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‘लेबनान पर कोई समझौता नहीं’- इजरायल की ईरान को सख्त चेतावनी, ट्रंप की धमकी से बढ़ा तनाव

मिडिल ईस्ट में स्थायी शांति की कोशिशों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बनी है। यह समझौता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की शर्त से जुड़ा बताया जा रहा है। हालांकि, इसके बावजूद क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता नजर आ रहा है।

ईरान की ओर से चेतावनी दी गई है कि अगर इजरायल लेबनान में अपने हमले जारी रखता है, तो वह सीजफायर से पीछे हट सकता है। इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि हिजबुल्लाह की वजह से लेबनान इस सीजफायर समझौते का हिस्सा नहीं है।

भारत में इजरायल के राजदूत रुविन अजार ने भी स्पष्ट कहा कि लेबनान के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा। उनके अनुसार, जब तक हिजबुल्लाह का पूरी तरह से खात्मा नहीं हो जाता, तब तक इजरायल अपने सैन्य अभियान को जारी रखेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल और अमेरिका इस मुद्दे पर एक ही पेज पर हैं और उनके बीच किसी तरह का मतभेद नहीं है।

इजरायली पक्ष का कहना है कि ईरान द्वारा उठाए गए दावे बेबुनियाद हैं और अगर वह सीजफायर का पालन नहीं करता, तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। साथ ही, इजरायल ने यह भी दावा किया है कि उसने ईरान के खिलाफ कार्रवाई के जरिए उसे एक मौका दिया है।

उधर, ट्रंप ने सीजफायर के बावजूद एक सख्त आर्थिक चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि कोई देश ईरान को सैन्य सहायता या हथियार सप्लाई करता है, तो उस देश से अमेरिका को निर्यात होने वाले सभी सामानों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जाएगा। इस फैसले ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।

ट्रंप के इस बयान और सीजफायर के बाद भी जारी बयानबाज़ी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तनाव को और बढ़ा दिया है। जहां एक ओर कुछ अमेरिकी नेताओं ने इस समझौते का समर्थन किया है, वहीं कुछ ने इसे लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।

इजरायल ने अमेरिका के साथ मिलकर सीजफायर का समर्थन किया है और इस दिशा में आगे बढ़ने की बात कही है। व्हाइट हाउस के अनुसार, ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बातचीत के बाद इस समझौते को आगे बढ़ाया गया।

हालांकि, ईरान-इजरायल तनाव, लेबनान पर हमले और ट्रंप की नई आर्थिक चेतावनियों ने यह साफ कर दिया है कि फिलहाल क्षेत्र में स्थायी शांति की राह आसान नहीं है और स्थिति अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है।

Health Tips:क्या मोटे लोगों को ज्यादा विटामिन C की जरूरत होती है? नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

विटामिन C को लंबे समय से शरीर के लिए एक जरूरी पोषक तत्व माना जाता है, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत करने, सर्दी-जुकाम से बचाव और शरीर की मरम्मत में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन हाल ही में सामने आई एक नई रिसर्च के अनुसार, यह पोषक तत्व खासतौर पर अधिक वजन वाले लोगों के लिए और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।

न्यूजीलैंड के ओटागो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा की गई और Critical Reviews in Food Science and Nutrition जर्नल में प्रकाशित स्टडी में पाया गया कि जिन लोगों का वजन ज्यादा है, उन्हें सामान्य दिशानिर्देशों से अधिक विटामिन C की आवश्यकता हो सकती है। यह निष्कर्ष इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया भर में मोटापे के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और कई लोग अनजाने में विटामिन C की कमी से जूझ रहे हो सकते हैं।

विटामिन C शरीर में कई जरूरी कार्य करता है, जैसे कि टिश्यू की मरम्मत, एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करना और शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाना। इसके अलावा यह त्वचा, घाव भरने और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी आवश्यक माना जाता है।

आमतौर पर स्वास्थ्य दिशानिर्देश एक तय मात्रा की सलाह देते हैं। उदाहरण के तौर पर, न्यूजीलैंड में रोजाना लगभग 45 मिलीग्राम विटामिन C लेने की सिफारिश की जाती है, जो औसतन 70 किलोग्राम वजन वाले व्यक्ति के आधार पर तय होती है। हालांकि, शोधकर्ता Anitra Carr के अनुसार, यह “एक ही नियम सभी के लिए” वाला तरीका सही नहीं हो सकता।

