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Sports Update:एशियन गेम्स में भारत-पाकिस्तान की भिड़ंत पर लगा ब्रेक, अब सिर्फ मेडल मैच में हो सकती है टक्कर

भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मुकाबला हमेशा से दर्शकों के लिए बेहद खास रहा है. दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज नहीं होने की वजह से फैंस को आमतौर पर एशिया कप और आईसीसी के बड़े टूर्नामेंट में ही आमना-सामना देखने का मौका मिलता है. ऐसे में 2026 एशियन गेम्स को लेकर भी भारत-पाकिस्तान मुकाबले की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन टूर्नामेंट का मौजूदा शेड्यूल इस रोमांचक मुकाबले को लीग या शुरुआती चरण में होने का मौका नहीं देता.

लीग स्टेज में नहीं होगा भारत-पाकिस्तान मैच

एशिया कप और आईसीसी टूर्नामेंट में कई बार भारत और पाकिस्तान की टीमें ग्रुप या लीग चरण में आमने-सामने आती हैं. लेकिन 2026 एशियन गेम्स में दोनों टीमों को अलग-अलग क्वार्टरफाइनल में रखा गया है.

इसका मतलब है कि भारत और पाकिस्तान का मुकाबला तभी संभव होगा, जब दोनों टीमें टूर्नामेंट में आगे बढ़ते हुए मेडल राउंड तक पहुंचें. यानी फैंस को दोनों टीमों के बीच मुकाबला देखने के लिए नॉकआउट चरण का इंतजार करना होगा.

भारत-पाकिस्तान के क्वार्टरफाइनल अलग-अलग

2026 एशियन गेम्स में पुरुष क्रिकेट प्रतियोगिता में कुल 10 टीमें हिस्सा लेंगी. भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका को सीधे क्वार्टरफाइनल में जगह मिली है, जबकि बाकी टीमों को ग्रुप चरण के जरिए अगले दौर में पहुंचना होगा.

भारत को क्वार्टरफाइनल-2 में रखा गया है, जबकि पाकिस्तान क्वार्टरफाइनल-1 में खेलेगा. दोनों क्वार्टरफाइनल मुकाबले 28 सितंबर को प्रस्तावित हैं. इन मैचों में दोनों टीमों का सामना ग्रुप स्टेज से आगे आने वाली टीमों से होगा.

सेमीफाइनल में भी नहीं होगी सीधी भिड़ंत

नॉकआउट ड्रॉ के अनुसार क्वार्टरफाइनल-2 जीतने वाली टीम सेमीफाइनल में क्वार्टरफाइनल-3 की विजेता टीम से भिड़ेगी. वहीं क्वार्टरफाइनल-1 की विजेता टीम का सामना क्वार्टरफाइनल-4 के विजेता से होगा.

दोनों सेमीफाइनल मुकाबले 1 अक्टूबर को खेले जाने हैं. ऐसे में भारत और पाकिस्तान के रास्ते सेमीफाइनल में भी अलग रहेंगे. दोनों टीमों के बीच मुकाबला तभी संभव होगा, जब वे अपने-अपने नॉकआउट मुकाबले जीतकर मेडल दौर में पहुंचें.

गोल्ड या ब्रॉन्ज के लिए हो सकती है भिड़ंत

मौजूदा ड्रॉ के हिसाब से भारत और पाकिस्तान की टीमें 2026 एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल के मुकाबले में आमने-सामने आ सकती हैं. इसके लिए दोनों को सेमीफाइनल जीतना होगा.

वहीं, अगर दोनों टीमें सेमीफाइनल में हार जाती हैं, तो ब्रॉन्ज मेडल के लिए होने वाले प्लेऑफ में उनकी टक्कर संभव है. दोनों मेडल मुकाबले 3 अक्टूबर को निर्धारित हैं.

यानी एशियन गेम्स में भारत-पाकिस्तान मैच पूरी तरह से टीमों के प्रदर्शन पर निर्भर रहेगा. फैंस को ग्रुप या शुरुआती चरण में दोनों टीमों की भिड़ंत देखने को नहीं मिलेगी.

कब होंगे 2026 एशियन गेम्स?

