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यूपी में 60 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद के लिए 6,414 क्रय केन्द्र संचालित: मुख्य सचिव

  • मुख्य सचिव तथा केंद्रीय सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति ने संयुक्त रूप से गेहूं खरीद की समीक्षा की
  • समीक्षा बैठक में महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया कि बीते वर्षों में क्रय केन्द्रों पर गेहूं अथवा धान विक्रय करने वाले किसानों को पुनः पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं
  • केन्द्र प्रभारियों के मोबाइल पर मिस्डकॉल करके पंजीकरण, एमएसपी, विक्रय के उपरांत 48 घंटे में भुगतान, बटाईदारों से खरीद तथा क्रय केन्द्रों पर किसानों को प्रदान की जा रही सुविधाओं आदि के बारे में जागरूक करने के निर्देश

लखनऊः मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र तथा केंद्रीय सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति संजीव चोपड़ा ने गेहूं खरीद की गहन समीक्षा की। बैठक में प्रदेश में 60 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए चर्चा की गई।
अपने संबोधन में मुख्य सचिव ने गेहूं खरीद के लिए किसानों के पंजीकरण की संख्या बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि क्रय केन्द्र पर किसानों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिये। गत वर्षों में क्रय केन्द्रों पर गेहूं अथवा धान विक्रय करने वाले किसानों को पुनः पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं है, केन्द्र प्रभारियों के मोबाइल नम्बर पर मिस्डकॉल करके पंजीकरण, एमएसपी, विक्रय के उपरांत 48 घंटे में भुगतान, बटाईदारों से खरीद तथा क्रय केन्द्रों पर किसानों को प्रदान की जा रही सुविधाओं आदि के बारे में जागरूक किया जाये। प्रमुख समाचार पत्रों में विज्ञापन, रेडियो जिंगल तथा प्रचार वाहन के माध्यम से गेहूं क्रय योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाये।
उन्होंने कहा कि जनपदों में केन्द्र प्रभारियों व अधिकारियों द्वारा गांव-गांव भ्रमण कर गेहूं विक्रय के लिए किसानों से व्यक्तिगत संपर्क स्थापित किया जाये। तहसील दिवस, किसान गोष्ठी, चौपाल आदि में कैम्प अथवा स्टॉल लगाकर कृषक पंजीकरण कराया जाये। प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर बैनर होर्डिंग लगाकर किसानों को गेहूँ की एम०एस०पी० व अन्य सुविधाओं के बारे में जागरूक किया जाए। इसके अलावा ऐसे किसानों जिन्होंने पूर्व में गेहूं अथवा धान विक्रय किया है, उनसे कॉल सेन्टर व कन्ट्रोल रूम से विक्रय हेतु संपर्क स्थापित किया जाये।
बैठक में बताया गया कि 60 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद के लिए 6,414 क्रय केन्द्र संचालित हैं, जो गत वर्ष की तुलना में 600 अधिक हैं। अब तक 2,82,315 किसान पंजीकृत करा चुके है। केन्द्र पर दैनिक खरीद की कोई सीमा नहीं है। मोबाइल क्रय केन्द्र के माध्यम से भी गेहूं खरीद की जा रही है। एक जनपद का किसान किसी अन्य जनपद में भी गेहूं विक्रय कर सकता है। 100 कुंतल तक गेहूं बिक्री करने वाले किसानों को सत्यापन से छूट प्रदान की गई है। किसान की एक से अधिक तहसीलों में भूमि होने की स्थिति में भी एक साथ क्रय सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
गेहूँ क्रय योजना के अनुश्रवण एवं सुचारूरूप से संचालन हेतु शासन स्तर से प्रदेश के सभी सम्भाग में नोडल अधिकारी नामित कर जनपदों का भ्रमण तथा प्राप्त फीड बैक के अनुसार अपेक्षित कार्यवाही की जा रही है। प्रदेश स्तर पर अपर आयुक्त खाद्य एवं रसद की अध्यक्षता में क्रय एजेन्सियों के प्रतिनिधियों के साथ समिति गठित कर गेहूँ खरीद की समीक्षा की जा रही है।
जनपद स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में क्रय एजेन्सियों के अधिकारी व मण्डी परिषद के अधिकारियों की कमेटी गठित कर गेहूँ की आवक व बाजार भाव की समीक्षा व निगरानी कर गेहूँ खरीद की प्रगति लाने के सम्बन्ध में कार्यवाही की जा रही है। 25 लाख किसानों के मोबाईल नम्बरों पर प्रदेश मुख्यालय से तथा 80 लाख किसानों को जनपद स्तर पर कृषि विभाग के माध्यम से गेहूँ खरीद के सम्बन्ध में एस०एम०एस० प्रेषित किया गया है।
बैठक में अपर मुख्य सचिव कृषि देवेश चतुर्वेदी, प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद आलोक कुमार, खाद्य आयुक्त सौरभ बाबू समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण आदि उपस्थित थे।

