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सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में 1000 स्थानों पर जरूरतमंद लोगों व पक्षियों के लिए घड़े व जलपात्र किए जाएंगे स्थापित – डॉ.राजेश्वर सिंह

आशियाना, लखनऊ : भीषण गर्मी को देखते हुए सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने माँ पीताम्बरा ट्रस्ट एवं Environment Warriors के सहयोग से एक महत्वपूर्ण जन-सेवा एवं पर्यावरण संरक्षण अभियान का शुभारंभ किया है, आशियाना स्थित विधायक कार्यालय से भाजपा पदाधिकारियों को पानी के घड़े व पक्षियों के लिए जलपात्र उपलब्ध करा शुरू हुआ अभियान।

इस अभियान के अंतर्गत सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में 1000 स्थानों पर जरूरतमंद लोगों के लिए पानी की व्यवस्था तथा 1000 स्थानों पर पक्षियों के लिए जलपात्र स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए 1000 घड़े तथा 1000 पक्षी जलपात्र/ मिट्टी के पात्र पार्टी कार्यकर्ताओं, बूथ अध्यक्षों एवं स्थानीय कार्यकर्ताओं को वितरित किए जाएंगे, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित रूप से पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करें।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि मई और जून की प्रचंड गर्मी में प्यासे राहगीरों, श्रमिकों, जरूरतमंदों और पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करना केवल सेवा नहीं, बल्कि हमारी मानवीय और सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी है। यह अभियान सरोजिनी नगर में सेवा, संवेदना और पर्यावरण संरक्षण के भाव को और मजबूत करेगा।

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लखनऊ में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है और यह एक गंभीर चेतावनी है। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, शहर के कई इलाकों में पिछले 9–10 वर्षों में ही 10–12 मीटर (लगभग 30–40 फीट) तक गिरावट दर्ज की गई है (स्रोत: Hindustan Times)। वहीं विशेषज्ञों के अनुसार, गोमती बेसिन क्षेत्र में भूजल स्तर कई स्थानों पर 30 मीटर तक नीचे चला गया है (स्रोत: Times of India)।

दीर्घकालिक रुझान और अध्ययनों से स्पष्ट है कि पिछले 15–20 वर्षों में लखनऊ के कई हिस्सों में कुल मिलाकर 20–30 मीटर (लगभग 60–100 फीट या उससे अधिक) तक गिरावट देखी गई है, जो अत्यंत चिंताजनक स्थिति है (स्रोत: CWE Journal, TERI Study)।

डॉ. सिंह ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे अपने घरों, पार्कों और संस्थानों में कम लागत वाले वर्षा जल संचयन सिस्टम अवश्य लगाएं, ताकि गिरते हुए भूजल स्तर को रोका जा सके और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षित किया जा सके।

इसके साथ ही उन्होंने लोगों से सोलर पैनल लगाने का भी आग्रह किया, ताकि पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम हो, पर्यावरण की रक्षा हो और राष्ट्रहित में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिले।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि सरोजिनी नगर केवल विकास का नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और सतत भविष्य का भी मॉडल बनेगा। यह अभियान न केवल लोगों और पक्षियों की प्यास बुझाएगा, बल्कि जल संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के प्रति भी व्यापक जन-जागरण का माध्यम बनेगा।

सरोजनीनगर की समस्याओं पर विधायक का सख्त रुख: डॉ.राजेश्वर सिंह ने NHAI को लिखे 3 पत्र, फुट ओवरब्रिज और नालों के अधूरे कार्य पर उठाए गंभीर सवाल

लखनऊ। सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेस-वे निर्माण के चलते उत्पन्न हो रही जनसमस्याओं को लेकर विधायक ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने (NHAI) के चेयरमैन को संबोधित करते हुए लगातार तीन विस्तृत पत्र भेजे हैं, जिनमें क्षेत्र की जमीनी समस्याओं को विस्तार से बताते हुए तत्काल समाधान की मांग की गई है। इन पत्रों में साफ तौर पर यह दर्शाया गया है कि एक्सप्रेस-वे निर्माण के साथ-साथ मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी स्थानीय जनता के लिए भारी परेशानी का कारण बन रही है।

