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Health Update:गर्मी में क्यों बढ़ रहे हैं बुखार और पेट की बीमारियां? जानें कारण और बचाव के उपाय

अगर इन दिनों आपको बुखार, सिरदर्द और पेट से जुड़ी समस्याएं एक साथ हो रही हैं, तो यह सिर्फ आपकी परेशानी नहीं है। गर्मियों के मौसम में इस तरह की बीमारियां तेजी से बढ़ती हैं, जिनका मुख्य कारण होता है फूड और वॉटर-बोर्न इंफेक्शन।

विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी और नमी का संयोजन बैक्टीरिया और वायरस के पनपने के लिए बेहद अनुकूल माहौल तैयार करता है। ऐसे में दूषित खाना या पानी शरीर में जाते ही सबसे पहले पाचन तंत्र को प्रभावित करता है।

क्या हैं इसके लक्षण?
इन बीमारियों की शुरुआत आमतौर पर पेट से होती है। मतली, उल्टी, दस्त, पेट में दर्द, गैस और ब्लोटिंग जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यदि समय रहते ध्यान न दिया जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है।

डिहाइड्रेशन क्यों बनता है खतरनाक?
उल्टी और दस्त के कारण शरीर से पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स तेजी से बाहर निकल जाते हैं, जिससे Dehydration की समस्या हो जाती है। इसका असर सिर्फ प्यास तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बुखार, सिरदर्द, कमजोरी और चक्कर जैसी दिक्कतें भी शुरू हो सकती हैं।

किन लोगों को ज्यादा खतरा?
बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग इस मौसम में ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इसके अलावा बाहर का खाना ज्यादा खाने वाले, असुरक्षित पानी पीने वाले या ज्यादा यात्रा करने वाले लोगों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

कैसे करें बचाव?

  • हमेशा उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं
  • बाहर का खुला या कच्चा खाना खाने से बचें
  • ताजा और गर्म भोजन को प्राथमिकता दें
  • खाने से पहले और टॉयलेट के बाद हाथ जरूर धोएं
  • शरीर को हाइड्रेट रखें, जरूरत पड़ने पर ORS या नारियल पानी लें

अगर लक्षण गंभीर हो जाएं या लंबे समय तक बने रहें, तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना जरूरी है।

महत्वपूर्ण सूचना:
यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी बीमारी या लक्षण की स्थिति में विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

हॉर्मुज खुलने के बावजूद अमेरिकी सख्ती बरकरार, Donald Trump के बयान से मची हलचल

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच Iran ने Strait of Hormuz को व्यावसायिक जहाजों के लिए खोल दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर राहत की उम्मीद जगी है। यह फैसला लेबनान में लागू युद्धविराम के मद्देनजर लिया गया है और निर्धारित अवधि तक प्रभावी रहेगा।

ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने कहा कि सभी कमर्शियल जहाज तय मार्गों के जरिए इस जलमार्ग से गुजर सकेंगे। हालांकि, सुरक्षा और नियंत्रण बनाए रखने के लिए इन जहाजों को निर्धारित रूट और नियमों का पालन करना होगा।

इस फैसले का असर वैश्विक बाजारों पर भी तुरंत दिखा। तेल की कीमतों में गिरावट आई और शेयर बाजारों में तेजी देखने को मिली। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

लेकिन United States ने इस बीच कड़ा रुख बनाए रखा है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ किया कि भले ही जलमार्ग खुल गया हो, लेकिन ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि जब तक सभी शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक सैन्य दबाव कम नहीं किया जाएगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नाकेबंदी अभियान में हजारों अमेरिकी सैनिक, कई युद्धपोत और विमान तैनात हैं, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हॉर्मुज के खुलने के बावजूद जहाजों की आवाजाही सीमित और नियंत्रित रहेगी।

यह घटनाक्रम Israel और Lebanon के बीच लागू युद्धविराम के बीच सामने आया है। हालांकि फिलहाल तनाव में कुछ कमी आई है, लेकिन क्षेत्र में अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।

इस बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के संकेत भी मिले हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ जल्द बातचीत संभव है, जिससे आगे चलकर किसी समझौते की राह बन सकती है।

