आज के दौर में छोटे बच्चों को मोबाइल देना कई घरों में आम बात बन चुकी है। खाना खिलाने से लेकर बच्चे को शांत कराने तक, स्क्रीन का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। लेकिन अब All India Institute of Medical Sciences की एक नई स्टडी ने इसे लेकर गंभीर चेतावनी दी है।
रिसर्च में पाया गया है कि बहुत कम उम्र से मोबाइल और स्क्रीन के ज्यादा संपर्क में रहने वाले बच्चों में सीखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। साथ ही उनमें Autism Spectrum Disorder जैसे लक्षण विकसित होने का खतरा भी बढ़ सकता है।
क्या कहती है AIIMS की स्टडी?
Dr. Sheffali Gulati के अनुसार, एक साल की उम्र में अधिक स्क्रीन देखने वाले बच्चों में तीन साल की उम्र तक ऑटिज्म से जुड़े लक्षण ज्यादा देखने को मिले।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह प्रभाव लड़कों में अधिक स्पष्ट दिखाई दिया, हालांकि लड़कियों में भी इसके संकेत पाए गए।
बच्चों के दिमाग पर कैसे पड़ता है असर?
डॉक्टरों का कहना है कि शुरुआती वर्षों में बच्चों का मस्तिष्क बहुत तेजी से विकसित होता है। इस दौरान उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत होती है:
- माता-पिता से बातचीत
- चेहरे के हावभाव समझने की
- आवाज और भावनाओं को पहचानने की
- आसपास की दुनिया से जुड़ने की
लेकिन जब बच्चा लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन में उलझा रहता है, तो उसका सामाजिक और मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है।
क्या होता है ऑटिज्म?
Autism Spectrum Disorder एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे को सामाजिक व्यवहार, भाषा और भावनाओं को समझने में कठिनाई हो सकती है।
ऐसे बच्चों में अक्सर ये संकेत दिखाई दे सकते हैं:
- नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना
- आंखों में कम देखना
- बोलने में देरी
- अकेले रहना पसंद करना
- बार-बार एक जैसी हरकतें करना
- तेज आवाज या बदलाव से परेशान होना
किन संकेतों को नजरअंदाज न करें?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बच्चा दूसरों से घुलने-मिलने से बचता है, बोलने में देरी हो रही है या सामाजिक प्रतिक्रिया कम देता है, तो जल्द जांच करानी चाहिए। समय पर मदद मिलने से स्थिति को बेहतर ढंग से संभाला जा सकता है।
18 महीने से कम उम्र के बच्चों के लिए खास सलाह
AIIMS के विशेषज्ञों के अनुसार 18 महीने से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से जितना दूर रखा जाए, उतना बेहतर है। अचानक मोबाइल छीनने के बजाय धीरे-धीरे स्क्रीन टाइम कम करना ज्यादा सही तरीका माना जाता है।
बच्चों के विकास के लिए क्या है सबसे जरूरी?
विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों के स्वस्थ मानसिक विकास के लिए मोबाइल नहीं, बल्कि परिवार और माता-पिता का समय सबसे ज्यादा जरूरी है। बच्चे जितना ज्यादा वास्तविक दुनिया, खेलकूद और लोगों के साथ जुड़ेंगे, उनका सामाजिक और भावनात्मक विकास उतना ही बेहतर होगा।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी विशेषज्ञों और रिसर्च रिपोर्ट्स पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी चिंता की स्थिति में डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

