एक्सप्रेस-वे बना परेशानी की वजह, सड़क पार करना हुआ जानलेवा

विधायक डॉ. सिंह ने अपने पत्र में बताया कि लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेस-वे का निर्माण जहां विकास का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर इससे जुड़े कुछ जरूरी कार्य अधूरे रहने के कारण आम जनता को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

शांति नगर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि यहां लगभग 30 हजार की आबादी निवास करती है, जिसे एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर आवागमन के लिए कोई सुरक्षित व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। लोग रोजाना जान जोखिम में डालकर सड़क पार कर रहे हैं।

खासतौर पर स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राएं, बुजुर्ग और महिलाएं इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित हैं। ऐसे में हज हाउस के पास फुट ओवरब्रिज का निर्माण अत्यंत आवश्यक बताया गया है, ताकि लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके और दुर्घटनाओं की आशंका कम हो।

दरोगा खेड़ा में 60 हजार आबादी की परेशानी, लंबा चक्कर मजबूरी

अपने दूसरे पत्र में विधायक ने दरोगा खेड़ा क्षेत्र की गंभीर स्थिति का जिक्र किया है। यहां करीब 60 हजार की आबादी एक्सप्रेस-वे के कारण सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।

स्थानीय लोगों को सड़क के एक ओर से दूसरी ओर जाने के लिए कई किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बर्बादी हो रही है। यह समस्या केवल असुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में भी लोगों के लिए खतरा बन सकती है।

विधायक ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं है, तो निजी भूमि खरीदकर भी फुट ओवरब्रिज का निर्माण कराया जाना चाहिए। उन्होंने इसे जनहित में अत्यंत आवश्यक कदम बताते हुए प्राथमिकता के आधार पर कार्य कराने की मांग की है।

अधूरे नालों से बढ़ रहा जलभराव, बारिश में बिगड़ सकते हैं हालात

तीसरे पत्र में विधायक ने एक्सप्रेस-वे के किनारे बन रहे नालों के अधूरे कार्यों पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि कृष्णा लोक कॉलोनी, दरोगा खेड़ा और रैनियापुर फॉरेंसिक यूनिवर्सिटी मोड़ जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर नालों के “मिसिंग लिंक” अभी तक पूरे नहीं किए गए हैं।

इसका सीधा असर यह हो रहा है कि पानी का निकास बाधित हो रहा है और क्षेत्र में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो रही है। स्थानीय निवासियों के घरों और सड़कों पर पानी भरने से जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

विधायक ने आगाह किया कि यदि बारिश से पहले इन अधूरे कार्यों को पूरा नहीं किया गया, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती है, जिससे हजारों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

NHAI से समयबद्ध और प्राथमिकता आधारित कार्रवाई की मांग

विधायक ने से इन सभी मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि:

  • फुट ओवरब्रिज निर्माण को प्राथमिकता दी जाए
  • जहां आवश्यक हो, वहां भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाए
  • नालों के अधूरे “मिसिंग लिंक” कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूर्ण कराया जाए

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करने का भी अनुरोध किया है, ताकि इन परियोजनाओं में किसी प्रकार की लापरवाही न हो और जनता को जल्द राहत मिल सके।

जनता को राहत दिलाने की दिशा में बड़ा कदम

विधायक की इस पहल को क्षेत्र की जनता के लिए एक बड़ी उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है। यदि NHAI इन मांगों पर जल्द कार्रवाई करता है, तो सरोजनीनगर में लंबे समय से चली आ रही समस्याओं- जैसे सड़क पार करने की असुविधा, ट्रैफिक अव्यवस्था और जलभराव- से काफी हद तक निजात मिल सकती है।

यह पहल न केवल विकास कार्यों को संतुलित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जनप्रतिनिधि क्षेत्र की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए समाधान के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

