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‘आवारापन 2’ का बॉक्स ऑफिस पर धमाका, ओपनिंग डे पर 13 फिल्मों को पछाड़ा

इमरान हाशमी और दिशा पाटनी की फिल्म ‘आवारापन 2’ ने सिनेमाघरों में रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर मजबूत शुरुआत की है। लंबे समय से इस फिल्म का इंतजार कर रहे दर्शकों के बीच रिलीज के बाद इसका क्रेज देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और इमरान हाशमी के अभिनय की भी तारीफ हो रही है।

फिल्म को मिल रहे अच्छे वर्ड ऑफ माउथ का असर शुरुआती कमाई पर भी दिखाई दे रहा है। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, ‘आवारापन 2’ ने पहले ही दिन 2026 में रिलीज हुई कई चर्चित फिल्मों के ओपनिंग कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया है।

पहले दिन 20 करोड़ से ज्यादा की कमाई

शुरुआती बॉक्स ऑफिस आंकड़ों के अनुसार, ‘आवारापन 2’ ने रिलीज के पहले दिन करीब 20.50 करोड़ रुपये का कारोबार किया। फिल्म की ऑक्यूपेंसी लगभग 40 प्रतिशत के आसपास बताई गई और इसे देशभर में हजारों शोज मिले।

फिल्म की रिलीज से पहले भी दर्शकों के बीच अच्छा खासा उत्साह था। एडवांस बुकिंग में भी फिल्म को मजबूत प्रतिक्रिया मिली, जिसका फायदा ओपनिंग डे पर देखने को मिला।

2026 की इन फिल्मों को पीछे छोड़ा

पहले दिन के शुरुआती आंकड़ों के आधार पर ‘आवारापन 2’ ने 2026 की कई फिल्मों के ओपनिंग डे कलेक्शन को पार किया है। इनमें ‘ओ रोमियो’, ‘अल्फा’, ‘इक्कीस’, ‘मर्दानी 3’, ‘पति पत्नी और वो दो’, ‘पेद्दी’, ‘राजा शिवाजी’, ‘है जवानी तो इश्क होना है’ और ‘कॉकटेल 2’ जैसी फिल्में शामिल हैं।

इसके अलावा शुरुआती आंकड़ों में ‘धमाल 4’, ‘वेलकम टू द जंगल’, ‘भूत बंगला’ और ‘द ओडिसी’ जैसी फिल्मों के पहले दिन के कलेक्शन भी ‘आवारापन 2’ से कम बताए गए हैं।

इस तरह शुरुआती आंकड़े सही रहने पर इमरान हाशमी की फिल्म ने पहले दिन ही 13 फिल्मों के ओपनिंग डे कलेक्शन को पीछे छोड़ दिया है।

एडवांस बुकिंग में भी दिखा था क्रेज

‘आवारापन 2’ की रिलीज से पहले ही टिकटों की बिक्री ने फिल्म को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी का संकेत दे दिया था। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म ने एडवांस बुकिंग से करीब 8.57 करोड़ रुपये की कमाई की थी। ब्लॉक सीटों को जोड़ने पर यह आंकड़ा लगभग 11.36 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।

रिलीज से पहले फिल्म के लिए करीब 2.85 लाख टिकट बुक किए जाने की जानकारी सामने आई थी। एडवांस बुकिंग के मजबूत आंकड़ों ने फिल्म की ओपनिंग को लेकर उम्मीदें बढ़ा दी थीं।

क्या है ‘आवारापन 2’ की कहानी और जॉनर?

