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तेल संकट के बीच पाकिस्तान को राहत, होर्मुज से LNG टैंकरों को मंजूरी दे रहा ईरान

Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान को राहत देने के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। तेल और गैस संकट से जूझ रहे Pakistan के लिए कतर से LNG टैंकर लगातार भेजे जा रहे हैं और इन्हें होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति भी मिल रही है।

कतर से पाकिस्तान पहुंच रहा LNG टैंकर

रिपोर्ट्स के मुताबिक 1.74 लाख क्यूबिक मीटर क्षमता वाला LNG टैंकर ‘मिहजेम’ कतर के रास लफान पोर्ट से रवाना होकर पाकिस्तान के कासिम पोर्ट की ओर बढ़ रहा है। बताया जा रहा है कि यह टैंकर कराची पहुंचने वाला है।

इससे पहले भी एक LNG टैंकर को विशेष अनुमति देकर Strait of Hormuz से गुजरने दिया गया था।

ईरान पाकिस्तान पर क्यों दिखा रहा नरमी?

सूत्रों के अनुसार Iran और पाकिस्तान के बीच हाल के दिनों में ऊर्जा सहयोग बढ़ा है। माना जा रहा है कि ईरान, अमेरिका और क्षेत्रीय देशों के बीच तनाव कम कराने में पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका को महत्व दे रहा है।

बताया जा रहा है कि कतर और पाकिस्तान के बीच LNG सप्लाई समझौते को सुचारु बनाए रखने के लिए ईरान ने टैंकरों को होर्मुज से गुजरने की मंजूरी दी।

पाकिस्तान में गैस संकट गहराया

Pakistan इस समय गंभीर गैस और ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। बिजली उत्पादन और घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए उसे LNG आयात पर काफी निर्भर रहना पड़ रहा है।

कतर पाकिस्तान का प्रमुख LNG सप्लायर माना जाता है और आने वाले दिनों में पाकिस्तान के लिए दो और LNG टैंकर रवाना होने की संभावना जताई जा रही है।

दुनिया की नजर होर्मुज पर

Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव न केवल मिडिल ईस्ट बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

Sports News:सिर्फ 9% थी जीत की उम्मीद, फिर दिल्ली ने पंजाब से छीना मैच; अक्षर, मिलर और आशुतोष बने हीरो

Delhi Capitals ने रोमांचक मुकाबले में Punjab Kings को 3 विकेट से हराकर प्लेऑफ की उम्मीदों को जिंदा रखा। 211 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए दिल्ली ने 19 ओवर में मैच अपने नाम कर लिया।

एक समय ऐसा लग रहा था कि मुकाबला पूरी तरह पंजाब की पकड़ में है। आंकड़ों के अनुसार दिल्ली की जीत की संभावना सिर्फ 9 प्रतिशत रह गई थी, लेकिन इसके बाद मैच ने जबरदस्त करवट ली।

अक्षर पटेल ने रखी जीत की नींव

Axar Patel ने कप्तानी पारी खेलते हुए 30 गेंदों में 56 रन बनाए। हालांकि उनके आउट होने के बाद दिल्ली की स्थिति मुश्किल में दिखने लगी थी। 14 ओवर के बाद टीम का स्कोर 138/5 था और आखिरी 5 ओवरों में 68 रन की जरूरत थी।

डेविड मिलर और आशुतोष शर्मा ने पलटा मैच

इसके बाद David Miller और Ashutosh Sharma ने तूफानी बल्लेबाजी शुरू की। मिलर ने कुछ ही गेंदों में मैच का रुख बदल दिया। वह एक समय 20 गेंदों में 28 रन पर खेल रहे थे, लेकिन अगले 7 गेंदों में अपनी फिफ्टी पूरी कर ली।

मिलर 51 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन तब तक मुकाबला फिर से दिल्ली की ओर झुक चुका था।

