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Sports Update:विराट कोहली की फिटनेस पर सवाल, वायरल वीडियो ने बढ़ाई RCB की चिंता

रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली की फिटनेस को लेकर टीम की चिंता बढ़ गई है। लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ होने वाले अगले मुकाबले से पहले उनका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे बाएं पैर में पट्टी बांधे नजर आए।

यह मुकाबला 15 अप्रैल को बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में खेला जाना है, और उससे पहले कोहली की यह स्थिति टीम मैनेजमेंट के लिए टेंशन का कारण बन गई है।

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में विराट कोहली को मैदान पर देखा गया, जहां उन्होंने न्यूजीलैंड के दिग्गज खिलाड़ी केन विलियमसन से मुलाकात की और बाद में लखनऊ सुपर जायंट्स के कप्तान ऋषभ पंत से भी बातचीत की। इस दौरान उनके बाएं पैर पर बैंडेज दिखाई दिया।

जानकारी के अनुसार, मुंबई इंडियंस के खिलाफ पिछले मैच के दौरान कोहली को टखने में हल्की चोट लगी थी। हालांकि उन्होंने उस मैच में शानदार बल्लेबाजी करते हुए अर्धशतक जड़ा था, लेकिन मैदान छोड़ते समय उन्हें असहज महसूस करते देखा गया था।

इसके बाद कोहली नेट्स में अभ्यास करते भी नजर आए, लेकिन उनके घुटने पर बैंडेज होने से उनकी फिटनेस को लेकर सवाल और बढ़ गए हैं।

हालांकि अभ्यास सत्र में उन्होंने बल्लेबाजी की, जिससे यह संकेत मिला कि वे खेलने के लिए तैयार हो सकते हैं, लेकिन अंतिम फैसला उनकी मेडिकल रिपोर्ट और मैच से पहले की स्थिति पर निर्भर करेगा।

इस सीजन में विराट कोहली का प्रदर्शन शानदार रहा है। उन्होंने अब तक 4 मैचों में 179 रन बनाए हैं और उनका औसत 59 से ज्यादा का रहा है। पिछले मैच में मुंबई इंडियंस के खिलाफ उन्होंने 50 रन की पारी खेली थी।

वहीं RCB की टीम फिलहाल पॉइंट्स टेबल में मजबूत स्थिति में है और 4 में से 3 मैच जीतकर तीसरे स्थान पर बनी हुई है। ऐसे में विराट की फिटनेस टीम के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

रोटी या चावल: सेहत के लिए कौन सा है ज्यादा फायदेमंद? जानिए सच्चाई

भारत में खाने की आदतें क्षेत्र के अनुसार काफी अलग हैं—उत्तर भारत में जहां रोटी मुख्य आहार है, वहीं दक्षिण और पूर्व भारत में चावल ज्यादा खाया जाता है। ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि सेहत के लिए रोटी बेहतर है या चावल।

विशेषज्ञों के अनुसार, इसका कोई एक सीधा जवाब नहीं है क्योंकि यह व्यक्ति की उम्र, पाचन शक्ति, जीवनशैली और शारीरिक गतिविधि पर निर्भर करता है।

चावल को हल्का और जल्दी पचने वाला अनाज माना जाता है। यह उन लोगों के लिए बेहतर हो सकता है जिनकी पाचन शक्ति कमजोर है, जैसे बुजुर्ग, बच्चे या बीमार व्यक्ति। खिचड़ी और दाल-चावल जैसे भोजन आसानी से पच जाते हैं और पेट पर ज्यादा बोझ नहीं डालते।

वहीं रोटी, यानी गेहूं से बनी रोटी, अपेक्षाकृत ज्यादा फाइबर और प्रोटीन प्रदान करती है। यह लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करती है और शरीर को धीरे-धीरे ऊर्जा देती है। इसलिए इसे अधिक शारीरिक मेहनत करने वाले लोगों के लिए उपयोगी माना जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार भी दोनों अनाजों के अलग-अलग गुण हैं—चावल शरीर को ठंडक देने वाला और हल्का माना जाता है, जबकि गेहूं अधिक ताकत और ऊर्जा देने वाला अनाज है।

आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि दोनों का प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें कैसे और किसके साथ खाया जा रहा है। जब रोटी या चावल को दाल, सब्जी और संतुलित आहार के साथ लिया जाता है, तो उनका असर शरीर पर संतुलित रहता है।

हालांकि, विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि ज्यादा प्रोसेस्ड अनाज जैसे सफेद चावल और मैदा से बचना चाहिए क्योंकि इनमें फाइबर और पोषक तत्व कम होते हैं और ये ब्लड शुगर पर असर डाल सकते हैं।

सही विकल्प के रूप में साबुत गेहूं की रोटी और बिना पॉलिश किए हुए चावल (ब्राउन राइस) ज्यादा बेहतर माने जाते हैं।

कुल मिलाकर, न रोटी पूरी तरह बेहतर है और न चावल—असली सेहत का राज संतुलित आहार और सही मात्रा में दोनों का सेवन है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ा तनाव, अमेरिका ने भारी सैन्य तैनाती के साथ नाकेबंदी का दावा किया