‘आवारापन 2’ साल 2007 में रिलीज हुई ‘आवारापन’ की अगली कड़ी है। फिल्म में इमरान हाशमी एक बार फिर शिवम पंडित के किरदार में नजर आए हैं। उनके साथ दिशा पाटनी भी अहम भूमिका में हैं और उन्होंने जारा का किरदार निभाया है।

फिल्म में एक्शन, रोमांस और म्यूजिक का मिश्रण देखने को मिलता है। शुरुआती प्रतिक्रियाओं में इमरान हाशमी की परफॉर्मेंस को खास तौर पर पसंद किए जाने की बात सामने आ रही है।

अब फिल्म के लिए असली चुनौती दूसरे और तीसरे दिन की कमाई होगी। अगर दर्शकों का सकारात्मक रुझान आगे भी जारी रहता है, तो ‘आवारापन 2’ आने वाले दिनों में बॉक्स ऑफिस पर और मजबूत प्रदर्शन कर सकती है।

ईरान युद्ध के बीच ट्रंप पर बढ़ा दबाव, USS अब्राहम लिंकन की लंबी तैनाती पर उठे सवाल

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। ईरान से जुड़े सैन्य अभियान में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन की लंबे समय तक तैनाती को लेकर सांसदों ने सवाल उठाए हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, जहाज का क्रू कई महीनों से समुद्र में तैनात है। लंबे समय तक घर से दूर रहने और लगातार सैन्य अभियान का हिस्सा बने रहने के कारण नाविकों की सुविधाओं और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई गई है। जहाज पर करीब 5 हजार नौसैनिकों की तैनाती बताई गई है।

डेमोक्रेट सीनेटर ने गिनाईं कई परेशानियां

कनेक्टिकट के डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और कार्यवाहक नौसेना सचिव हंग काओ को पत्र लिखकर USS अब्राहम लिंकन पर सामने आई कथित समस्याओं को लेकर जवाब मांगा है।

उन्होंने जहाज पर बुनियादी सामान की कमी, पानी की गुणवत्ता, प्लंबिंग से जुड़ी परेशानियां, कर्मचारियों के बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य, डेक की सुरक्षा और डाक व्यवस्था में रुकावट जैसी समस्याओं का उल्लेख किया।

ब्लूमेंथल के अनुसार, डाक सेवा में दिक्कतों के कारण कुछ ‘केयर पैकेज’ भी लंबे समय तक अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाए। इनमें से कई समस्याओं के बारे में पहले भी सैन्य मामलों से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स सामने आने की बात कही गई है।

ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर भी निशाना

ब्लूमेंथल ने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर को सामान्य अवधि से काफी ज्यादा समय तक समुद्र में तैनात रखा। उन्होंने इसके लिए वेनेजुएला से जुड़े अमेरिकी दबाव अभियान और ईरान के साथ सैन्य संघर्ष का संदर्भ दिया।

एरिजोना के डेमोक्रेटिक सीनेटर रूबेन गैलेगो ने भी USS अब्राहम लिंकन का दौरा करने के लिए सांसदों के प्रतिनिधिमंडल की मांग की है। पूर्व मरीन रहे गैलेगो ने सैनिकों की परिस्थितियों को लेकर ट्रंप प्रशासन की आलोचना की।

लिंकन की जगह USS जॉर्ज वाशिंगटन की तैयारी

एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना मध्य पूर्व में USS अब्राहम लिंकन की जगह USS जॉर्ज वाशिंगटन को भेजने की तैयारी कर रही है। अधिकारी ने पहचान सार्वजनिक न करने की शर्त पर यह जानकारी दी।

बताया गया है कि जॉर्ज वाशिंगटन हाल में मलक्का जलडमरूमध्य से पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा है। हालांकि, वह कब तक लिंकन की जगह लेगा, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

ईरानी हमलों का भी सामना कर चुका है लिंकन

अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, ईरान के साथ सैन्य संघर्ष के शुरुआती दौर में USS अब्राहम लिंकन को ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा था।

रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने पहले दावा किया था कि ईरान ने अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को निशाना बनाकर बड़ी संख्या में मिसाइलें और एकतरफा हमलावर ड्रोन दागे थे, लेकिन उन्हें जहाज तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया।

लिंकन ने ईरानी बंदरगाहों से जुड़ी अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी को लागू करने में भी भूमिका निभाई। पहली नाकेबंदी अप्रैल से जून के बीच चली थी, जबकि बाद में इसे दोबारा शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई।