आखिरी ओवरों में मची तबाही

अंतिम 3 ओवरों में दिल्ली को 36 रन चाहिए थे। तभी Ashutosh Sharma और Madhav Tiwari ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए मैच पूरी तरह पलट दिया।

मार्कस स्टोइनिस के ओवर में दोनों बल्लेबाजों ने 19 रन बटोर लिए। आखिरी 12 गेंदों में 17 रन चाहिए थे, लेकिन आशुतोष ने तेजी से रन बनाकर दबाव कम कर दिया। वह 10 गेंदों में 24 रन बनाकर आउट हुए।

इसके बाद आकिब नबी ने नो-बॉल पर चौका और फ्री-हिट पर छक्का लगाकर दिल्ली को यादगार जीत दिला दी।

प्लेऑफ की उम्मीद अब भी कायम

इस जीत के साथ Delhi Capitals के 12 मैचों में 10 अंक हो गए हैं। टीम की प्लेऑफ की उम्मीदें अभी बरकरार हैं, हालांकि आगे का रास्ता आसान नहीं होगा।

दिल्ली को अपने बाकी दोनों मुकाबले बड़े अंतर से जीतने होंगे, साथ ही अन्य टीमों के नतीजों पर भी उसकी नजर रहेगी।

“सपा राज में भर्ती घोटाले, योगी राज में पारदर्शी नौकरियां – यही है बदला हुआ उत्तर प्रदेश”: डॉ. राजेश्वर सिंह

  • “2017 से पहले सिफारिश और जातिवाद, आज योगी सरकार ने 9 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी दी”: डॉ. राजेश्वर सिंह
  • “भर्ती माफियाओं से सुशासन तक: योगी सरकार ने युवाओं का विश्वास जीता”: डॉ. राजेश्वर सिंह

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश का युवा केवल वोटर नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य, विकास और सामर्थ्य की सबसे बड़ी ताकत है। लेकिन 2017 से पहले सपा सरकार में युवाओं को अवसर नहीं, बल्कि जातिवाद, भ्रष्टाचार और सिफारिश आधारित व्यवस्था मिली।

उन्होंने कहा कि 2012-17 के दौरान हुई 600 से अधिक भर्तियां विवादों में रहीं। लगभग 45 हजार पदों की जांच तक की नौबत आई और भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द कराने व CBI जांच की मांग को लेकर 700 से अधिक याचिकाएं अदालतों में दाखिल हुईं।

डॉ. सिंह ने कहा कि पीसीएस 2011 भर्ती में इंटरव्यू प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे, जहां 86 में से 56 एसडीएम एक ही जाति से चयनित हुए। इतिहास प्रवक्ता भर्ती में OBC कोटे के 15 में से 7 चयन एक ही जाति विशेष से हुए। वहीं 2014 की PCS परीक्षा में 25 प्रश्न गलत पाए गए।

उन्होंने कहा कि सपा सरकार की लैपटॉप योजना भी भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी रही, जिसमें 1173 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से वितरित 8 लाख से अधिक लैपटॉप वितरण पर सवाल उठे।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि 2017 के बाद मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में भर्ती व्यवस्था पूरी तरह बदली। भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी, तकनीक आधारित और जवाबदेह बनाया गया। डिजिटल मॉनिटरिंग, सख्त सुरक्षा व्यवस्था और भर्ती माफियाओं पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की गई।

उन्होंने कहा कि पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश में 9 लाख से अधिक सरकारी नौकरियों की प्रक्रिया संचालित की गई है। केवल पुलिस विभाग में ही 2.20 लाख से अधिक भर्तियां पूरी की गईं।

डॉ. सिंह ने कहा कि योगी सरकार ने युवाओं को डिजिटल रूप से भी सशक्त किया। 2 करोड़ से अधिक युवाओं को स्मार्टफोन और टैबलेट वितरित किए गए। अभ्युदय योजना, स्किल डेवलपमेंट मिशन, ODOP, डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर नीति, एक्सप्रेसवे नेटवर्क और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट जैसी पहलों ने उत्तर प्रदेश को रोजगार और निवेश का बड़ा केंद्र बनाया है।

उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश भर्ती घोटालों और परिवारवाद की राजनीति से निकलकर पारदर्शिता, सुशासन, निवेश और विकास का मॉडल बन चुका है। यही कारण है कि प्रदेश का युवा आज जातिवाद नहीं, बल्कि अवसर, सुशासन और विकास की राजनीति के साथ मजबूती से खड़ा है।

Health Tips:रोजाना सप्लीमेंट्स खाना कितना सही? डॉक्टरों ने बताया कब फायदा और कब हो सकता है नुकसान

आजकल विटामिन और हेल्थ सप्लीमेंट्स लेना लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बनता जा रहा है। कोई इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए कैप्सूल ले रहा है, तो कोई एनर्जी और फिटनेस के नाम पर रोज कई तरह के सप्लीमेंट्स का सेवन कर रहा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बिना जरूरत सप्लीमेंट्स लेना हमेशा फायदेमंद नहीं होता और कई बार यह शरीर को नुकसान भी पहुंचा सकता है।

एक्सपर्ट ने क्या कहा?

CK Birla Hospital के इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ Amit Prakash Singh के अनुसार, लोग अक्सर मान लेते हैं कि ज्यादा विटामिन लेने से ज्यादा फायदा होगा, जबकि शरीर केवल उतने ही पोषक तत्व इस्तेमाल करता है जितनी उसे जरूरत होती है।

उन्होंने बताया कि यदि शरीर को पहले से पर्याप्त पोषण मिल रहा हो, तो अतिरिक्त सप्लीमेंट्स कई बार बिना किसी लाभ के शरीर से बाहर निकल जाते हैं।

कौन-से विटामिन ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं?

विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ विटामिन जैसे Vitamin C पानी में घुलकर शरीर से बाहर निकल जाते हैं, लेकिन Vitamin A और Vitamin D जैसे तत्व शरीर में जमा हो सकते हैं।

जरूरत से ज्यादा मात्रा में इनका सेवन करने से:

  • लिवर पर असर पड़ सकता है
  • किडनी को नुकसान हो सकता है
  • हड्डियों से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं

इसके अलावा बिना जरूरत आयरन सप्लीमेंट लेने से पेट संबंधी परेशानियां और लंबे समय में शरीर के अन्य अंगों पर भी असर पड़ सकता है।

रिसर्च में क्या सामने आया?

एक बड़ी रिसर्च में यह पाया गया कि स्वस्थ लोगों में रोजाना मल्टीविटामिन लेने से दिल की बीमारी या कैंसर से बचाव का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ सप्लीमेंट्स के भरोसे अच्छी सेहत नहीं बनाई जा सकती।

असली पोषण कहां से मिलता है?

डॉक्टरों के अनुसार, फल, सब्जियां, दालें, मेवे और साबुत अनाज शरीर को सिर्फ विटामिन ही नहीं देते, बल्कि फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और कई जरूरी पोषक तत्व भी पहुंचाते हैं।

उदाहरण के तौर पर एक संतरा केवल विटामिन सी ही नहीं देता, बल्कि शरीर को पानी और फाइबर भी उपलब्ध कराता है।

कब जरूरी होते हैं सप्लीमेंट्स?