2026 एशियन गेम्स का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होना है. क्रिकेट प्रतियोगिता इससे पहले 17 सितंबर से शुरू होकर 3 अक्टूबर तक चलेगी. महिलाओं की क्रिकेट प्रतियोगिता पहले आयोजित होगी, जिसका फाइनल 22 सितंबर को निर्धारित है. इसके बाद पुरुषों के मुकाबले खेले जाएंगे.

पुरुषों के टूर्नामेंट में 10 और महिलाओं की प्रतियोगिता में 8 टीमें हिस्सा लेंगी. अफगानिस्तान के अलावा नेपाल, हांगकांग, चीन, जापान, मलेशिया और ओमान जैसी टीमें भी प्रतियोगिता का हिस्सा होंगी.

इसलिए 2026 एशियन गेम्स में भारत-पाकिस्तान का क्रिकेट मुकाबला तभी देखने को मिलेगा, जब दोनों टीमें मेडल राउंड तक पहुंचेंगी.

World Organ Donation Day 2026: मौत के बाद किन अंगों का किया जा सकता है दान? जानें जरूरी नियम

हर साल 13 अगस्त को विश्व अंगदान दिवस मनाया जाता है. इस दिन लोगों को ऑर्गन डोनेशन के महत्व के बारे में जानकारी देने और जरूरतमंद मरीजों के लिए अंगदान को प्रोत्साहित करने की कोशिश की जाती है.

भारत समेत दुनिया के कई देशों में ऐसे मरीजों की संख्या काफी ज्यादा है, जिन्हें किडनी, लिवर, हृदय या दूसरे अंगों के ट्रांसप्लांट की जरूरत होती है. किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके उपयुक्त अंग और ऊतक दूसरे मरीजों के इलाज में इस्तेमाल किए जा सकते हैं. हालांकि, अंगदान के लिए मेडिकल जांच और निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी होता है.

कौन-कौन से अंग दान किए जा सकते हैं?

अंगदान में कई महत्वपूर्ण अंग शामिल हो सकते हैं. हालांकि, किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद वास्तव में कौन-सा अंग ट्रांसप्लांट के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, यह उसकी मेडिकल स्थिति और अंग की गुणवत्ता पर निर्भर करता है.

किडनी

किडनी सबसे ज्यादा ट्रांसप्लांट किए जाने वाले अंगों में शामिल है. मृत दाता की दोनों किडनी जरूरत के मुताबिक अलग-अलग मरीजों के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं.

जीवित व्यक्ति भी मेडिकल जांच और निर्धारित नियमों के तहत एक किडनी दान कर सकता है. ऐसा करने से पहले दाता की सेहत और भविष्य में उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है.

लिवर

लिवर की खासियत यह है कि इसका कुछ हिस्सा जीवित दाता से लिया जा सकता है. लिवर का बचा हुआ हिस्सा समय के साथ बढ़ने की क्षमता रखता है.

मृत व्यक्ति से भी लिवर दान किया जा सकता है. किस मरीज के लिए अंग उपयुक्त होगा, यह मेडिकल जांच के बाद निर्धारित किया जाता है.

हृदय

मृत दाता का स्वस्थ हृदय गंभीर हृदय रोग से पीड़ित मरीज के ट्रांसप्लांट में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए दाता के हृदय की स्थिति और दूसरे मेडिकल मानकों की जांच की जाती है.

फेफड़े

मृत दाता से एक या दोनों फेफड़ों का इस्तेमाल प्रत्यारोपण के लिए किया जा सकता है. कुछ विशेष मेडिकल परिस्थितियों में जीवित दाता से फेफड़े के हिस्से का दान भी संभव हो सकता है.

अग्न्याशय

पैंक्रियाज यानी अग्न्याशय भी ट्रांसप्लांट के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले अंगों में शामिल है. कुछ विशेष परिस्थितियों में जीवित दाता से इसके हिस्से का दान किया जा सकता है.

छोटी आंत

कुछ मरीजों में छोटी आंत के ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ सकती है. इसलिए उपयुक्त परिस्थितियों में आंत का दान भी ऑर्गन डोनेशन का हिस्सा हो सकता है.