लंबे समय तक तैनाती से भविष्य की तैयारियों पर असर

अमेरिकी नौसेना के पास एयरक्राफ्ट कैरियर की संख्या सीमित है। ऐसे में किसी एक युद्धपोत को तय अवधि से कई महीने अधिक समय तक तैनात रखने से दूसरे अभियानों के लिए उपलब्धता प्रभावित होने की चिंता जताई गई है।

अमेरिकी नौसेना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि लगातार लंबी तैनाती से जहाज के क्रू पर दबाव बढ़ सकता है और भविष्य के सैन्य अभियानों के लिए तैयारियों पर भी असर पड़ सकता है।

ऐसे में USS अब्राहम लिंकन की लंबी तैनाती अब केवल ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य रणनीति का हिस्सा नहीं रही, बल्कि सैनिकों की कार्य परिस्थितियों, नौसेना की क्षमता और ट्रंप प्रशासन की सैन्य नीति को लेकर घरेलू राजनीतिक बहस का भी मुद्दा बन गई है।

Travel Tips: बारिश के मौसम में और भी खूबसूरत हो जाते हैं साउथ के ये Hill Stations, मानसून में जरूर करें विजिट

मानसून आते ही पहाड़ों और वादियों की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। चारों तरफ फैली हरियाली, बादलों से घिरी चोटियां, ठंडी हवाएं और झरनों की आवाज सफर को बेहद खास बना देती है। अगर आप इस बारिश के मौसम में प्रकृति के करीब कुछ समय बिताना चाहते हैं, तो दक्षिण भारत के कई हिल स्टेशन शानदार विकल्प हो सकते हैं।

साउथ इंडिया के इन पहाड़ी इलाकों में चाय और कॉफी के बागानों से लेकर घने जंगल, झीलें और झरने तक देखने को मिलते हैं। बारिश के बाद यहां का प्राकृतिक नजारा इतना आकर्षक हो जाता है कि कई जगहों पर पहाड़ बादलों के बीच छिपे हुए नजर आते हैं।

मुन्नार

केरल का मुन्नार मानसून के दौरान हरियाली और धुंध से ढका बेहद खूबसूरत दिखाई देता है। चारों ओर फैले चाय के बागान, पहाड़ी रास्ते और ठंडी हवाएं यहां के सफर को यादगार बनाती हैं।

अगर आपको प्रकृति, फोटोग्राफी और शांत वातावरण पसंद है, तो मुन्नार मानसून ट्रिप के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है।

कूर्ग

कर्नाटक का कूर्ग अपने कॉफी बागानों, हरे-भरे पहाड़ों और शांत माहौल के लिए जाना जाता है। बारिश के मौसम में यहां की प्राकृतिक सुंदरता और भी निखर जाती है।

कूर्ग में हरियाली के बीच घूमने के साथ झरनों और आसपास के प्राकृतिक स्थलों का आनंद लिया जा सकता है। अगर आप भीड़भाड़ से दूर आरामदायक छुट्टी चाहते हैं, तो यह जगह पसंद आ सकती है।

चिकमगलूर

कर्नाटक का चिकमगलूर भी मानसून में घूमने के लिए आकर्षक डेस्टिनेशन है। बारिश के बाद यहां की पहाड़ियां और घाटियां हरे रंग की चादर ओढ़ लेती हैं।

बादलों से ढकी पहाड़ियों और कॉफी एस्टेट्स के बीच समय बिताना इस जगह की खासियत है। शहर की भागदौड़ से ब्रेक लेने वालों के लिए चिकमगलूर एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

कोडाइकनाल

तमिलनाडु का कोडाइकनाल अपनी झीलों, घाटियों और खूबसूरत व्यू पॉइंट्स के लिए मशहूर है। मानसून के दौरान बारिश और धुंध यहां के प्राकृतिक नजारों को और आकर्षक बना देती है।

