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“एमएस धोनी के कारण जडेजा को CSK छोड़ना पड़ा? रिपोर्ट में आया चौंकाने वाला खुलासा”

रवींद्र जडेजा का चेन्नई सुपर किंग्स के साथ 12 साल पुराना रिश्ता बहुत जल्द समाप्त हो सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स अनुसार उन्होंने राजस्थान रॉयल्स में जाने की ट्रेड डील के सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. जडेजा ने तीन बार चेन्नई टीम के साथ इंडियन प्रीमियर लीग का खिताब जीता है. अब एक ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि चेन्नई सुपर किंग्स का जडेजा को रिलीज करने का कोई इरादा नहीं था.

जब कुछ महीने पहले संजू सैमसन के राजस्थान रॉयल्स छोड़ने की खबर आई, तब CSK उन पहली टीमों में से एक थी, जिसने सैमसन को अपने स्क्वाड में शामिल करने के लिए दिलचस्पी दिखाई थी. राजस्थान रॉयल्स मैनेजमेंट ने CSK अधिकारियों के साथ संपर्क साधा और जब ट्रेड में सैमसन के बदले एक खिलाड़ी की मांग की तो चेन्नई टीम पीछे हट गई थी.

चेन्नई सुपर किंग्स चाहती थी कि वो कैश देकर संजू सैमसन को अपनी टीम में शामिल कर ले, लेकिन RR टीम की नजरें रवींद्र जडेजा पर टिकी थीं. अब ट्रेड डील बढ़ते-बढ़ते इस मुकाम पर आ पहुंची है कि सैमसन के बदले रवींद्र जडेजा और सैम कर्रन, CSK छोड़कर राजस्थान रॉयल्स में जा सकते हैं. हालांकि इस ट्रेड डील पर अभी तक कोई पुष्टि नहीं हो सकी है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक एमएस धोनी सहित CSK मैनेजमेंट सैमसन को अपने साथ लाने की इतनी उत्सुक थी कि अधिकारियों ने अमेरिका में मेजर क्रिकेट लीग के दौरान भी सैमसन से मुलाकात की थी. चूंकि धोनी लंबे समय से घुटनों में समस्या से जूझ रहे हैं, ऐसे में चेन्नई टीम को उनके उत्तराधिकारी की सख्त जरूरत है.

इससे पहले पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ भी कह चुके हैं कि एमएस धोनी को अगर सीएसके टीम के भले के लिए रवींद्र जडेजा का त्याग भी करना पड़े, तो सही होगा, क्योंकि सैमसन के आने से चेन्नई टीम में कप्तानी का एक और विकल्प खुल जाएगा.

Travel Tips:“सपनों का हनीमून! बिना वीजा के इन जगहों पर जिएं जिंदगी के सबसे रोमांटिक लम्हे”

हनीमून हर नवविवाहित जोड़े के जीवन का सबसे खूबसूरत समय होता है, जिसे खास जगह पर बिताना हर किसी का सपना होता है। दुनिया में कई ऐसी रोमांटिक डेस्टिनेशंस हैं जो हनीमून के लिए परफेक्ट मानी जाती हैं। मालदीव अपने शांत समुद्र, वॉटर विला और प्राइवेट बीच के लिए मशहूर है। दुनिया में ऐसी के बीच वाले देश हैं जो वीजा-फ्री है, जहां आप अपने पल को सुकून से बिता सकते हैं। मॉरीशस सुंदर बीच और नेचर के कारण रोमांटिक माहौल प्रदान करता है। मॉरीशस और सेशेल्स भी अपने लग्जरी रिसॉर्ट्स और नीले समुद्र के लिए लोकप्रिय हैं। हनीमून को खास बनाने के लिए आप इन जगहों पर घूमने जरुर जाएं। ये सभी जगहें कपल्स को सुकून, रोमांस और यादगार पलों से भरा अनुभव देंगी।

मालदीव

नवविवाहित कपल्स के लिए मालदीव सबसे बेस्ट जगहों में से एक है। हनीमून के लिए यह बेस्ट डेस्टिनेशन है, जो कि वीजा-फ्री है। यहां के ओवरवॉटर विला, क्लिर ब्लू पानी और रंग-बिरंगी मछलियां किसी स्वर्ग से कम नहीं है। मालदीव में प्राइवेट रिसॉर्ट्स दीपों के लिए जाना जाता है। शाम के समय समुद्र किनारे कैंडललाइट डिनर, कपल स्पा और सनसेट क्रूज आपकी यादों को हमेशा यादगार बना देंगा।

