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WPL 2026 Mumbai Indians vs Gujarat Giants19th Match Highlights:गुजरात ने मुंबई को शिकस्त देकर प्लेऑफ में मारी एंट्री, हरमनप्रीत की नाबाद 82 रन की पारी भी नहीं आई काम

 महिला प्रीमियर लीग 2026 (WPL 2026) के 19वें मुकाबले में गुजरात जायंट्स और मुंबई इंडियंस की टीमें वडोदरा के बीसीए स्टेडियम में आमने-सामने थीं. मुकाबले में गुजरात ने 11 रन से जीत दर्ज करते हुए प्लेऑफ में जगह बना ली है. इसके साथ गुजरात प्लेऑफ में पहुंचने वाली दूसरी टीम बनी. इससे पहले रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने डायरेक्ट फाइनल के लिए क्वालीफाई किया था. मुंबई के लिए रन चेज में हरमनप्रीत कौर ने 48 गेंदों में 8 चौके और 4 छक्कों की मदद से 82* रन बनाए, लेकिन उनकी पारी टीम को जीत नहीं दिला सकी.

हालांकि हार के बावजूद मुंबई के पास प्लेऑफ में जगह हासिल करने का मौका है. मुंबई ने अपने सभी लीग मैच खेल लिए हैं. अब टीम को टूर्नामेंट के आखिरी लीग मैच पर निर्भर होना पड़ेगा, जो 01 फरवरी, रविवार को दिल्ली कैपिटल्स और यूपी वॉरियर्स के बीच खएला जाएगा. मुंबई अपनी उम्मीदों को जिंदा रखने के लिए चाहेगी कि यूपी वॉरियर्स की टीम दिल्ली कैपिटल्स को हरा दे.

मुकाबले का हाल

बात करें मैच की, तो मुकाबले में गुजरात ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने का फैसला किया और 20 ओवर में 4 विकेट पर 167 रन बोर्ड पर लगाए. टीम के लिए कप्तान एश्ले गार्डनर ने सबसे बड़ी पारी खेलते हुए 28 गेंदों में 7 चौके और 1 छक्के की मदद से 46 रन बनाए. इस दौरान मुंबई के लिए अमेलिया केर ने सबसे ज्यादा 2 विकेट चटकाए.

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— Gujarat Giants (@Giant_Cricket) January 30, 2026

रन चेज में मुंबई इंडियंस फ्लॉप

फिर रन चेज के लिए मैदान पर उतरी मुंबई की टीम 20 ओवर में 7 विकेट पर 156 रन ही बना सकी. टीम के लिए कप्तान हरमनप्रीत कौर ने सबसे बड़ी पारी खेली. हरमनप्रीत के अलावा टीम की दूसरी कोई भी बल्लेबाज 30 रन का आंकड़ा भी पार नहीं कर सकी. सिर्फ कप्तान को छोड़कर बाकी सभी बल्लेबाजों का फ्लॉप होना टीम के लिए हार का बड़ा कारण बना. इस दौरान गुजरात के लिए सोफी डिवाइन और जॉर्जिया वेयरहैम ने सबसे ज्यादा 2-2 विकेट चटकाए.

Difference Between CT Scan And X Ray: सीटी स्कैन और एक्स-रे में क्या है फर्क? जानिए किन बीमारियों में कौन-सी जांच होती है जरूरी

आधुनिक चिकित्सा में मेडिकल इमेजिंग की भूमिका बेहद अहम हो चुकी है. इसकी मदद से डॉक्टर शरीर के अंदरूनी हिस्सों को साफ तौर पर देख पाते हैं और सही बीमारी की पहचान कर पाते हैं. एक्स-रे और सीटी स्कैन ऐसी दो प्रमुख जांच तकनीकें हैं, जिन्होंने डायग्नोसिस की दुनिया में बड़ा बदलाव किया है. हालांकि दोनों ही जांचों में रेडिएशन का इस्तेमाल होता है, लेकिन इनके उपयोग, फायदे और सीमाएं अलग-अलग हैं. चलिए आपको बताते हैं कि दोनों में क्या अंतर है.