नेचर लवर्स के लिए यह जगह खास है। यहां शांत वातावरण में घूमने और पहाड़ी खूबसूरती का आनंद लेने का अलग अनुभव मिलता है।

वायनाड

केरल का वायनाड घने जंगलों, झरनों, गुफाओं और पहाड़ी इलाकों के लिए जाना जाता है। मानसून में यहां हरियाली और भी ज्यादा घनी दिखाई देती है।

अगर आपको ट्रेकिंग, नेचर वॉक और जंगलों के बीच घूमना पसंद है, तो वायनाड आपकी लिस्ट में शामिल हो सकता है। हालांकि बारिश के दौरान ट्रेकिंग रूट पर जाने से पहले स्थानीय मौसम और सुरक्षा निर्देशों की जानकारी जरूर लें।

ऊटी

तमिलनाडु का ऊटी दक्षिण भारत के लोकप्रिय हिल स्टेशनों में शामिल है। बारिश के दौरान यहां के चाय बागान, पहाड़ और गार्डन बेहद खूबसूरत नजर आते हैं।

ऊटी घूमने के दौरान पायकारा फॉल्स और आसपास के प्राकृतिक स्थलों को भी अपनी यात्रा में शामिल किया जा सकता है। बारिश के समय झरनों का नजारा खास तौर पर आकर्षक हो सकता है, लेकिन तेज बारिश में सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है।

मानसून ट्रिप पर इन बातों का रखें ध्यान

बारिश के मौसम में पहाड़ी इलाकों की यात्रा खूबसूरत होने के साथ थोड़ी चुनौतीपूर्ण भी हो सकती है। ट्रिप प्लान करने से पहले मौसम और स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी जरूर लें।

  • छाता और रेनकोट साथ रखें।
  • फिसलन वाले रास्तों के लिए अच्छी ग्रिप वाले जूते पहनें।
  • पहाड़ी इलाकों में यात्रा से पहले मौसम का पूर्वानुमान जरूर देखें।
  • भूस्खलन या तेज बारिश की चेतावनी हो तो जोखिम वाले रास्तों पर जाने से बचें।
  • स्थानीय प्रशासन और पर्यटन विभाग की गाइडलाइंस का पालन करें।
  • झरनों, नदियों और तेज बहाव वाले पानी के पास सावधानी बरतें।

मानसून में इन हिल स्टेशनों की खूबसूरती जरूर बढ़ जाती है, लेकिन सुरक्षित यात्रा के लिए मौसम और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही प्लान बनाना सबसे बेहतर है।

डेंगू में प्लेटलेट्स कब तेजी से गिरती हैं? जानिए ये खतरनाक संकेत, समय रहते रहें सावधान

बरसात के मौसम में डेंगू का खतरा बढ़ जाता है। डेंगू की पुष्टि होते ही सबसे ज्यादा चिंता प्लेटलेट्स को लेकर होती है। हालांकि, डेंगू में प्लेटलेट्स का कम होना आम हो सकता है, लेकिन सिर्फ प्लेटलेट काउंट के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि मरीज की हालत कितनी गंभीर है। कई बार प्लेटलेट्स कम होने के बावजूद मरीज स्थिर रहता है, जबकि कुछ मामलों में दूसरे संकेत गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर सकते हैं।

इसलिए डेंगू के दौरान बुखार के साथ-साथ शरीर में होने वाले बदलावों पर नजर रखना बेहद जरूरी है। खासतौर पर बुखार कम होने के आसपास का समय महत्वपूर्ण हो सकता है। आइए समझते हैं कि डेंगू में प्लेटलेट्स कब गिरती हैं और किन लक्षणों में तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।

डेंगू में प्लेटलेट्स कब गिरने लगती हैं?

