांतों की रक्षा करती है. साथ ही इनेमल हमारे शरीर के सबसे मजबूत हिस्सा भी होती है. लेकिन ज्यादातर लोग इनेमल की केयर को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका हरजाना उन्हें बाद में भुगतना पड़ता है. इनेमल खराब हेने के बाद दांतों में सड़न और पीलापन आ जाता है. ऐसे में ओरल केयर के लिए इनेमल कका ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

क्या होती है इनेमल?   

हमारे दांतो के ऊपर मौजूद लेयर को इनेमल कहा जाता है. दरअसल, हमारे दांतो की कठोरता और सफेदी इसी इनेमल से कायम रहती है. 95% हाइड्रॉक्सीएपेटाइड मिनरल्स से बनने के कारण ये इनेमल शरीर में सबसे मजबूत होती है. साथ ही इसकी एक लिमिटेशन ये होती है कि इनेमल में कोई लिविंग सेल्स मौजूद नहीं होते, जिस कारण ये वापस से रिपेयर नहीं हो सकती. ऐसे में इसका ध्यान रखना और भी जरूरी हो जाता है क्योंकि आपके दांतों को कैविटी और पीलेपन से बचाने का एक अकेला जरिया यही है.

कैसे होता है इनेमल डैमेज? 

इनेमल कभी रातोंरात डैमेज नहीं होती है बल्कि ये कई दिनों की प्रोसेस के दौरान खराब होती है. ऐसे में इसके डैमेज होने के कई कारण हो सकते हैं. जैसे-

1. जोर से ब्रश करना: कई लोगों को लगता है कि बहुत जोर से ब्रश करने से दांत चमकते और अच्छे से साफ होते हैं. लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता है. इससे केवल दांतो पर चढ़ी इनेमल की लेयर कोरोड हो जाती है और मसुड़ों को नुकसान भी होता है.

2. खराब ओरल हेल्थ: ओरल हेल्थ का ख्याल न रखने पर भी इनेमल की लेयर खराब हो जाती है. ऐसा इसलिए क्योंकि उसपर प्लाक जम जाता है और बैक्टीकिया अटैक करने लगते हैं, जिससे दांत जल्दी सड़ जाता है.

3. मुंह का कम पीएच: हमारे मुंह का पीएच काफी कम होने पर भी इनेमल को नुकसान होता है. कम पीएच के कारण मुंह एसेडिक हो जाता है और इनेमल को कमजोर करता है.

कैसे करें इसकी केयर?

इनेमल की केयर करने के लिए आप कई तरीके अपना सकते हैं. जैसे- सही तरह का खाना खाने से लेकर सही समय पर भोजन करना शामिल है. साथ ही, हाइड्रेट रहना भी जरूरी है, क्योंकि इससे मुंह में ज्यादा लार बनती है और एसिड का असर कम होता है. इसके अलावा दांतों को रेगुलरली ब्रश करके और उनकी जांच कराके भी इनेमल को प्रोटेक्ट किया जा सकता है.

Travel Tips:दिवाली पर कुबेर देव का आशीर्वाद! इन मंदिरों में दर्शन से खुलेंगे धन के द्वार

धनतेरस से दिवाली पर्व का आरंभ हो जाता है। वैसे तो इस दिन देव कुबरे की पूजा की जाती है। आमतौर पर कुबेर की पूजा में मूर्ति स्थापित करने की मनाही होती है। कुबेर देव की मूर्ति का इस्तेमाल पूजा में कम किया जाता है। हालांकि, भारत में कुछ मंदिर है जो कुबरे देव को समर्पित है। इन मंदिरों में कुबेर जी की मूर्ति मौजदू है। मान्यता है कि धनतेरस से लेकर दीपावली तक कुबरे देव के मंदिरों में काफी भीड़ लगी रहती है। कुबेर जी के इन मंदिरों में दर्शन करने से आप कर्जों से मुक्ति पा सकते हैं। अगर आप आर्थिक तंगी से परेशान है, तो आप धन की मनोकामना के लिए इन मंदिरों में दर्शन जरुर करने जाएं।

कुबेर भंडारी मंदिर

सबसे लोकप्रिय कुबेर देव का मंदिर गुजरात में बना हुआ है। गुजरात के वडोदरा जिले में यह मंदिर स्थित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मंदिर को भगवान शिव ने बनवाया था। कहा जाता है कि जो व्यक्ति धनतेरस और दिवाली पर इस मंदिर  में दर्शन करने के लिए आता है। उसके जीवन में धन की कमी नहीं होती। यहां पर पहुंचने के लिए आप कैब करनी पड़ेगी क्योंकि यह वडोदरा से 60 किमी दूरी पर स्थित है।

उत्तराखंड का प्राचीन कुबेर मंदिर

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिला से करीब 40 किमी दूरी पर जागेश्वर धाम है, उधर ही 100 मीटर की दूरी पर प्राचीन कुबेर देव का मंदिर स्थापित है। आपको बता दें कि, यहां पर एकलिंग रूप में कुबेर की पूजा होती है। इस मंदिर को कत्यूरी राजवंश के राजाओं द्वारा 7वीं से 14वीं शताब्दी मे बनवाया गया है। धनतेरस वाले दिन इस मंदिर का दर्शन जरुर करें।

कुबेर मंदिर, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में आपको  कुबरे देव के 3 मंदिर दर्शन के लिए मिल जाएंगे है। यहां पर धन के देवता की पूजा की जाती है। पहला मंदिर उज्जैन में बना है, दूसरा मंदिर खंडवा के ओंकारेश्वर में, इनके दर्शन से ही धन की समस्या दूर हो जाती है। तीसरा मंदिर उज्जैन के संदीपनि मुनि के आश्रम में कुबेर देव मंदिर स्थापित है। इस मंदिर में चतुर्भुजी मूर्ति स्थापित है। इस मंदिर में कुबेर को पंचमेवा, अनार और मौसमी का भोग लगता है। आप इस मंदिर का दर्शन करने जरुर जाएं।