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Assam Hidden Places: गुवाहाटी के करीब बसा यह खूबसूरत गांव प्रकृति प्रेमियों का स्वर्ग, नज़ारे देख हो जाएंगे दीवाने।

नॉर्थ ईस्ट इंडिया में घूमने जाने वाले सबसे खूबसूरत और लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में असम पहले नंबर पर आता है। यह पूर्वोत्तर भारत में स्थित प्राकृतिक सुंदरता, चार बागानों और जैवविविधता का खजाना है। यह बांग्लादेश और भूटान दोनों के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को साझा करता है। यह राज्य गुवाहाटी जैसी खूबसूरत जगह और कामाख्या मंदिर जैसे फेमस धार्मिक स्थल के लिए पूरे देश में फेमस है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको असम के चाय बागों के बीच में स्थित सरलपारा की खासियत और इसकी खूबसूरती के बारे में बताने जा रहे हैं।

सरलपारा

सरलपारा की खासियत और खूबसूरती बताने से पहले आपको सरलपारा असम के कोकराझार जिले में पड़ता है। यह कोकराझार मुख्य शहर से करीब 56 किमी दूर है। सरलपारा, असम की एक ऐसी जगह है, जोकि भूटान सीमा के पास स्थित है। इस वजह से यह जगह पर्यटकों के लिए काफी लोकप्रिय है।

क्यों फेमस है सरलपारा

भूटान सीमा के पास स्थित सरलपारा पूरे असम के सबसे फेमस और खूबसूरत पिकनिक स्पॉट माना जाता है। सरलपारा की शानदार प्राकृतिक सुंदरता, पहाड़, झरना और घाटियां खूबसूरती में चार चांद लगाने का काम करती हैं। सरलपारा के आसपास कई खूबसूरत चाय के बागान भी मौजूद हैं, जोकि पर्यटकों को खूब आकर्षित करते हैं।

सरलपारा में मौजूद घास के मैदान और मैदान के बीच बहने वाली एक छोटी नदी सैलानियों को सबसे ज्यादा अपनी ओर आकर्षित करती है। इसको प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग माना जाता है।

यह जगह अपने शांत और शुद्ध वातावरण के लिए भी जाना जाता है। सरलपारा शानदार और लुभावने सूर्योदय और सूर्यास्त के दृश्यों के लिए भी जाना जाता है। सरलपारा कई किस्म के फूलों के लिए भी जाना जाता है।

पर्यटकों के लिए क्यों खास है सरलपारा

यह जगह पर्यटकों के बीच सबसे ज्यादा पिकनिक स्पॉट के रूप में फेमस है। यहां पर स्थानीय ही नहीं बल्कि असम के दूर-दराज से लोग परिवार के साथ पिकनिक मनाने के लिए आते हैं।

वीकेंड में यहां पर भारी संख्या में लोग परिवार के साथ मौज-मस्ती के लिए पहुंचते हैं। यहां पर कई लोग दोस्तों, परिवार और पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड करने के लिए पहुंचते हैं।

सरलपारा पर्यटकों के बीच सिर्फ पिकनिक स्पॉक के तौर पर ही नहीं बल्कि एडवेंचर स्पॉट के रूप में भी जाना जाता है। यहां पर कई पर्यटक हाइकिंग, ट्रेकिंग और कैंपिंग का शानदार लुत्फ उठाने के लिए पहुंचते हैं। इसके साथ ही सरलपारा की खूबसूरती के बीच यादगार फोटोग्राफी कर सकते हैं।

आसपास घूमने की जगहें

सरलपारा के आसपास कई ऐसी शानदार और मनमोहक जगहें मौजूद हैं। जिसकी खूबसूरती आपको चंद मिनटों में दीवाना बना सकती है। सरलपारा के आसपास आप बोरनोखोरी गांव, बेटीया जंगल, टी गार्डन और गौरांग नदी जैसी खूबसूरत जगहों को एक्सप्लोर कर सकते हैं।

तालिबान ने पाकिस्तान के खिलाफ उठाया बड़ा कदम, बढ़ती धमकियों के बीच कड़ा संदेश दिया।

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के मध्य चल रहे तनाव के बीच अब तालिबानी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. अफगानिस्तान सरकार ने पाकिस्तान के साथ व्यापार और ट्रांजिट रोकने का ऐलान किया है. अफगानिस्तान के आर्थिक मामलों के डिप्टी प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने इसकी घोषणा की. उन्होंने उद्योगपतियों और व्यापारियों के साथ एक बैठक में निर्णय लिया.