मॉरीशस

मॉरीशस सुंदर बीच, हरे-भरे जंगलों और विविध संस्कृति के लिए जाना जाता है। कपल्स यहां पर ले मॉर्न ब्राबांट, चमरेल की सेवन कलर्ड अर्थ और पाम्पलमूस बोटैनिकस गार्डन देख सकते हैं। यदि आप एडवेंचर का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो स्कूबा डाइविंग, सेलिंग या ट्रेकिंग का मजा ले सकते हैं। यहां आप हनीमून को शानदार तरीके से एन्जॉय कर सकते हैं।

सेशेल्स

एक शांत और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है सेशेल्स, यहां पर सफेद रेत वाले बीच और नीले पानी की लहरें कपल्स को अट्रैक्ट करेगी। यहां के लोकप्रिय स्थानों में अन्से लाजियो बीच और यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट डे शामिल है। कपल्स यहां पर प्राइवेट यॉट में सफर कर सकते हैं।

अल्माटी

अल्माटी कजाखस्तान का सबसे बड़ा और खूबसूरत शहर है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आधुनिकता के लिए प्रसिद्ध है। यह शहर बर्फ से ढके पहाड़ों, झीलों और हरियाली से घिरा हुआ है। अल्माटी कभी देश की राजधानी था और आज भी इसका सांस्कृतिक और आर्थिक केंद्र माना जाता है। यहां का मेदेओ आइस स्केटिंग रिंक, शिम्बुलक स्की रिसॉर्ट और बिग अल्माटी लेक प्रमुख आकर्षण हैं।  अपनी शांत जलवायु और सुंदर दृश्यों के कारण यह हनीमून और पर्यटन के लिए सबसे बेस्ट डेस्टिनेशन है।

फिजी

हनीमून के लिए फिजी एक शानदार डेस्टिनेशन है। फिजी नेचुरल खूबसूरती के लिए जाना जाता है। यहां के साफ बीच, कोरल रीफ और हरियाली से भरे जंगल न्यूली वेड कपल के लिए शानदार है। यहां पर आफ डाइविंग, स्नॉर्कलिंग और हाइकिंग कर सकते हैं। 

Sports News:“मामा और चाचा का रिश्ता… KKR के पूर्व खिलाड़ी ने गौतम गंभीर और हर्षित राणा पर दिया हैरतअंगेज बयान”

23 वर्षीय भारतीय गेंदबाज हर्षित राणा पिछले महीनों आलोचकों के निशाने पर रहे हैं. पूर्व क्रिकेटर क्रिस श्रीकांत ने तो यह तक कह दिया था कि गौतम गंभीर की जी-हुजूरी करने के कारण ही हर्षित टीम इंडिया में बने हुए हैं. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आखिरी वनडे में 4 विकेट लेकर अपने आलोचकों का मुंह बंद करने का काम किया था.

खासतौर पर KKR का प्लेयर होने के कारण हर्षित को टारगेट किया गया, गौतम गंभीर भी इस IPL टीम के मेंटॉर रह चुके हैं. अब कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए खेल चुके मनविंदर बिसला ने हर्षित को लेकर बड़ा बयान दे डाला है.

मामा-चाचा का रिश्ता नहीं है…

इंडियन क्रिकेट कैनटीन पॉडकास्ट पर चर्चा के दौरान मनविंदर बिसला ने कहा कि हर्षित राणा और गौतम गंभीर के बीच कोई मामा या चाचा वाला रिश्ता नहीं है. उन्होंने कहा, “जो भी लोग हर्षित राणा को ट्रोल कर रहे हैं, वो KKR के फैन नहीं होंगे. हर कोई यही मानता है कि गौतम गंभीर पहले KKR के लिए काम कर चुके हैं, इसी वजह से गंभीर, हर्षित को सपोर्ट कर रहे हैं. कोई मामा-चाचा का रिश्ता तो है नहीं. हर कोई सोचता है कि KKR कनेक्शन की वजह से हर्षित टीम में हैं.”

हर्षित राणा ने नवंबर 2024 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच में अपना इंटरनेशनल क्रिकेट डेब्यू किया था. वो उसके बाद 8 ODI, पांच टी20 और 2 टेस्ट मैचों में कुल मिलाकर 25 विकेट ले चुके हैं.

