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Health News:हाथों में दिखें ये संकेत तो सतर्क हो जाएं, हो सकता है Liver Disease का शुरुआती इशारा

हमारा लिवर शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह खून को डिटॉक्स करने, पाचन में मदद करने और हार्मोन संतुलन बनाए रखने जैसे कई जरूरी काम करता है। लेकिन जब लिवर में समस्या शुरू होती है, तो इसके लक्षण हमेशा तुरंत स्पष्ट नहीं होते। कई बार इसके शुरुआती संकेत हमारे हाथों में दिखाई देने लगते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, हाथों की त्वचा, नाखून और उंगलियों में कुछ बदलाव लिवर से जुड़ी बीमारियों जैसे Fatty Liver Disease, Hepatitis और Cirrhosis का संकेत हो सकते हैं।


1. हथेलियों का लाल होना

अगर हथेलियां खासकर अंगूठे और छोटी उंगली के पास असामान्य रूप से लाल दिखें, तो इसे पामर एरिथेमा कहा जाता है। यह तब हो सकता है जब लिवर ठीक से काम नहीं कर पाता और शरीर में हार्मोन का स्तर असंतुलित हो जाता है।


2. उंगलियों का मुड़ना

कुछ लोगों में हथेली के नीचे की त्वचा मोटी होकर उंगलियों को अंदर की ओर मोड़ने लगती है। इस स्थिति को Dupuytren’s Contracture कहा जाता है। यह लंबे समय से चल रही लिवर बीमारी या अधिक शराब सेवन से जुड़ी हो सकती है।


3. नाखूनों का सफेद पड़ना

अगर नाखून लगभग सफेद दिखने लगें और किनारे पर हल्की गुलाबी पट्टी नजर आए, तो यह टेरीज नेल्स का संकेत हो सकता है। यह अक्सर लिवर सिरोसिस में खून के प्रवाह और प्रोटीन स्तर में बदलाव की वजह से होता है।


4. उंगलियों के सिरे का उभरना

कभी-कभी उंगलियों के सिरे गोल और उभरे हुए दिखाई देने लगते हैं, जिसे Nail Clubbing कहा जाता है। यह आमतौर पर फेफड़ों और दिल की बीमारियों से जुड़ा होता है, लेकिन लंबे समय तक लिवर की समस्या में भी दिख सकता है।


5. हाथों का कांपना

अगर हाथ फैलाने पर कलाई या उंगलियों में अचानक झटके जैसी हरकत हो, तो इसे Asterixis कहा जाता है। यह लिवर की गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है, जब शरीर में जमा टॉक्सिन दिमाग को प्रभावित करने लगते हैं।


6. हथेलियों में लगातार खुजली

अगर हथेलियों और पैरों के तलवों में बिना किसी दाने के लगातार खुजली हो, तो यह भी लिवर से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। यह स्थिति तब होती है जब शरीर में पित्त का प्रवाह सही तरीके से नहीं हो पाता।


✅ कब डॉक्टर से मिलें?
अगर हाथों में ऐसे बदलाव लंबे समय तक दिखाई दें या इनके साथ थकान, पीलिया, भूख कम लगना या पेट में सूजन जैसे लक्षण भी हों, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। समय पर पहचान और इलाज से लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।


डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

हॉलीवुड स्टार कैरेन गिलन का ‘शीला की जवानी’ पर डांस वायरल, वीडियो ने सोशल मीडिया पर मचाया तहलका

साल 2010 में आई फिल्म ‘तीस मार खान’ को एक दशक से भी ज्यादा का समय हो गया है. लेकिन इस फिल्म का और इसके गानों का क्रेज अब तक भी खत्म नहीं हुआ है. खासतौर से बात जब आए कैटरीना कैफ के गाने ‘शीला की जवानी’ की, तब तो कोई भी खुद को थिरकने से नहीं रो पाता है. ऐसे में हाल ही मं एक हॉलीवुड एक्ट्रेस ‘शीला की जवानी’ पर डांस करती नजर आई हैं. जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

कैरेन गिलन ने किया ‘शीला की जवानी’ पर डांस
ये हॉलीवुड एक्ट्रेस कैरेन गिलन हैं, जिनको हमने ‘जुमांजी’ फिल्म में देखा है. कैरेन का हाल ही में एक वीडियो x (ट्विटर) पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में वो ‘शीला की जवानी’ गाने पर जमकर डांस कर रही हैं. उनके डांस मूव्स के साथ ये गाना और भी अच्छा लग रह है. इस वीडियो को देख सोशल मीडिया यूजर्स भी हैरान हो रहे हैं.

यूजर्स कर रहे कमेंट
इस वीडियो पर सोशल मीडिया यूजर्स भी खूब कमेंट्स कर रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, ‘कैरेन गिलन शीला की जवानी पर वाइब करती हुई मेरी 2026 की लिस्ट में नहीं थीं.’ एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘ये आज पूरे दिन की सबसे कूल चीज है.’ तो वहीं एक और यूजर ने लिखा, ‘फराह खान और सनिधि चौहान की तरह ही आप भी आइकन हो.’ इसी तरह से कई सारे कमेंट् और भी वीडियोज में आ रहे हैं.

