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आंबेडकर जयंती पर लखनऊ में विचार और संस्कृति का संगम, ‘नमक से पहले पानी’ ने छुआ हर दिल

  • बाबा साहेब की जयंती पर गूंजा समानता का संदेश, देशभर के कलाकारों ने मंच पर रचा इतिहास
  • संविधान निर्माता को सांस्कृतिक श्रद्धांजलि, नाटक और संगीत के जरिए जीवंत हुआ संघर्ष का सफर

लखनऊ, 14 अप्रैल 2026: राजधानी में की 135वीं जयंती के अवसर पर मंगलवार को आयोजित भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे शहर को सामाजिक जागरूकता और समरसता के रंग में रंग दिया। नाट्य मंचन, संगीत और कलात्मक प्रस्तुतियों के जरिए बाबा साहेब के जीवन संघर्ष, उनके विचार और समाज सुधार की यात्रा को इस तरह प्रस्तुत किया गया कि दर्शक भावुक भी हुए और प्रेरित भी।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा ‘नमक से पहले पानी’ नाटक, जिसने बाबा साहेब के संघर्ष, आत्मसम्मान और समाज में बराबरी के अधिकार की लड़ाई को बेहद मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। उन्नाव से आए कलाकारों की टीम में योगेंद्र पाल ने बाबा साहेब की भूमिका को इतने प्रभावशाली ढंग से निभाया कि दर्शक उनकी प्रस्तुति से गहराई से जुड़ गए।

वहीं, लखनऊ के कलाकार विपिन कुमार और उनकी टीम ने अपनी ऊर्जावान प्रस्तुति से कार्यक्रम में नई जान फूंक दी। मुंबई से आए कलाकारों के मधुर गीतों ने पूरे माहौल को भावनात्मक और प्रेरणादायक बना दिया, जिससे कार्यक्रम एक यादगार सांस्कृतिक उत्सव में बदल गया।

इस अवसर पर ने आंबेडकर जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बाबा साहेब ने भारत को एक ऐसा संविधान दिया, जो समानता, न्याय और अधिकारों की मजबूत नींव पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर के प्रयासों की बदौलत आज समाज का हर वर्ग सशक्त होकर आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश सरकार बाबा साहेब से जुड़े ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के संरक्षण और विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है, ताकि उनकी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सहेजकर पहुंचाया जा सके।

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि देशभर से आए कलाकारों की प्रस्तुतियों ने इस आयोजन को विशेष बना दिया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के विचार—समानता, शिक्षा और न्याय—आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं और इन्हें जन-जन तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के दौरान यह भी याद किया गया कि 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में जन्मे न सिर्फ भारतीय संविधान के शिल्पकार थे, बल्कि एक महान समाज सुधारक और दूरदर्शी नेता भी थे। स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री के रूप में उन्होंने जो मूलभूत सिद्धांत स्थापित किए, वे आज भी देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

आंबेडकर जयंती पर आयोजित यह सांस्कृतिक आयोजन न केवल एक श्रद्धांजलि था, बल्कि यह समाज में समानता, जागरूकता और एकता का सशक्त संदेश भी बनकर उभरा।

Health Tips:क्या फ्रूट जूस से बढ़ता है ब्लड शुगर? जानिए सच और गलतफहमी

आजकल सोशल मीडिया पर यह दावा खूब किया जा रहा है कि फ्रूट जूस पीने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है और Diabetes का खतरा हो सकता है। लेकिन सच्चाई थोड़ी संतुलित है—न पूरी तरह हां, न पूरी तरह ना।

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार फ्रूट जूस में कई जरूरी पोषक तत्व होते हैं, इसलिए इसे पूरी तरह खराब नहीं कहा जा सकता। लेकिन इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि आप इसे कितनी मात्रा में और कैसे पीते हैं।

ब्लड शुगर क्यों बढ़ सकता है?
फ्रूट जूस का ग्लाइसेमिक इंडेक्स मध्यम से ज्यादा होता है, यानी यह शरीर में जल्दी पचता है। इससे जूस पीने के बाद कुछ समय के लिए ब्लड शुगर बढ़ सकता है।

जूस बनाम साबुत फल

  • साबुत फल: इनमें फाइबर होता है, जो शुगर के अवशोषण को धीमा करता है।
  • फ्रूट जूस: जूस बनाते समय फाइबर काफी हद तक निकल जाता है, जिससे शुगर सीधे और तेजी से खून में पहुंचती है।