सिर्फ अंग ही नहीं, इन टिश्यू का भी हो सकता है दान

अंगदान के अलावा कई प्रकार के टिश्यू भी जरूरतमंद मरीजों के इलाज में काम आ सकते हैं. इनमें शामिल हैं:

  • कॉर्निया
  • त्वचा
  • हड्डियां
  • हार्ट वाल्व
  • रक्त वाहिकाएं
  • टेंडन
  • कुछ प्रकार की नसें

उदाहरण के लिए, कॉर्निया ट्रांसप्लांट से कुछ मरीजों की दृष्टि सुधारने में मदद मिल सकती है. वहीं, डोनेट की गई त्वचा का इस्तेमाल गंभीर जलने या बड़े घाव वाले मरीजों के उपचार में किया जा सकता है.

जीवित रहते कौन से अंग दान किए जा सकते हैं?

जीवित व्यक्ति सभी अंग दान नहीं कर सकता. कुछ अंग या उनके हिस्से ही निर्धारित मेडिकल परिस्थितियों में दान किए जा सकते हैं.

आमतौर पर जीवित दाता एक किडनी या लिवर का एक हिस्सा दान कर सकता है. कुछ विशेष मामलों में अग्न्याशय के हिस्से और कुछ अन्य अंगों के हिस्से का दान भी संभव हो सकता है.

हालांकि, जीवित अंगदान के लिए दाता की पूरी मेडिकल जांच के साथ-साथ लागू कानूनी और नैतिक नियमों का पालन किया जाता है.

क्या हर उम्र का व्यक्ति अंगदान कर सकता है?

अंगदान के लिए केवल उम्र ही निर्णायक कारक नहीं होती. किसी व्यक्ति के अंग दान के योग्य हैं या नहीं, यह उसकी स्वास्थ्य स्थिति, मृत्यु के कारण, अंगों की स्थिति और मेडिकल जांच जैसे कई पहलुओं पर निर्भर करता है.

मृत्यु के बाद डॉक्टर और संबंधित मेडिकल टीम यह तय करती है कि कौन-से अंग या टिश्यू ट्रांसप्लांट के लिए सुरक्षित और उपयुक्त हैं.

अंगदान की प्रक्रिया कैसे होती है?

अंगदान की प्रक्रिया सामान्य दान से अलग होती है और इसमें निर्धारित मेडिकल तथा कानूनी नियम लागू होते हैं. व्यक्ति द्वारा अंगदान की इच्छा व्यक्त करने के बाद भी मृत्यु के समय मेडिकल टीम अंगों की उपयुक्तता का मूल्यांकन करती है.

जीवित अंगदान में दाता की सहमति, स्वास्थ्य जांच और लागू कानूनी मंजूरी महत्वपूर्ण होती है. वहीं, मृतक से अंगदान के मामले में मृत्यु की कानूनी/चिकित्सकीय पुष्टि और निर्धारित प्रक्रिया के बाद ही अंगों को प्रत्यारोपण के लिए लिया जाता है.

ध्यान रखें: अंगदान से जुड़े नियम और पात्रता परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकती है. इसलिए अंगदान का निर्णय लेने से पहले अधिकृत ट्रांसप्लांट सेंटर या संबंधित सरकारी संस्था से आधिकारिक जानकारी लेना जरूरी है.

Balochistan Airstrike: बलूचिस्तान में एयरस्ट्राइक से 28 मौतों का दावा, महिलाओं-बच्चों के भी मारे जाने की खबर

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में एक एयरस्ट्राइक के बाद बड़ी संख्या में नागरिकों के मारे जाने का दावा सामने आया है. रिपोर्ट के मुताबिक, सुराब इलाके के गोंधन गांव में मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात पाकिस्तानी वायुसेना ने कार्रवाई की. इस हमले को कथित तौर पर बलूच लड़ाकों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है.

स्थानीय स्तर से सामने आई जानकारी के अनुसार, हमले में 28 लोगों की मौत हुई है. मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं. इसके अलावा कई लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है.