एक्स-रे: सबसे पुरानी और भरोसेमंद जांच

एक्स-रे एक तरह की इलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणें होती हैं, जो शरीर के सॉफ्ट टिश्यू से होकर निकल जाती हैं, लेकिन हड्डियों जैसी सख्त स्ट्रक्चर द्वारा रोक ली जाती हैं. इसी वजह से एक्स-रे में हड्डियां साफ दिखाई देती हैं. यह जांच कम समय में हो जाती है, खर्च भी कम होता है और लगभग हर अस्पताल में उपलब्ध होती है. एक्स-रे का इस्तेमाल हड्डियों के फ्रैक्चर, दांतों की समस्याओं, फेफड़ों और हार्ट से जुड़ी बीमारियों की जांच में किया जाता है. इसके अलावा महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती जांच के लिए मैमोग्राफी भी एक्स-रे तकनीक पर आधारित होती है.

एक्स-रे का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह जल्दी हो जाता है और रेडिएशन की मात्रा भी अपेक्षाकृत कम होती है. हालांकि इसकी सीमा यह है कि सॉफ्ट टिश्यू जैसे मांसपेशियां, नसें या अंग इसमें स्पष्ट नहीं दिखते. बार-बार एक्स-रे कराना, खासकर बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए जोखिम भरा हो सकता है.

सीटी स्कैन: ज्यादा जानकारी देने वाली जांच

सीटी स्कैन को एक्स-रे का एडवांस रूप माना जाता है. इसमें घूमने वाली एक्स-रे मशीन शरीर के अलग-अलग एंगल से तस्वीरें लेती है, जिन्हें कंप्यूटर जोड़कर थ्री-डायमेंशनल इमेज बना देता है. इससे शरीर के अंदरूनी अंगों की बेहद स्पष्ट तस्वीर मिलती है.

सीटी स्कैन का इस्तेमाल गंभीर चोट, एक्सीडेंट, ट्यूमर, कैंसर, ब्रेन इंजरी, स्ट्रोक, किडनी स्टोन, अपेंडिसाइटिस और पेट से जुड़ी बीमारियों की जांच में किया जाता है. यह जांच डॉक्टरों को बीमारी की सटीक स्थिति समझने में मदद करती है. हालांकि सीटी स्कैन में रेडिएशन की मात्रा एक्स-रे से ज्यादा होती है और यह जांच महंगी भी होती है. कुछ मामलों में कॉन्ट्रास्ट डाई का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे एलर्जी की समस्या भी हो सकती है.

किस बीमारी में कौन-सी जांच जरूरी?

अगर हड्डी टूटने, दांत या फेफड़ों की सामान्य समस्या हो, तो एक्स-रे पर्याप्त होता है. लेकिन जब बीमारी जटिल हो, अंदरूनी चोट, कैंसर या ब्रेन से जुड़ी समस्या हो, तब सीटी स्कैन जरूरी हो जाता है.

हालांकि, एक्स-रे और सीटी स्कैन दोनों ही अपनी जगह जरूरी जांचें हैं. मरीज की स्थिति, बीमारी की गंभीरता और जोखिम को देखते हुए डॉक्टर तय करते हैं कि कौन-सी जांच सबसे सही रहेगी.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

Australian Open 2026 Final Live Streaming In India: ऑस्ट्रेलियन ओपन फाइनल में भिड़ेंगे नोवाक जोकोविच और कार्लोस अल्कराज, जानें लाइव मैच देखने का तरीका

ऑस्ट्रेलियन ओपन का फाइनल तय हो गया है. खिताबी मुकाबला नोवाक जोकोविच (Novak Djokovic) और कार्लोस अल्काराज (Carlos Alcaraz) के बीच खेला जाएगा. जोकोविच ने कमाल करते हुए 11वीं बार ऑस्ट्रेलियन ओपन के फाइनल में जगह बनाई. इस मुकाबले को लेकर भारत में काफी ज्यादा उत्साह देखने को मिल रहा है. तो आइए जानते हैं कि ऑस्ट्रेलियन ओपन का फाइनल भारत में कब और कहां लाइव प्रसारित होगा.