यही वजह है कि जूस पीने से शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है, जबकि फल खाने से ऐसा कम होता है।

क्या जूस नुकसानदायक है?
फ्रूट जूस पूरी तरह नुकसानदायक नहीं है। कई रिसर्च बताती हैं कि सीमित मात्रा में लेने पर यह सीधे तौर पर डायबिटीज का कारण नहीं बनता। समस्या तब होती है जब:

  • ज्यादा मात्रा में जूस पिया जाए
  • बार-बार पिया जाए
  • खाली पेट पिया जाए

जूस में मौजूद शुगर कैसे काम करती है?
फ्रूट जूस में प्राकृतिक शुगर—फ्रक्टोज और ग्लूकोज—होती है। ये प्रोसेस्ड ड्रिंक्स की तुलना में बेहतर होती हैं, लेकिन फाइबर की कमी के कारण ये जल्दी अवशोषित हो जाती हैं, जिससे शुगर लेवल अचानक बढ़ सकता है।

किसे सावधान रहना चाहिए?

  • डायबिटीज या प्रीडायबिटीज वाले लोग
  • वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोग
  • जिनका ब्लड शुगर जल्दी बढ़ता है

क्या करें?

  • जूस की जगह साबुत फल खाएं
  • जूस पीना हो तो कम मात्रा में लें
  • खाली पेट जूस पीने से बचें
  • बिना शक्कर मिलाए ताजा जूस ही लें

निष्कर्ष:
फ्रूट जूस खुद में खराब नहीं है, लेकिन इसका ज्यादा और गलत तरीके से सेवन ब्लड शुगर बढ़ा सकता है। संतुलन और सही समय का ध्यान रखना ही सबसे जरूरी है।

Health Update:फल-सब्जियों पर लगे स्टिकर से हो सकता है नुकसान, खरीदते समय बरतें सावधानी

खाने-पीने की चीजों को लेकर छोटी सी लापरवाही भी सेहत पर भारी पड़ सकती है। Food Safety and Standards Authority of India ने फल और सब्जियों पर लगे स्टिकर को लेकर चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि इन स्टिकर के पीछे इस्तेमाल होने वाला चिपकने वाला पदार्थ खाने योग्य नहीं होता और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

अक्सर लोग बाजार से फल या सब्जियां खरीदते समय उन पर लगे स्टिकर को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत जोखिम भरी हो सकती है। इन स्टिकर में गोंद, स्याही और अन्य रसायनों का इस्तेमाल होता है, जो शरीर के लिए सुरक्षित नहीं माने जाते।

क्या हो सकती है समस्या?
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर गलती से स्टिकर का छोटा हिस्सा शरीर में चला भी जाए तो आमतौर पर गंभीर नुकसान नहीं होता, लेकिन यह पूरी तरह सुरक्षित भी नहीं है। इससे पेट में जलन, मितली, पाचन संबंधी दिक्कत या असहजता हो सकती है। बच्चों और बुजुर्गों में यह गले में फंसने का खतरा भी बढ़ा सकता है। लंबे समय तक ऐसे रसायनों का सेवन करने से शरीर पर धीरे-धीरे नकारात्मक असर पड़ सकता है।

क्या सावधानी बरतें?

  • फल और सब्जियों को खाने से पहले अच्छी तरह धोएं
  • उन पर लगे सभी स्टिकर जरूर हटा दें
  • जरूरत हो तो फल छीलकर खाएं
  • हल्के गुनगुने पानी से सफाई करें (साबुन या केमिकल क्लीनर से बचें)
  • साफ और अलग जगह पर इन्हें स्टोर करें

विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही कुछ स्टिकर में फूड-ग्रेड गोंद इस्तेमाल होता हो, इसका मतलब यह नहीं कि उसे सीधे खाया जा सकता है। इसलिए सावधानी बरतना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।

डिस्क्लेमर:
यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी समस्या के लिए डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

ऑरेंज कैप रेस में बड़ा बदलाव, वैभव सूर्यवंशी पीछे; क्लासेन-ईशान ने मारी बाजी

Indian Premier League 2026 में ऑरेंज कैप की रेस रोमांचक होती जा रही है। Vaibhav Suryavanshi से अब यह प्रतिष्ठित कैप छिन गई है और Sunrisers Hyderabad के दो बल्लेबाज आगे निकल चुके हैं।

