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लखनऊ: एसजीपीजीआई ने वॉकथॉन और पिंक बॉल क्रिकेट लीग के साथ मनाया स्तन कैंसर जागरूकता माह

  • एसजीपीजीआई ने स्तन कैंसर जागरूकता माह के तहत वॉकथॉन और पिंक बॉल क्रिकेट लीग का आयोजन किया।
  • कार्यक्रम में डॉक्टर, नर्स, छात्र, कर्मचारी और उनके परिवार बड़ी संख्या में शामिल हुए।
  • वॉकथॉन ने स्तन स्व-परीक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश फैलाया।
  • चार उत्साही टीमों ने पिंक बॉल क्रिकेट लीग में प्रतिस्पर्धा की, महिला खिलाड़ियों ने मुख्य भाग लिया।
  • विशेषज्ञों ने स्तन स्व-परीक्षण और प्रारंभिक जांच के महत्व पर जोर दिया।

लखनऊ। स्तन कैंसर महिलाओं में सबसे आम कैंसर है और उनके जीवनकाल में लगभग आठ में से एक महिला इससे प्रभावित होती है। अच्छी खबर यह है कि अगर समय पर पता चल जाए, तो स्तन कैंसर का इलाज संभव है और जीवित रहने की दर बहुत अच्छी रहती है। इस संदेश को फैलाने के लिए एसजीपीजीआई ब्रेस्ट हेल्थ कार्यक्रम, एंडोक्राइन और ब्रेस्ट सर्जरी विभाग मिलकर हर अक्टूबर में विशेष कार्यक्रम आयोजित करता है, जिसे स्तन कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है।

इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को स्तन स्व-परीक्षण के बारे में जानकारी देना, प्रारंभिक चेतावनी संकेतों को पहचानने के लिए प्रेरित करना और बिना किसी डर या झिझक के चिकित्सा सलाह लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। इस तरह के कार्यक्रम समुदाय तक पहुँचते हैं और संदेश फैलाते हैं कि समय पर पता लगाने से जीवन बचाया जा सकता है।

वॉकथॉन में दिखा उत्साह और प्रतिबद्धता

इस वर्ष के जागरूकता अभियान के तहत, 26 अक्टूबर को एसजीपीजीआई परिसर में एक रंगारंग और ऊर्जा से भरपूर वॉकथॉन आयोजित किया गया। वॉकथॉन को अस्पताल के क्रिकेट मैदान से शाम 3:00 बजे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया और यह अस्पताल के मुख्य द्वार (गेट नंबर 1) तक पहुँचा।

वॉकथॉन में विभिन्न विभागों के डॉक्टर, नर्स, छात्र, कर्मचारी, उनके परिवार और परिसर के निवासियों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। सभी प्रतिभागियों ने गुलाबी टी-शर्ट और टोपी पहनी और स्तन कैंसर जागरूकता व स्व-परीक्षण पर संदेश वाली तख्तियाँ लिए हुए थे।

यह वॉक महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति एकता, देखभाल और प्रतिबद्धता का प्रतीक था, जिससे यह संदेश गया कि नियमित जांच के छोटे कदम भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

पिंक बॉल क्रिकेट लीग ने बढ़ाया उत्साह

वॉकथॉन के बाद क्रिकेट मैदान में आयोजित पिंक बॉल क्रिकेट मिनी लीग ने कार्यक्रम को और भी उत्साहवर्धक बना दिया। चार टीमों – हैल्स्टेड डायरेक्टर्स इलेवन, ऑड्रेच डीन्स इलेवन, क्लॉफ सीएमएस इलेवन, वेरोनेसी एंडोक्राइन सर्जरी इलेवन – ने बड़ी ऊर्जा और मुस्कान के साथ प्रतिस्पर्धा की।

टीमों के नाम स्तन सर्जरी के विश्व प्रसिद्ध अग्रदूतों के नाम पर रखे गए थे, जो स्तन कैंसर के इलाज में योगदान देने वाले वैज्ञानिकों का सम्मान करते हैं। सभी टीमों में मुख्य रूप से महिला खिलाड़ी थीं, जबकि पुरुष खिलाड़ियों को बाएं हाथ से खेलना या अंडर-आर्म गेंदबाजी करना था।

