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लखनऊ: SVM मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप, डिस्चार्ज को लेकर हंगामा

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के कृष्णानगर थानाक्षेत्र अंतर्गत भारत माता मंदिर के सामने स्थित SVM मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप लगे हैं। गंभीर हालत में मरीज के साथ कौशाम्बी से राजधानी लखनऊ इलाज के लिए पहुंचे परिजनों का दावा है कि गंभीर हालत में भर्ती मरीज को डिस्चार्ज नहीं किया जा रहा और इलाज के नाम पर मात्र 4-5 घंटे का भारी-भरकम बिल थमाया गया है।

क्या है पूरा मामला?

परिजनों के अनुसार, से एक महिला मरीज को गंभीर स्थिति में देर रात प्रयागराज (कौशांबी) से लखनऊ लाया गया। हालत नाजुक होने के चलते उन्हें तत्काल SVM मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।

परिजनों का आरोप है कि रात से सुबह तक इलाज के नाम पर करीब एक लाख रुपये का बिल बना दिया गया। उनका कहना है कि कई टेस्ट और दवाओं का स्पष्ट ब्योरा नहीं दिया गया, जबकि मरीज की हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ।

केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर ले जाने की मांग

मरीज की हालत बिगड़ने पर परिजन उसे बेहतर इलाज के लिए में शिफ्ट करना चाहते थे। आरोप है कि सुबह से डिस्चार्ज की मांग की जा रही है, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने भुगतान का हवाला देकर मरीज को छोड़ने से इनकार कर दिया।

परिजनों का कहना है कि उन्होंने करीब 40 हजार रुपये तत्काल जमा भी किए, इसके बावजूद डिस्चार्ज नहीं दिया गया। मामला उग्र होने पर परिजनों ने शिकायत किया जिसके बाद मौके पर पुलिस के पहुंचने के बाद मरीज को डिस्चार्ज किया गया।

मारपीट और अभद्रता का आरोप

बिल को लेकर विरोध करने पर अस्पताल स्टाफ द्वारा अभद्रता और धक्का-मुक्की किए जाने का भी आरोप लगाया गया है। परिजनों का दावा है कि पूरी घटना अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद है।

पुलिस और स्वास्थ्य विभाग से कार्रवाई की मांग

मामले की सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई। परिजन निष्पक्ष जांच और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि गंभीर मरीज को रोककर रखना मानवता के खिलाफ है।

बड़ा सवाल

यह घटना एक बार फिर निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। क्या गंभीर मरीजों को आर्थिक कारणों से रोका जा सकता है? क्या स्वास्थ्य विभाग ऐसी घटनाओं पर निगरानी रख पा रहा है?

फिलहाल मरीज की हालत गंभीर बताई जा रही है और परिजन उसे जल्द से जल्द ट्रॉमा सेंटर में शिफ्ट कराने की कोशिश में जुटे हैं। प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।

वैश्विक बौद्ध आस्था का केंद्र बना उत्तर प्रदेश : वर्ष 2025 में करीब 82 लाख पर्यटक पहुंचे बुद्ध भूमि

  • इनबाउंड टूरिज्म में बौद्ध सर्किट ने रचा नया कीर्तिमान, 4.40 लाख से अधिक विदेशी पर्यटकों का आगमन
  • वर्ष 2022 से 2025 तक साल दर साल बढ़ी बौद्ध पर्यटकों की संख्या, कुशीनगर बना विदेशी पर्यटकों का पसंदीदा स्थल
  • यूपी टूरिज्म फैम ट्रिप और विदेशी आयोजनों में सहभाग के जरिए बौद्ध बहुल देशों को कर रहा आकर्षित
  • वैश्विक ‘बोधि यात्रा’ की पहली पसंद बना उत्तर प्रदेश, बौद्ध सर्किट लिख रहा पर्यटन विकास का नया अध्याय

