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इजरायल की संसद में पीएम मोदी का भाषण, हमास और आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख

इजरायल की संसद Knesset में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने संबोधन देते हुए आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख दोहराया और कहा कि भारत मजबूती से इजरायल के साथ खड़ा है।

हमास हमले पर जताई संवेदना

पीएम मोदी ने 7 अक्टूबर को Hamas द्वारा किए गए आतंकी हमले में मारे गए इजरायली नागरिकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी भी कारण से आम नागरिकों की हत्या को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

उन्होंने कहा, “हम आपका दर्द समझते हैं। भारत इस कठिन समय में और आगे भी पूरे विश्वास के साथ इजरायल के साथ खड़ा है।”

26/11 का जिक्र

प्रधानमंत्री ने भारत में आतंकवाद के लंबे अनुभव का उल्लेख करते हुए 2008 Mumbai attacks (26/11) को याद किया, जिसमें इजरायली नागरिक भी मारे गए थे। उन्होंने दोहराया कि भारत की आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति है और इसमें कोई दोहरा मापदंड नहीं है।

गाजा शांति पहल पर भारत का रुख

पीएम मोदी ने गाजा शांति पहल का समर्थन करते हुए कहा कि United Nations Security Council द्वारा अनुमोदित पहल क्षेत्र में स्थायी शांति का रास्ता दिखाती है। उन्होंने कहा कि भारत बातचीत, शांति और स्थिरता के पक्ष में है और फ़िलिस्तीन मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करता है।

सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित

संसद में प्रधानमंत्री मोदी को “स्पीकर ऑफ क्नेसेट मेडल” से सम्मानित किया गया, जो क्नेसेट का सर्वोच्च सम्मान है। यह सम्मान भारत–इजरायल संबंधों को मजबूत बनाने में उनके व्यक्तिगत योगदान के लिए दिया गया।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में यह भी उल्लेख किया कि उनका जन्म (17 सितंबर 1950) उसी दिन हुआ था, जब भारत ने इजरायल को आधिकारिक मान्यता दी थी। उन्होंने कहा कि भारत और इजरायल के रिश्ते साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, इतिहास और पारस्परिक सम्मान पर आधारित हैं।

नेतन्याहू ने पीएम मोदी को कहा अपना ‘भाई’, इजरायली संसद में भारत को बताया सच्चा और महान दोस्त

प्रधानमंत्री Narendra Modi के इजरायल दौरे के दौरान इजरायल की संसद Knesset में उनका भव्य स्वागत किया गया। संसद को संबोधित करने से पहले इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने उन्हें अपना “प्रिय मित्र” ही नहीं, बल्कि “भाई” तक बताया।

नेतन्याहू का भावुक संबोधन

नेतन्याहू ने कहा कि “नरेंद्र मोदी, मेरे प्रिय दोस्त” सिर्फ औपचारिक शब्द नहीं हैं। उन्होंने आगे कहा कि कई मायनों में भारत और इजरायल भाई जैसे हैं। पिछली मुलाकात को याद करते हुए उन्होंने भूमध्य सागर के तट पर साथ बिताए पलों का जिक्र किया और दोनों देशों के रिश्तों को तकनीक और सहयोग से मजबूत बनाने की बात कही।

उन्होंने संसद में कहा, “भारत हमारा महान दोस्त है। आज हमारे साथ इजरायल का एक सच्चा मित्र और वैश्विक मंच पर एक प्रभावशाली नेता मौजूद है। प्रधानमंत्री मोदी, यरूशलम में आपका स्वागत है।”

साझा इतिहास और लोकतांत्रिक मूल्य

नेतन्याहू ने दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि लगभग 80 वर्ष पहले भारत और इजरायल ने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता पाई। दोनों देश मजबूत लोकतंत्र हैं और कठिन परिस्थितियों के बावजूद लोकतांत्रिक मूल्यों को कायम रखा है।

संसद में गूंजे ‘मोदी-मोदी’ के नारे

पीएम मोदी के संसद पहुंचने पर जोरदार स्वागत हुआ। दर्शक दीर्घा में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval और विदेश सचिव Vikram Misri भी मौजूद थे।

संसद के स्पीकर Amir Ohana ने हिंदी में स्वागत करते हुए कहा, “प्राइम मिनिस्टर मोदी, जेरूसलम में आपका स्वागत है, क्नेसेट में आपका स्वागत है।”

इस दौरे को भारत–इजरायल संबंधों के लिहाज से एक अहम पड़ाव माना जा रहा है, जिसने दोनों देशों की रणनीतिक और कूटनीतिक साझेदारी को और मजबूती दी है।

सौंदर्यीकरण से संवर रहा 87 साल पुराना रविदास मंदिर, बदलेगा लखनऊ का धार्मिक नक्शा

  • 80.27 लाख रुपए की धनराशि से रविदास मंदिर का हो रहा पर्यटन विकास और सौंदर्यीकरण
  • बारा बिरवा रविदास मंदिर का कायाकल्प, सोलर प्लांट व डॉरमेट्री से बढ़ेगा धार्मिक पर्यटन
  • समरसता के प्रतीक स्थलों के साथ हर वर्ग के तीर्थ स्थलों का हो रहा पर्यटन विकास