बरदार ने व्यापारियों के साथ एक बैठक में कहा- “अफगान के व्यापारियों को तुरंत पाकिस्तान से इतर वैकल्पिक व्यापार मार्गों (Business Route) की तलाश करनी चाहिए.”

बरदार ने कहा, “देश की गरिमा की रक्षा, व्यापार, उद्योग और अफगानियों के अधिकारों की रक्षा के लिए, इस्लामिक अमीरात ने हमारे व्यापारी भाईयों को सूचित किया है. इसमें पाकिस्तान की तरफ से बार-बार व्यापार किए जाने वाले रास्तों को रोका गया है. साथ ही गैर राजनीतिक मुद्दों को राजनीतिक टूल के रूप में इस्तेमाल किया है.”

बात नहीं मानोगे तो मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा: गनी
उन्होंने व्यापारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा- नोटिस के बावजूद अगर कोई भी व्यापारी पाकिस्तान के रास्ते माल का आयात या निर्यात करता है, तो उसे मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. अगर उस व्यापारी पर किसी तरह की मुश्किल आती है, सरकार की उस व्यापारी की कोई मदद नहीं करेगी. इसलिए हम सलाह दे रहे हैं, कि पाकिस्तान के साथ व्यापार को रोक दें.

बता दें, तालिबान सरकार ने ये सख्त फैसला पाकिस्तान की ओर से लगातार दी जा रही हमले की धमकियों के बीच लिया है.

पाक-अफगानिस्तान के बीच तनाव क्यों?

दरअसल, जिस हिस्से में पिछले कुछ वक्त से दोनों देशों के बीच झड़प देखने को मिली है, उसकी वजह कुर्रम नाम का जिला है. ये कभी फेडरली एडमिनिस्टरड ट्राइबल एरियाज (FATA) का इलाका था. यह इलाका ऊंचे पहाड़, घने जंगलों और गहरी घाटियों से घिरा हुआ है. यहां पश्तून कबीले के लोग रहा करते थे. 1983 में ब्रिटिशों ने ड्यूंड लाइन बनाई थी. ये लाइन अफगानिस्तान और ब्रिटिश भारत को अलग करती थी. लेकिन पश्तून कबीले के लोगों ने इस लाइन को कभी नहीं माना. वे इसे अपना इलाका ही मानते थे. ब्रिटिश सरकार को डर था कि अगर ये कबीले अफगानिस्तान से मिल गए, तो उनका कंट्रोल न के बराबर रह जाएगा. इसलिए उन्होंने FATA नाम का एक अलग इलाका बनाया, जिसमें बाजौर, मोहमान्द, खैबर, ओरकजई, कुर्रम, उत्तर वजीरिस्तान और दक्षिण वजीरिस्तान के अलावा 6 फ्रंटियर रीजन भी थे.

जब भारत से अलग होकर पाकिस्तान बना, तो तब के तात्कालीन प्रधानमंत्री मोहम्मद अली जिन्ना ने कबीलों से वादा किया था, कि हम इस इलाके को वैसा ही रहने देंगे. लेकिन पाकिस्तान ने साल 2018 में FATA को खैबर पख्तूनख्वा सूबे में मिला लिया.  लेकिन पश्तून के कबीले इसके विरोध में थे. ब्रिटिश सरकार के समय में बना बफर जोन FATA अब खत्म हो गया है, मतलब कुर्रम अब खैबर पख्तूनख्वा का हिस्सा है. अगर यहां हमला होता है, तो पाकिस्तान इसे अपने देश पर हमला मानता है. इस वजह से दोनों देश के बीच तनाव बना हुआ है.

Health Tips:सर्दियों में नहाने के लिए गरम पानी बेहतर या ठंडा? जानिए दोनों के फायदे और क्या है सही विकल्प