लखनऊ, 22 फरवरी 2026: उत्तर प्रदेश ने एक बार फिर वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए बौद्ध आस्था और विरासत के केंद्र के रूप में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वर्ष 2025 में प्रदेश ने बौद्ध सर्किट के जरिए दुनिया भर के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करते हुए लगभग 82 लाख आगंतुकों का स्वागत किया, जिनमें 4.40 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक शामिल रहे। विशेष रूप से कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन के प्रमुख आकर्षण के रूप में उभरकर सामने आया, जहां विदेशी श्रद्धालुओं की सर्वाधिक आमद दर्ज की गई।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘उत्तर प्रदेश आज वैश्विक बौद्ध आस्था का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। उन्होंने बताया कि दुनिया भर के बौद्ध धर्मावलंबी अपनी ‘बोधि यात्रा’ की शुरुआत उत्तर प्रदेश से करने को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे राज्य में इनबाउंड टूरिज्म में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है। सारनाथ, कपिलवस्तु, श्रावस्ती, संकिसा, कौशांबी और कुशीनगर जैसे भगवान बुद्ध के जीवन और संदेश से जुड़े पवित्र स्थलों के भ्रमण को श्रद्धालु जीवन की पवित्र यात्रा मानते हैं।’

साल दर साल बढ़ी बौद्ध पर्यटकों की संख्या
पर्यटन मंत्री ने बताया कि ‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश का पर्यटन क्षेत्र निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के छह पवित्र बौद्ध स्थलों पर पर्यटकों की संख्या में वर्ष दर वर्ष उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में इन स्थलों पर लगभग 82 लाख पर्यटकों का आगमन हुआ, जिनमें 4.40 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक शामिल रहे। वर्ष 2024 में कुल 61 लाख से अधिक पर्यटक राज्य के बौद्ध स्थलों पर पहुंचे, जिनमें 3.50 लाख से अधिक विदेशी आगंतुक थे। वहीं वर्ष 2023 में करीब 47 लाख पर्यटकों ने प्रदेश के बौद्ध सर्किट का भ्रमण किया, जिनमें 2.50 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक शामिल रहे। वर्ष 2022 में 22.40 लाख से अधिक पर्यटक बौद्ध स्थलों पर आए, जिनमें 48 हजार से अधिक विदेशी पर्यटक थे। मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश का बौद्ध सर्किट वैश्विक आस्था और आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है।

कुशीनगर बना विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा इनबाउंड पर्यटन को गति देने के लिए अपनाई गई बहुआयामी रणनीति अब ठोस परिणाम देने लगी है। इसी प्रयास का असर है कि प्रदेश के बौद्ध सर्किट, विशेषकर भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर, विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद बनकर उभरी है। वर्ष 2025 में 2.90 लाख से अधिक विदेशी पर्यटकों का आगमन इस ऐतिहासिक स्थल पर दर्ज किया गया, जो बीते वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। साल 2024 में 2.51 लाख, 2023 में 2.14 लाख तथा 2022 में 41 हजार से अधिक विदेशी पर्यटकों ने कुशीनगर की पवित्र धरती पर पहुंचकर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की।

बौद्ध सर्किट से इनबाउंड टूरिज्म को नया आयाम
मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘केंद्रीय बजट 2026-27 में भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ को देश के 15 सबसे प्रमुख पुरातात्विक स्थलों में शामिल कर एक ‘एक्सपेरिमेंटल कल्चर डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करने का ऐलान किया गया है। इसी क्रम में अगस्त माह में लगभग 200 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल उत्तर प्रदेश आएगा। उन्होंने बताया, कि सारनाथ और कुशीनगर में जापानी बौद्ध संस्थानों का होना भारत-जापान के बीच दशकों से चले आ रहे आध्यात्मिक संबंधों का प्रमाण है। इसी प्रकार बौद्ध धर्म मानने वाले अन्य देशों- श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार, कंबोडिया, लाओस पीडीआर, वियतनाम एवं दक्षिण कोरिया जैसे देशों से प्रति वर्ष बड़ी संख्या में बौद्ध पर्यटक उत्तर प्रदेश आते हैं। प्रदेश का पर्यटन विभाग इन देशों के नागरिकों, टूर एंड ट्रैवेल प्रतिनिधियों एवं उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों के लिए नियमित रूप से फैम ट्रिप आयोजित करती है। साथ ही, वैश्विक आयोजनों का हिस्सा बनकर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर उत्तर प्रदेश की सशक्त उपस्थिति सुनिश्चित कर रहा है।’