लखनऊ, 25 फरवरी 2026: राजधानी लखनऊ के कानपुर रोड स्थित बारा बिरवा का प्रसिद्ध रविदास मंदिर अब भव्य और आधुनिक स्वरूप में नजर आएगा। श्रद्धालुओं की सुविधाओं और बढ़ते पर्यटन संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने मंदिर के व्यापक पर्यटन विकास एवं सौंदर्यीकरण का खाका तैयार किया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत 80.27 लाख रुपए व्यय किए जाएंगे, जिनमें से 60 लाख रुपए की प्रथम किस्त जारी कर विकास कार्यों को गति दे दी गई है।

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘मंदिर परिसर को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को स्वच्छ, सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण उपलब्ध हो सके। परियोजना अंतर्गत परिसर में अत्याधुनिक सार्वजनिक शौचालय का निर्माण किया जाएगा, जिसमें सिविल, प्लंबिंग और फायर सेफ्टी से जुड़े सभी आवश्यक कार्य शामिल होंगे। साथ ही, यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डॉरमेट्री सहित सुविधा संपन्न टूरिस्ट रेस्ट रूम का निर्माण भी होगा। यह पहल न केवल श्रद्धालुओं की सुविधाओं को सुदृढ़ करेगी, बल्कि लखनऊ की धार्मिक पर्यटन छवि को भी नई पहचान देगी।’

रविदास मंदिर में आधुनिक सुविधाओं की पहल
श्रद्धालुओं को सुगम और सुव्यवस्थित दर्शन अनुभव प्रदान करने के लिए मंदिर परिसर में अलग-अलग स्थानों पर दिशा सूचक साइन बोर्ड लगाए जाएंगे, ताकि बाहर से आने वाले भक्तों को मंदिर के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो। ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाते हुए 10 किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल भी स्थापित किया जाएगा, जिससे बिजली व्यवस्था सुदृढ़ होगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पर्याप्त संख्या में बेंच तथा स्वच्छता सुनिश्चित करने हेतु डस्टबिन की समुचित व्यवस्था की जाएगी, जिससे परिसर साफ-सुथरा और सुव्यवस्थित बना रहे।

सुनियोजित ढंग से पूर्ण होगी परियोजना- मंत्री
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘लखनऊ के बारा बिरवा स्थित रविदास मंदिर धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक चेतना और समरसता का भी प्रतीक है। मंदिर के पर्यटन विकास का कार्य प्रगति पर है। इसे आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर आगंतुकों के लिए अधिक सुगम और आकर्षक बनाया जा रहा है। प्रदेश सरकार संत परंपरा से जुड़े पवित्र स्थलों के संरक्षण और उनके पर्यटन विकास के लिए प्रतिबद्ध है। विभागीय प्रयास है कि उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान मिल सके। यह परियोजना समयबद्ध और सुनियोजित ढंग से पूर्ण की जाएगी।’

संत शिरोमणि की स्मृतियों से जुड़ा मंदिर
संत शिरोमणि गुरु रविदास की पावन स्मृतियों से जुड़ा यह मंदिर आज आस्था, समरसता और सामाजिक चेतना का केंद्र बन चुका है। संत रविदास सेवा समिति के सुचारू संचालन में यहां वर्ष भर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है। हर वर्ष रविदास जयंती के अवसर पर भव्य आयोजन क्षेत्र को भक्तिमय बना देता है। संत रविदास में गहरी आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और बढ़ती संख्या को देखते हुए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा यहां समग्र पर्यटन विकास कार्य तेजी से संचालित किए जा रहे हैं।

‘दंगल’ की बबीता बनने से पहले क्या करती थीं सान्या मल्होत्रा? जानें दिल्ली से मुंबई तक का सफर

‘दंगल’ में बबीता फोगाट का किरदार निभाकर पहचान बनाने वाली सान्या मल्होत्रा आज इंडस्ट्री का जाना-पहचाना चेहरा हैं। 25 फरवरी 1992 को दिल्ली में जन्मीं सान्या ने अपनी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई राजधानी में ही पूरी की। लेकिन फिल्मों में आने से पहले उनका सपना कुछ और था।


🎬 एक्टिंग नहीं, डांस था पहला प्यार

सान्या मल्होत्रा एक ट्रेंड बैले और कंटेम्पररी डांसर हैं। उन्होंने एक्टिंग से पहले डांस में करियर बनाने की कोशिश की। वह पॉपुलर रियलिटी शो डांस इंडिया डांस में भी नजर आई थीं। हालांकि वह टॉप 100 तक ही पहुंच सकीं।

इसके बाद उन्होंने मुंबई का रुख किया। यहां उन्होंने ऑडिशन देना शुरू किया और साथ ही कैमरा पर्सन्स को असिस्ट भी किया।


