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Health News:महिलाएं कितने साल तक फ्रीज करवा सकती हैं एग्स? जानिए खर्च और पूरी प्रक्रिया

आज के समय में कई महिलाएं अपने करियर, सही पार्टनर का इंतजार या स्वास्थ्य कारणों की वजह से मां बनने का फैसला बाद में लेना चाहती हैं। ऐसे में एग फ्रीजिंग एक विकल्प बनकर सामने आया है। मेडिकल भाषा में इसे Oocyte Cryopreservation कहा जाता है, जिसमें महिला के अंडों को निकालकर विशेष तकनीक से फ्रीज करके सुरक्षित रखा जाता है ताकि भविष्य में In Vitro Fertilization के जरिए गर्भधारण संभव हो सके।


कौन महिलाएं एग फ्रीजिंग करा सकती हैं?

डॉक्टर आमतौर पर महिला की उम्र, स्वास्थ्य और फर्टिलिटी से जुड़े कई पहलुओं को देखकर एग फ्रीजिंग की सलाह देते हैं। यह प्रक्रिया खासतौर पर इन परिस्थितियों में उपयोगी हो सकती है:

  • करियर या व्यक्तिगत कारणों से देर से मां बनने की योजना
  • कैंसर जैसे रोग का इलाज शुरू होने से पहले
  • गंभीर एंडोमेट्रियोसिस जैसी समस्या
  • जेंडर-अफर्मिंग सर्जरी से पहले

विशेषज्ञों के अनुसार 40 साल से पहले एग फ्रीजिंग कराना बेहतर माना जाता है, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ एग्स की संख्या और गुणवत्ता कम होने लगती है।


कितने साल तक सुरक्षित रह सकते हैं फ्रीज किए गए एग्स?

आधुनिक तकनीक की मदद से फ्रीज किए गए एग्स को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। कई मामलों में वैज्ञानिकों ने 10 से 14 साल तक फ्रीज किए गए एग्स से सफल गर्भधारण भी देखा है।

कुछ देशों में इन्हें कई दशकों तक स्टोर करने की अनुमति देने पर भी चर्चा हुई है और कहीं-कहीं यह सीमा लगभग 55 साल तक भी बताई गई है, बशर्ते एग्स को सही तकनीक से संरक्षित किया गया हो।


भारत में कितना आता है खर्च?

भारत में एग फ्रीजिंग की लागत शहर और क्लिनिक के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। आमतौर पर:

  • एग निकालने और फ्रीज करने का खर्च: लगभग ₹50,000 से ₹1.5 लाख
  • हर साल स्टोरेज फीस: लगभग ₹5,000 से ₹15,000

यह लागत अस्पताल, तकनीक और डॉक्टर की विशेषज्ञता के आधार पर ज्यादा भी हो सकती है।


क्यों जरूरी है सही समय पर फैसला?

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, महिलाओं में एग्स की संख्या और गुणवत्ता कम होती जाती है। आमतौर पर 45–55 साल की उम्र के बीच महिलाओं में मेनोपॉज हो जाता है और एग्स बनना बंद हो जाते हैं। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर कोई महिला भविष्य के लिए एग फ्रीजिंग पर विचार कर रही है तो कम उम्र में यह प्रक्रिया ज्यादा सफल मानी जाती है।


डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी मेडिकल निर्णय से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

Sports News:‘मेरे लिए विश्व कप जीतना…’ Hardik Pandya का बयान हुआ वायरल

टी20 विश्व कप 2026 जीतने के बाद भारतीय ऑलराउंडर Hardik Pandya का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने कहा कि लगातार दूसरा टी20 विश्व कप जीतना उनके लिए किसी व्यक्तिगत वादे को पूरा करने जैसा है और टीम इंडिया की सफलता की यह सिर्फ शुरुआत है।


खुद से किया वादा हुआ पूरा

पंड्या ने बताया कि ICC Men’s T20 World Cup 2024 में बारबाडोस में मिली जीत के बाद उन्होंने खुद से एक वादा किया था।

उन्होंने कहा,

“2024 में जीत के बाद मैंने खुद से वादा किया था कि मैं जिस भी टूर्नामेंट में खेलूंगा, उसे जीतने के लिए खेलूंगा और ट्रॉफी उठाऊंगा। अहमदाबाद में न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली जीत इस बात का सबूत है कि मेरा वह वादा सच हो गया है। और यह तो बस शुरुआत है।”