इस आयोजन में एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आर. के. धीमन मुख्य संरक्षक और डॉ. (श्रीमती) प्रवीणा धीमन एक टीम की कप्तान के रूप में मौजूद थीं।

विशेषज्ञों ने दी जानकारी और प्रेरणा

कार्यक्रम आयोजकों – डॉ. अभिषेक कृष्णा, डॉ. सबरत्नम एम, डॉ. ज्ञान चंद – ने सभी का स्वागत किया।
विभागाध्यक्ष प्रो. गौरव अग्रवाल ने स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता और इसके सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला।
प्रोफेसर अंजलि मिश्रा ने स्तन स्व-परीक्षण और स्तन स्क्रीनिंग की अहमियत पर जोर दिया और कहा कि प्रारंभिक अवस्था में पता लगाना जीवन रक्षक हो सकता है।

समुदाय और स्वास्थ्य जागरूकता का संगम

एसजीपीजीआई का पिंक बाई पिंक बॉल कार्यक्रम स्वास्थ्य जागरूकता को खुशी और उत्साह के साथ जोड़ने का एक सफल प्रयास रहा। इस आयोजन ने न केवल खेल भावना का जश्न मनाया, बल्कि समुदाय की शक्ति और एक स्वस्थ कल की आशा को भी उजागर किया।

संदेश स्पष्ट है: समय पर जांच और जागरूकता से स्तन कैंसर के खिलाफ लड़ाई में हर व्यक्ति बदलाव ला सकता है।

रबी सीजन के लिए पर्याप्त बीज और खाद उपलब्ध – कृषि मंत्री

  • 10 लाख से अधिक किसानों को रबी सीजन में निःशुल्क बीज मिनीकिट देगी योगी सरकार
  • शेष किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर मिलेंगे बीज

लखनऊ- 26 अक्टूबर, 2025 : रबी सीजन में प्रदेश के सभी 75 जनपदों में सुचारू रूप से आच्छादन हो सके इसके लिए प्रदेश के कृषि विभाग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इसकी जानकारी प्रदेश के कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को दी है।
कृषि मंत्री श्री शाही ने किसानों को आश्वस्त किया है कि प्रदेश की योगी सरकार द्वारा रबी सीजन के लिए बीज और खाद की समुचित व्यवस्था कर ली गई है। उन्होंने बताया कि दलहन और तिलहन में उत्तर प्रदेश और भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रदेश के 10 लाख से अधिक किसानों को ऑनलाइन आवेदन पर लाटरी के माध्यम से निःशुल्क मिनीकिट उपलब्ध करा रही है। वहीं शेष किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर किसान कल्याण केन्द्र (उप्र कृषि विभाग के बीज गोदाम) पर आधारीय और प्रमाणित उत्कृष्ट बीज (गेहूँ, चना, मसूर, दालवाली मटर, सरसों आदि के बीज आधे दाम पर किसानों को जोत के आवश्यकता के अनुसार उपलब्ध करा रही है।
उन्होंने जानकारी दी है कि 8 प्रकार की फसलों/प्रजातियों के बीज अनुदान पर दिए जा रहे हैं। जिसमें गेहूं (सामान्य प्रजातियाँ) और गेहूं डीबीडब्ल्यू के लिए विक्रय दर 4680/- रुपये प्रति क्विंटल है, जिस पर सरकारी अनुदान 2340/- रुपये है और कृषक अंश भी 2340/- रुपये है। इसी प्रकार, राई (बाजरा प्रजातियाँ) और तोरिया (आजकल/अगेती) के बीज प्रमाणित प्रकार के हैं। तोरिया का विक्रय दर सर्वाधिक 11147/- रुपये है, जिस पर 5500/- रुपये का अनुदान और 5647/- रुपये का कृषक अंश है। राई/सरसों का विक्रय दर 10317/- रुपये है, जिस पर अनुदान 5153/- रुपये और कृषक अंश 5164/- रुपये है। चना (समस्त प्रजातियाँ) के बीज का विक्रय दर 10320/- रुपये है, जिस पर 5160/- रुपये का अनुदान और कृषक अंश भी 5160/- रुपये है। मसूर का विक्रय दर 11048/- रुपये है, जिस पर अनुदान 5523/- रुपये और कृषक अंश 5525/- रुपये है। जौ बीज की विक्रय दर 7093/- रुपये है, जिस पर अनुदान 3574/- रुपये और कृषक अंश 3519/- रुपये है।
उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे प्राप्त नवीन बीज का समुचित भण्डारण, सही ढंग से बोआई और पक्षियों एवं अन्य कृषक जीवों से बचाव की उचित देख-रेख करें ताकि बीज का अच्छा अंकुरण हो सके। किसानों से अपील की है कि वे सरकार द्वारा 50 प्रतिशत अनुदान पर दिए जा रहे बीजों के लिए कोई भी अतिरिक्त मूल्य का भुगतान न करें।
उन्होंने जानकारी दी है कि प्रदेश में खाद की भी कोई कमी नहीं है। सभी 75 जिलों में पर्याप्त मात्रा में डीएपी, एनपीके, एसएसपी, पोटाश उपलब्ध है। डीएपी 4 लाख 79 हजार मीट्रिक टन, एनपीके 4 लाख 82 हजार मीट्रिक टन, एसएसपी 3 लाख 2 हजार मीट्रिक टन, यूरिया 11 लाख 84 हजार मीट्रिक टन, पोटाश 95 हजार मीट्रिक टन। इसमें सहकारी समितियों पर डीएपी 2 लाख 28896 मीट्रिक टन, एनपीके 1 लाख 34 हजार मीट्रिक टन तथा यूरिया 5 लाख 3201 मीट्रिक टन है।