डेंगू में शुरुआती दौर में आमतौर पर तेज बुखार रहता है, जो करीब 2 से 7 दिनों तक चल सकता है। इसके बाद बीमारी का क्रिटिकल फेज शुरू हो सकता है। यह चरण अक्सर बुखार कम होने के समय, यानी बीमारी के तीसरे से सातवें दिन के बीच देखा जाता है।

इसी अवधि में कुछ मरीजों में प्लेटलेट्स तेजी से कम हो सकती हैं। इसलिए केवल बुखार उतर जाने को पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं मानना चाहिए। इस समय मरीज की निगरानी और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच कराना महत्वपूर्ण है।

सिर्फ प्लेटलेट रिपोर्ट से खतरे का अंदाजा नहीं

डेंगू में प्लेटलेट्स का आंकड़ा महत्वपूर्ण है, लेकिन यह अकेला पैरामीटर नहीं है। डॉक्टर मरीज की पूरी स्थिति का आकलन करते हैं। इसमें हीमेटोक्रिट (HCT), ब्लड प्रेशर, नाड़ी की स्थिति, पेशाब की मात्रा, शरीर में पानी की कमी और अन्य लक्षण शामिल होते हैं।

अगर प्लेटलेट्स तेजी से कम हो रही हों और साथ ही हीमेटोक्रिट बढ़ रहा हो, तो यह शरीर से प्लाज्मा लीक होने जैसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे में मरीज को तुरंत चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत पड़ सकती है।

कितनी प्लेटलेट्स चिंता की बात है?

प्लेटलेट्स की कोई एक संख्या हर मरीज के लिए खतरे की निश्चित सीमा नहीं बताती। ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि प्लेटलेट्स कितनी तेजी से गिर रही हैं और मरीज में ब्लीडिंग या अन्य गंभीर लक्षण मौजूद हैं या नहीं।

अगर प्लेटलेट्स लगातार तेजी से घट रही हैं और इसके साथ रक्तस्राव, ब्लड प्रेशर कम होना, सांस लेने में परेशानी या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

डेंगू के दौरान नीचे दिए गए किसी भी गंभीर संकेत के सामने आने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें:

  • तेज या लगातार पेट दर्द
  • बार-बार या लगातार उल्टी
  • नाक या मसूड़ों से खून आना
  • उल्टी या मल में खून दिखाई देना
  • सांस तेज चलना या सांस लेने में परेशानी
  • बहुत ज्यादा कमजोरी, सुस्ती या बेचैनी
  • अत्यधिक प्यास लगना
  • त्वचा का ठंडा, पीला या चिपचिपा होना
  • शरीर में तरल पदार्थ जमा होने के संकेत

इन लक्षणों को गंभीरता से लेना जरूरी है, क्योंकि डेंगू के क्रिटिकल फेज में मरीज की हालत तेजी से बदल सकती है।

डेंगू में प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए क्या करें?

डेंगू में मरीज को डिहाइड्रेशन से बचाना बेहद जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार पर्याप्त मात्रा में पानी, ORS और अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ दिए जा सकते हैं। मरीज को पर्याप्त आराम भी करना चाहिए।

पपीते के पत्ते या किसी अन्य घरेलू उपाय को प्लेटलेट्स बढ़ाने का प्रमाणित इलाज मानकर डॉक्टर की निगरानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसी तरह केवल प्लेटलेट काउंट कम होने पर हर मरीज को प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन की जरूरत नहीं होती। इसका फैसला डॉक्टर मरीज की पूरी स्थिति, रक्तस्राव और अन्य मेडिकल संकेतों को देखकर करते हैं।

जरूरी बात

डेंगू में प्लेटलेट्स का गिरना बीमारी का हिस्सा हो सकता है, लेकिन सिर्फ एक प्लेटलेट रिपोर्ट देखकर घबराना या खतरे का फैसला करना सही नहीं है। मरीज की हालत, प्लेटलेट्स में बदलाव की गति और ब्लीडिंग जैसे चेतावनी संकेत ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। गंभीर लक्षण दिखने पर घरेलू इलाज के बजाय तुरंत डॉक्टर या अस्पताल से संपर्क करें।

