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Health News:लो-रिस्क होने के बावजूद हार्ट अटैक! भारतीयों पर क्यों असरदार नहीं विदेशी मेडिकल फॉर्मूले?

भारत में दिल की बीमारियों को लेकर एक चौंकाने वाला ट्रेंड सामने आया है। हालिया अध्ययन के मुताबिक, बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी Heart Attack का शिकार हो रहे हैं, जिन्हें पहले “लो-रिस्क” माना गया था।

दिल्ली के GB Pant Hospital में किए गए इस अध्ययन में 5,000 से ज्यादा मरीजों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि पहली बार हार्ट अटैक झेलने वाले करीब 80% मरीजों को पहले हाई-रिस्क कैटेगरी में रखा ही नहीं गया था।

क्यों फेल हो रहे ग्लोबल मॉडल?
डॉक्टर आमतौर पर जिन इंटरनेशनल रिस्क कैलकुलेटर्स का इस्तेमाल करते हैं, वे भारतीयों के जोखिम को सही तरीके से पहचान नहीं पा रहे हैं। इन मॉडलों के अनुसार सिर्फ 11% से 20% मरीजों को ही हाई-रिस्क माना गया, जबकि बाद में सभी को हार्ट अटैक हुआ।

भारतीयों में अलग पैटर्न
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय मरीजों में दिल की बीमारी का पैटर्न पश्चिमी देशों से अलग है। यहां कम उम्र में ही जोखिम बढ़ जाता है। स्टडी में मरीजों की औसत उम्र करीब 54 साल पाई गई, जो चिंता का विषय है।

भारतीयों में एक खास “साउथ एशियन फेनोटाइप” देखा जाता है, जिसमें सामान्य वजन के बावजूद Diabetes और Insulin Resistance का खतरा रहता है। साथ ही कोलेस्ट्रॉल पैटर्न भी अलग होता है—HDL Cholesterol कम और ट्राइग्लिसराइड्स ज्यादा, जबकि LDL Cholesterol हमेशा अधिक नहीं होता।

छिपे हुए खतरे भी जिम्मेदार
कई लोगों में पेट के आसपास छिपी चर्बी (सेंट्रल ओबेसिटी) होती है, जो सामान्य BMI में नजर नहीं आती। इसके अलावा स्मोकिंग, तनाव और लाइफस्टाइल फैक्टर्स भी जोखिम बढ़ाते हैं।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि ये ग्लोबल मॉडल कुछ अहम फैक्टर्स को शामिल ही नहीं करते, जैसे लिपोप्रोटीन(a), ApoB, इंसुलिन रेसिस्टेंस और Chronic Kidney Disease। इसी वजह से असली खतरा छिपा रह जाता है और इलाज देर से शुरू होता है।

क्या है समाधान?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए अलग रिस्क कैलकुलेटर विकसित करना जरूरी है, जो यहां के लोगों के शरीर और लाइफस्टाइल के अनुसार सटीक आकलन कर सके।

Disclaimer:
यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

Sports Update:2 गेंद पर 2 रन भी नहीं बना सकी दिल्ली, हार के बाद क्या बोले कप्तान अक्षर पटेल?

Indian Premier League 2026 में Delhi Capitals और Gujarat Titans के बीच खेले गए मुकाबले में जबरदस्त रोमांच देखने को मिला। मैच आखिरी गेंद तक गया, लेकिन अंत में दिल्ली को बेहद करीबी हार का सामना करना पड़ा।

मैच के हीरो रहे David Miller, जिन्होंने आखिरी ओवरों में शानदार बल्लेबाजी कर टीम को जीत के करीब पहुंचाया, लेकिन अंतिम दो गेंदों पर जरूरी 2 रन नहीं बना सके। आखिरी गेंद पर रन लेने की कोशिश में रनआउट हो गया और गुजरात ने मैच अपने नाम कर लिया।

हार के बाद कप्तान Axar Patel ने कहा कि टीम को अपनी भावनाओं पर काबू रखना होगा। उन्होंने माना कि हार से सभी निराश हैं, लेकिन टूर्नामेंट लंबा है और टीम वापसी करेगी। उन्होंने मिलर की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी पारी के बिना टीम मैच में वापसी नहीं कर पाती।