फर्रुखाबाद: बी-पैक्स जहानगंज में सहकारी संवाद सम्पन्न, सदस्यता अभियान का उद्देश्य प्रत्येक परिवार को सहकारिता से जोड़ना : डॉ. प्रवीण सिंह जादौन

  • फर्रुखाबाद के बी-पैक्स जहानगंज में एम-पैक्स सदस्यता अभियान 2025 के तहत सहकारी संवाद कार्यक्रम आयोजित।
  • मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. प्रवीण सिंह जादौन की उपस्थिति, सहकारिता के विस्तार पर जोर।
  • समिति में गंदगी मिलने पर डॉ. जादौन ने एडीओ को दो दिन में सफाई के निर्देश दिए।
  • सदस्यता अभियान का उद्देश्य हर परिवार को सहकारिता से जोड़ना और किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना है।
  • कार्यक्रम में कई सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारी एवं स्थानीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

फर्रुखाबाद : जनपद फर्रुखाबाद के बी-पैक्स जहानगंज में एम-पैक्स सदस्यता अभियान 2025 के अंतर्गत एक सहकारी संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण सहकारी संघ के निदेशक डॉ. प्रवीण सिंह जादौन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान डॉ. जादौन ने सहकारी समिति परिसर में गंदगी पाए जाने पर सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता) के प्रति नाराजगी जताई और कहा कि –

“स्वच्छता सरकार की प्राथमिकता में है। बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियाँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, अतः इन्हें स्वच्छ रखना हमारी प्रथम जिम्मेदारी है।”

उन्होंने ए.डी.ओ. को दो दिनों के भीतर समिति परिसर को पूर्णतः स्वच्छ कराने के निर्देश दिए।

सहकारिता आंदोलन को नई दिशा मिल रही है

डॉ. जादौन ने कहा कि प्रदेश के सहकारिता मंत्री जे.पी.एस. राठौर के नेतृत्व में प्रदेश में सहकारिता आंदोलन को नई दिशा और गति मिल रही है। उन्होंने बताया कि “सदस्यता अभियान” का उद्देश्य प्रत्येक परिवार को सहकारिता से जोड़ना और सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाना है।

उन्होंने कहा कि यह अभियान सहकारिता विभाग द्वारा संचालित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत किसानों को सहकारी समितियों की सदस्यता लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सदस्यता लेने के लिए व्यक्ति की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए, और वह अपनी स्थानीय सहकारी समिति से संपर्क कर लगभग ₹225 का शुल्क जमा कर सदस्यता प्राप्त कर सकता है।