विशेष परिस्थितियों में सप्लीमेंट्स जरूरी हो सकते हैं, जैसे:

  • विटामिन डी की कमी
  • एनीमिया
  • गर्भावस्था में फोलिक एसिड की जरूरत
  • शरीर में पोषक तत्व सही से एब्जॉर्ब न होना

हालांकि ऐसी स्थिति में भी डॉक्टर की सलाह और सही मात्रा बेहद जरूरी मानी जाती है।

जरूरी सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि बिना जांच और डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक सप्लीमेंट्स लेना सही नहीं माना जाता। बेहतर स्वास्थ्य के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और अच्छी जीवनशैली ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

Disclaimer: यह जानकारी विशेषज्ञों की राय और रिसर्च पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी दवा या सप्लीमेंट का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

Health Update:मोबाइल की ज्यादा आदत बच्चों के दिमाग पर डाल सकती है असर, AIIMS स्टडी में सामने आई चिंता

आज के दौर में छोटे बच्चों को मोबाइल देना कई घरों में आम बात बन चुकी है। खाना खिलाने से लेकर बच्चे को शांत कराने तक, स्क्रीन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। लेकिन अब All India Institute of Medical Sciences की एक नई स्टडी ने इसे लेकर गंभीर चेतावनी दी है।

रिसर्च में पाया गया है कि बहुत कम उम्र से मोबाइल और स्क्रीन के ज्यादा संपर्क में रहने वाले बच्चों में सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। साथ ही उनमें Autism Spectrum Disorder जैसे लक्षण विकसित होने का खतरा भी बढ़ सकता है।

क्या कहती है AIIMS की स्टडी?

Dr. Sheffali Gulati के अनुसार, एक साल की उम्र में अधिक स्क्रीन देखने वाले बच्चों में तीन साल की उम्र तक ऑटिज्म से जुड़े लक्षण ज्यादा देखने को मिले।

विशेषज्ञों के मुताबिक यह प्रभाव लड़कों में अधिक स्पष्ट दिखाई दिया, हालांकि लड़कियों में भी इसके संकेत पाए गए।

बच्चों के दिमाग पर कैसे पड़ता है असर?

डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती वर्षों में बच्चों का मस्तिष्क बहुत तेजी से विकसित होता है। इस दौरान उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत होती है:

  • माता-पिता से बातचीत
  • चेहरे के हावभाव समझने की
  • आवाज और भावनाओं को पहचानने की
  • आसपास की दुनिया से जुड़ने की

लेकिन जब बच्चा लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन में उलझा रहता है, तो उसका सामाजिक और मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है।

क्या होता है ऑटिज्म?

Autism Spectrum Disorder एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे को सामाजिक व्यवहार, भाषा और भावनाओं को समझने में कठिनाई हो सकती है।

ऐसे बच्चों में अक्सर ये संकेत दिखाई दे सकते हैं:

  • नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना
  • आंखों में कम देखना
  • बोलने में देरी
  • अकेले रहना पसंद करना
  • बार-बार एक जैसी हरकतें करना
  • तेज आवाज या बदलाव से परेशान होना

किन संकेतों को नजरअंदाज न करें?

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बच्चा दूसरों से घुलने-मिलने से बचता है, बोलने में देरी हो रही है या सामाजिक प्रतिक्रिया कम देता है, तो जल्द जांच करानी चाहिए। समय पर मदद मिलने से स्थिति को बेहतर ढंग से संभाला जा सकता है।

18 महीने से कम उम्र के बच्चों के लिए खास सलाह

AIIMS के विशेषज्ञों के अनुसार 18 महीने से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से जितना दूर रखा जाए, उतना बेहतर है। अचानक मोबाइल छीनने के बजाय धीरे-धीरे स्क्रीन टाइम कम करना ज्यादा सही तरीका माना जाता है।

बच्चों के विकास के लिए क्या है सबसे जरूरी?

विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों के स्वस्थ मानसिक विकास के लिए मोबाइल नहीं, बल्कि परिवार और माता-पिता का समय सबसे ज्यादा जरूरी है। बच्चे जितना ज्यादा वास्तविक दुनिया, खेलकूद और लोगों के साथ जुड़ेंगे, उनका सामाजिक और भावनात्मक विकास उतना ही बेहतर होगा।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी विशेषज्ञों और रिसर्च रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी चिंता की स्थिति में डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।