बता दें कि नोवाक जोकोविच ने 4 घंटे और 9 मिनट तक चले सेमीफाइनल में यानिक सिनर को  3-6, 6-3, 4-6, 6-4, 6-4 से हराकर 25वां ग्रैंड स्लैम जीतने की उम्मीदों को जिंदा रखा. वहीं दूसरी तरफ कोर्लोस अल्कराज ने अलेक्जेंडर ज्वेरेव (Alexander Zverev) को 6-4, 7-6 (7/5), 6-7 (3/7), 6-7 (4/7), 7-5 से सेमीफाइनल में हराकर फाइनल में कदम रखा था. यह सेमीफाइनल 5 घंटे और 27 मिनट तक चला था.

कब होगा फाइनल?

नोवाक जोकोविच और कार्लोस अल्कराज के बीच ऑस्ट्रेलियन ओपन का फाइनल 01 फरवरी (रविवार) को रॉड लेवर एरिना में खेला जाएगा. भारतीय समय के अनुसार मुकाबले की शुरुआत, दोपहर में 2 बजे से होगी.

भारत में कहां देखें लाइव

नोवाक जोकोविच और कार्लोस अल्कराज के बीच होने वाले खिताबी मुकाबले को भारत में सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के जरिए लाइव प्रसारित किया जाएगा.

HE IS NOT DONE.

Alcaraz BREAKS and we’re all square at 5-5! pic.twitter.com/aMS3HKJ5Wl

— #AusOpen (@AustralianOpen) January 30, 2026

कहां होगी लाइव स्ट्रीमिंग?

भारत में इस खिताबी मुकाबले को फैनकोड एप के जरिए लाइव स्ट्रीम किया जाएगा, जिसके जरिए आप मोबाइल, लैपटॉप और स्मार्ट टीवी पर इसका लुत्फ उठा सकेंगे.

Bring on Sunday 🍿 pic.twitter.com/3aO7kIcEsr

— #AusOpen (@AustralianOpen) January 30, 2026

यानिक सिनर थे फाइनल के दावेदार

अल्कराज ने यानिस सिनर को सेमीफाइनल में हराकर दुनिया को हैरान कर दिया. मुकाबले में अल्कराज के खिलाफ यानिक सिनर को ही जीत का दावेदार माना जा रहा था. कहा जा रहा था कि सेमीफाइनल में सिनर जीत हासिल करके फाइनल में जगह बनाएंगे. लेकिन अल्कराज ने सबको गलत साबित करते हुए जीत अपने खाते में डाली.

गौरतलब है कि सिनर तीन बार ग्रैंड स्लैम के फाइनल में अल्कराज को हरा चुके हैं. इस रिकॉर्ड को देखते हुए सिनर को मैच से पहले एकतरफा विनर माना गया. लेकिन अल्कराज ने सबको गलत साबित करते हुए जीत अपने नाम की.

Health News:दिखने में फिट होने के बावजूद कंसीव में आ रही दिक्कत? डॉक्टर बता रहे हैं फर्टिलिटी में रुकावट की वजहें

आज बड़ी संख्या में ऐसी युवा महिलाएं हैं जो फिट हैं, एक्टिव हैं, सही खाना खाती हैं, योग-जिम करती हैं और बाहर से बिल्कुल हेल्दी नजर आती हैं. ऐसे में जब महीनों तक कोशिश करने के बाद भी प्रेगनेंसी नहीं ठहरती, तो सबसे पहला सवाल यही आता है, मैं तो बिल्कुल ठीक दिखती हूं, फिर मेरे साथ ही ऐसा क्यों हो रहा है. यह सवाल सिर्फ उलझन का नहीं, बल्कि मानसिक तनाव, खुद पर शक और कई बार अपराधबोध तक ले जाता है.

कई महिलाएं सोचने लगती हैं कि शायद उनसे ही कोई गलती हो रही है, जबकि सच्चाई यह है कि फर्टिलिटी सिर्फ बाहर से दिखने वाली हेल्थ से तय नहीं होती है. आज के तेज, तनाव भरे और अनियमित जीवन में फर्टिलिटी से जुड़ी कई समस्याएं ऐसी होती हैं, जिनके कोई साफ लक्षण दिखाई नहीं देते. इसी वजह से महिलाएं समय पर जांच नहीं करा पातीं और इलाज में देरी हो जाती है.