‘शीला की जवानी’ के बारे में
बता दें कि ‘शीला की जवानी’ साल 2010 में रिलीज हुई फिल्म ‘तीस मार खान’ का गाना है. इस गाने में कैटरीना कैफ नजर आई थीं. गाने को सुनिधि चौहान और विशाल ददलानी ने गाया था. इस गाने की कोरियोग्राफी फराह खान ने की थी. तो वहीं फिल्म में अक्षय कुमार, अक्षय खन्ना, कैटरीना कैफ, अपरा मेहता, अली असगर, मुरली शर्मा, रघु राम, आर्यन बब्बर नजर आए थे. 

रूसी तेल खरीद पर 30 दिन की छूट को लेकर खरगे का हमला, ट्रंप को बताया तानाशाह और मोदी सरकार पर उठाए सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका के फैसले पर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump को तानाशाह बताते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi पर भी तीखा हमला बोला।

कर्नाटक के चित्तपुर में करीब 1069 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का उद्घाटन करने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए खरगे ने कहा कि भारत सरकार ने ईरान से जुड़े मौजूदा संघर्ष के बीच अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को अमेरिका के सामने झुका दिया है।

ट्रंप तानाशाह, मोदी उनके गुलाम: खरगे

सभा में बोलते हुए खरगे ने कहा कि ट्रंप तानाशाह की तरह व्यवहार कर रहे हैं और मोदी उनके दबाव में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भारतीय रिफाइनरियों को पहले से ट्रांजिट में मौजूद रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट दी है, जो यह दिखाता है कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के बजाय अमेरिकी दबाव में फैसले ले रहा है।

उन्होंने लोगों से सवाल करते हुए कहा कि कांग्रेस ने देश को अंग्रेजों से आजादी दिलाई थी, लेकिन क्या आज देश को फिर से किसी के दबाव में लाने के लिए सत्ता में आया गया है?

भारत सरकार ने आरोपों को किया खारिज

अमेरिकी अधिकारियों की ओर से यह कहा गया था कि पश्चिम एशिया के संकट के बीच भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अनुमति दी गई है। हालांकि भारत सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए किसी भी देश से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। यह छूट केवल सप्लाई चेन में आने वाली संभावित रुकावट को दूर करने के लिए दी गई है।

ईरान के सुप्रीम लीडर की हत्या पर भी उठाए सवाल

खरगे ने Ali Khamenei की हत्या को लेकर भी अमेरिका की आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसी स्वतंत्र देश के नेता को निशाना बनाना वैश्विक शांति के लिए खतरा बन सकता है। अगर किसी देश का शीर्ष नेता मारा जाता है तो इससे दुनिया की स्थिरता और सुरक्षा दोनों पर असर पड़ सकता है।

विदेश नीति और ट्रेड डील पर भी सरकार को घेरा

कांग्रेस अध्यक्ष ने अमेरिका के साथ हुई व्यापारिक समझौतों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि मौजूदा सरकार की विदेश नीति के कारण भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा कमजोर हुई है। उन्होंने याद दिलाया कि Jawaharlal Nehru के नेतृत्व में भारत गुट निरपेक्ष आंदोलन के जरिए विश्व शांति और स्वतंत्र विदेश नीति का मजबूत समर्थक रहा है।

‘द केरल स्टोरी 2’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा, दूसरे रविवार की कमाई ने सबको चौंकाया

अदिति भाटिया, ऐश्वर्या ओझा और उल्का गुप्ता की फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड’ को रिलीज से पहले कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। विरोध प्रदर्शन और कानूनी विवादों के बावजूद, फिल्म ने साल 2023 में आई अपनी पहली किस्त की तरह ही रिलीज से पहले काफी उतार-चढ़ाव देखे। हालांकि इन सबके बावजूद फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी पकड़ बनाई और दूसरे वीकेंड पर शानदार प्रदर्शन किया। आइए जानते हैं कि रिलीज के 10वें दिन यानी दूसरे रविवार को फिल्म ने कितना कलेक्शन किया।

10वें दिन की कमाई

फिल्म की शुरुआत भले ही धीमी रही हो, लेकिन बाद में इसकी कमाई में तेजी देखने को मिली। पहले हफ्ते में अच्छी कमाई करने के बाद फिल्म ने दूसरे शनिवार तक अपना लगभग 28 करोड़ रुपये का बजट भी वसूल कर लिया। इसी के साथ यह फिल्म ‘बॉर्डर 2’ के बाद साल 2026 की दूसरी सफल फिल्म बन गई और सुरक्षित जोन में पहुंच गई।

दिलचस्प बात यह रही कि उसी दिन भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल का असर भी फिल्म की कमाई पर ज्यादा नहीं पड़ा।