हमले में 9 बच्चों और 7 महिलाओं की मौत का दावा

एयरस्ट्राइक के बाद सामने आई शुरुआती जानकारी में दावा किया गया कि मृतकों में 9 बच्चे, 7 महिलाएं और 12 पुरुष शामिल हैं. इसके अलावा करीब 17 लोगों के घायल होने की बात कही गई है.

घायलों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाने की जानकारी है. हालांकि, ऐसे मामलों में शुरुआती आंकड़े बदल सकते हैं और घटना की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी होती है.

मलबे में दबे मिले लोगों के शव

हमले के बाद सामने आई तस्वीरों और स्थानीय रिपोर्टों में क्षतिग्रस्त मकानों और मलबे का जिक्र किया गया है. दावा है कि मलबे के नीचे कई लोगों के शव मिले, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं.

घटना के बाद इलाके में अफरातफरी का माहौल बन गया. राहत और बचाव से जुड़े प्रयासों के दौरान प्रभावित परिवारों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा.

बलूचिस्तान में पहले भी सैन्य कार्रवाई पर उठते रहे हैं सवाल

बलूचिस्तान लंबे समय से अलगाववादी गतिविधियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के अभियानों का केंद्र रहा है. क्षेत्र में आतंकवाद और उग्रवाद से निपटने के नाम पर की जाने वाली सैन्य कार्रवाइयों को लेकर नागरिकों की सुरक्षा और मानवाधिकारों से जुड़े सवाल भी उठते रहे हैं.

ऐसी कार्रवाइयों में आम नागरिकों के प्रभावित होने के आरोप पहले भी सामने आते रहे हैं. इसी वजह से सुराब की घटना को लेकर भी सैन्य कार्रवाई के तौर-तरीकों पर सवाल उठ रहे हैं.

2025 में खैबर पख्तूनख्वाह की घटना का भी जिक्र

रिपोर्ट में पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह स्थित तिराह घाटी में सितंबर 2025 में हुई एक एयरस्ट्राइक का भी संदर्भ दिया गया है. उस कार्रवाई में भी नागरिकों के मारे जाने का दावा सामने आया था.

बलूचिस्तान की ताजा घटना के बाद एक बार फिर आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो सकती है.

पाकिस्तानी सेना की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार

सुराब में हुई कथित एयरस्ट्राइक को लेकर अभी सामने आए दावों में बड़ी संख्या में नागरिकों के मारे जाने की बात कही जा रही है. हालांकि, घटना से जुड़े आंकड़ों और हमले के वास्तविक लक्ष्य की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है.

फिलहाल पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों की ओर से इस घटना पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार है. आधिकारिक बयान आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्रवाई किस लक्ष्य को ध्यान में रखकर की गई थी और नुकसान का वास्तविक आंकड़ा क्या है.

India vs Sri Lanka Test Series: श्रीलंका दौरा भारत के लिए क्यों है महत्वपूर्ण? पूर्व दिग्गज ने समझाया

भारतीय क्रिकेट टीम के लिए श्रीलंका के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज सिर्फ दो मुकाबलों की सीरीज नहीं है. यह दौरा टीम इंडिया के लिए World Test Championship (WTC) के लिहाज से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ टेस्ट क्रिकेट में स्पिन गेंदबाजी की अगली पीढ़ी तैयार करने के नजरिए से भी अहम माना जा रहा है.

पूर्व भारतीय स्पिनर मुरली कार्तिक के मुताबिक, श्रीलंका की परिस्थितियां भारतीय स्पिनरों को खुद को साबित करने का अच्छा मौका देंगी. खासकर ऐसे समय में जब अनुभवी ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के अंतिम दौर में पहुंच चुके हैं.

WTC के लिए जीत जरूरी

भारत के लिए इस टेस्ट सीरीज का सबसे बड़ा महत्व WTC की अंक तालिका से जुड़ा है. फाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए टीम इंडिया को श्रीलंका के खिलाफ अच्छा प्रदर्शन करना होगा.

टेस्ट टीम में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव भी देखने को मिला है. रोहित शर्मा, विराट कोहली, अजिंक्य रहाणे, चेतेश्वर पुजारा और रविचंद्रन अश्विन जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के संन्यास के बाद भारतीय टेस्ट टीम में नई पीढ़ी को जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है.