लोकसभा चुनाव: यूपी के पूर्व डीजीपी समेत कई दलों के नेता बीजेपी में शामिल

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी विजय कुमार अपनी पत्नी के साथ उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के भी कई नेता भी भाजपा में शामिल हुए। लखनऊ में भाजपा प्रदेश कार्यालय में पूर्व डीजीपी विजय कुमार और उनकी पत्नी समेत कई दलों के नेताओं को भाजपा की सदस्यता द‍िलाई गई।

इसके साथ ही बीजेपी में शामिल होने वालों में बीएसपी के प्रवक्ता रहे धर्मवीर चौधरी, मनोज अग्रवाल, सचिन शर्मा समेत कांग्रेस और अन्य दलों के नेताओं ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की. इस दौरान उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा की यूपी में सभी 80 सिम जीतने का लक्ष्य हमने रखा है और उसे दिशा में हम लगातार आगे बढ़ रहे हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट: अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीशों के बड़े पैमाने पर हुए तबादले

प्रयागराज: यूपी में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश की अदालतों में कार्यरत 322 अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीशों का तबादला किया है। अदालत के रजिस्ट्रार भारती के अनुसार सभी को 15 अप्रैल को दोपहर बाद कार्यभार सौंपकर नये तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के लिए कहा गया है। यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि इस वार्षिक स्थानांतरण के खिलाफ किसी प्रकार की अर्जी पर कार्यभार ग्रहण करने तक विचार नहीं किया जाएगा। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रैंक के न्यायिक अधिकारियों की सूची में राजीव कुमार पालीवाल महोबा से आगरा, विनोद कुमार (पंचम) बलरामपुर से गाजियाबाद, डॉ. सत्यवान सिंह लखनऊ (रजिस्ट्री) से उन्नाव, मोहम्मद आजाद जालौन (उरई) से कुशीनगर (पडरौना), बृजेश कुमार शर्मा प्रयागराज (रजिस्ट्री) से सहारनपुर, अनुतोष कुमार शर्मा वाराणसी से कासगंज, कमलेश कुमार हापुड़ से बस्ती, विजय कुमार आजाद फिरोजाबाद से सीतापुर, चंद्र विजय श्रीनेत मुरादाबाद से बुलंदशहर, छवि अस्थाना गाजियाबाद से रामपुर, राहुल सिंह (द्वितीय) सीतापुर से कानपुर नगर, सुशील कुमार वर्मा चित्रकूट से रायबरेली, चंद्रशेखर मिश्रा मिर्जापुर से मेरठ, कविता निगम बरेली से बहराइच भेजा गया है।

वहीं शैलेंद्र यादव कानपुर नगर से सोनभद्र, रामानंद आजमगढ़ से बरेली, कुमारी पारुल जैन बिजनौर से लखीमपुर खीरी, सुनील सिंह अलीगढ़ से ललितपुर, उत्कर्ष यादव कौशांबी से एटा, स्वप्नदीप सिंघल अमरोहा से मैनपुरी, हरेंद्र प्रसाद मथुरा से मऊ, नीलिमा सिंह सुल्तानपुर से प्रयागराज, मोहम्मद बाबर खान ललितपुर से मेरठ, अभिषेक उपाध्याय सीतापुर से मेरठ, संतोष कुमार गौतम गोरखपुर से मिर्जापुर, ओमवीर सिंह (द्वितीय) मेरठ से देवरिया, सुनील कुमार सिंह (तृतीय) औरैया से हरदोई, विनय तिवारी फतेहपुर से अलीगढ़, मोनिका ठाकुर प्रतापगढ़ से आगरा, कविता मिश्रा लखनऊ से भदोही, महेंद्र सिंह (चतुर्थ) फर्रुखाबाद से सीतापुर, मोना पंवार गौतम बुद्ध नगर से मुरादाबाद, कुमारी अलका चौधरी महोबा से बिजनौर, अमित कुमार पांडेय अयोध्या से रायबरेली, अंजना झांसी से मिर्जापुर, शमीम अहमद अंसारी रामपुर से गोरखपुर, काशी प्रसाद सिंह यादव जौनपुर से लखनऊ, बृजेश कुमार (द्वितीय) सिद्धार्थनगर से मथुरा, शैलेंद्र सचान मुरादाबाद से फर्रुखाबाद, राकेश कुमार तिवारी रायबरेली से कानपुर नगर, कुमार प्रशांत इटावा से लखनऊ स्थानांतरित किया गया है।