उन्होंने ऑस्ट्रेलिया टूर पर बल्लेबाजी में भी प्रभावित किया है. तीसरे वनडे मैच में उन्होंने नाबाद 24 रनों की पारी खेली थी. वहीं दूसरे टी20 मैच में 35 रन की पारी खेल अपनी बैटिंग स्किल्स का दमदार प्रदर्शन किया था.

Rabies Deaths in Delhi:“सरकार का दावा,दिल्ली में रेबीज से कोई मौत नहीं, लेकिन अस्पतालों के आंकड़े खुलासे कर सकते हैं”

 दिल्ली में रेबीज के मामलों को लेकर सरकारी दावों और असल आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आया है. संसद में केंद्र सरकार ने बताया था कि साल 2022 से 2024 के बीच राजधानी में एक भी इंसान की मौत रेबीज से नहीं हुई, लेकिन राइट टू इन्फॉर्मेशन के तहत मिले आंकड़े इस दावे से बिल्कुल अलग तस्वीर दिखाते हैं. दिल्ली नगर निगम के अधीन महार्षि वाल्मीकि इंफेक्शन रोग अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में 18 लोगों की मौत रेबीज से हुई है. इनमें 2022 में 6, 2023 में 2 और 2024 में 10 मौतें दर्ज की गईं. यह आंकड़े सीधे तौर पर उस रिपोर्ट से टकराते हैं, जिसे पशुपालन और मत्स्य पालन राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने संसद में पेश किया था.

क्या था रिपोर्ट में?

सरकारी रिपोर्ट में कहा गया था कि जनवरी 2022 से जनवरी 2025 तक दिल्ली में जीरो ह्यूमन रेबीज डेथ्स दर्ज की गईं. हालांकि, लोकसभा के उसी जवाब में कुत्तों के काटने के मामलों का जिक्र जरूर था दिल्ली में 2022 में 6,691, 2023 में 17,874 और 2024 में 25,210 डॉग बाइट केस दर्ज हुए. यह आंकड़े दिखाते हैं कि जहां इंसानी मौतें शून्य बताई गईं, वहीं कुत्तों के काटने के मामलों में हर साल लगातार बढ़ोतरी हुई है. यह अंतर स्वास्थ्य तंत्र की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है. जब बीमारी पूरी तरह से रोकी जा सकती है, तो मौतों की रिपोर्टिंग में इतनी अंतर क्यों है? एक्सपर्ट के अनुसार, यह डेटा समन्वय और रिपोर्टिंग की ट्रांसपेरेंसी की कमी को उजागर करता है.

डाटा अपलोड करना जरूरी

केंद्र सरकार के नेशनल रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम के तहत, राज्यों को हर महीने कुत्तों के काटने और रेबीज़ से हुई मौतों का डेटा तैयार कर इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम पोर्टल पर अपलोड करना होता है. मंत्रालय का कहना है कि यह सिस्टम पूरे देश में रेबीज और एनिमल बाइट्स की निगरानी को बेहतर बनाता है. हालांकि, RTI में मिले आंकड़े बताते हैं कि जमीनी स्तर पर डेटा रिपोर्टिंग अभी भी अधूरी और सही तरीके से नहीं है. यही वजह है कि केंद्र और स्थानीय स्तर के आंकड़े एक-दूसरे से मेल नहीं खाते.

सरकार ने लॉन्च किया था मिशन

रेबीज को लेकर सरकार ने 2021 में नेशनल एक्शन प्लान फॉर डॉग-मीडिएटेड रेबीज एलिमिनेशन बाय 2030 लॉन्च किया था, जो स्वास्थ्य मंत्रालय और पशुपालन मंत्रालय की संयुक्त पहल है. इस योजना के तहत नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल मानव स्वास्थ्य से जुड़े मामलों की निगरानी करता है, जबकि पशुपालन विभाग पशु स्वास्थ्य की देखरेख करता है. योजना का मकसद है देशभर में कुत्तों का टीकाकरण, नसबंदी और एंटी-रेबीज वैक्सीन और सीरम की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करना. ये दवाएं नेशनल हेल्थ मिशन के तहत मुफ्त उपलब्ध कराई जाती हैं और इन्हें राज्यों की आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल किया गया है.