सोनू निगम ने मुंबई में खरीदा नया ऑफिस, 1 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी को लेकर चर्चा तेज

बॉलीवुड के मशहूर प्लेबैक सिंगर सोनू निगम इन दिनों अपनी रियल एस्टेट डील्स को लेकर चर्चा में हैं। पिछले कुछ समय से वह मुंबई और महाराष्ट्र के अलग-अलग इलाकों में प्रॉपर्टी से जुड़े सौदे कर रहे हैं। अब सामने आई जानकारी के मुताबिक, उन्होंने मुंबई के अंधेरी वेस्ट में एक नया कमर्शियल स्पेस खरीदा है।

बताया जा रहा है कि इस प्रॉपर्टी की कीमत करीब 1 करोड़ रुपये है। दस्तावेजों के अनुसार, यह ऑफिस स्पेस अंधेरी वेस्ट के प्रमुख इलाके में स्थित है और इसका कारपेट एरिया 258.33 वर्ग फीट है।

6 अगस्त को हुआ प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन

जानकारी के मुताबिक, सोनू निगम ने इस कमर्शियल प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन 6 अगस्त 2026 को कराया। डील के दौरान उन्होंने करीब 6 लाख रुपये स्टांप ड्यूटी के रूप में चुकाए। इसके अलावा लगभग 30 हजार रुपये रजिस्ट्रेशन फीस भी दी गई।

स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क को जोड़ने के बाद इस प्रॉपर्टी पर कुल खर्च करीब 1.06 करोड़ रुपये तक पहुंचता है। कारपेट एरिया के हिसाब से देखें तो यह सौदा करीब 38,710 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर पर हुआ है।

रियल एस्टेट में लगातार निवेश

सोनू निगम पिछले कुछ वर्षों से रियल एस्टेट में सक्रिय नजर आ रहे हैं। मुंबई के अलावा महाराष्ट्र के दूसरे इलाकों में भी उनके प्रॉपर्टी से जुड़े लेनदेन सामने आए हैं।

2026 में उन्होंने रायगढ़ जिले के कर्जत इलाके में अपनी जमीन का एक हिस्सा बेचा था। मई 2026 में करीब 1.067 हेक्टेयर जमीन की बिक्री लगभग 95 लाख रुपये में होने की जानकारी सामने आई थी।

इससे पहले अप्रैल 2026 में भी कर्जत में 1.9 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में फैली जमीन के अलग-अलग हिस्सों से जुड़ा सौदा हुआ था। इस डील की कीमत करीब 1.95 करोड़ रुपये बताई गई थी।

मड आइलैंड में भी हुआ बड़ा सौदा

सोनू निगम के परिवार की ओर से मुंबई के मड आइलैंड इलाके में भी बड़ा प्रॉपर्टी सौदा किया गया था। फरवरी 2026 में उनके पिता अगम कुमार निगम ने करीब 1,197 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैली जमीन से जुड़ी डील की थी।

इस प्रॉपर्टी की कीमत करीब 10 करोड़ रुपये बताई गई थी। इससे पता चलता है कि निगम परिवार की रियल एस्टेट में दिलचस्पी लगातार बनी हुई है।

सर्जरी के बाद भी सुर्खियों में रहे सोनू निगम

रियल एस्टेट निवेश के अलावा सोनू निगम हाल ही में अपनी सर्जरी को लेकर भी चर्चा में रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर अस्पताल से एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें वह ऑपरेशन थिएटर में नजर आए।

खास बात यह थी कि सर्जरी के दौरान भी सोनू निगम गाना गाते दिखाई दिए। उन्होंने 1949 में आई फिल्म ‘दुलारी’ का मशहूर गीत ‘सुहानी रात ढल चुकी’ गाया। यह गाना महान गायक मोहम्मद रफी की आवाज में लोकप्रिय हुआ था।

सोनू निगम की नई प्रॉपर्टी डील एक बार फिर उनके रियल एस्टेट निवेश को लेकर चर्चा का विषय बन गई है।