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में हालात और गंभीर हो गए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि उसने ईरानी बंदरगाहों के आसपास बड़े पैमाने पर नाकेबंदी अभियान शुरू किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान में 10,000 से अधिक अमेरिकी नौसैनिक, मरीन और वायुसेना के जवानों को तैनात किया गया है। इसके साथ ही एक दर्जन से ज्यादा युद्धपोत और 100 से अधिक लड़ाकू एवं निगरानी विमान भी इस ऑपरेशन का हिस्सा बताए जा रहे हैं।

CENTCOM का कहना है कि पहले 24 घंटे के दौरान किसी भी जहाज को इस क्षेत्र से होकर ईरानी बंदरगाहों तक पहुंचने की अनुमति नहीं मिली। इस दौरान 6 व्यापारिक जहाजों ने अमेरिकी निर्देशों का पालन करते हुए रास्ता बदल लिया।

अमेरिकी सेना के अनुसार, यह नाकेबंदी ईरानी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश करने या बाहर निकलने वाले सभी जहाजों पर लागू की जा रही है, चाहे वे किसी भी देश के हों। साथ ही यह भी दावा किया गया है कि गैर-ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों के लिए समुद्री मार्ग खुले रखे जा रहे हैं।

इस मिशन में एयरक्राफ्ट कैरियर, गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर, लैंडिंग शिप, निगरानी विमान, ड्रोन और रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट सहित कई तरह की सैन्य संपत्तियां शामिल हैं।

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर ईरान की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है।

Health Update:खाने से पहले पानी पीना क्यों सलाह देते हैं डॉक्टर? जानें इसके फायदे और असर

अक्सर डॉक्टर यह सलाह देते हैं कि खाना खाने से पहले पानी पीना चाहिए। यह आदत सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, खाने से पहले पानी पीने से पेट थोड़ा भर जाता है, जिससे भूख का एहसास कम हो सकता है। इससे व्यक्ति जरूरत से ज्यादा खाना खाने से बच सकता है और ओवरईटिंग की संभावना कम हो जाती है।

कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि जो लोग भोजन से पहले पानी पीते हैं, वे सामान्यतः कम कैलोरी का सेवन करते हैं। यह आदत खासकर उन लोगों के लिए मददगार हो सकती है जो वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं।

एक और कारण यह माना जाता है कि कई बार शरीर में पानी की कमी को हम भूख समझ लेते हैं। ऐसे में भोजन से पहले पानी पीने से अनावश्यक खाने से बचा जा सकता है।

हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि पानी पीने से वजन घटाने पर कोई बड़ा या जादुई असर नहीं पड़ता। शरीर द्वारा पानी को गर्म करने में बहुत कम कैलोरी खर्च होती है, इसलिए इसे वजन कम करने का प्रमुख तरीका नहीं माना जा सकता।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति मीठे या हाई-कैलोरी ड्रिंक्स की जगह साधारण पानी का सेवन करता है, तो यह निश्चित रूप से स्वास्थ्य के लिए बेहतर विकल्प है।

कुल मिलाकर, खाने से पहले पानी पीना एक अच्छी आदत हो सकती है, खासकर तब जब इससे आपकी खाने की मात्रा नियंत्रित रहती हो। लेकिन इसे वजन घटाने का अकेला उपाय नहीं माना जाना चाहिए।

ईरान संकट के बीच पाकिस्तान ने भारत की सराहना की, परमाणु सुरक्षा पर दिया बयान

मध्य पूर्व में जारी तनाव और ईरान युद्ध के बीच रूस में पाकिस्तान के राजदूत फैसल नियाज तिरमिजी ने भारत और पाकिस्तान के परमाणु सुरक्षा रिकॉर्ड की सराहना करते हुए दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग की बात कही है।

एक इंटरव्यू में पाकिस्तानी राजदूत ने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान ने लंबे समय से एक-दूसरे की परमाणु सुविधाओं पर हमला न करने की पारस्परिक समझ बनाए रखी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की परमाणु सुविधाएं सुरक्षित हैं और यह व्यवस्था क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात, खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष को देखते हुए ऐसी समझ और भी जरूरी हो जाती है। उनके अनुसार, किसी भी परमाणु ठिकाने पर हमला पूरे क्षेत्र के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है।

राजदूत ने यह भी उल्लेख किया कि हालिया क्षेत्रीय तनाव के दौरान इजरायल द्वारा परमाणु ढांचे पर संभावित हमलों की आशंका को लेकर चिंता जताई गई थी, क्योंकि इससे न केवल संबंधित देश बल्कि आसपास के क्षेत्रों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

भारत-पाक संबंधों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है। साथ ही उन्होंने रूस की मध्यस्थ भूमिका की संभावना पर भी सकारात्मक रुख दिखाया।

इसके अलावा पाकिस्तान ने यह भी इच्छा जताई कि वह ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों में शामिल होना चाहता है और इसके लिए भारत के साथ बेहतर संबंधों की आवश्यकता को भी स्वीकार किया।

हालांकि भारत की ओर से पहले भी यह स्पष्ट किया जा चुका है कि सीमा पार सैन्य तनाव को रोकने पर सहमति दोनों देशों के डीजीएमओ स्तर की सीधी बातचीत के बाद बनी थी।

कुल मिलाकर, मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के बीच पाकिस्तान की यह टिप्पणी एक कूटनीतिक नरमी और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।