इसके अलावा सिविल जज (जूनियर डिवीजन) रैंक के स्थानांतरित न्यायिक अधिकारियों की सूची में काव्या श्रीवास्तव लखनऊ से रामपुर, संघमित्रा चित्रकूट से मिर्जापुर, दीक्षा त्यागी आजमगढ़ से गोरखपुर, बिंदु यादव रामपुर से फतेहपुर, शिप्रा सिंह (प्रथम) मेरठ से प्रतापगढ़, आभा प्रयागराज से हापुड़, अभिषेक शर्मा देवरिया से प्रयागराज, मोनिका मिश्रा बिजनौर से बलरामपुर, प्रशांत वर्मा मैनपुरी से कानपुर नगर, पीयूष मूलचंदानी संभल (चंदौसी) से कासगंज, स्वाति वर्मा (द्वितीय) बरेली से जालौन (उरई), पूजा शर्मा बिजनौर से लखीमपुर खीरी, अनुजया कृष्णा बाराबंकी से सुल्तानपुर, सौम्या द्विवेदी कानपुर नगर से सिद्धार्थनगर, यशा शर्मा लखनऊ से कन्नौज, मनाली चंद्रा बदायूं से सुल्तानपुर, रचना रावत मैनपुरी से बरेली, तान्या सक्सेना प्रयागराज से उन्नाव, गीतिका सिंह मिर्जापुर से अयोध्या, प्रगति रघुवंशी आगरा से मुरादाबाद, विजयलक्ष्मी देवी लखनऊ से कन्नौज, अमृतांशु राज चंदौली से हरदोई, प्रियंका वर्मा द्वितीय रायबरेली से मथुरा, रजत शर्मा गोंडा से इटावा शामिल हैं।

अंत में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रैंक न्यायिक अधिकारियों में अरुण कुमार (चतुर्थ) को प्रयागराज से सिद्धार्थनगर, अविनाश चंद्र गौतम को लखीमपुर खीरी से सुल्तानपुर, महेंद्र सिंह पासवान को फतेहपुर से अयोध्या, सर्वेश सिंह यादव को मुरादाबाद से इटावा, अंशुमाली पांडेय को हरदोई से अयोध्या, अनूप कुमार पांडेय को मुरादाबाद से बलरामपुर, अनुभव कटियार को बरेली से सिद्धार्थनगर, विनोद शर्मा को मेरठ से अयोध्या, रुचि तिवारी को मथुरा से बाराबंकी, दिवाकर कुमार को औरैया से बाराबंकी, किरण गोंड को सुल्तानपुर से लखीमपुर खीरी, आमिर सुहैल को अयोध्या से कौशांबी, रणविजय सिंह को लखनऊ से जौनपुर, नवनीत सिंह को प्रयागराज से सुल्तानपुर, मीनाक्षी यादव को वाराणसी से प्रतापगढ़, प्रदीप कुमार शुक्ला को प्रतापगढ़ से कानपुर नगर, आशुतोष (द्वितीय) को बरेली से फतेहपुर, देवेंद्र कुमार (प्रथम) को बरेली से बस्ती, विपिन यादव को बाराबंकी से कन्नौज, नीरज कुमार त्रिपाठी कोप्रतापगढ़ से वाराणसी, सुधा सिंह को उन्नाव से बाराबंकी, श्वेता चौधरी को मऊ से मुरादाबाद, वीरेंद्र कुमार (चतुर्थ) को कानपुर नगर से बहराइच, सुधांशु शेखर उपाध्याय को गाजियाबाद से अयोध्या, प्रशांत मिश्रा (द्वितीय) को लखनऊ से अमरोहा, मोहम्मद साजिद (द्वितीय) को प्रयागराज से फतेहपुर, विमलेश सरोज को बरेली से मैनपुरी, सुमित कुमार (प्रथम) को रायबरेली से बरेली, स्मिता गोस्वामी को मुरादाबाद से हरदोई, प्रशांत शुक्ला को अयोध्या से अलीगढ़, इला चौधरी को लखनऊ से चित्रकूट, सतीश कुमार मगन को रायबरेली से अयोध्या, खान जीशान मसूद को बाराबंकी से कासगंज, पराग यादव को मेरठ से बलिया, राज बाबू को फतेहपुर से बस्ती, सचिन कुमार दीक्षित को मुरादाबाद से चित्रकूट स्थानांतरित किया गया है।