कुल मिलाकर, हॉर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरा कदम है, लेकिन अमेरिका की सख्ती और क्षेत्रीय तनाव के चलते स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।

जन्म से बहरेपन के इलाज में नई कामयाबी: एक इंजेक्शन से बच्चों की सुनने की क्षमता वापस आने की उम्मीद

जन्म से सुनने में असमर्थ बच्चों और युवाओं के लिए मेडिकल साइंस ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में सामने आई एक रिसर्च के अनुसार, एक खास जीन थेरेपी इंजेक्शन की मदद से जन्मजात बहरेपन के कुछ मामलों में सुनने की क्षमता काफी हद तक वापस लाई जा सकी है।

यह उपचार खास तौर पर उन मरीजों के लिए प्रभावी पाया गया है, जिनकी सुनने की समस्या OTOF जीन में बदलाव (mutation) के कारण होती है। यह जीन ओटोफरलिन प्रोटीन बनाने में मदद करता है, जो कान से दिमाग तक ध्वनि संकेत पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है। जब यह जीन ठीक से काम नहीं करता, तो आवाज कान तक पहुंचने के बावजूद मस्तिष्क तक सही संकेत नहीं जा पाती।

रिसर्च में 1 से 24 वर्ष की उम्र के 10 मरीजों पर परीक्षण किया गया। वैज्ञानिकों ने एक सुरक्षित वायरस (AAV) के जरिए OTOF जीन की स्वस्थ कॉपी को कान के अंदर एक छोटे इंजेक्शन के माध्यम से पहुंचाया। यह इंजेक्शन कॉक्लिया के निचले हिस्से में दिया गया।

सबसे उत्साहजनक बात यह रही कि सभी मरीजों में सुनने की क्षमता में सुधार देखा गया। कई मरीजों ने एक महीने के भीतर फर्क महसूस करना शुरू कर दिया, जबकि 6 महीने बाद सुनने की क्षमता में स्पष्ट सुधार दर्ज किया गया। औसतन मरीजों की सुनने की क्षमता लगभग 106 dB से सुधरकर 52 dB तक पहुंच गई।

बच्चों में इसका असर सबसे बेहतर देखा गया, विशेषकर 5 से 8 साल की उम्र के बीच। एक 7 वर्षीय बच्ची इलाज के कुछ महीनों बाद लगभग सामान्य रूप से सुनने और अपनी मां से बातचीत करने लगी।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि यह इलाज हर प्रकार के बहरेपन के लिए नहीं है। फिलहाल यह थेरेपी केवल OTOF जीन से जुड़े विशेष प्रकार के जन्मजात बहरेपन पर प्रभावी साबित हुई है। अन्य कारणों से होने वाली सुनने की समस्या के लिए अभी अलग शोध जारी है।

महत्वपूर्ण सूचना:
यह खबर वैज्ञानिक अध्ययन पर आधारित है, लेकिन इसे व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह न माना जाए। यदि किसी बच्चे में जन्म से सुनने की समस्या है, तो ENT विशेषज्ञ और जेनेटिक टेस्टिंग विशेषज्ञ से सलाह लेना आवश्यक है।

Hidden Peaks Of India: हिमालय से परे, दक्षिण भारत की ये 3 चोटियां देती हैं जन्नत जैसा एहसास

घूमने-फिरने और एडवेंचर का शौक रखने वालों के लिए भारत में सिर्फ हिमालय ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारत में भी कई ऐसी खूबसूरत चोटियां हैं जो किसी जन्नत से कम नहीं लगतीं। ट्रेकिंग और प्राकृतिक नजारों के शौकीनों के लिए ये जगहें बेहद खास मानी जाती हैं।

लोग आमतौर पर पहाड़ों की बात करते समय हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को याद करते हैं, लेकिन देश के दूसरे हिस्सों में भी ऐसी कई जगहें हैं जहां का दृश्य मन को सुकून देता है और ट्रेकिंग का अनुभव रोमांच से भर देता है।

1. कलसूबाई पीक, महाराष्ट्र
महाराष्ट्र के नासिक जिले में स्थित Kalsubai Peak राज्य की सबसे ऊंची चोटी मानी जाती है। यह लगभग 5400 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां ट्रेकिंग की शुरुआत बारी गांव से होती है और रास्ते में लोहे की सीढ़ियों के जरिए चढ़ाई करनी पड़ती है। शिखर पर पहुंचने के बाद चारों ओर फैला मनमोहक दृश्य यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