मैच के आखिरी ओवरों में समीकरण बेहद दिलचस्प था। दिल्ली को अंतिम 12 गेंदों में 36 रन चाहिए थे। मिलर ने 19वें ओवर में तेज गेंदबाज Mohammed Siraj पर आक्रमण करते हुए 23 रन बटोरे, जिससे मैच का रुख बदल गया।

आखिरी ओवर में दिल्ली को 13 रन चाहिए थे। युवा बल्लेबाज Vipraj Nigam ने चौके से शुरुआत की, लेकिन जल्दी आउट हो गए। इसके बाद मिलर ने Prasidh Krishna की गेंद पर छक्का लगाकर मैच को रोमांचक बना दिया।

आखिरी दो गेंदों पर सिर्फ 2 रन की जरूरत थी, लेकिन मिलर ने एक गेंद पर सिंगल लेने से मना कर दिया और अंतिम गेंद पर रन लेने के प्रयास में Kuldeep Yadav रनआउट हो गए। विकेटकीपर Jos Buttler की फुर्ती ने गुजरात को यादगार जीत दिला दी।

इस रोमांचक मुकाबले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि क्रिकेट में आखिरी गेंद तक कुछ भी संभव है।

Health Tips:सिर्फ प्यास लगने पर पानी पीना पड़ सकता है भारी, किडनी पर बढ़ता है खतरा

अक्सर लोग तभी पानी पीते हैं जब उन्हें प्यास लगती है, लेकिन यह आदत किडनी की सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकती है। हमारी Kidneys शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने, खून को साफ रखने और तरल संतुलन बनाए रखने का काम करती हैं। ऐसे में पर्याप्त पानी न मिलने पर इन्हें ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है।

अगर शरीर को लगातार कम पानी मिलता है, तो डिहाइड्रेशन की स्थिति बनती है और पेशाब गाढ़ा हो जाता है। इससे Kidney Stones, Urinary Tract Infection और यहां तक कि Chronic Kidney Disease का खतरा बढ़ सकता है।

पानी को लेकर आम गलतफहमियां
कई लोग सोचते हैं कि चाय, कॉफी या जूस पीना ही काफी है, लेकिन इनमें मौजूद कैफीन और शुगर शरीर से पानी की कमी बढ़ा सकते हैं। एक बड़ी गलतफहमी यह भी है कि प्यास लगे तभी पानी पीना चाहिए, जबकि प्यास लगने तक शरीर हल्का डिहाइड्रेट हो चुका होता है।

वहीं, जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी सही नहीं है। बहुत कम समय में अत्यधिक पानी पीने से खून में सोडियम का स्तर कम हो सकता है, जिसे Hyponatremia कहा जाता है। गंभीर मामलों में यह दिमाग पर असर डाल सकता है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
विशेषज्ञों के अनुसार, किडनी को संतुलित मात्रा में पानी की जरूरत होती है। बहुत कम या बहुत ज्यादा, दोनों ही नुकसान पहुंचा सकते हैं। खासकर डायबिटीज या दिल के मरीजों को तरल सेवन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

कितना पानी पीना चाहिए?
हर व्यक्ति के लिए पानी की जरूरत अलग होती है। सामान्य तौर पर महिलाओं को लगभग 2.2 लीटर और पुरुषों को करीब 3 लीटर तरल की जरूरत होती है, लेकिन यह मौसम, एक्सरसाइज और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।
पेशाब का रंग भी संकेत देता है—हल्का पीला सही हाइड्रेशन का संकेत है, जबकि गहरा रंग पानी की कमी दिखाता है।

निष्कर्ष:
सिर्फ प्यास के भरोसे पानी पीना सही नहीं है। दिनभर नियमित अंतराल पर पानी पीना किडनी को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है।

Disclaimer:
यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

Sports News:NOC विवाद में फंसे RCB के तेज गेंदबाज नुवान तुषारा, IPL 2026 में खेलने पर संकट

Nuwan Thushara इन दिनों कानूनी विवाद के चलते मुश्किल में हैं, जिससे उनका Indian Premier League 2026 में खेलना अधर में लटक गया है। उन्होंने नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) नहीं मिलने पर Sri Lanka Cricket के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