सदस्य बनने वाले किसानों को केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का सीधा लाभ प्राप्त होता है।

अनेक पदाधिकारी रहे उपस्थित

कार्यक्रम में जिला सहकारी बैंक फर्रुखाबाद के निदेशक रामेंद्र कटियार, अपना दल के जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह ‘रिंकू कटियार’, एम-पैक्स जहानगंज की अध्यक्ष अर्चना कटियार, संचालक अंकुल गुप्ता, सुमित शुक्ला, ए.डी.ओ. कमालगंज योगेंद्र सिंह, सचिव राजीव दुबे सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त शिवम कुमार, चेतराम, हरीराम, सियाराम, हरिश्चंद्र, लाल सिंह, सुनील कुमार, मोनू, सुशील कुमार, राजवीर सिंह, रंजीत कुमार, छम्मीलाल, रामसिंह, संजीत पाल, गौतम कुमार, अनीस समेत अनेक सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी को सौंपा नीति-पत्र : उत्तर प्रदेश में वधशालाओं के मानवीय नियमन हेतु AI-आधारित प्रणाली लागू करने का सुझाव

  • डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को स्लॉटर हाउसों के मानवीय नियमन हेतु AI-आधारित प्रणाली लागू करने का विस्तृत नीति-पत्र सौंपा।
  • नीति-पत्र में पशु-क्रूरता रोकने और वधशालाओं की निगरानी में पारदर्शिता लाने के लिए AI-सक्षम कैमरों की अनिवार्यता का सुझाव दिया गया।
  • प्रस्ताव के तहत सभी स्लॉटर हाउसों को राज्य कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़कर रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था की जाएगी।
  • डॉ. सिंह ने कहा – “AI केवल तकनीक नहीं, करुणा का माध्यम है, जो शासन को संवेदनशील और प्रभावी बनाता है।”
  • यह पहल उत्तर प्रदेश को AI-आधारित Humane Governance Network लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना सकती है।

भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक विस्तृत नीति-पत्र सौंपा, जिसमें उन्होंने प्रदेशभर के स्लॉटर हाउसों के लिए AI-आधारित Humane Monitoring System लागू करने का प्रस्ताव रखा। इस प्रणाली का उद्देश्य वधशालाओं में पारदर्शिता, मानवीय दृष्टिकोण और तकनीकी निगरानी के माध्यम से पशु-क्रूरता की रोकथाम सुनिश्चित करना है।

डॉ. सिंह ने मुख्यमंत्री के गौ-संरक्षण और करुणा-आधारित सुशासन की सराहना करते हुए कहा-
“योगी जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने गौ-संरक्षण और पशु-कल्याण को राज्य नीति का मूल तत्व बना दिया है। अब आवश्यक है कि वधशालाओं में पारदर्शिता, तकनीक और संवेदनशीलता को जोड़ा जाए ताकि संविधान के अनुच्छेद 48 की भावना के अनुरूप वैज्ञानिक एवं मानवीय व्यवस्था स्थापित की जा सके।”

नीति-पत्र में उजागर हुईं गंभीर कमियाँ

डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा प्रस्तुत नीति-पत्र में राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पशु-क्रूरता से जुड़े तथ्यों का विश्लेषण किया गया है।
NCRB के आंकड़ों (2019–22) के अनुसार, देश में हर वर्ष 20,000 से अधिक पशु-क्रूरता के मामले दर्ज होते हैं।
UP पशुपालन विभाग (2023) की रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश की लगभग 260 लाइसेंस प्राप्त वधशालाओं में से केवल आधी में CCTV कैमरे कार्यरत हैं।
AWBI (2020) की रिपोर्ट के अनुसार मेरठ, मुरादाबाद और अलीगढ़ जिलों में गर्भवती भैंसों के वध की शिकायतें मिली हैं।
World Animal Protection Index (2020) में भारत को “कमजोर प्रवर्तन” श्रेणी में रखा गया है।
इन तथ्यों ने यह स्पष्ट किया कि एक कठोर, तकनीकी और मानवीय निगरानी प्रणाली की आवश्यकता अत्यावश्यक है।