मुश्किल दौर से की जोरदार वापसी

32 वर्षीय पंड्या ने यह भी बताया कि 2024 विश्व कप से पहले उनका व्यक्तिगत समय काफी कठिन रहा था।

उन्होंने कहा कि उस समय कई चीजें उनके मुताबिक नहीं हो रही थीं, लेकिन उन्होंने खुद से मजबूत वापसी करने का संकल्प लिया। उसी जज्बे के साथ उन्होंने टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया और टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।


बल्ले और गेंद दोनों से दिखाया दम

पूरे टूर्नामेंट में पंड्या का प्रदर्शन शानदार रहा।

  • दो अर्धशतक लगाए
  • जरूरत पड़ने पर महत्वपूर्ण गेंदबाजी स्पैल डाले
  • कुल 9 विकेट अपने नाम किए

पिछले चरण में उन्होंने 7.64 की इकॉनमी से 11 विकेट लिए और लगभग 48 की औसत से 144 रन बनाए।


“देश के लिए ट्रॉफी जीतना ही मेरा लक्ष्य”

पंड्या ने कहा कि वह क्रिकेट सिर्फ इसलिए खेलते हैं ताकि भारत के लिए अच्छा कर सकें और ट्रॉफी जीत सकें।

उनके मुताबिक,

“मैं भारत के लिए जितनी भी ट्रॉफियां संभव हों, सब जीतना चाहता हूं।”


इतिहास रचने वाली टीम इंडिया

भारत ने इस जीत के साथ टी20 विश्व कप का खिताब बरकरार रखने का कारनामा किया और ऐसा करने वाली पहली टीम बन गई।

इससे पहले भारत ने ICC Men’s T20 World Cup 2007 में पहला खिताब जीता था और अब टीम के नाम कुल तीन टी20 विश्व कप ट्रॉफियां हो चुकी हैं।

मिडिल ईस्ट तनाव का असर: लंदन से मुंबई जा रही इंडिगो फ्लाइट काहिरा डायवर्ट, एयरपोर्ट पर फंसे यात्री

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी पड़ने लगा है। IndiGo की लंदन से मुंबई आने वाली फ्लाइट 6E2 को रास्ते में डायवर्ट कर मिस्र की राजधानी काहिरा में उतारना पड़ा।

यह फ्लाइट Heathrow Airport से 8 मार्च की रात रवाना हुई थी और इसे 9 मार्च की सुबह Chhatrapati Shivaji Maharaj International Airport पहुंचना था। लेकिन मध्य पूर्व में जारी तनाव और कुछ हवाई क्षेत्रों के बंद होने के कारण विमान को रास्ते में ही मोड़कर Cairo International Airport पर उतारना पड़ा।

वीजा न होने से एयरपोर्ट पर ही रुके यात्री

काहिरा पहुंचने के बाद विमान में सवार भारतीय यात्रियों को कई घंटों तक एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ा। यात्रियों में छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे।

ज्यादातर यात्रियों के पास मिस्र का वीजा नहीं था, इसलिए उन्हें एयरपोर्ट से बाहर जाने की अनुमति नहीं मिल सकी और उन्हें टर्मिनल के अंदर ही रुकना पड़ा।


FDTL नियम भी बने देरी की वजह

एयरलाइन सूत्रों के मुताबिक देरी की एक बड़ी वजह FDTL (Flight Duty Time Limitation) नियम भी है।

अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के अनुसार पायलट और केबिन क्रू एक तय समय से अधिक लगातार ड्यूटी नहीं कर सकते। काहिरा पहुंचने तक क्रू की ड्यूटी अवधि पूरी हो चुकी थी, इसलिए विमान तुरंत आगे की उड़ान नहीं भर सका।


सोशल मीडिया पर यात्रियों की शिकायतें

कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर बताया कि लंबी देरी और अनिश्चितता के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

एयरलाइन के अनुसार क्रू को जरूरी आराम (Crew Rest) देने के बाद फ्लाइट को फिर से मुंबई के लिए रवाना किया जाएगा और यह 10 मार्च को भारत पहुंच सकती है।