दरअसल, विदेशी खिलाड़ियों को IPL में हिस्सा लेने के लिए अपने देश के क्रिकेट बोर्ड से NOC लेना अनिवार्य होता है। तुषारा को 2024 और 2025 सीजन में यह अनुमति मिल चुकी थी और वे Royal Challengers Bengaluru के लिए खेल चुके हैं। लेकिन इस बार उन्हें फिटनेस मानकों का हवाला देते हुए NOC देने से इनकार कर दिया गया।

तुषारा का कहना है कि उनका सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट 31 मार्च 2026 को खत्म हो चुका है और वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहना चाहते हैं, इसलिए नया कॉन्ट्रैक्ट नहीं लेना चाहते। उन्होंने यह भी बताया कि बोर्ड पहले ही संकेत दे चुका था कि उन्हें राष्ट्रीय टीम के लिए नहीं चुना जाएगा। ऐसे में NOC न देना उनके साथ अन्याय है।

उन्होंने कोर्ट में यह भी दलील दी कि अगर उन्हें समय पर NOC नहीं मिला तो Royal Challengers Bengaluru उन्हें IPL 2026 के लिए रिप्लेस कर सकती है, जिससे उन्हें आर्थिक और करियर दोनों स्तर पर नुकसान होगा।

वहीं Sri Lanka Cricket ने साफ कर दिया है कि वह तुषारा की याचिका का विरोध करेगा। इस मामले में अगली सुनवाई 23 अप्रैल को तय की गई है।

गुड और बैड कोलेस्ट्रॉल का सच: क्या दिल के खतरे का फैसला सिर्फ नंबर से होता है?

खाने-पीने की गलत आदतों के कारण आजकल कोलेस्ट्रॉल की समस्या आम होती जा रही है। आमतौर पर इसे दो हिस्सों में बांटा जाता है—LDL Cholesterol (बैड) और HDL Cholesterol (गुड)। लेकिन क्या यह समझ पूरी तरह सही है? असल सच्चाई इससे थोड़ी अलग है।

कोलेस्ट्रॉल क्या होता है?
कोलेस्ट्रॉल एक तरह का फैट है, जो शरीर में सेल, हार्मोन और विटामिन D बनाने में जरूरी भूमिका निभाता है। हमारा लिवर इसे खुद बनाता है, लेकिन ज्यादा मात्रा में यह खून की नसों में जमा होकर प्लाक बना सकता है, जिससे दिल की बीमारी और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।

क्या LDL हमेशा नुकसानदायक होता है?
LDL Cholesterol को आमतौर पर खतरनाक माना जाता है, लेकिन हर LDL एक जैसा नहीं होता। इसके छोटे और घने कण ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं, क्योंकि ये धमनियों में आसानी से जमा होकर ब्लॉकेज का कारण बनते हैं। यानी सिर्फ LDL का नंबर देखकर जोखिम तय नहीं किया जा सकता।

क्या HDL हमेशा सुरक्षित है?
HDL Cholesterol को “गुड” कहा जाता है क्योंकि यह शरीर से अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल हटाने में मदद करता है। लेकिन इसका बहुत ज्यादा स्तर भी हमेशा फायदेमंद नहीं होता, खासकर जब लाइफस्टाइल सही न हो। इसलिए सिर्फ HDL ज्यादा होना पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं है।

असली जोखिम कहां छिपा है?
कोलेस्ट्रॉल का खतरा सिर्फ LDL और HDL के नंबर पर निर्भर नहीं करता। इसमें ट्राइग्लिसराइड्स, लाइफस्टाइल, डाइट और शरीर की कुल स्थिति भी अहम भूमिका निभाते हैं। दो लोगों की रिपोर्ट समान होने पर भी उनका जोखिम अलग हो सकता है।

कैसे करें बचाव?

  • नियमित व्यायाम करें
  • संतुलित और हेल्दी डाइट लें
  • स्मोकिंग और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से बचें
  • पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करें

कुल मिलाकर, कोलेस्ट्रॉल को समझने के लिए सिर्फ “गुड” और “बैड” का लेबल काफी नहीं है। पूरी हेल्थ प्रोफाइल को ध्यान में रखना जरूरी है।