हेल्दी दिखना और फर्टाइल होना दोनों अलग कैसे हैं

डॉक्टर्स कहते हैं कि यह एक बहुत आम गलतफहमी है कि जो महिला बाहर से हेल्दी दिखती है, उसे गर्भधारण में कोई दिक्कत नहीं हो सकती, हकीकत यह है कि आज कई ऐसी महिलाएं, जो पूरी तरह सामान्य जीवन जी रही हैं, फिर भी कंसीव नहीं कर पा रही हैं और यह अब असामान्य नहीं रह गया है.  मेडिकल भाषा में, 35 साल से कम उम्र की महिला अगर 12 महीने तक बिना किसी सुरक्षा के संबंध बनाने के बाद भी प्रेग्नेंट नहीं होती और 35 साल से अधिक उम्र की महिला अगर 6 महीने में कंसीव नहीं कर पाती, तो इसे बांझपन (Infertility) माना जाता है.  दुनियाभर में लगभग हर 6 में से 1 दंपत्ति इस समस्या से जूझ रहा है.  समय पर जांच न कराने से न सिर्फ इलाज मुश्किल होता है, बल्कि मानसिक दबाव भी बढ़ता जाता है.

प्रेगनेंसी एक नाजुक और जटिल प्रक्रिया 

अक्सर लोग सोचते हैं कि बस संबंध बनाने से प्रेग्नेंट हो जाती है, लेकिन असल में इसके पीछे शरीर के अंदर कई जरूरी प्रक्रियाएं सही तरह से काम करनी होती हैं. प्रेगनेंस के लिए जरूरी है कि हर महीने सही समय पर ओव्यूलेशन होना, फैलोपियन ट्यूब का खुला और हेल्दी होना, शुक्राणुओं की अच्छी क्वालिटी और संख्या, अंडाणु और शुक्राणु का सही तरह से निषेचित होना और निषेचित अंडाणु का गर्भाशय में जाकर सफलतापूर्वक चिपकना (इम्प्लांटेशन) इनमें से किसी भी स्टेज पर अगर छोटी-सी भी गड़बड़ी हो जाए, तो प्रेगनेंसी रुक सकती है और खास बात यह है कि अक्सर इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते हैं.

कौन सी बीमारियां जो दिखती नहीं, लेकिन फर्टिलिटी को प्रभावित करती हैं

1. पीसीओएस (PCOS) – यह एक हार्मोनल समस्या है, जो प्रजनन आयु की 6 से 13 प्रतिशत महिलाओं को प्रभावित करती है. इसमें ओव्यूलेशन नियमित नहीं होता, जिससे कंसीव करने में दिक्कत आती है., कई महिलाओं को इसके लक्षण भी साफ महसूस नहीं होते है.

2. एंडोमेट्रियोसिस – इस स्थिति में यूर्टस टिशू यूर्टस के बाहर बनने लगता है. यह अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब के काम में रुकावट डाल सकता है. हैरानी की बात यह है कि कई बार इसमें तेज दर्द भी नहीं होता, इसलिए महिला को पता ही नहीं चलता है.

3. फैलोपियन ट्यूब का ब्लॉक होना – पुराने संक्रमण, सर्जरी या गर्भाशय की बनावट से जुड़ी समस्याओं के कारण ट्यूब ब्लॉक हो सकती हैं. यह समस्या अक्सर बिना किसी लक्षण के होती है, लेकिन प्रेगनेंसी की संभावना को काफी कम कर देती है.

जब सभी जांच सामान्य हों, फिर भी प्रेग्नेंसी न हो

कुछ मामलों में सभी टेस्ट नॉर्मल आने के बावजूद प्रेगनेंसी नहीं ठहरती है. इसे डॉक्टर अस्पष्ट बांझपन (Unexplained Infertility) कहते हैं. इसका मतलब यह नहीं कि अब कोई रास्ता नहीं बचा, इसका मतलब सिर्फ इतना है कि ओव्यूलेशन के समय, अंडाणु और शुक्राणु की आपसी प्रक्रिया या इम्प्लांटेशन में कोई बहुत सूक्ष्म समस्या हो सकती है, जिसे आज के टेस्ट पकड़ नहीं पाते, ऐसे मामलों में पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट और सहायक प्रजनन तकनीकें मददगार साबित होती हैं.