चित्रकूट, बांदा व कौशांबी के मोरंग/बालू घाटों में जिम्मेदारों की नाक के नीचे अवैध खनन और अवैध खनन परिवहन चरम पर

  • खनिज विभाग, पुलिस विभाग और परिवहन विभाग पस्त, खनन माफिया मस्त
  • बांदा, चित्रकूट और कौशांबी के मोरंग/बालू घाटों में कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिलता है
  • अवैध खनन और अवैध खनन परिवहन दोनों जिम्मेदारों की नाक के नीचे चरम पर है लेकिन जिम्मेदार आंख बंद किए हुए बैठे हैं, सिर्फ खानापूर्ति तक सीमित हैं सारे जिम्मेदार
  • इन सभी जनपदों में ओवरलोड गाड़ियों को पास करवाने वाले गिरोह भी सक्रिय हैं लेकिन वो भी जिम्मेदारों की नाक के नीचे फल-फूल रहे हैं

लखनऊ: चित्रकूट जनपद में राजापुर तहसील अंतर्गत कई क्षेत्रो में अवैध खनन और अवैध खनन परिवहन दोनों स्थानीय जिम्मेदारों की नाक के नीचे चरम पर है लेकिन जिम्मेदार आंख बंद किए हुए बैठे हैं और उच्चाधिकारियों को ग़लत फ़ीडिंग कर रहे हैं । तहसील स्तर से लेकर जनपद स्तर तक के जिम्मेदार अधिकारी कार्यवाही के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति तक ही सीमित हैं।

अभी हाल ही में चित्रकूट ARTO विवेक शुक्ला का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ है जिसमें ड्राइवर उनके मुंह में इंट्री लेने संबंधी आरोप लगा रहा है।

चित्रकूट ARTO विवेक कुमार शुक्ला का वायरल वीडियो

लेकिन शायद जो फोटो अवैध खनन परिवहन का शनिवार को सोशल मीडिया में वायरल हुआ है ये गाडियां इंट्री की रकम देकर ही जनपद में खुलेआम अवैध खनन परिवहन कर रही है और arto साहब एसी केबिन में विश्राम फरमा रहे हैं और हरी पत्ती का आनंद ले रहे हैं। एक युवा पत्रकार से मिली जानकारी में अब तो सुनने में यहाँ तक आ रहा है की उक्त महोदय नई प्राइवेट स्कॉर्पियो में चल रहे हैं। ऐसे अधिकारियों के यहां सीबीआई, ईडी और इनकम टैक्स सारी एजेंसियां एक साथ जानी चाहिए, जिससे इनको इनके किए का अंदाजा हो जाएगा।

वहीं कौशांबी जनपद समेत इन सभी जनपदों में पासर गैंग भी सक्रिय है, जो न सिर्फ अधिकारियों की लोकेशन देता है बल्कि ओवरलोड वाहनों को बिना किसी तकलीफ के एक निश्चित रकम लेकर जनपदों की सीमा पार करवाता है इनका अपना पूरा रैकेट है, अब इस रकम का बंदरबांट कहां तक होता है इसके एविडेंस तो हमारे पास नहीं हैं लेकिन बिना किसी जिम्मेदार की मिलीभगत के यह कार्य इतना आसानी से संभव भी नहीं है। इससे पहले एक बार अभियान चलाया गया था जिसमे इन पासरों के आकाओं तक के दिमाग की बत्ती गुल हो गई थी लेकिन समय बीता और काम फिर से फलने- फूलने लगा ।

प्रदेश के बांदा, चित्रकूट और कौशांबी जनपदों में अवैध खनन व अवैध खनन परिवहन के मामले में चिंता की बातें उठ रही हैं। इन क्षेत्रों में धरती के निचले स्तरों से मानव गतिविधियों के लिए खतरा बन रहा है। अवैध खनन की प्रवृत्ति के कारण, भूमि के अवैध खनन से पर्यावरणीय संतुलन पर भी असर पड़ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार को सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अवैध खनन की रोकथाम के लिए कठोर कानूनों की आवश्यकता है और उनके पालन का पर्याप्त संवर्धन करना चाहिए। साथ ही, कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ, लोगों को इस प्रयास में शामिल करना चाहिए ताकि अवैध खनन को रोका जा सके।

