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Health News:20–30 की उम्र में क्यों बढ़ रहा Hypertension?

हाई ब्लड प्रेशर अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहा। 20–30 साल के युवाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह अक्सर बिना स्पष्ट लक्षण के शरीर को नुकसान पहुंचाता रहता है, इसलिए इसे “साइलेंट किलर” कहा जाता है।


युवाओं में बीपी बढ़ने के मुख्य कारण

Max Healthcare की रिपोर्ट के अनुसार, बदलती लाइफस्टाइल इसकी सबसे बड़ी वजह है:

1️⃣ अनियमित जीवनशैली

  • लंबे वर्किंग ऑवर
  • कम नींद
  • जंक और प्रोसेस्ड फूड
  • शारीरिक गतिविधि की कमी

2️⃣ लगातार तनाव

तनाव बढ़ने पर शरीर में स्ट्रेस हार्मोन (जैसे कॉर्टिसोल) बढ़ते हैं, जिससे ब्लड वेसल्स संकरी हो जाती हैं और बीपी बढ़ जाता है।

3️⃣ मोटापा

अधिक वजन दिल पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे रक्तचाप बढ़ सकता है।

4️⃣ धूम्रपान और शराब

कम उम्र में इनकी आदतें हृदय और रक्तचाप पर नकारात्मक असर डालती हैं।

5️⃣ पारिवारिक इतिहास

अगर परिवार में पहले से हाई बीपी रहा है, तो जोखिम अधिक होता है।


क्या होते हैं लक्षण?

हाई बीपी अक्सर बिना लक्षण के होता है, लेकिन कुछ लोगों में ये संकेत दिख सकते हैं:

  • सुबह सिरदर्द
  • धुंधला दिखाई देना
  • थकान
  • घबराहट
  • कभी-कभी नाक से खून आना

अगर इसे नजरअंदाज किया जाए, तो आगे चलकर यह हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी डैमेज, आंखों की रोशनी में कमी और ब्रेन फंक्शन पर असर डाल सकता है।


कैसे करें बचाव?

कम उम्र में ही सावधानी बरतकर हाई बीपी को काफी हद तक रोका जा सकता है:

✔️ संतुलित आहार (फल, सब्जियां, साबुत अनाज, फाइबर)
✔️ नमक और प्रोसेस्ड फूड कम करें
✔️ हफ्ते में कम से कम 5 दिन, 30 मिनट एक्सरसाइज
✔️ तनाव कम करने के लिए योग/मेडिटेशन
✔️ रोज 7–9 घंटे की नींद
✔️ धूम्रपान और शराब से दूरी
✔️ 18 साल के बाद साल में कम से कम एक बार बीपी जांच

समय रहते उठाया गया छोटा कदम भविष्य की बड़ी बीमारियों से बचा सकता है।


Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

Health News:देख नहीं सकते तो क्या? अब “सुनकर” पहचानेंगे दुनिया—एम्स ने दिए AI स्मार्ट ग्लासेस

तकनीक के जरिए दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए All India Institute of Medical Sciences (एम्स) ने 53 नेत्रहीन और गंभीर दृष्टिबाधित लोगों को एआई आधारित स्मार्ट विज़न ग्लासेस वितरित किए।

ये खास चश्मे आसपास के दृश्य को ध्वनि में बदल देते हैं, जिससे उपयोगकर्ता अपने आसपास की दुनिया को “सुन” सकते हैं।

कैसे काम करते हैं ये स्मार्ट ग्लासेस?

इन ग्लासेस में रियल-टाइम ऑब्जेक्ट रिकग्निशन और टेक्स्ट-टू-स्पीच तकनीक लगी है। यह डिवाइस:

  • प्रिंटेड टेक्स्ट पढ़कर सुनाता है
  • वस्तुओं की पहचान करता है
  • चेहरों को पहचान सकता है
  • रास्ते में आने वाली बाधाओं की जानकारी देता है
  • नेविगेशन में मदद करता है

दवा के लेबल पढ़ना, नोट पहचानना या दरवाजे का रास्ता ढूंढना—ये सभी काम अब पहले से आसान हो सकते हैं।


किन लोगों को मिला लाभ?