डॉक्टर से जल्दी मिलना क्यों जरूरी है?

डॉक्टर महिलाओं को सलाह देते हैं कि अगर आप 6 से 12 महीने तक कोशिश करने के बाद भी कंसीव नहीं कर पा रही हैं, तो इंतजार न करें. समय पर जांच कराने से समस्या की सही पहचान होती है, लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव किए जा सकते हैं, दवाओं या आईवीएफ जैसी तकनीकों से सही समय पर इलाज संभव होता है. आज जब कई महिलाएं करियर या निजी कारणों से मातृत्व को टाल रही हैं, तब जागरूकता और समय पर कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है.

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

ईरान के सुप्रीम लीडर के बेटे के अरबों डॉलर के प्रॉपर्टी साम्राज्य की कहानी, कैसे बनी यह संपत्ति

उत्तरी लंदन में एक घनी पेड़ों से घिरी सड़क को बिलेनियर्स रो के नाम से जाना जाता है. बड़ी-बड़ी लग्जरी गाड़ियों और काले दरवाजों के पीछे कई खाली आलीशान घर दिखाई देते हैं. स्कूली बच्चे इधर-उधर घूमते नजर आते हैं, जबकि बाहर काली एसयूवी गाड़ियों में निजी गार्ड गश्त लगाते रहते हैं.

बिशप्स एवेन्यू पर स्थित इन आलीशान घरों के पीछे तेहरान से लेकर दुबई और फ्रैंकफर्ट तक फैला एक नेटवर्क है. कई गुप्त कंपनियों के जरिए इन घरों का असली मालिकाना हक मीडिल ईस्ट की सबसे ताकतवर शख्सियतों में से एक ईरान के सर्वोच्च नेता के दूसरे बड़े बेटे मोजतबा खामेनेई तक पहुंचता है.

अयातुल्ला अली के संभावित उत्तराधिकारी हैं मोजतबा 
56 वर्षीय धर्मगुरु मोजतबा खामेनेई को उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई का संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है, जो लंदन स्थित इन घरों के मालिक हैं. यह जानकारी मामले से परिचित लोगों और एक प्रमुख पश्चिमी खुफिया एजेंसी के आकलन से मिली है. इन लोगों ने बताया कि युवा खामेनेई सारी प्रॉपर्टी अपने नाम पर नहीं रखते, लेकिन वे डील में खुद शामिल रहे हैं, जिनमें से कई डील 2011 से चल रही हैं.

कहां-कहां किया है निवेश
जानकारों के मुताबिक मोजतबा खामेनेई ने जहाजों के व्यापार में निवेश कर रखा है और स्विस बैंक खातों में भी पूरी नकदी जमा है तो वहीं 138 मिलियन डॉलर से अधिक मूल्य की संपत्तियां ब्रिटेन में हैं. कंपनियों के इस जाल ने खामेनेई को 2019 में लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद अरबों डॉलर की धनराशि पश्चिमी बाजारों में पहुंचाने में मदद की है.

दुबई से लेकर मलोरका तक संपत्तियां
इसमें लंदन के कई सबसे खास इलाकों में स्थित प्रमुख अचल संपत्तियां शामिल हैं, जहां एक घर जिसकी कीमत 2014 में 33.7 मिलियन यूरो थी जब उसे खरीदा गया था. दुबई के बेवर्ली हिल्स कहे जाने वाले क्षेत्र में एक विला और फ्रैंकफर्ट से लेकर मलोरका तक आलीशान यूरोपीय होटल की चेन है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक इन लेन-देन के लिए नकदी ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन और संयुक्त अरब अमीरात के बैंकों में खातों के माध्यम से भेजी गई है और ये पैसे मुख्य रूप से ईरानी तेल की बिक्री से मिले हैं.

ब्लूमबर्ग द्वारा देखे गए किसी भी दस्तावेज में खामेनेई के नाम पर सीधे तौर पर संपत्तियों का जिक्र नहीं है. इसके बजाय कई खरीददारी एक ईरानी व्यवसायी अली अंसारी के नाम पर दिखाई देती हैं, जिन पर ब्रिटेन ने अक्टूबर में प्रतिबंध लगा दिया था.