अवैध खनन के खिलाफ जनजागरूकता को बढ़ावा देने की भी जरूरत है। सामाजिक संगठनों, स्थानीय प्रशासन, और सरकारी अधिकारियों को मिलकर लोगों को जागरूक करना चाहिए कि अवैध खनन के नकारात्मक प्रभाव क्या हो सकते हैं। साथ ही, स्थानीय लोगों को भी इस मुद्दे में सहयोग करना चाहिए ताकि वे स्वयं को संरक्षित रख सकें और अवैध खनन को रोकने में सहायक हो सकें। इस तरह की सामुदायिक भागीदारी और सरकारी संज्ञान का समर्थन, इस समस्या के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

“द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल”: पाकिस्तान से फिल्म के निर्माता-निर्देशक के ऊपर फतवा जारी

  • वसीम रिजवी और सनोज मिश्रा की फिल्म ”द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल” 27 अप्रैल को रिलीज़ होगी
  • पूर्व के वसीम रिज़वी वर्तमान में जितेन्द्र नारायण सिंह हैं
  • सेंसर बोर्ड इस फ़िल्म को रिलीज करने के लिए नहीं दे रहा सर्टिफिकेट
  • पाकिस्तान के करांची स्थित आतंकवादी संगठन जामिया दारुल उलूम ने भी फतवा जारी कर दिया है और फ़िल्म रिलीज ना करने की धमकी दिया

मुंबई: आज मुंबई के अँधेरी वेस्ट इस्थित कंट्री क्लब वीरा देसाई रोड में बॉलीवुड फिल्म ”द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल” का एक संवाददाता सम्मेलन फिल्म के टीम के साथ आयोजन किया गया इस अवसर पर फिल्म के सभी टीम मेंबर उपस्थित थे। मुम्बई में इन दिनों बॉलीवुड फ़िल्म “द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल” को लेकर काफी चर्चाएं सुनने को मिल रही हैं । इस फ़िल्म का सेंसरशिप तो हो चुका है लेकिन सेंसर बोर्ड इस फ़िल्म को रिलीज करने के लिए सर्टिफिकेट नहीं दे रहा है। निर्माता-निर्देशक सेंसर बोर्ड के चक्कर लगा लगाकर थक गए लेकिन सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी या उनकी टीम से कोई भी इस फ़िल्म को लेकर कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं। ऐसे में इस फ़िल्म को बनाने में निर्माता के करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है । इसी मुद्दे को लेकर मुम्बई में आज एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया है जिसमे फ़िल्म ”द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल” की पूरी टीम मौजूद थी।

जितेन्द्र नारायण सिंह (पूर्व में सैय्यद वसीम रिज़वी)

इस फ़िल्म के बारे में बात करते हुए फिल्म के निर्माता वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण सिंह कहते हैं कि हमने तो एक सच्ची घटनाओं पर आधारित सिर्फ फ़िल्म बनाई थी। उसके लिए भी हमारे ऊपर पाकिस्तान के करांची स्थित एक आतंकवादी संगठन जामिया दारुल उलूम ने फतवा जारी कर दिया है और फ़िल्म रिलीज ना करने की धमकी दिया हुआ है, बताइए कि भारत मे फ़िल्म बनाने और रिलीज कराने के लिए क्या अब पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों से इजाज़त लेनी पड़ेगी ?

हम क्या अब यही समझें कि पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार को पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन के लोग चला रहे हैं ? क्योंकि फ़िल्म को रिलीज होने से उनको ही दिक्कत है और यहां पर ममता बनर्जी की सरकार रिलीज नहीं करने दे रही है । तो फिर इन आतंकवादियों से रिश्ते को क्या समझा जाये ? क्या हमारे देश मे सिर्फ वामपन्थी विचारधारा वाले लोगों के लिए ही अभिव्यक्ति की आज़ादी और सिनेमैटिक लिबर्टी मिलती है ? क्या इस सिनेमैटिक लिबर्टी और भिव्यक्ति की आज़ादी पर हम इंडिपेंडेंट लोगों का कोई अधिकार नहीं है ? क्या हमें समाजिक कुरीतियों को उजागर करने के लिए भी अब प्रताड़ित किया जाएगा ? इस फ़िल्म के जरिये हुए हमारे अब तक के नुकसान की भरपाई कौन करेगा ? यदि पश्चिम बंगाल में सबकुछ सही चल रहा है तो ममता सरकार हमारी फ़िल्म रीलीज क्यों नही होने देती ? ममता बनर्जी की सरकार हमारी टीम के पीछे हाथ धोकर क्यों पड़ी हुई है ? क्या हमने फ़िल्म बनाकर कोई अपराध कर दिया है ? ममता सरकार कोई स्पस्ट कारण क्यों नहीं बता रही है ? यदि पश्चिम बंगाल में रोहिंग्याओं और बंगलादेशी घुसपैठियों की मदद ममता बनर्जी की सरकार नहीं कर रही है तो वो इस बात को सरेआम साबित क्यों नहीं करती ? वो हमारी फ़िल्म को बिना रीलीजिंग के ही प्रोपेगैंडा फ़िल्म क्यों साबित करने पर तुली हुई हैं ?