अब ऑरेंज कैप Heinrich Klaasen के पास है, जिन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 224 रन बना लिए हैं। वहीं टीम के कप्तान Ishan Kishan भी उनके बेहद करीब हैं।

राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मैच में ईशान किशन ने 44 गेंदों में 91 रन की विस्फोटक पारी खेली, जिससे उन्होंने ऑरेंज कैप की दौड़ में लंबी छलांग लगाई। इस सीजन में यह उनका दूसरा अर्धशतक है और अब उनके कुल 213 रन हो चुके हैं।

मैच से पहले क्लासेन 184 रन पर थे, लेकिन 30 रन बनाते ही उन्होंने Vaibhav Suryavanshi और ईशान किशन दोनों को पीछे छोड़ दिया। बाद में 40 रन की पारी खेलकर उन्होंने अपनी बढ़त और मजबूत कर ली।

ऑरेंज कैप की मौजूदा सूची इस प्रकार है:

  • 224 रन – Heinrich Klaasen (SRH)
  • 213 रन – Ishan Kishan (SRH)
  • 200 रन – Vaibhav Suryavanshi (RR)
  • 195 रन – Rajat Patidar (RCB)

गौरतलब है कि Vaibhav Suryavanshi इस मैच में प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं थे और उन्हें इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में उतारा जा सकता है। अगर उन्हें बल्लेबाजी का मौका मिलता है, तो वे फिर से ऑरेंज कैप हासिल करने की दौड़ में वापसी कर सकते हैं।

कुल मिलाकर, इस सीजन में ऑरेंज कैप की रेस बेहद करीबी और रोमांचक बनी हुई है, जहां हर मैच के साथ समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।

Health Update:थकान, पेट फूलना और जोड़ों का दर्द हो सकते हैं गंभीर संकेत, नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

अक्सर लोग शरीर में होने वाली छोटी-छोटी परेशानियों को हल्के में ले लेते हैं—जैसे थकान को तनाव समझ लेना, पेट फूलने को खानपान की समस्या मान लेना या जोड़ों के दर्द को सामान्य मानकर टाल देना। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार, ये लक्षण किसी बड़ी समस्या की शुरुआती चेतावनी भी हो सकते हैं, खासकर Autoimmune Disease से जुड़े मामलों में।

विशेषज्ञ बताते हैं कि कई बार इन बीमारियों की शुरुआत शरीर के गट यानी आंतों से होती है। गट सिर्फ पाचन का हिस्सा नहीं, बल्कि इम्यून सिस्टम का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी है, जहां शरीर की लगभग 70% इम्यून गतिविधियां होती हैं। यहां मौजूद माइक्रोबायोम—जिसमें बैक्टीरिया, वायरस और फंगस शामिल होते हैं—इम्यून सिस्टम को संतुलित रखने में मदद करता है।

जब यह संतुलन बिगड़ता है, तो समस्या शुरू होती है। Leaky Gut जैसी स्थिति में आंतों की परत कमजोर हो जाती है और हानिकारक तत्व खून में प्रवेश कर जाते हैं। इससे इम्यून सिस्टम बार-बार सक्रिय होता है, शरीर में सूजन बढ़ती है और धीरे-धीरे ऑटोइम्यून समस्याएं विकसित हो सकती हैं।

क्या हैं शुरुआती संकेत?
इन बीमारियों के लक्षण शुरुआत में बहुत सामान्य लगते हैं, जैसे:

  • लगातार थकान
  • बार-बार पेट फूलना
  • दिमाग में धुंधलापन (ब्रेन फॉग)
  • हल्का लेकिन बार-बार होने वाला जोड़ों का दर्द
  • त्वचा से जुड़ी समस्याएं

अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें या एक साथ दिखाई दें, तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

एक और कारण Molecular Mimicry भी हो सकता है, जिसमें कुछ बैक्टीरिया शरीर के टिश्यू जैसे दिखते हैं। इससे इम्यून सिस्टम भ्रमित होकर अपने ही शरीर पर हमला करने लगता है, जो आगे चलकर ऑटोइम्यून बीमारी का रूप ले सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन बीमारियों की शुरुआत हमेशा वहीं नहीं होती जहां लक्षण दिखते हैं। इसलिए अगर थकान, पाचन से जुड़ी समस्या और सूजन जैसे लक्षण लगातार बने रहें, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। समय पर पहचान होने से इन बीमारियों को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।

डिस्क्लेमर:
यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। इसे चिकित्सा सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या लक्षण के लिए डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।