✈️ क्यों बदल रहे हैं फ्लाइट रूट?
हाल के दिनों में मध्य पूर्व के कई हिस्सों में तनाव और कुछ देशों के हवाई क्षेत्र में पाबंदियों के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के रूट बदले जा रहे हैं। इसका असर कई एयरलाइनों के संचालन पर पड़ रहा है।

‘मां ने अकेले ही पाला-पोसा…’ Amandeep Sidhu ने सुनाई अपने संघर्षभरे बचपन की कहानी

टीवी और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े कलाकार अक्सर अपने संघर्ष और सफलता की कहानियां साझा करते हैं। इसी कड़ी में टीवी एक्ट्रेस Amandeep Sidhu ने भी अपने बचपन और परिवार से जुड़ी भावुक यादें साझा की हैं। उन्होंने बताया कि उनकी जिंदगी में सबसे बड़ी प्रेरणा उनकी मां रही हैं, जिन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में पूरे परिवार को संभाला।


बचपन में मां ने संभाली सारी जिम्मेदारी

टीवी शो Ganga Mai Ki Betiyan में स्नेहा का किरदार निभा रहीं अमनदीप सिद्धू ने कहा कि उनकी मां ने उन्हें और उनके दो भाई-बहनों को दिल्ली में अकेले ही पाला-पोसा।

उन्होंने बताया कि उस समय उनके पिता काम के सिलसिले में दुबई में रहते थे, इसलिए घर और बच्चों की सारी जिम्मेदारी उनकी मां पर ही थी।


कठिन हालात में भी नहीं हारी हिम्मत

अमनदीप ने कहा कि दिल्ली जैसे बड़े शहर में तीन बच्चों की परवरिश करना किसी भी महिला के लिए आसान नहीं होता।

इसके बावजूद उनकी मां ने हर परिस्थिति में धैर्य और हिम्मत के साथ परिवार को संभाला। उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित किया कि बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर कोई असर न पड़े।


बच्चों के सपनों के लिए त्याग

एक्ट्रेस के मुताबिक, उनकी मां ने कई बार अपने सपनों और इच्छाओं को पीछे रखकर बच्चों के सपनों को प्राथमिकता दी।

उन्होंने बच्चों को हमेशा आजादी दी कि वे अपने फैसले खुद ले सकें और अपने सपनों का पीछा कर सकें। हर कदम पर उन्होंने उनका हौसला बढ़ाया।


मां से मिलती है सबसे बड़ी प्रेरणा

अमनदीप सिद्धू ने कहा कि उनकी मां उनके जीवन की सबसे मजबूत महिला हैं और वे उनसे लगातार प्रेरणा लेती हैं।

उनके मुताबिक, कठिन परिस्थितियों में भी जिस तरह उनकी मां ने परिवार को संभाला और बच्चों को आगे बढ़ने का मौका दिया, वह हमेशा उनके लिए प्रेरणादायक रहेगा। उन्होंने मां के प्यार, त्याग और मेहनत के लिए आभार भी जताया।

सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथ फैला रहे पाकिस्तानी आतंकी संगठन, चौंकाने वाली रिपोर्ट आई सामने

इंटरनेट की दुनिया ने लोगों को जानकारी से दूर नहीं रखा है, बल्कि इसकी पहुंच को आसान बना दिया है. डिजिटल युग में सोशल मीडिया की जानकारी और खबरें बहुत तेजी से वायरल होती है. इसी को लेकर यूरेशिया रिव्यू की चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आतंकी संगठन तेजी से कट्टरपंथ फैलाने और हमलों की साजिश रचने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं. वह न सिर्फ लॉजिस्टिक नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहे हैं, बल्कि एडवांस डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. वह इन्हें हथियारों की तरह उपयोग कर रहे हैं. इस रिपोर्ट का टाइटल कट्टरपंथ फैलाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का हथियारीकरण, भारतीय उपमहाद्वीप पर मंडराता बड़ा खतरा है.

रिपोर्ट में लाल किले के पास हुए आतंकी हमले का जिक्र 

इस रिपोर्ट के मुताबिक, 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास हुए आतंकी हमले और 14 दिसंबर 2025 को ऑस्ट्रेलिया के बोंडी बीच पर हालिया हमले यह दिखाते हैं कि चरमपंथी नेटवर्क किस तरह सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर हिंसा भड़काने का काम कर रहे हैं.