ईरान–अमेरिका तनाव से बढ़ा ग्लोबल ऑयल संकट, सप्लाई प्रभावित और कीमतों में उछाल

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और संभावित युद्ध जैसी स्थिति ने वैश्विक तेल बाजार को झकझोर दिया है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से तेल और गैस की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है। यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा ट्रांजिट रूट्स में से एक है, जहां से भारी मात्रा में कच्चा तेल और गैस की आपूर्ति होती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोजाना 12–13 मिलियन बैरल तक तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है, जो वैश्विक मांग का लगभग 11–13% हिस्सा है। अनुमान है कि कुछ ही हफ्तों में सैकड़ों मिलियन बैरल तेल बाजार से गायब हो चुका है, जिससे यह अब तक के सबसे बड़े सप्लाई शॉक्स में गिना जा रहा है।

इतिहास से बड़ा संकट?
तुलना करें तो 1973 ऑयल क्राइसिस, 1979 ईरानी क्रांति और 1991 खाड़ी युद्ध के दौरान भी तेल सप्लाई प्रभावित हुई थी, लेकिन मौजूदा संकट का असर उससे कहीं ज्यादा व्यापक माना जा रहा है।

गैस और फ्यूल पर भी असर
यह संकट सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं है। कतर जैसे देशों से आने वाली LNG सप्लाई प्रभावित हुई है। साथ ही डीजल, जेट फ्यूल और उर्वरकों की उपलब्धता भी कम हो रही है, जिससे ट्रांसपोर्ट और एविएशन सेक्टर पर दबाव बढ़ गया है।

कीमतों में तेज उछाल
तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर करीब 95 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं, जो पहले लगभग 70 डॉलर के आसपास थीं। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े निर्यातक देश भी होर्मुज मार्ग बाधित होने से पूरी क्षमता से निर्यात नहीं कर पा रहे हैं।

तेजी से घटती सप्लाई
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई तेजी से घट रही है और स्टॉक भी खत्म होने की कगार पर हैं। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो यह संकट कोविड-19 के दौरान आई गिरावट के बाद सबसे बड़ी सप्लाई कमी साबित हो सकता है।

आगे क्या?
मिडिल ईस्ट दुनिया की करीब 30% तेल आपूर्ति करता है। ऐसे में अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। भले ही तनाव जल्द खत्म हो जाए, लेकिन सप्लाई को सामान्य होने में महीनों या साल लग सकते हैं।

Sports News:लखनऊ की धीमी पिच पर राजस्थान ढेर, वैभव-जुरेल फ्लॉप; जडेजा की 43 रन की जुझारू पारी से टीम सम्मानजनक स्कोर तक पहुंची

आईपीएल 2026 के एक मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स की बल्लेबाजी लखनऊ सुपर जायंट्स के घरेलू मैदान इकाना क्रिकेट स्टेडियम की धीमी पिच पर बिखर गई। पूरी पारी में राजस्थान के बल्लेबाज संघर्ष करते नजर आए और टीम 155 के आसपास ही सिमटने की स्थिति में पहुंच गई।

पारी की शुरुआत से ही राजस्थान को झटके लगने लगे और महज 32 रन पर तीन विकेट गिर गए। इसके बाद भी स्थिति नहीं सुधरी और 77 रन तक पहुंचते-पहुंचते आधी टीम पवेलियन लौट चुकी थी।

युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी सिर्फ 8 रन बनाकर आउट हो गए, जबकि ध्रुव जुरेल खाता तक नहीं खोल सके। यशस्वी जायसवाल ने 22 रन बनाए, लेकिन बड़ी पारी नहीं खेल सके। कप्तान रियान पराग ने 20 रन का योगदान दिया।

