अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। ईरान से जुड़े सैन्य अभियान में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन की लंबे समय तक तैनाती को लेकर सांसदों ने सवाल उठाए हैं।
रिपोर्टों के मुताबिक, जहाज का क्रू कई महीनों से समुद्र में तैनात है। लंबे समय तक घर से दूर रहने और लगातार सैन्य अभियान का हिस्सा बने रहने के कारण नाविकों की सुविधाओं और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई गई है। जहाज पर करीब 5 हजार नौसैनिकों की तैनाती बताई गई है।
डेमोक्रेट सीनेटर ने गिनाईं कई परेशानियां
कनेक्टिकट के डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और कार्यवाहक नौसेना सचिव हंग काओ को पत्र लिखकर USS अब्राहम लिंकन पर सामने आई कथित समस्याओं को लेकर जवाब मांगा है।
उन्होंने जहाज पर बुनियादी सामान की कमी, पानी की गुणवत्ता, प्लंबिंग से जुड़ी परेशानियां, कर्मचारियों के बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य, डेक की सुरक्षा और डाक व्यवस्था में रुकावट जैसी समस्याओं का उल्लेख किया।
ब्लूमेंथल के अनुसार, डाक सेवा में दिक्कतों के कारण कुछ ‘केयर पैकेज’ भी लंबे समय तक अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पाए। इनमें से कई समस्याओं के बारे में पहले भी सैन्य मामलों से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स सामने आने की बात कही गई है।
ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर भी निशाना
ब्लूमेंथल ने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर को सामान्य अवधि से काफी ज्यादा समय तक समुद्र में तैनात रखा। उन्होंने इसके लिए वेनेजुएला से जुड़े अमेरिकी दबाव अभियान और ईरान के साथ सैन्य संघर्ष का संदर्भ दिया।
एरिजोना के डेमोक्रेटिक सीनेटर रूबेन गैलेगो ने भी USS अब्राहम लिंकन का दौरा करने के लिए सांसदों के प्रतिनिधिमंडल की मांग की है। पूर्व मरीन रहे गैलेगो ने सैनिकों की परिस्थितियों को लेकर ट्रंप प्रशासन की आलोचना की।
लिंकन की जगह USS जॉर्ज वाशिंगटन की तैयारी
एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना मध्य पूर्व में USS अब्राहम लिंकन की जगह USS जॉर्ज वाशिंगटन को भेजने की तैयारी कर रही है। अधिकारी ने पहचान सार्वजनिक न करने की शर्त पर यह जानकारी दी।
बताया गया है कि जॉर्ज वाशिंगटन हाल में मलक्का जलडमरूमध्य से पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा है। हालांकि, वह कब तक लिंकन की जगह लेगा, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
ईरानी हमलों का भी सामना कर चुका है लिंकन
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, ईरान के साथ सैन्य संघर्ष के शुरुआती दौर में USS अब्राहम लिंकन को ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा था।
रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने पहले दावा किया था कि ईरान ने अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर को निशाना बनाकर बड़ी संख्या में मिसाइलें और एकतरफा हमलावर ड्रोन दागे थे, लेकिन उन्हें जहाज तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया।
लिंकन ने ईरानी बंदरगाहों से जुड़ी अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी को लागू करने में भी भूमिका निभाई। पहली नाकेबंदी अप्रैल से जून के बीच चली थी, जबकि बाद में इसे दोबारा शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई।
लंबे समय तक तैनाती से भविष्य की तैयारियों पर असर
अमेरिकी नौसेना के पास एयरक्राफ्ट कैरियर की संख्या सीमित है। ऐसे में किसी एक युद्धपोत को तय अवधि से कई महीने अधिक समय तक तैनात रखने से दूसरे अभियानों के लिए उपलब्धता प्रभावित होने की चिंता जताई गई है।
अमेरिकी नौसेना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि लगातार लंबी तैनाती से जहाज के क्रू पर दबाव बढ़ सकता है और भविष्य के सैन्य अभियानों के लिए तैयारियों पर भी असर पड़ सकता है।
ऐसे में USS अब्राहम लिंकन की लंबी तैनाती अब केवल ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य रणनीति का हिस्सा नहीं रही, बल्कि सैनिकों की कार्य परिस्थितियों, नौसेना की क्षमता और ट्रंप प्रशासन की सैन्य नीति को लेकर घरेलू राजनीतिक बहस का भी मुद्दा बन गई है।


