सर्दी की शुरुआत होते ही सुबह उठकर अक्सर नहाने को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही सामने आता है कि नहाना चाहिए या नहीं. अगर नहाने का मन बना भी लिया हो तो अगली समस्या यही होती है कि गरम पानी से नहाना चाहिए या ठंडा पानी से. कई लोगों का मानना होता है कि सर्दियों में गरम पानी से नहाना ज्यादा सही होता है क्योंकि इससे शरीर को आराम मिलता है, थकान दूर होती है और ठंड से राहत मिलती है. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि गरम पानी स्किन और बालों दोनों को नुकसान पहुंचता है क्योंकि यह शरीर के नेचुरल ऑयल की लेयर को खत्म कर देता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि सर्दियों में गरम पानी से नहाना ज्यादा अच्छा है या ठंडा पानी से नहाना ज्यादा अच्छा है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ साइंटिफिक रिसर्च एंड इंजीनियरिंग डेवलपमेंट की 2022 की रिपोर्ट बताती है कि गरम पानी से नहाने पर स्किन की बाहरी लेयर की सेल्स को नुकसान पहुंचता है. जिससे स्किन रोग जैसे एग्जिमा का खतरा बढ़ जाता है. इसे लेकर कई डॉक्टर भी बताते हैं कि सर्दियों में नहाते वक्त पानी सिर्फ गुनगुना होना चाहिए. वहीं बहुत गरम पानी से नहीं नहाना चाहिए. ज्यादा गरम पानी से स्किन सूख जाती है जिसे जेरोसिस कहा जाता है.  कुछ एक्सपर्ट्स यह भी बताते हैं कि शरीर की ऊपर की लेयर पर मौजूद नेचुरल ऑयल स्किन को बैक्टीरिया और धूल से बचाता है. जब हम बहुत गरम पानी का इस्तेमाल करते हैं तो यह ऑयल की लेयर पूरी तरह से खत्म हो जाती है और स्किन में खुजली, रेडनेस और ड्राइनेस बढ़ जाती है.

ठंडे पानी से नहाने के क्या है नुकसान?

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर कड़ाके की ठंड में अचानक ठंडे पानी से नहाया जाए तो यह शरीर के लिए खतरनाक हो सकता है. दरअसल बहुत ठंडा पानी शरीर पर पड़ते ही ब्लड वेसल्स सिकुड़ जाती है. जिससे ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है और दिल की धड़कन तेज हो सकती है. इससे हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है. खासकर उन लोगों में जिन्हें पहले से हार्ट या ब्लड प्रेशर की समस्या होती है.

डॉक्टर क्या देते हैं राय?

डॉक्टर बताते हैं की बहुत ठंडे पानी से नहाने पर चिलब्लेन जैसी समस्या हो सकती है. जिसमें हाथ-पैरों में सूजन, जलन और नीलापन आ सकता है. डॉक्टर का कहना है कि सर्दियों में हल्के गुनगुने पानी से नहाना सबसे सुरक्षित और आरामदायक होता है. इसके बाद मॉइश्चराइजर लगाना भी जरूरी है, ताकि स्किन की नमी बरकरार रहे. वहीं गांवों में लोग अक्सर हैंडपंप या बोरवेल के पानी से नहाते हैं जो मौसम के हिसाब से ठंडा या हल्का गरम महसूस होता है. ऐसे में एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इस पानी में कई बार खनिज तत्वों की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे यह हार्ड वाटर बन जाता है. ऐसे पानी से स्किन की नेचुरल ऑयल वाली लेयर खत्म हो जाती है और बालों की बनावट भी खराब हो जाती है. इसी वजह से डॉक्टर सलाह देते हैं कि सर्दी हो या गर्मी नहाने के लिए हमेशा हल्का गुनगुना पानी इस्तेमाल करें.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी सीनेटर मार्को रुबियो से की मुलाकात, दिल्ली धमाके को लेकर सामने आया US का रुख।

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने बुधवार को कनाडा के ओंटारियो में आयोजित G7 विदेश मंत्रियों की बैठक (G7-FMM) के दौरान अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की. मुलाकात के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार (10 नवंबर, 2025) को दिल्ली में लाल किले के बाहर हुए कार धमाके में मारे गए लोगों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट की. इसके साथ ही उन्होंने घायलों के जल्द स्वस्थ की प्रार्थना की.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दिल्ली में हुए कार विस्फोट में मारे जाने वाले लोगों के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री के शोक संदेश की सराहना की. उन्होंने इस संबंध में एक पोस्ट भी शेयर किया है.

Good to meet @SecRubio this morning at #G7 FMM.

Appreciate his condolences on the loss of lives in the blast in Delhi.

Discussed our bilateral ties, focusing on trade and supply chains. Exchanged views on the Ukraine conflict, the Middle East/West Asia situation and… pic.twitter.com/W4ps4E7D4L

— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) November 12, 2025

एस. जयशंकर ने बुधवार को रात करीब 8 बजे (भारतीय समयानुसार) सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किए पोस्ट में कहा, ”आज सुबह  G7 विदेश मंत्रियों की बैठक (FMM) के दौरान अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मिलकर अच्छा लगा. दिल्ली में हुए विस्फोट में जान गंवाने वालों के प्रति उनके शोक संदेश की मैं सराहना करता हूं.”

उन्होंने आगे कहा, ”इस दौरान हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों पर विस्तृत चर्चा की. इसमें विशेष रूप से व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया. इसके साथ ही यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व, पश्चिम एशिया की स्थिति और इंडो पैसिफिक क्षेत्र पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया गया.”