AI से होगा पशु-कल्याण में ऐतिहासिक सुधार

डॉ. सिंह ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पशु-कल्याण और शासन व्यवस्था में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती है। AI-सक्षम कैमरे रीयल-टाइम वीडियो फीड का विश्लेषण कर गर्भवती या नवजात पशुओं की पहचान, stunning protocol का उल्लंघन, overcrowding या अन्य असंवैधानिक गतिविधियों का पता तुरंत लगा सकते हैं। यह प्रणाली स्वतः अलर्ट जनरेट कर जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग को सूचित करेगी, जिससे क्रूरता घटने से पहले ही कार्रवाई संभव हो सकेगी। डॉ. सिंह के शब्दों में – “AI केवल तकनीक नहीं, बल्कि करुणा का माध्यम है। यह शासन को संवेदनशील और प्रभावी – दोनों बना सकता है।”

राज्य कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से एकीकृत होगी निगरानी प्रणाली

नीति-पत्र में प्रस्तावित किया गया है कि उत्तर प्रदेश के सभी स्लॉटर हाउसों में AI-सक्षम कैमरे लगाए जाएँ और उन्हें राज्य कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ा जाए। इससे रीयल-टाइम निगरानी, तत्काल अलर्ट और बहु-विभागीय समन्वय सुनिश्चित होगा। यह पहल उत्तर प्रदेश को देश का पहला राज्य बना सकती है जहाँ AI-आधारित Humane Governance Network कार्यरत होगा l जो करुणा, तकनीक और पारदर्शिता का समन्वित उदाहरण बनेगा।

मुख्य नीति-सुझाव

नीति-पत्र में डॉ. राजेश्वर सिंह ने कई ठोस सुझाव दिए-

  1. सभी वधशालाओं में 24×7 CCTV व AI निगरानी प्रणाली अनिवार्य की जाए।
  2. गर्भवती और नवजात पशुओं के वध पर पूर्ण प्रतिबंध सुनिश्चित किया जाए।
  3. “UP Humane Slaughter Protocol 2025” लागू कर पशुओं की फिटनेस जांच, विश्राम व स्वच्छता को अनिवार्य बनाया जाए।
  4. Transparency Portal विकसित किया जाए ताकि निरीक्षण रिपोर्ट और शिकायत निवारण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हों।
  5. Humane Compliance Certificate के बिना किसी वधशाला को लाइसेंस नवीनीकरण की अनुमति न दी जाए।
  6. सभी कर्मियों के लिए “Humane Handling Certificate” को अनिवार्य किया जाए।

प्रशासनिक व वित्तीय कदमों की रूपरेखा

डॉ. सिंह ने 2025–27 तक अंतर-विभागीय टास्क फोर्स के गठन, 90 दिनों में शासनादेश जारी करने और AI+CCTV मॉनिटरिंग को अनिवार्य बनाने का सुझाव दिया है। साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य बजट 2025–26 में AI प्रणाली और प्रशिक्षण के लिए विशेष अनुदान रखा जाए, ताकि इस नीति का पायलट प्रोजेक्ट शीर्ष 10 वधशालाओं में 6 माह के भीतर शुरू किया जा सके।

वैश्विक उदाहरण और नई दिशा

नीति-पत्र में ब्रिटेन, जर्मनी, न्यूज़ीलैंड, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के उदाहरण दिए गए हैं, जहाँ वधशालाओं में CCTV और Humane Officer System अनिवार्य हैं। डॉ. सिंह ने सुझाव दिया कि उत्तर प्रदेश में “Humane-Certified Meat – UP” लेबल लॉन्च किया जाए, जिससे राज्य की पहचान नैतिक शासन और वैश्विक मानकों के अनुरूप बने।

डॉ. राजेश्वर सिंह का वक्तव्य

“यह केवल आस्था या भोजन का विषय नहीं — यह करुणा और सभ्यता की परीक्षा है। यदि उत्तर प्रदेश AI-आधारित Humane Monitoring System को राज्य कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़े, तो यह विश्व स्तर पर ऐसा पहला मॉडल बनेगा जहाँ शासन, संवेदना और तकनीक एक साथ काम करते हैं।”- डॉ. राजेश्वर सिंह, विधायक (सरोजिनी नगर, लखनऊ)