2. नेत्रावती पीक, कर्नाटक
Netravati Peak कर्नाटक की एक प्रसिद्ध ट्रेकिंग डेस्टिनेशन है। यहां पहुंचने के लिए करीब 6 किलोमीटर की ट्रेकिंग करनी होती है। रास्ते में हरियाली और पहाड़ों के शानदार दृश्य देखने को मिलते हैं, जबकि शिखर पर पहुंचकर पूरा नजारा बेहद आकर्षक और यादगार बन जाता है।

3. कोलुक्कुमलाई पीक, तमिलनाडु
Kolukkumalai Peak अपनी अद्भुत सूर्योदय दृश्य के लिए मशहूर है। यह तमिलनाडु में स्थित होने के बावजूद इसकी ट्रेकिंग की शुरुआत केरल के इडुक्की जिले से होती है। यहां सूर्योदय का नजारा देखने के लिए यात्रियों को सुबह तड़के निकलना पड़ता है, जो इस यात्रा को और भी खास बना देता है।

ये तीनों जगहें एडवेंचर और प्राकृतिक सुंदरता का बेहतरीन मिश्रण हैं, जो ट्रेकिंग प्रेमियों को एक अनोखा अनुभव प्रदान करती हैं।

कन्फर्म तत्काल टिकट पर भी मिल सकता है फुल रिफंड, Indian Railways के जरूरी नियम जानें

भारत में ट्रेन यात्रा के लिए Indian Railways सबसे लोकप्रिय माध्यमों में से एक है। कई बार यात्रियों को अचानक यात्रा करनी पड़ती है, ऐसे में तत्काल टिकट बुकिंग एक महत्वपूर्ण विकल्प बन जाता है। लेकिन अक्सर यह सवाल उठता है कि अगर कन्फर्म तत्काल टिकट कैंसिल करनी पड़े तो क्या रिफंड मिलेगा या नहीं।

दरअसल, तत्काल टिकट के रिफंड के नियम सामान्य टिकटों से अलग होते हैं। आमतौर पर यदि कोई यात्री अपनी कन्फर्म तत्काल टिकट खुद कैंसिल करता है, तो उसे रिफंड नहीं मिलता। यह रेलवे का स्पष्ट नियम है।

हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में कन्फर्म तत्काल टिकट पर भी 100% रिफंड मिल सकता है। इसके लिए तीन अहम नियम समझना जरूरी है:

1. ट्रेन रद्द होने पर पूरा रिफंड
अगर किसी कारण से ट्रेन ही रद्द हो जाती है, तो यात्रियों को पूरा पैसा वापस मिलता है, चाहे टिकट तत्काल ही क्यों न हो।

2. ट्रेन 3 घंटे या उससे ज्यादा लेट हो
यदि आपकी ट्रेन निर्धारित समय से 3 घंटे या उससे अधिक देरी से चलती है और आप यात्रा नहीं करते, तो टिकट कैंसिल करने पर पूरा रिफंड मिल सकता है।

3. रेलवे की ओर से टिकट कैंसिल या बदलाव
अगर रेलवे खुद टिकट में कोई बदलाव करता है या किसी तकनीकी कारण से टिकट कैंसिल होती है, तो भी यात्री को पूरा रिफंड दिया जाता है।

इसके अलावा, अगर तत्काल टिकट RAC या वेटिंग लिस्ट में है और कन्फर्म नहीं होती, तो भी नियमानुसार कटौती के बाद रिफंड मिल सकता है।

कब नहीं मिलता रिफंड?

  • कन्फर्म तत्काल टिकट को यात्री खुद कैंसिल करे
  • ट्रेन समय पर हो और कोई विशेष परिस्थिति न हो
  • चार्ट बनने के बाद टिकट कैंसिल की जाए

ऐसे मामलों में रेलवे कोई रिफंड नहीं देता।

यात्रा से पहले इन नियमों को समझ लेना जरूरी है, ताकि अचानक योजना बदलने पर आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।