भारत सरकार ने माना आतंकी हमला, विस्फोट में गई 12 लोगों की जान

दिल्ली में सोमवार (10 नवंबर, 2025) को लाल किले के बाहर मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पास ट्रैफिक सिग्नल में खड़ी कार में बड़ा विस्फोट हुआ. इस विस्फोट में 12 लोगों ने अपनी जान गंवा दी, साथ ही 20 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका इलाज जारी है. वहीं, भारत सरकार ने लाल किले के बाहर हुए कार धमाके को बुधवार (12 नवंबर, 2025) को आतंकवादी हमला माना है. सरकार ने कहा है कि इस आतंकी षड्यंत्र को रचने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.

नौसेना प्रमुख जल्द होंगे अमेरिका के दौरे पर, समुद्री सुरक्षा में और बढ़ेगी भारत की ताकत।

भारत और अमेरिका के राजनीतिक संबंधों में भले ही खटास जारी है, लेकिन रक्षा सहयोग पटरी पर आता दिखाई पड़ रहा है. मालाबार युद्धाभ्यास के बीच, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी छह दिवसीय अमेरिका के दौरे पर जा रहे हैं. उनकी यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच मजबूत और स्थायी समुद्री साझेदारी को मजबूत करना है.

नौसेना प्रमुख इस यात्रा के दौरान अमेरिकी युद्ध (रक्षा) विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श करेंगे और अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों के अलावा इंडो-पैसिफिक कमान के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे पापारो और यूएस पेसिफिक फ्लीट के कमांडर एडमिरल स्टीफन टी कोहलर से भी मुलाकात करेंगे. ये बातचीत दोनों नौसेनाओं के बीच चल रहे समुद्री सहयोग की समीक्षा, स्तरीय-परिचालन संबंधों को बढ़ाने और सूचना साझा करने और समुद्री क्षेत्र जागरूकता के तंत्र को मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी.

नेवी चीफ की यात्रा को लेकर भारतीय नौसेना ने दी जानकारी

भारतीय नौसेना के प्रवक्ता कैप्टन विवेक मधवाल के मुताबिक, नेवी चीफ की यात्रा का उद्देश्य भारतीय नौसेना और यूएस नेवी के बीच मजबूत और स्थायी समुद्री साझेदारी को और मजबूत करना है, जो भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी का एक प्रमुख स्तंभ है.

इस यात्रा में एडमिरल त्रिपाठी, अमेरिकी नौसेना के प्रमुख नौसैनिक संस्थानों और परिचालन कमांड के साथ बैठक भी करेंगे. चर्चाओं में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझा समुद्री प्राथमिकताओं, मिलान जैसे बहुपक्षीय ढांचों के अंतर्गत सहयोग और संयुक्त समुद्री बल (CMF) पहलों पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है.

भारत और अमेरिका के बीच आपसी विश्वास और साझा मूल्यों पर आधारित यह एक दीर्घकालिक समुद्री साझेदारी है. नौसेना प्रमुख की यह यात्रा एक स्वतंत्र, खुले, समावेशी और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के दृष्टिकोण को मूर्त करने के लिए अमेरिकी नौसेना के साथ सहयोग को और बढ़ाने की भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है.

क्वाड देशों की साझा युद्धाभ्यास के बीच नौसेना प्रमुख की हो रही यात्रा

एडमिरल त्रिपाठी का ये दौरा, ऐसे समय में हो रहा है जब भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया (क्वाड देशों) की नौसेनाओं का साझा युद्धाभ्यास प्रशांत महासागर के ग्वाम मिलिट्री बेस पर शुरू हो चुका है (10-18 नवंबर). इस एक्सरसाइज में भारतीय नौसेना का जंगी जहाज INS सह्याद्री हिस्सा ले रहा है.

ऑपरेशन सिंदूर और टैरिफ वॉर के बाद से भारत और अमेरिका के संबंधों में आई दरार के बाद से क्वाड देशों के राष्ट्राध्यक्षों की मीटिंग नहीं हो पाई है. क्वाड संगठन में भारत और अमेरिका के अलावा, जापान और ऑस्ट्रेलिया भी सदस्य हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार (11 नवंबर, 2025) को कहा था कि भारत के साथ टैरिफ विवाद सुलझने जा रहा है. ट्रंप ने जल्द भारत दौरे की संभावना जताई है. ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि दौरे के बाद भारत के लोग उन्हें फिर से प्यार करने लगेंगे.