Six Sixes In An Over In International Cricket: एक ओवर में 6 छक्के लगाने वाले युवराज सिंह नहीं थे पहले बल्लेबाज, अब तक 5 खिलाड़ी कर चुके हैं ये कारनामा

इंटरनेशनल क्रिकेट में अब तक 5 खिलाड़ियों ने ही एक ओवर की सभी 6 गेंदों पर 6 छक्के लगाए हैं. साल 1877 में इंटरनेशनल क्रिकेट की शुरुआत हुई थी, लेकिन 2007 में पहली बार कोई बल्लेबाज इंटरनेशनल क्रिकेट के एक ओवर में 6 गेंदों पर 6 छक्के मार पाया था. इंटरनेशनल क्रिकेट के 152 साल के इतिहास में केवल 5 खिलाड़ियों ने ये कारनामा किया है. भारत के बेहतरीन बल्लेबाज युवराज सिंह का भी नाम इस लिस्ट में शामिल है. यहां हम आपको बताने जा रहे हैं कि इंटरनेशनल क्रिकेट में एक ओवर में 6 छक्के लगाने वाले 5 खिलाड़ी कौन हैं?

इंटरनेशनल क्रिकेट में एक ओवर में 6 छक्के लगाने वाले 5 खिलाड़ी

1. हर्शल गिब्स (दक्षिण अफ्रीका)

दक्षिण अफ्रीका के हर्शल गिब्स वनडे इंटरनेशनल में एक ओवर में 6 छक्के लगाने वाले पहले इंटरनेशनल खिलाड़ी हैं और गैरी सोबर्स और रवि शास्त्री के बाद तीसरे, जिन्होंने घरेलू क्रिकेट में ऐसा किया था. गिब्स ने 2007 में नीदरलैंड्स के खिलाफ ये कारनामा किया था, उन्होंने लेग स्पिनर डैन वैन बुंगे के ओवर में 6 छक्के जड़े थे.

2. युवराज सिंह (भारत)

भारतीय बल्लेबाज युवराज सिंह टी20 इंटरनेशनल में एक ओवर में 6 छक्के लगाने वाले पहले और दूसरे इंटरनेशनल खिलाड़ी हैं. युवराज ने भी 2007 में ही इंग्लैंड के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप मैच में ये कारनामा किया था, उन्होंने तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड के ओवर में 6 छक्के जड़े थे. उस मैच में युवराज ने 12 गेंदों पर फिफ्टी लगाई थी, जो अब तक का सबसे तेज अर्धशतक है.

3. कीरोन पोलार्ड (वेस्टइंडीज) 

वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान कीरोन पोलार्ड टी20 इंटरनेशनल में एक ओवर में 6 छक्के लगाने वाले दूसरे और तीसरे इंटरनेशनल खिलाड़ी हैं. पोलार्ड ने 2021 में श्रीलंका के खिलाफ ये कारनामा किया था, उन्होंने स्पिन गेंदबाज अकीला धनंजया के ओवर में 6 छक्के लगाए थे. रोचक बात है कि 6 छक्के खाने के एक ओवर पहले अकीला ने हैट्रिक पूरी की थी.

4. जसकरण मल्होत्रा (अमेरिका)

अमेरिका के बल्लेबाज जसकरण मल्होत्रा वनडे इंटरनेशनल में एक ओवर में 6 छक्के लगाने वाले दूसरे और चौथे इंटरनेशनल खिलाड़ी हैं. जसकरण ने भी 2021 में ही पापुआ न्यू गिनी के खिलाफ ये कारनामा किया था, उन्होंने गौड़ी टोका के ओवर में 6 छक्के जड़े थे.

5. दीपेंद्र सिंह ऐरी (नेपाल)

नेपाल के बल्लेबाज दीपेंद्र सिंह ऐरी टी20 इंटरनेशनल में एक ओवर में 6 छक्के लगाने वाले तीसरे और पांचवें इंटरनेशनल खिलाड़ी हैं. दीपेंद्र ने 2024 में कतर के खिलाफ ये कारनामा किया था, उन्होंने तेज गेंदबाज कामरान खान के ओवर में 6 छक्के लगाए थे.