ऐसे में श्रीलंका दौरा युवा खिलाड़ियों के लिए खुद को साबित करने का अहम मौका बन सकता है.

जडेजा के बाद कौन संभालेगा स्पिन की कमान?

भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक यह है कि रवींद्र जडेजा के बाद स्पिन विभाग का नेतृत्व कौन करेगा.

जडेजा ने लंबे समय तक भारतीय टेस्ट टीम में गेंद और बल्ले दोनों से अहम भूमिका निभाई है. उनके करियर के अंतिम चरण में पहुंचने के साथ ही टीम मैनेजमेंट को अगले स्पिन लीडर की तलाश करनी होगी.

मुरली कार्तिक का मानना है कि इस बदलाव के दौर में श्रीलंका सीरीज काफी उपयोगी साबित हो सकती है.

कुलदीप यादव पर रहेंगी नजरें

स्पिन विभाग में कुलदीप यादव का नाम सबसे प्रमुख दावेदारों में है. बाएं हाथ के इस कलाई के स्पिनर ने कई मौकों पर भारत के लिए मैच जिताऊ प्रदर्शन किया है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उन्हें लगातार मौके नहीं मिले.

टीम में रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा जैसे दिग्गजों की मौजूदगी के कारण कुलदीप को लंबे समय तक प्लेइंग इलेवन में जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा.

अब जडेजा के करियर के अंतिम दौर में पहुंचने के बाद कुलदीप के पास अपनी उपयोगिता साबित करने का बड़ा अवसर है.

मानव सुथार ने भी बढ़ाई चुनौती

कुलदीप के अलावा युवा स्पिनर मानव सुथार भी टीम के लिए महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभर रहे हैं. उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया था और एक टेस्ट में सात विकेट हासिल किए थे.

कार्तिक के मुताबिक, सुथार का प्रदर्शन भारतीय स्पिन गेंदबाजी के भविष्य के लिहाज से सकारात्मक संकेत है. युवा स्पिनर के अच्छे प्रदर्शन से टीम में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी.

क्या कुलदीप बन सकते हैं अगले स्पिन लीडर?

मुरली कार्तिक के अनुसार, आने वाली सीरीज में यह देखने का मौका मिलेगा कि क्या कुलदीप यादव जडेजा के बाद भारतीय स्पिन आक्रमण की अगुवाई करने की क्षमता रखते हैं.

भारतीय टेस्ट क्रिकेट में अनिल कुंबले, हरभजन सिंह, रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा जैसे स्पिनरों ने लंबे समय तक अहम जिम्मेदारी निभाई है. ऐसे दिग्गजों के बाद उस स्थान को भरना आसान नहीं होगा.

कुलदीप के सामने अब खुद को नियमित टेस्ट गेंदबाज और टीम के प्रमुख स्पिन विकल्प के रूप में स्थापित करने की चुनौती है.

श्रीलंका सीरीज में युवा स्पिनरों का टेस्ट

श्रीलंका की परिस्थितियां आम तौर पर स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती हैं. इसलिए यह दौरा भारतीय स्पिन यूनिट के लिए अपनी क्षमता दिखाने का अच्छा अवसर हो सकता है.

एक तरफ टीम इंडिया WTC की अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए जीत हासिल करना चाहेगी, वहीं दूसरी तरफ टीम मैनेजमेंट की नजर भविष्य की टेस्ट टीम तैयार करने पर भी होगी.

इसी वजह से श्रीलंका के खिलाफ यह टेस्ट सीरीज भारत के लिए सिर्फ WTC अंक हासिल करने का मौका नहीं, बल्कि जडेजा के बाद स्पिन विभाग का अगला लीडर तलाशने की दिशा में भी बेहद महत्वपूर्ण पड़ाव है.

NATO Summit: ट्रंप की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता, ईरान की जानकारी के बीच बदला गया विमान

तुर्किए की राजधानी अंकारा में NATO सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर खतरे की रिपोर्ट सामने आई है. दावा किया गया है कि अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को ऐसी खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके मुताबिक ईरानी एजेंटों को ट्रंप की लोकेशन की जानकारी थी और उनके विमान को भी संभावित मिसाइल हमले का खतरा था.