लाभार्थियों में अमर कॉलोनी स्थित एक ब्लाइंड स्कूल के 28 बच्चे और एम्स के डॉ. आरपी सेंटर से जुड़े 25 वयस्क शामिल हैं। इनमें लो-विजन और रिहैबिलिटेशन क्लिनिक के वे मरीज भी हैं, जिन्हें अपूरणीय दृष्टिहानि है।


‘प्रोजेक्ट दृष्टि’ के तहत पहल

करीब 35,000 रुपये कीमत वाला यह उपकरण ‘प्रोजेक्ट दृष्टि’ के तहत मुफ्त उपलब्ध कराया गया है। इस पहल में Rotary International, Vision-Aid और अन्य सहयोगियों का समर्थन है।

एम्स के कम्युनिटी ऑप्थैल्मोलॉजी विभाग से जुड़े डॉ. प्रवीण वशिष्ठ के अनुसार, इसे एक संरचित रिसर्च परियोजना के रूप में लागू किया जा रहा है। लाभार्थियों का एक वर्ष तक हर महीने फॉलो-अप होगा, ताकि उनकी जीवन गुणवत्ता में आए बदलाव का आकलन किया जा सके।


भारत में अंधत्व की चुनौती

भारत में करीब एक करोड़ लोग अंधत्व या गंभीर दृष्टिबाधा से जूझ रहे हैं। कई मामलों में इलाज संभव है, लेकिन एडवांस ग्लूकोमा, डायबिटिक रेटिनोपैथी, एज-रिलेटेड मैक्युलर डीजेनेरेशन या ऑप्टिक नर्व डैमेज जैसी स्थितियों में सर्जरी समाधान नहीं होती। ऐसे में पुनर्वास और सहायक तकनीक ही स्वतंत्र जीवन की राह बनती है।

एसएचजी टेक्नोलॉजीज़ द्वारा विकसित ये स्मार्ट ग्लासेस अब अपने पांचवें संस्करण में हैं। नया मॉडल हल्का, सेंसर-आधारित और उन्नत एआई क्षमताओं से लैस है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी एआई आधारित सहायक तकनीक इलाज का विकल्प नहीं, बल्कि उसका मजबूत पूरक है—जो दृष्टिहीन लोगों को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में नई ताकत देती है।


Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

‘धुरंधर 2’ की रिलीज का काउंटडाउन शुरू, Ranveer Singh ने डबिंग का काम किया पूरा

बॉलीवुड स्टार रणवीर सिंह की फिल्म ‘धुरंधर’ को दर्शकों का जबरदस्त प्यार मिला था। अब इसके सीक्वल ‘धुरंधर 2’ का इंतजार भी तेज हो गया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, रणवीर सिंह ने फिल्म के लिए अपनी डबिंग पूरी कर ली है, जिससे साफ है कि फिल्म अब रिलीज के अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

डबिंग पूरी, फिल्म फाइनल स्टेज पर

ट्रेड वेबसाइट Sacnilk की रिपोर्ट के अनुसार, ‘धुरंधर 2’ की डबिंग का काम पूरा हो चुका है। डबिंग फिल्म की रिलीज से पहले की अहम प्रक्रिया होती है। इसके खत्म होते ही पोस्ट-प्रोडक्शन का काम लगभग अंतिम चरण में माना जाता है।

फिल्म हिंदी के अलावा तेलुगू, तमिल, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में भी रिलीज की जाएगी।


टीजर से नाराज हुए थे फैंस

रिलीज डेट के साथ फिल्म का पहला टीजर भी सामने आया था, लेकिन दर्शकों को वह खास पसंद नहीं आया। कई फैंस का कहना था कि टीजर में दिखाए गए सीन पहले पार्ट के क्रेडिट्स में पहले ही देखे जा चुके हैं। दर्शकों को उम्मीद थी कि पहले भाग की तरह इस बार भी दमदार झलक देखने को मिलेगी।


कब होगी रिलीज?

Aditya Dhar के निर्देशन में बनी ‘धुरंधर 2’ 19 मार्च को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

फिल्म में रणवीर सिंह के साथ:

  • Arjun Rampal
  • R. Madhavan
  • Sanjay Dutt
  • Akshaye Khanna

नजर आएंगे। जानकारी के मुताबिक, पिछले पार्ट में ‘रहमान डकैत’ के किरदार की कहानी खत्म हो चुकी थी, इसलिए इस बार कुछ नए ट्विस्ट देखने को मिल सकते हैं।

अब डबिंग पूरी होने के बाद फैंस की नजरें सिर्फ रिलीज डे पर टिकी हैं। देखना दिलचस्प होगा कि ‘धुरंधर 2’ पहले पार्ट की सफलता को दोहरा पाती है या नहीं।

Health News:मसूड़ों से खून आना और नीले निशान पड़ना हो सकते हैं Vitamin K की कमी के संकेत

विटामिन K की कमी शरीर में कई गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है। खासतौर पर यह खून जमने (ब्लड क्लॉटिंग) की प्रक्रिया के लिए बेहद जरूरी है। इसकी कमी होने पर मामूली चोट में भी ज्यादा खून बह सकता है, मसूड़ों से ब्लीडिंग हो सकती है या त्वचा पर आसानी से नीले निशान पड़ सकते हैं।


शरीर में विटामिन K की क्या भूमिका है?