नेट जीरो सरोजनीनगर – टारगेट 2040: युवा ऊर्जा, पर्यावरणीय संकल्प और सांस्कृतिक गौरव का ऐतिहासिक संगम, Yo-Yo Honey Singh के बाद अब संजय दत्त पहुंचे लखनऊ

लखनऊ : सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र एक बार फिर इतिहास रचने की तैयारी में है। विकास, पर्यावरण संरक्षण और युवा सशक्तिकरण को एक सूत्र में पिरोते हुए सरोजनीनगर के लोकप्रिय विधायक Dr. Rajeshwar Singh 22 फरवरी को प्रातः 11 बजे “नेट जीरो सरोजनीनगर – टारगेट 2040” अभियान का भव्य शुभारंभ करने जा रहे हैं। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और हरित भविष्य का संकल्प है।

क्या है ‘नेट जीरो’ का विज़न?

‘नेट जीरो’ का सीधा और स्पष्ट अर्थ है— जितना कार्बन उत्सर्जन हो, उतना ही कार्बन कम या अवशोषित किया जाए। सरल शब्दों में कार्बन आउट = कार्बन इन। इस मिशन के तहत सरोजनीनगर को वर्ष 2040 तक ऐसा मॉडल क्षेत्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जहां विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित हो सके।

मिशन की रणनीति: संकल्प से सिद्धि तक

इस महत्वाकांक्षी अभियान के अंतर्गत स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा, सौर ऊर्जा का विस्तार, वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का पुनर्जीवन, ‘रिड्यूस, रीयूज और रीसायकल’ की संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाना, व्यापक वृक्षारोपण और हरित आवरण की रक्षा जैसे ठोस कदम उठाए जाएंगे। इस अभियान की असली ताकत जनभागीदारी होगी— क्योंकि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि समाज का सामूहिक दायित्व है।

युवाओं के लिए निरंतर सक्रिय नेतृत्व

डॉ. राजेश्वर सिंह लगातार युवाओं को सकारात्मक मंच प्रदान करने में अग्रणी रहे हैं। इससे पूर्व सरोजनीनगर में मशहूर गायक Yo Yo Honey Singh का ऐतिहासिक कॉन्सर्ट आयोजित कर उन्होंने सांस्कृतिक ऊर्जा और युवा उत्साह का नया अध्याय लिखा था। वह आयोजन न केवल सरोजनीनगर, बल्कि पूरी राजधानी के लिए चर्चा का विषय बना और हजारों युवाओं की भागीदारी ने इसे यादगार बना दिया।

अब उसी ऊर्जा और जोश के साथ “नेट जीरो” अभियान के शुभारंभ अवसर पर बॉलीवुड के प्रख्यात अभिनेता Sanjay Dutt मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। उनका आगमन सरोजनीनगर ही नहीं, बल्कि पूरी राजधानी लखनऊ के लिए गौरव का क्षण माना जा रहा है।

सरोजनीनगर बनेगा मॉडल ग्रीन विधानसभा

इस पहल के माध्यम से सरोजनीनगर को उत्तर प्रदेश की एक मॉडल ग्रीन विधानसभा के रूप में स्थापित करने की रूपरेखा तैयार की गई है। चरणबद्ध कार्ययोजना के तहत ऊर्जा संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त अभियान, सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम और पर्यावरणीय नवाचारों को बढ़ावा दिया जाएगा।

डॉ. राजेश्वर सिंह का स्पष्ट संदेश है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। यदि समाज, प्रशासन और युवा शक्ति एक साथ खड़े हों, तो वर्ष 2040 का लक्ष्य केवल सपना नहीं, बल्कि वास्तविकता बन सकता है।