रैबीज को रोकने का तरीका

एक तरफ सरकार शून्य मौत का दावा कर रही है और दूसरी तरफ अस्पतालों के रिकॉर्ड में मौतें दर्ज हो रही हैं तो सवाल उठता है कि कहीं स्वास्थ्य निगरानी और रिपोर्टिंग व्यवस्था में गंभीर खामियां तो नहीं हैं. रेबीज ऐसी बीमारी है जो 100 प्रतिशत रोकी जा सकती है, लेकिन लक्षण दिखने के बाद लगभग हमेशा जानलेवा साबित होती है.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

“कैटरीना कैफ 42 साल की उम्र में बनी मां — जानें इस उम्र में प्रेग्नेंसी के खतरे और चुनौतियाँ”

हाल ही में बॉलीवुड एक्ट्रेस कैटरीना कैफ मां बनी है. उन्होंने 7 नवंबर 2025 को बेटे को जन्म दिया है. मां बनने की जानकारी उन्होंने और उनके पति विकी कौशल ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर कर दी थी. शादी के 4 साल बाद 42 साल की उम्र में मां बनी कैटरीना के लिए बहुत खास एहसास माना जा रहा था. लेकिन इसी के साथ लोगों के बीच यह चर्चा भी शुरू हो गई थी कि 40 के बाद  प्रेग्नेंसी कितनी सेफ होती है. इस उम्र में मां बनना कितना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि 42 की उम्र में  प्रेग्नेंसी कितनी मुश्किल होती है.

40 की उम्र के बाद  प्रेग्नेंसी क्यों हो जाती है मुश्किल

एक्सपर्ट के अनुसार 35 साल की उम्र के बाद महिला की फर्टिलिटी यानी गर्भधारण करने की क्षमता धीरे-धीरे घटने लगती है. वहीं उम्र बढ़ने के साथ एग्ज की क्वालिटी और संख्या दोनों कम होने लगती है. यही कारण है कि 40 की उम्र में कंसीव करना बहुत मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा इस उम्र में थायराइड, डायबिटीज और हाई बीपी जैसी समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है जो  प्रेग्नेंसी को और ज्यादा मुश्किल बना देता है. वहीं एक्सपर्ट के अनुसार अगर महिला की फैलोपियन ट्यूब्स खुली है, एग्ज की क्वालिटी अच्छी है और पार्टनर के स्पर्म नॉर्मल है तो 25 से 30 साल की उम्र में प्रेग्नेंट होने की संभावना करीब 20 प्रतिशत होती है, लेकिन 40 की उम्र के बाद यही संभावना घटकर केवल 5 प्रतिशत तक रह जाती है.

40 की उम्र के बाद बढ़ जाते हैं हेल्थ रिस्क

डॉक्टरों के अनुसार 40 की उम्र के बाद  प्रेग्नेंसी को हाई रिस्क  प्रेग्नेंसी माना जाता है. इस दौरान गर्भवती महिलाओं को जेस्टेशनल हाइपरटेंशन, डायबिटीज और सी-सेक्शन डिलीवरी का खतरा ज्यादा रहता है. वहीं कुछ मामलों में मिसकैरेज की संभावना भी बढ़ जाती है. इसके अलावा 40 की उम्र के बाद गर्भधारण करने पर बच्चों में कुछ जेनेटिक बीमारियों का रिस्क भी बढ़ जाता है. इनमें डाउन सिंड्रोम, थायराइड डिसऑर्डर या मेंटल डिसऑर्डर जैसी समस्या शामिल होती है. हालांकि यह सभी मामलों में जरूरी नहीं होता है, लेकिन इसकी संभावनाएं बहुत बढ़ जाती है.

40 की उम्र के बाद नार्मल डिलीवरी की संभावनाएं कम

एक्सपर्ट्स के अनुसार 40 की उम्र के बाद नार्मल डिलीवरी की संभावनाएं भी कम हो जाती है. क्योंकि शरीर की सहनशक्ति और मसल्स फ्लेक्सिबिलिटी कम होने लगती है. कई मामलों में महिलाओं को सी-सेक्शन डिलीवरी करवानी पड़ती है. हालांकि अगर  प्रेग्नेंसी और बच्चे की कंडीशन नॉर्मल है तो नॉर्मल डिलीवरी भी हो सकती है. इसके अलावा एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर कोई महिलाएं 40 की उम्र में  प्रेग्नेंसी प्लान करती है तो उन्हें अपनी हेल्थ का भी खास ध्यान रखना होता है. जिससे वह अपनी  प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले समस्याओं से बच सकती है.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.