टीम को मुश्किल स्थिति से बाहर निकालने की जिम्मेदारी रवींद्र जडेजा ने संभाली। उन्होंने 29 गेंदों में नाबाद 43 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली और टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। एक समय जब राजस्थान 9 ओवर में 62 रन पर 4 विकेट गंवा चुकी थी, तब जडेजा ने पारी को संभाला और अंतिम ओवरों में तेजी से रन बनाए। अंतिम ओवर में उन्होंने आक्रामक अंदाज दिखाते हुए लगभग 20 रन बटोरे।

इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर आए शुभम दुबे ने भी 11 गेंदों में 19 रन बनाकर योगदान दिया।

अब मुकाबले में लखनऊ सुपर जायंट्स के सामने 159 रनों का लक्ष्य है। इकाना स्टेडियम की पिच को देखते हुए यह स्कोर चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यहां पहले भी कम स्कोर वाले मैचों में टीमें जीत दर्ज कर चुकी हैं। पिछले सीजन में इसी मैदान पर 126 रन का स्कोर भी सफलतापूर्वक डिफेंड किया गया था।

केदारनाथ धाम यात्रा 2026: दिल्ली से जाने का खर्च और पूरा बजट, जानें ट्रैवल गाइड

केदारनाथ धाम की यात्रा शुरू हो चुकी है और केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंचने लगी है। 3,583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह पवित्र धाम हर साल लाखों भक्तों को आकर्षित करता है।

अगर आप दिल्ली से केदारनाथ यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो पहले से पूरी जानकारी और बजट समझना बेहद जरूरी है, ताकि यात्रा आसान और सुरक्षित रहे।

रजिस्ट्रेशन सबसे जरूरी

केदारनाथ यात्रा के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है, जो फ्री में किया जाता है। इसमें नाम, उम्र और ID की जानकारी देकर ई-पास (QR कोड) जारी किया जाता है। यह पास यात्रा के दौरान कई जगह चेक किया जाता है, खासकर सोनप्रयाग में।

दिल्ली से केदारनाथ का रास्ता

  • दिल्ली से हरिद्वार: लगभग 220 किमी
  • हरिद्वार से गौरीकुंड: लगभग 240 किमी
  • आगे का रास्ता ऋषिकेश, रुद्रप्रयाग और गुप्तकाशी से होकर जाता है

यात्रा ट्रेन, बस या फ्लाइट (देहरादून तक) से की जा सकती है।

केदारनाथ तक कैसे पहुंचें

गौरीकुंड से केदारनाथ तक करीब 16–18 किमी का ट्रेक है:

  • पैदल यात्रा: 6–10 घंटे
  • घोड़ा/पालकी की सुविधा
  • हेलीकॉप्टर सेवा: फाटा, सिरसी और गुप्तकाशी से उपलब्ध

मौसम कैसा रहेगा

अप्रैल–मई में मौसम ठंडा रहता है। दिन में तापमान 0°C से 15°C के बीच और रात में इससे नीचे जा सकता है। अचानक बारिश या बर्फबारी भी संभव है, इसलिए गर्म कपड़े जरूरी हैं।

कितना आएगा खर्च (लगभग)

  • दिल्ली से हरिद्वार/देहरादून: ₹300–₹1000
  • बस से गौरीकुंड: ₹300–₹500
  • दिल्ली से सीधी बस: ₹500–₹1000
  • हेलीकॉप्टर (राउंड ट्रिप): ₹5500 से ₹7740 तक
  • कुल यात्रा बजट (औसतन): ₹8,000 से ₹20,000 तक (सुविधा के अनुसार)

कहां ठहरें

मंदिर के पास सीमित सुविधा होने के कारण गुप्तकाशी और सोनप्रयाग में ठहरना बेहतर रहता है। भीड़ के कारण पहले से होटल बुकिंग जरूरी है।

जरूरी सावधानियां

  • रजिस्ट्रेशन और ID साथ रखें
  • पर्याप्त पानी और गर्म कपड़े रखें
  • रात में ट्रेकिंग से बचें

केदारनाथ यात्रा आस्था और एडवेंचर दोनों का अनोखा अनुभव देती है, लेकिन सही प्लानिंग से ही यह यात्रा सुरक्षित और यादगार बनती है।