फ़िल्म द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल के विषय वस्तु को लेकर बात करते हुए फ़िल्म के निर्देशक सनोज मिश्रा काफी उत्साहित नजर आए । उन्होंने कहा कि हमने एक बेहद सत्य घटना पर आधारित फिल्म बनाई है जिसमें पश्चिम बंगाल में बढ़ रहे संगठित अपराध और टार्गेटेड हिंसा को हमने इंगित किया है ,अब ये बात तो उनको ही बुरी लग सकती है जो इनके पोषक हैं तो फिर हम क्या करें ? जब इस देश मे मिशन कश्मीर, हैदर, उड़ता पंजाब, कश्मीर फाइल्स, द केरला स्टोरी जैसी मुद्दे वाली फिल्में रिलीज हो सकती हैं तो हमारी फ़िल्म को रिलीज करने में क्या बुराई है ? हमने भी एक मुद्दा ही उठाया है, क्या हमने फ़िल्म में इंसानियत से परे कोई चीज दिखाई है ? क्या उन बाकी फिल्मों को स्पेशल दर्जा हासिल था ? हमें भी फ़िल्म रिलीज करने दिया जाए । मेरा यह फिल्म पूरी तरह बनकर तैयार है जो 27 अप्रैल को पुरे हिंदुस्तान में प्रदर्शित की जाएगी। जिस की सभी तैयारी की जा चुकी है।

फ़िल्म द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल के अभिनेता यजुर मारवाह कहते हैं कि इस फ़िल्म को लेकर वे खासे उत्साहित हैं, उनको पहली बार किसी सत्य घटना पर आधारित फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने का मौका मिला है , हम इस फ़िल्म को करने के बाद से ही वे ऐसी घटनाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो गए हैं। फ़िल्म को अब तक रिलीज हो जाना चाहिए था। फ़िल्म की अभिनेत्री अर्शिन मेहता कहती हैं कि ऐसी फिल्में बार बार नहीं बनतीं । हमने अपने कैरेक्टर से काफी हद तक इंसाफ किया है , द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल वहां की सत्यता को काफी हद तक हूबहू परोसने का काम करेगी । हम इस फ़िल्म को फरवरी में ही रिलीज की प्लानिंग कर रहे थे ताकि देशभर से लोग फ़िल्म के बारे में देखकर अपनी राय देते , लेकिन अब सब चीजें तो हमारे बस में नहीं रहती न !? हमने अपने हिस्से का अभिनय तो कर दिया अब बस आशा में हैं की कब फ़िल्म रिलीज होगी । वसीम रिजवी फिल्म्स के बैनर तले बनी फिल्म ”द डायरी ऑफ वेस्ट बंगाल” के निर्माता वसीम रिजवी उर्फ़ जितेंद्र नारायण सिंह है , फिल्म के लेखक और निर्देशक सनोज मिश्र हैं। फिल्म के कलाकारों में अर्शिन मेहता , यजुर मारवाह, दीपक कंबोज ,अल्फिया शेख, गरिमा कपूर रीना भट्टाचार्य, गौरी शंकर, देव फौजदार, अनिल अंजुनिल, संजू सोलंकी, डा रामेंद्र चक्रवर्ती, दीपक सूठा, जितेंद्र नारायण सिंह, जनार्दन सिंह मयूर, अनुज दीक्षित, नीत महल जैसे मंजे हुए कलाकार है । फिल्म के सह निर्माता क्षत्रपाल सूर्यवंशी, संजय कुमार, और अर्जुन सिंह हैं। फ़िल्म के छायाकार सत्यपाल सिंह, संपादक रंजीत प्रसाद और संगीतकार ए आर दत्ता और पी आर ओ संजय भूषण पटियाला हैं ।