रिपोर्ट में दावा- कमजोर और संवेदनशील लोगों को आतंकवाद में धकेला जा रहा

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि डिजिटल प्रोपेगेंडा, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन साइकोलॉजिकल हेरफेर के जरिए कमजोर और संवेदनशील लोगों को टेरिरिस्ट एक्टिविटी की ओर धकेलने की कोशिश की जा रही है. इन घटनाओं को लोन वुल्फ हमले के रूप में दिखाने की कोशिश की जाती है. ऐसे हमले संगठित और पूरी प्लानिंग के तहत अंजाम दिए जाते हैं. रिपोर्ट में बताया गया कि आतंकी संगठन लोगों को प्रभावित करने के लिए फेक न्यूज, प्रोपेगेंडा और नैरेटिव वॉरफेयर का इस्तेमाल कर रहे हैं. इन तरीकों से आर्थिक रूप से कमजोर और समाज से कटे हुए लोगों को धर्म, राज्य या किसी काल्पनिक एजेंडे के नाम पर उकसाया जाता है.

इसकी वजह सोशल मीडिया का उपयोग कम लागत में होता है. इससे सेंट्रलाइज स्ट्रक्चर, तेज स्पीड और वैश्विक स्तर पर पहुंच जैसे विशेषताएं इसे चरमपंथी संगठनों के लिए कैंपेन चलाने, सपोटर्स को भर्ती करने और हमलों के लिए लोगों को संगठित करने का प्रभावी माध्यम बना देती है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सोशल मीडिया आतंकवाद का मुख्य कारण न हो, लेकिन आधुनिक आतंकवाद को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.

रिपोर्ट में इस्लामिक स्टेट और सहयोगी संगठन का जिक्र 

इस रिपोर्ट में इस्लामिक स्टेट और उसके सहयोगी संगठनों की भूमिका भी जिक्र किया गया है. इराक और सीरिया में क्षेत्रीय नुकसान के बावजूद आइएस ने अपने डिजिटल ऑपरेशन मजबूत किए हैं. ऑनलाइन प्रोपेगेंडा नेटवर्क के जरिए वैचारिक प्रभाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई है. रिपोर्ट की मानें तो दक्षिण एशिया में भी चरमपंथी नेटवर्क तेजी से सक्रिय हो रहे हैं. 2024 तक आईएस के ऑनलाइन नेटवर्क भारत और बांग्लादेश जैसे देशों तक फैल गए हैं.

पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों का भी जिक्र 

इस रिपोर्ट में पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों ‘द रजिस्टेंस फ्रंट और पीपुल्स एंटी फासटिस्ट फ्रंट’ का भी उल्लेख किया है. इन पर सोशल मीडिया के जरिए प्रोपेगेंडा फैलाने का आरोप लगाया है. इसके अलावा जमात ए इस्लामी के बांग्लादेश में गहरे प्रभाव और पाकिस्तान खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े कथित समर्थन नेटवर्क का जिक्र भी किया गया है. रिपोर्ट की मानें तो रेड फोर्ट हमले से जुड़े हमलावर ऑनलाइन कंट्टरपंथ का शिकार हुए थे. जांचकर्ताओं ने इसे व्हाइट कॉलर टेररिज्म बताया है. इसमें कई लोग पढ़े लिखे भी थे.

साइबर आधारित आतंकवाद का बढ़ता खतरा 

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कैसे साइबर आधारित आतंकवाद के बढ़ते खतरे का भी जिक्र किया गया है. यहां ऑनलाइन भर्ती अभियान और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को चरमपंथी नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है. कई देशों ने ऑनलाइन चरमपंथ से निपटने के लिए कड़े कानून और नियम लागू करना शुरू कर दिया है. ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, सिंगापुर और इंडोनेशिया जैसे देशों ने इस दिशा में कदम उठाए हैं, जबकि भारत ने 2025 में ही कट्टरपंथ और आतंकी प्रोपेगेंडा फैलाने वाले 9,845 यूआरएल ब्लॉक किए.रिपोर्ट में कहा गया है कि इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सहयोग जरूरी होगा. इसके लिए मजबूत साइबर सुरक्षा ढांचे और खुफिया एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई गई है.