स्टडी में यह भी पाया गया कि हर अतिरिक्त 10 किलोग्राम वजन के साथ शरीर को लगभग 17 से 22 मिलीग्राम अतिरिक्त विटामिन C की जरूरत पड़ सकती है। यानी जिन लोगों का वजन ज्यादा है, उन्हें अपनी जरूरत के हिसाब से इस पोषक तत्व की मात्रा बढ़ानी पड़ सकती है।

शोधकर्ताओं ने दो बड़े अध्ययनों के डेटा का विश्लेषण किया, जिनमें हजारों लोग शामिल थे। नतीजों में पाया गया कि सामान्य सिफारिशों के आधार पर तो कई लोगों में विटामिन C पर्याप्त दिखा, लेकिन जब वजन को ध्यान में रखा गया, तो केवल एक-तिहाई से आधे लोगों में ही इसकी पर्याप्त मात्रा पाई गई।

विशेषज्ञों के अनुसार, मोटापे की स्थिति में शरीर में हल्की सूजन (inflammation) बनी रहती है, जिससे विटामिन C तेजी से खर्च होता है। यही कारण है कि अधिक वजन वाले लोगों में इसकी कमी जल्दी हो सकती है।

इस कमी को पूरा करना आसान है। संतरा, कीवी, स्ट्रॉबेरी और शिमला मिर्च जैसे फल और सब्जियां विटामिन C के अच्छे स्रोत हैं। रोजाना अपने आहार में थोड़े से बदलाव करके इस पोषक तत्व की जरूरत को आसानी से पूरा किया जा सकता है।

(यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है, इसे चिकित्सीय सलाह के रूप में न लें। किसी भी बदलाव से पहले विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।)

शहबाज शरीफ की पोस्ट पर विवाद गहराया, पूर्व मेजर आदिल राजा ने लगाए गंभीर आरोप

अमेरिका-ईरान तनाव और सीजफायर से जुड़ी चर्चाओं के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की एक एक्स (X) पोस्ट को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। दावा किया जा रहा है कि उनकी यह पोस्ट, जिसे बाद में एडिट किया गया, अमेरिका द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट जैसी थी। पोस्ट में ‘ड्राफ्ट’ शब्द दिखाई देने के बाद इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है।

इस मामले पर पाकिस्तान के रिटायर्ड मेजर और पत्रकार आदिल राजा ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि पोस्ट की भाषा और उसके स्वरूप से ऐसा प्रतीत होता है कि यह अमेरिका द्वारा तैयार की गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पोस्ट को बिना पूरी तरह समझे ही साझा कर दिया गया, जिससे यह मामला सामने आया।

आदिल राजा के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम से पाकिस्तान की मौजूदा सत्ता व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं। उनका कहना है कि कई बार ऐसी गलतियां खुद ही व्यवस्था की सच्चाई उजागर कर देती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस स्थिति में पाकिस्तान की भूमिका केवल एक ‘मध्यस्थ’ की नहीं, बल्कि अमेरिका के निर्देशों का पालन करने वाले एक माध्यम की रही है।

रिटायर्ड मेजर ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान के नेतृत्व और सैन्य ढांचे के बीच निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है, और कई अहम फैसले बाहरी प्रभाव से प्रभावित हो सकते हैं। उनके अनुसार, इस तरह की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय राजनीति में पाकिस्तान की स्थिति को लेकर नए सवाल खड़े करती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में कई बार रणनीतिक और आर्थिक हित शामिल होते हैं, जिसके चलते निर्णयों में तेजी देखी जाती है। हालांकि, इन दावों को लेकर आधिकारिक स्तर पर किसी भी पक्ष की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कुल मिलाकर, शहबाज शरीफ की एक्स पोस्ट और उससे जुड़े ‘ड्राफ्ट’ विवाद ने न सिर्फ पाकिस्तान की राजनीति बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहस को जन्म दे दिया है, और आने वाले समय में इस पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।

चुनाव आयोग पर अविश्वास, दरअसल जनता के फैसले पर अविश्वास है: डॉ. राजेश्वर सिंह

लखनऊ। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठाए जा रहे सवालों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत का लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा और मजबूत लोकतंत्र है, जिसकी नींव चुनाव आयोग की पारदर्शी और निष्पक्ष कार्यप्रणाली पर आधारित है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पर अविश्वास जताना सीधे तौर पर देश की जनता के फैसले और जनादेश पर सवाल खड़ा करने जैसा है।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि वर्ष 2024 के आम चुनाव ने एक बार फिर भारतीय लोकतंत्र की ताकत को पूरी दुनिया के सामने प्रदर्शित किया है। उन्होंने बताया कि इस चुनाव में 96.88 करोड़ से अधिक मतदाता पंजीकृत थे, जबकि 10.52 लाख से अधिक मतदान केंद्र स्थापित किए गए। इसके साथ ही 64 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर लोकतंत्र को और सशक्त बनाया।