अगर कलेक्शन की बात करें तो फिल्म ने पहले हफ्ते में 22.9 करोड़ रुपये की कमाई की थी। इसके बाद आठवें दिन 2.75 करोड़ रुपये और नौवें दिन करीब 3.85 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म ने रिलीज के 10वें दिन यानी दूसरे रविवार को लगभग 3.18 करोड़ रुपये की कमाई की। इस तरह 10 दिनों में फिल्म की कुल कमाई करीब 32.68 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

‘इक्कीस’ के कलेक्शन को दे सकती है टक्कर

‘द केरल स्टोरी 2’ अब साल 2026 की दूसरी सफल फिल्म बन चुकी है। साथ ही यह फिल्म साल की चौथी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली बॉलीवुड फिल्म बनने के लिए ‘इक्कीस’ के 36.25 करोड़ रुपये के लाइफटाइम कलेक्शन को पीछे छोड़ने की ओर बढ़ रही है। उम्मीद की जा रही है कि फिल्म दूसरे सोमवार या मंगलवार तक यह आंकड़ा पार कर सकती है।

फिल्म हुई ऑफिशियली सफल

विपुल अमृतलाल शाह के निर्देशन में बनी इस फिल्म का बजट करीब 28 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। महज 9 दिनों में फिल्म ने अपना पूरा बजट निकाल लिया और भारतीय बॉक्स ऑफिस पर इसे सफल माना जा रहा है। हालांकि ‘हिट’ का दर्जा पाने के लिए फिल्म को लगभग 56 करोड़ रुपये कमाने होंगे।

अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में ‘धुरंधर 2’ की रिलीज के बीच क्या ‘द केरल स्टोरी 2’ यह मुकाम हासिल कर पाती है या नहीं।

Health News:सिर्फ खूबसूरती नहीं, महिलाओं के श्रृंगार में छिपा है हार्मोनल बैलेंस का आयुर्वेदिक रहस्य

महिलाओं को सजना-संवरना हमेशा से पसंद रहा है। त्योहार हो, शादी हो या कोई खास मौका—बिंदी, काजल, चूड़ियां और गहने महिलाओं की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि पारंपरिक श्रृंगार सिर्फ सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि सेहत से भी जुड़ा हुआ माना जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार महिलाओं के कई पारंपरिक श्रृंगार ऐसे हैं जो शरीर के संतुलन और मानसिक स्थिति पर सकारात्मक असर डाल सकते हैं। माना जाता है कि ये चीजें नर्वस सिस्टम, शरीर की गर्मी और शरीर की ऊर्जा के संतुलन को बनाए रखने में मदद करती हैं, जिससे हार्मोनल हेल्थ बेहतर हो सकती है।

बिंदी और कुमकुम का असर

माथे के बीच में लगाई जाने वाली बिंदी या कुमकुम को आयुर्वेद में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह स्थान शरीर के उस बिंदु से जुड़ा माना जाता है जो मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन से संबंधित होता है। कहा जाता है कि इस जगह पर कुमकुम लगाने से तनाव कम हो सकता है और भावनात्मक उतार-चढ़ाव नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

काजल से मिलती है ठंडक

पारंपरिक तरीके से तैयार किया गया काजल ठंडी तासीर वाला माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार आंखें शरीर के Pitta Dosha से जुड़ी होती हैं। ऐसे में काजल लगाने से शरीर की अतिरिक्त गर्मी कम हो सकती है और सिरदर्द या चिड़चिड़ापन कम करने में मदद मिलती है।

मोती के गहनों का महत्व

मोती से बने आभूषणों को ठंडक देने वाला और मानसिक शांति बढ़ाने वाला माना जाता है। जिन महिलाओं को मूड स्विंग, चिड़चिड़ापन या शरीर में ज्यादा गर्मी महसूस होती है, उनके लिए मोती के गहने पहनना लाभकारी माना जाता है। यह Premenstrual Syndrome से जुड़े लक्षणों को कम करने में सहायक माना जाता है।

चूड़ियां और ब्लड सर्कुलेशन

चूड़ियां पहनने से कलाई पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे रक्त संचार बेहतर होने में मदद मिल सकती है। इससे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह संतुलित रहता है और हाथों की नसों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

चांदी और सोने के गहनों का असर

आयुर्वेद में माना जाता है कि नाभि के नीचे चांदी के गहने पहनने से शरीर की अतिरिक्त गर्मी कम हो सकती है और भारी रक्तस्राव जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। वहीं नाभि के ऊपर सोने के गहने पहनना शरीर को ताकत और पोषण देने वाला माना जाता है।

नथ, सिंदूर और मांग टीका का महत्व

नथ पहनने को भी पारंपरिक रूप से महिलाओं की Reproductive Health से जोड़ा जाता है। वहीं सिंदूर और मांग टीका को भावनात्मक और मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
भारतीय परंपरा में श्रृंगार सिर्फ सुंदरता बढ़ाने का माध्यम नहीं रहा, बल्कि इसे स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन से भी जोड़ा गया है। हालांकि इन मान्यताओं का आधार मुख्य रूप से आयुर्वेदिक परंपराओं और सांस्कृतिक विश्वासों पर आधारित है, इसलिए किसी भी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी होता है।