रिपोर्ट के अनुसार, खतरे को देखते हुए अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों ने ट्रंप को सुरक्षित निकालने के लिए एक बेहद गोपनीय ऑपरेशन की योजना बनाई. इस दौरान उनके आवागमन को लेकर ऐसी रणनीति अपनाई गई, जिससे उनकी वास्तविक लोकेशन और यात्रा का तरीका सार्वजनिक न हो सके.

होटल की मंजिल तक की जानकारी होने का दावा

रिपोर्ट में दो अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि ईरानी एजेंटों के पास अंकारा में ट्रंप की मौजूदगी से जुड़ी संवेदनशील जानकारी थी. यहां तक कहा गया कि उन्हें उस होटल की मंजिल की भी जानकारी थी, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति ठहरे हुए थे.

इसी दौरान ट्रंप के विमान को सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल से निशाना बनाए जाने की आशंका भी जताई गई. NATO सम्मेलन के आसपास एक व्यक्ति को कथित तौर पर कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के साथ देखे जाने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है.

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और ईरान की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है.

ट्रंप को सुरक्षित निकालने के लिए गुप्त योजना

खतरे की सूचना मिलने के बाद अमेरिकी अधिकारियों ने ट्रंप की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उनकी यात्रा योजना में बदलाव किया.

दावे के मुताबिक, ट्रंप को पहले आधिकारिक तौर पर Air Force One में सवार होते हुए दिखाया गया. इसके बाद उन्हें गुप्त तरीके से विमान से अलग कर दिया गया और एक कैटरिंग कंटेनर की आड़ में एयरपोर्ट से बाहर निकाला गया.

इसके बाद कथित तौर पर उन्हें सैन्य विमान के जरिए तुर्किए से सुरक्षित रवाना किया गया. इस पूरे ऑपरेशन का मकसद ट्रंप की वास्तविक आवाजाही को छिपाकर संभावित खतरे से बचाना बताया गया है.

Air Force One से बाकी अधिकारी रवाना हुए

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के अलग रास्ते से रवाना होने के बाद Air Force One ब्रिटेन के लिए रवाना हुआ. विमान में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट, वरिष्ठ व्हाइट हाउस अधिकारी, पत्रकार और सैन्यकर्मी मौजूद थे.

इस व्यवस्था के कारण ट्रंप के विमान में होने का भ्रम बना रहा और सार्वजनिक तौर पर ऐसा ही प्रतीत हुआ कि उन्होंने पूरी यात्रा Air Force One से की.

विमान में यात्रियों को खिड़कियां बंद रखने का निर्देश

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप की सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव के बाद Air Force One में मौजूद दूसरे यात्रियों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बन गई थी.

बताया गया कि 8 जुलाई को अंकारा से ब्रिटेन के लिए उड़ान के दौरान यात्रियों को विमान की खिड़कियों के पर्दे बंद रखने के निर्देश दिए गए थे. इसका उद्देश्य विमान की स्थिति या अंदर मौजूद लोगों की गतिविधियों को बाहर से देखने की संभावना को कम करना बताया गया.

विमान के ब्रिटेन पहुंचने के बाद ट्रंप कथित तौर पर दोबारा Air Force One में सवार हुए और कैमरों के सामने विमान से बाहर निकले. इससे देखने वालों को यही लगा कि वह शुरुआत से इसी विमान में यात्रा कर रहे थे.

क्या था ट्रंप पर खतरे का कारण?

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ईरान वास्तव में ट्रंप की सटीक लोकेशन तक पहुंच गया था और क्या उनके विमान पर हमला करने की कोई वास्तविक योजना थी.

सामने आई रिपोर्ट में अमेरिकी खुफिया जानकारी और सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से संभावित खतरे का उल्लेख किया गया है. हालांकि, इस मामले से जुड़े सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है.

अगर ये दावे सही साबित होते हैं, तो NATO सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर यह बेहद गंभीर सुरक्षा चुनौती मानी जाएगी.