🌟 मुकेश छाबड़ा ने दिया बड़ा मौका

मुंबई में कुछ विज्ञापनों में काम करने के दौरान मशहूर कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा की नजर उन पर पड़ी। यहीं से सान्या के करियर को नई दिशा मिली।

फिर निर्देशक नितेश तिवारी ने उन्हें फिल्म दंगल के लिए चुन लिया। यह उनकी डेब्यू फिल्म थी, जिसमें उन्होंने बबीता फोगाट का किरदार निभाया। फिल्म में आमिर खान भी मुख्य भूमिका में थे।

दिलचस्प बात यह है कि ‘दंगल’ के बाद भी सान्या ने फिल्म सीक्रेट सुपरस्टार के गाने ‘सेक्सी बलिये’ को कोरियोग्राफ किया था।


🎥 सान्या का फिल्मी सफर

‘दंगल’ के बाद सान्या ने लगातार अलग-अलग किरदारों से दर्शकों का दिल जीता। उनकी प्रमुख फिल्में हैं:

  • पटाखा
  • बधाई हो
  • शकुंतला देवी
  • लूडो
  • पगलैट
  • मीनाक्षी सुंदरेशंवर
  • लव होस्टल
  • मिसेज

आने वाले समय में वह फिल्म बंदर में नजर आएंगी, जिसका निर्देशन अनुराग कश्यप कर रहे हैं। फिल्म में बॉबी देओल भी अहम भूमिका में होंगे।


दिल्ली की एक ट्रेंड डांसर से बॉलीवुड की दमदार एक्ट्रेस बनने तक का सान्या मल्होत्रा का सफर मेहनत, लगन और लगातार सीखते रहने की मिसाल है।

सर्वाइकल कैंसर रोकथाम की दिशा में बड़ा फैसला: 14 साल की बेटियों को मुफ्त HPV टीका

महिलाओं की सेहत को सुरक्षित बनाने की दिशा में भारत सरकार ने एक अहम पहल की है। देशभर में 14 साल की लड़कियों को मुफ्त HPV वैक्सीन लगाने का अभियान शुरू किया जा रहा है। यह कदम सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए उठाया गया है, जो भारत में महिलाओं के बीच तेजी से बढ़ता स्वास्थ्य खतरा बना हुआ है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, हर साल करीब 1.15 करोड़ लड़कियां 14 वर्ष की आयु में पहुंचती हैं, जिन्हें इस राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत कवर करने की योजना है।


भारत में सर्वाइकल कैंसर की स्थिति

भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामलों की वैश्विक हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत है। अनुमान है कि हर साल करीब 80 हजार नए मामले सामने आते हैं और 42 हजार से ज्यादा महिलाओं की मौत इस बीमारी से हो जाती है।

इस कैंसर के लगभग सभी मामलों के पीछे ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) का लगातार बना रहने वाला संक्रमण जिम्मेदार होता है। खासकर HPV के टाइप 16 और 18 को उच्च जोखिम वाला माना जाता है, जो अधिकांश मामलों से जुड़े हैं।


क्वाड्रिवेलेंट वैक्सीन कैसे करती है काम?

राष्ट्रीय कार्यक्रम में इस्तेमाल की जा रही क्वाड्रिवेलेंट वैक्सीन:

  • HPV टाइप 16 और 18 से सुरक्षा देती है (जो सर्वाइकल कैंसर के प्रमुख कारण हैं)
  • HPV टाइप 6 और 11 से भी बचाव करती है (जो जननांग मस्सों का कारण बनते हैं)

डॉक्टरों के अनुसार, वायरस के संपर्क में आने से पहले वैक्सीन लगाने पर लगभग 90–97 प्रतिशत तक सुरक्षा मिल सकती है। रिसर्च बताती है कि टीकाकरण के बाद 12 से 15 साल तक मजबूत इम्यूनिटी बनी रहती है।


किन आयु वर्ग के लिए है वैक्सीन?

  • 9–14 वर्ष की लड़कियां: प्राथमिक लक्ष्य समूह
  • 15–26 वर्ष की महिलाएं: कैच-अप वैक्सीनेशन की सलाह
  • 27–45 वर्ष के पुरुष और महिलाएं: डॉक्टर की सलाह के बाद
  • 9–14 वर्ष के लड़के: संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए शामिल करने पर जोर

कमजोर इम्यून सिस्टम (जैसे HIV संक्रमित व्यक्ति) वाले लोगों को टीका लगवाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।


कितनी प्रभावी है HPV वैक्सीन?

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, HPV वैक्सीन दुनिया में सबसे ज्यादा अध्ययन की गई वैक्सीन में से एक है। जिन HPV प्रकारों को यह कवर करती है, उनके खिलाफ यह 90 प्रतिशत से अधिक प्रभावी पाई गई है।

सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में 24 घंटे निगरानी और आवश्यक चिकित्सा सहायता की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि सुरक्षा मानकों को मजबूत रखा जा सके और अभिभावकों का भरोसा बढ़े।


Disclaimer: यह जानकारी शोध अध्ययनों और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। टीकाकरण या किसी भी स्वास्थ्य निर्णय से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।