उन्होंने आगे कहा कि चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वीवीपैट (VVPAT) जैसी व्यवस्थाओं ने चुनाव प्रणाली को अधिक विश्वसनीय और पारदर्शी बनाया है। साथ ही, मजबूत निगरानी तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था के चलते चुनाव पूरी तरह शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न होते हैं।

डॉ. सिंह ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी चुनाव परिणाम उम्मीद के अनुरूप नहीं आते, तब कुछ लोग चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने लगते हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और इससे जनता के विश्वास को ठेस पहुंचती है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत में सत्ता परिवर्तन हमेशा लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत शांतिपूर्ण ढंग से होता आया है, जो चुनाव आयोग की विश्वसनीयता का सबसे बड़ा प्रमाण है। ऐसे में आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना न केवल अनुचित है, बल्कि यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने का प्रयास भी है।

अंत में डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि देश की जनता जागरूक है और अपने मताधिकार का सही उपयोग करना जानती है। इसलिए किसी भी संस्था पर अनावश्यक संदेह करने के बजाय लोकतंत्र की मजबूती के लिए सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

Health News:बिना डॉक्टर की सलाह आई ड्रॉप डालना पड़ सकता है भारी, आंखों की रोशनी पर पड़ सकता है असर

आजकल लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप और स्क्रीन के इस्तेमाल से आंखों में जलन, सूखापन और लालिमा जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के सीधे मेडिकल स्टोर से आई ड्रॉप लेकर इस्तेमाल करने लगते हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत आंखों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है और गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकती है।

आंखों से जुड़ी हर समस्या का कारण एक जैसा नहीं होता। यह एलर्जी, बैक्टीरियल या वायरल इंफेक्शन, ड्राई आई या Glaucoma जैसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकती है। बिना जांच के आई ड्रॉप इस्तेमाल करने से असली बीमारी छिप सकती है और इलाज में देरी हो सकती है।

खासतौर पर स्टेरॉयड युक्त आई ड्रॉप्स का बिना सलाह इस्तेमाल सबसे ज्यादा नुकसानदायक होता है। ये तुरंत राहत तो देते हैं, लेकिन लंबे समय तक उपयोग से आंखों का प्रेशर बढ़ सकता है, जिससे Glaucoma और Cataract (मोतियाबिंद) जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अगर आंख में पहले से कोई संक्रमण है, तो स्टेरॉयड उसे और गंभीर बना सकता है।

एंटीबायोटिक आई ड्रॉप्स का गलत इस्तेमाल भी आम है। हर बार आंख लाल होने का मतलब बैक्टीरियल इंफेक्शन नहीं होता—कई बार यह वायरल या एलर्जी की वजह से होता है। ऐसे में एंटीबायोटिक बेअसर रहती हैं और बार-बार इस्तेमाल करने से दवाओं का असर कम हो सकता है (एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस)।

रेडनेस कम करने वाले ड्रॉप्स कुछ समय के लिए राहत देते हैं, लेकिन इनके अधिक इस्तेमाल से आंखों में दोबारा ज्यादा लालिमा और सूखापन बढ़ सकता है। वहीं, आर्टिफिशियल टीयर्स को सुरक्षित माना जाता है, लेकिन अगर बार-बार इनकी जरूरत पड़ रही है, तो यह किसी अंदरूनी समस्या का संकेत हो सकता है।

खासतौर पर कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी आई ड्रॉप इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे कॉर्निया को नुकसान हो सकता है।

कब तुरंत डॉक्टर से मिलें?

  • आंखों में तेज दर्द हो
  • रोशनी चुभे या धुंधला दिखाई दे
  • आंख में चोट लगी हो
  • 2–3 दिन में समस्या ठीक न हो

डॉक्टरों का कहना है कि आंख शरीर का बेहद संवेदनशील अंग है और गलत दवा का असर सीधे नजर पर पड़ सकता है। कई आई ड्रॉप्स सिर्फ लक्षणों को दबाती हैं, बीमारी को ठीक नहीं करतीं, जिससे समस्या और बढ़ सकती है।

Disclaimer: यह जानकारी विशेषज्ञों और रिसर्च पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी दवा के इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।