युवा जोश, सांस्कृतिक चेतना और पर्यावरणीय प्रतिबद्धता का यह संगम सरोजनीनगर को नई पहचान देने जा रहा है। 22 फरवरी का यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत है- जो आने वाले वर्षों में राजधानी लखनऊ को हरित, स्वच्छ और संतुलित विकास की दिशा में नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहा है।

युवाओं को विरासत से जोड़ने की अनूठी पहल, लखनऊ में ‘यूथ हेरिटेज लीडरशिप प्रोग्राम’ का सफल आयोजन

छतर मंजिल से जनरल कोठी तक शैक्षणिक भ्रमण, छात्रों ने जाना ऐतिहासिक धरोहरों का महत्व

70 विद्यार्थियों की सहभागिता, विरासत संरक्षण के लिए नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर

ऐतिहासिक धरोहरों पर गर्व करें युवा, संरक्षण में निभाएं सक्रिय भूमिका: जयवीर सिंह

विरासत केवल अतीत नहीं, हमारी पहचान और भविष्य की दिशा भी है: जयवीर सिंह

लखनऊ, 21 फरवरी 2026

उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और युवाओं में ऐतिहासिक चेतना विकसित करने के उद्देश्य से एक दिवसीय “यूथ हेरिटेज लीडरशिप प्रोग्राम” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय (संस्कृति विभाग) द्वारा इतिहास संस्थान, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को भारतीय विरासत के महत्व से परिचित कराना और उन्हें सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय नेतृत्वकर्ता के रूप में तैयार करना था।

ऐतिहासिक स्थलों का शैक्षणिक भ्रमण

कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागी छात्रों को लखनऊ की प्रमुख ऐतिहासिक धरोहरों का भ्रमण कराया गया। विद्यार्थियों ने तथा का दौरा किया। भ्रमण के दौरान इन स्मारकों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्थापत्य शैली, सांस्कृतिक महत्व और संरक्षण संबंधी पहलुओं की जानकारी सरल और संवादात्मक शैली में दी गई।

विशेषज्ञों ने बताया कि छतर मंजिल अवध काल की स्थापत्य कला का अनूठा उदाहरण है, जबकि कैसरबाग परिसर लखनऊ की नवाबी विरासत का प्रतीक माना जाता है। छात्रों ने इन इमारतों की वास्तु संरचना, ऐतिहासिक घटनाओं और वर्तमान संरक्षण प्रयासों को प्रत्यक्ष रूप से समझा, जिससे उनकी ऐतिहासिक दृष्टि और गहरी हुई।

विरासत की परिभाषा और युवाओं की भूमिका

कार्यक्रम के दौरान निदेशक सुश्री रेनू द्विवेदी ने विद्यार्थियों को विरासत की परिभाषा, स्वरूप और उसके सांस्कृतिक आयामों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विरासत केवल भौतिक इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि परंपराएं, भाषा, लोक कला और जीवन शैली भी इसका अभिन्न हिस्सा हैं। संवाद के माध्यम से छात्रों को यह समझाया गया कि सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा में युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

विद्यार्थियों को जागरूक, संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा दी गई, ताकि वे भविष्य में विरासत संरक्षण से जुड़े अभियानों में सक्रिय योगदान दे सकें।

मंत्री का संदेश: विरासत से जुड़ाव ही असली उद्देश्य

इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराना नहीं, बल्कि युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भावनात्मक रूप से जोड़ना है। उन्होंने कहा, “विरासत केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि हमारी पहचान और भविष्य की दिशा है। जब युवा अपनी विरासत पर गर्व करना सीखते हैं, तभी संरक्षण का भाव स्वाभाविक रूप से विकसित होता है।”

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं और समाज में जागरूकता फैलाएं।

70 छात्रों की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालक विद्यालय और जय प्रकाश नारायण सर्वोदय बालिका विद्यालय के कक्षा 9वीं और 11वीं के लगभग 70 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इतिहास संस्थान से सुश्री सुयशा जी सहित पुरातत्व निदेशालय के अधिकारी, शिक्षकगण एवं विद्यालय स्टाफ भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