  • खून का थक्का बनाना:
    विटामिन K उन प्रोटीन को सक्रिय करता है जो खून जमने की प्रक्रिया में शामिल होते हैं। इसकी कमी से ब्लीडिंग डिसऑर्डर का खतरा बढ़ जाता है।
  • हड्डियों को मजबूत रखना:
    यह ऑस्टियोकैल्सिन नामक प्रोटीन को सक्रिय करने में मदद करता है, जो कैल्शियम को हड्डियों से जोड़ता है। कमी होने पर हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम बढ़ सकता है।
  • दिल की सेहत:
    विटामिन K आर्टरीज में कैल्शियम जमा होने को नियंत्रित करता है। इसकी कमी से धमनियों में कैल्शियम जमा होने का खतरा बढ़ सकता है, जिससे हृदय रोग का जोखिम बढ़ता है।

नवजात शिशुओं के लिए क्यों जरूरी?

नवजात शिशुओं में विटामिन K का स्तर स्वाभाविक रूप से कम होता है, क्योंकि उनकी आंतों में अभी वे बैक्टीरिया विकसित नहीं हुए होते जो विटामिन K बनाते हैं। इससे हेमोरेजिक डिजीज ऑफ द न्यूबॉर्न (Vitamin K Deficiency Bleeding) का खतरा रहता है, जो गंभीर मामलों में ब्रेन ब्लीडिंग तक का कारण बन सकता है।


एडल्ट्स में दिखने वाले लक्षण

  • नाक से बार-बार खून आना
  • मसूड़ों से खून बहना
  • हल्की चोट में ज्यादा ब्लीडिंग
  • शरीर पर जल्दी नीले निशान पड़ना
  • ज्यादा या अनियमित पीरियड ब्लीडिंग

किन लोगों में ज्यादा जोखिम?

United States National Library of Medicine के अनुसार, इन लोगों में कमी का खतरा ज्यादा हो सकता है:

  • ब्लड थिनर दवाएं लेने वाले
  • लंबे समय तक एंटीबायोटिक लेने वाले
  • जिनके आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां कम हों
  • जिनमें फैट एब्जॉर्प्शन की समस्या हो (जैसे लिवर या पाचन संबंधी बीमारियां)
  • विटामिन A या E की बहुत अधिक मात्रा लेने वाले

कैसे करें बचाव?

  • हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी, ब्रोकोली)
  • सोयाबीन और वनस्पति तेल
  • संतुलित और पौष्टिक आहार
  • जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट

⚠️ कब डॉक्टर से मिलें?

अगर आपको बार-बार ब्लीडिंग, लंबे समय तक घाव से खून बहना या शरीर पर बिना कारण नीले निशान दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें।


Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी लक्षण या स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

Sports News:‘फ्री का पैसा ले रहा है क्या?’ – Mohammad Kaif ने पाक हेड कोच की लगाई क्लास

ICC Men’s T20 World Cup 2026 में पाकिस्तान की टीम सुपर-8 में पहुंच चुकी है, लेकिन भारत के खिलाफ हार के बाद टीम के प्रदर्शन पर सवाल उठ रहे हैं। इसी कड़ी में भारत के पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने पाकिस्तान के हेड कोच Mike Hesson पर तीखा निशाना साधा।

कोच पर उठाए सवाल

अपने यूट्यूब चैनल पर कैफ ने कहा कि कप्तान Salman Agha को दोष देने के बजाय कोच की रणनीति पर सवाल उठना चाहिए।

कैफ ने कहा,

“सलमान आगा को छोड़िए, माइक हेसन क्या कर रहे हैं? उन्होंने आईपीएल में भी कोचिंग की है। वह भारत के खिलाफ पहले फील्डिंग करने की सलाह क्यों दे रहे हैं? फ्री का पैसा ले रहा है क्या भाई?”

उन्होंने आगे कहा कि यह सलमान आगा का पहला वर्ल्ड कप हो सकता है, लेकिन अनुभवी कोच को पिच और मैच परिस्थितियों की बेहतर समझ होनी चाहिए थी।


भारत के खिलाफ एकतरफा हार

मैच में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 175/7 रन बनाए।

  • Ishan Kishan ने 77 रन की शानदार पारी खेली।
  • पाकिस्तान की ओर से Saim Ayub ने 3 विकेट लिए।

लक्ष्य का पीछा करते हुए पाकिस्तान की टीम 18 ओवर में 114 रन पर सिमट गई।

  • Usman Khan ने 44 रन बनाए।
  • भारत के लिए Hardik Pandya, Jasprit Bumrah, Axar Patel और Varun Chakravarthy ने 2-2 विकेट झटके।
  • Kuldeep Yadav और Tilak Varma ने 1-1 विकेट लिया।

इस तरह भारत ने मुकाबला एकतरफा अंदाज में अपने नाम किया।


पाकिस्तान भले ही सुपर-8 में पहुंच गया हो, लेकिन भारत के खिलाफ हार के बाद टीम की रणनीति और कोचिंग पर बहस तेज हो गई है। अब देखना होगा कि आगे के मुकाबलों में टीम किस तरह वापसी करती है।