यह पहल न केवल विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक अनुभव सिद्ध हुई, बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुई। युवाओं में जागरूकता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने वाला यह कार्यक्रम भविष्य में विरासत संरक्षण की मजबूत नींव रखने का प्रयास माना जा रहा है।

संपर्क सूत्र – अभिषेक सिंह

युवा पर्यटन अंतर्गत शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार, नवाबगंज (उन्नाव) का कराया गया शैक्षणिक भ्रमण

  • प्रकृति की पाठशाला में युवा कदम, शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार में छात्रों ने पढ़ा जैव-विविधता और संरक्षण का पाठ
  • नेचर ट्रेल्स से वॉच टॉवर तक, पर्यटन संग पर्यावरण संरक्षण की राह पर बढे विद्यार्थी
  • ईको-टूरिज्म से सशक्त हो रही पर्यावरण चेतना, भावी पीढ़ी बनेगी प्रकृति संरक्षण की अग्रदूत- जयवीर सिंह

लखनऊ, 21 फरवरी 2026 : पर्यटन एवं प्राकृतिक धरोहरों से युवाओं को जोड़कर उन्हें पर्यावरण संरक्षण का सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड (यूपीईटीडीबी) लगातार सार्थक पहल कर रहा है। इसी क्रम में 21 फरवरी 2026 को ‘युवा पर्यटन’ के अंतर्गत ईज माय ट्रिप के सहयोग से पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, एसजीपीजीआई, लखनऊ के लगभग 60 विद्यार्थियों को शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार (उन्नाव) का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया।

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘इस तरह के भ्रमण कार्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को जैव विविधता, आर्द्रभूमि संरक्षण और ईको-टूरिज्म के महत्व से अवगत कराना है। साथ ही, छात्रों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है, ताकि वे कक्षा की पढ़ाई के साथ-साथ वास्तविक प्राकृतिक परिवेश में सीखने का अनुभव प्राप्त कर सकें।’

प्रवासी पक्षियों का प्रमुख आश्रय स्थल
मंत्री ने बताया कि ‘शहीद चंद्रशेखर आजाद पक्षी विहार अंतरराष्ट्रीय महत्व का वेटलैंड है। यह राज्य के 11 रामसर स्थलों में से एक है। शांत एवं हरे-भरे वातावरण में स्थित यह पक्षी विहार पक्षी प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षक स्थल है। सर्दियों के मौसम में यह विभिन्न प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों का प्रमुख आश्रय स्थल बन जाता है।’

नेचर ट्रेल्स भ्रमण..वॉच टॉवर और व्यू-शेड्स से अवलोकन 
शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने झील के किनारे विकसित नेचर ट्रेल्स पर भ्रमण किया तथा वॉच टॉवर और व्यू-शेड्स से पक्षियों एवं वन्यजीवों का अवलोकन किया। यह अनुभव न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता भी विकसित हुई।

प्रकृति से जुड़ने का अनूठा अनुभव
पक्षी विहार परिसर में प्रकृति, ज्ञान और मनोरंजन का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां इंटरप्रिटेशन सेंटर ने विद्यार्थियों को जैव-विविधता की रोचक जानकारी से अवगत कराया। वहीं, कैफेटेरिया ने भ्रमण को नया आयाम दिया। इस दौरान बच्चों के उत्साह और खिलखिलाहट से पार्क गूंज उठा। शैक्षणिक भ्रमण के दौरान छात्र-छात्राओं ने प्रकृति से जुड़ने का अनूठा अनुभव प्राप्त किया।

भावी पीढ़ी को प्रकृति से जोड़ने का प्रयास- मंत्री 
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘उत्तर प्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड का प्रयास है कि आने वाली पीढ़ी को प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा जाए। इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों में जागरूकता, जिम्मेदारी एवं सतत पर्यटन की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए न केवल एक यादगार अनुभव रहा, बल्कि प्रकृति से सीखने और उससे जुड़ने का एक सशक्त माध्यम भी बना।’