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लखनऊ का ‘Meri Zindagi’ रॉक बैंड: देश का पहला ऑल-वीमेन बैंड जो किचन के बर्तनों से भी बनाता है संगीत

लखनऊ: जब हम म्यूजिक बैंड की बात करते हैं, तो आमतौर पर हमारे सामने पुरुषों का चेहरा आता है, लेकिन लखनऊ का ‘Meri Zindagi’ रॉक बैंड इस धारणा को बदलने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह बैंड न केवल भारत का पहला ऑल-वीमेन रॉक बैंड है, बल्कि ये बैंड पारंपरिक म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स की जगह किचन के बर्तनों का इस्तेमाल कर संगीत बनाता है। सामाजिक बदलाव की आवाज बनने का यह अनोखा प्रयास महिला सशक्तिकरण और सामाजिक मुद्दों को उजागर करने के उद्देश्य से किया गया है।

‘Meri Zindagi’ बैंड की स्थापना और इसका सफर

इस बैंड की स्थापना लखनऊ की डॉ.जया तिवारी ने वर्ष 2010 में की थी। TRUE NEWS UP के मुख्य सम्पादक से बातचीत में उन्होंने बताया कि यह एक मिशन-चालित रॉक बैंड है जिसका मुख्य उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना है, खासकर महिलाओं और लड़कियों से जुड़े मुद्दों पर। बैंड ने अब तक 50 से अधिक शहरों में 550 से अधिक कंसर्ट किए हैं, जिनमें विभिन्न सामाजिक, सरकारी और निजी संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रम भी शामिल हैं।

जया तिवारी का कहना है कि बैंड का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने बैंड की शुरुआत की, तब उनकी टीम में सिर्फ दो-तीन महिलाएं थीं। धीरे-धीरे इससे और महिलाएं जुड़ती गईं। इस बैंड का खास उद्देश्य संगीत के माध्यम से महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों, शिक्षा और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर आवाज उठाना है।

कैसे आया ‘Meri Zindagi’ बैंड का आइडिया?

जया तिवारी ने TRUE NEWS UP के मुख्य सम्पादक शिवसागर सिंह चौहान को दिये एक इंटरव्यू में बताया कि जब उन्होंने देखा कि समाज में महिलाओं और लड़कियों के साथ भेदभाव हो रहा है, तो उन्होंने सोचा कि संगीत के माध्यम से इन मुद्दों को सामने लाना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारा पहला टारगेट Female Foeticide (कन्या भ्रूण हत्या) था। इसके बाद हमने बच्चियों की सुरक्षा, शिक्षा और अन्य सामाजिक समस्याओं को उजागर करने के लिए गाने लिखे।”

बैंड के शुरुआती दिनों में संसाधनों की कमी के चलते उन्होंने पारंपरिक म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स की जगह किचन के बर्तनों का इस्तेमाल किया। घर का काम करते हुए ये महिलाएं गानों के बोल और धुन तैयार करती थीं। यही साधारण बर्तन उनकी संगीत यात्रा के साधन बन गए।

बैंड की सामाजिक जिम्मेदारी और उद्देश्य

‘Meri Zindagi’ बैंड के सभी गाने सामाजिक मुद्दों पर आधारित होते हैं। उनके गाने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, महिलाओं की शिक्षा, और महिला सशक्तिकरण जैसे मिशन के संदेशों को समाज में फैलाते हैं। बैंड ने कई लड़कियों की शिक्षा का जिम्मा भी उठाया है, जिससे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है।

जया तिवारी कहती हैं, हम केवल वही गाने गाते हैं जो हम लिखते और कंपोज करते हैं। हमारा उद्देश्य समाज में बदलाव लाना है, पैसा नहीं। हम कभी भी ऐसे गाने नहीं गाएंगे जिनमें महिलाओं का अपमान या कामुकता हो। बॉलीवुड गानों का प्रदर्शन करने से इनकार करते हुए, बैंड के सभी सदस्य अपने-अपने पेशे में काम करते हैं और संगीत के प्रति अपने जुनून को भी बनाए रखते हैं। बैंड के लिए संगीत सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी है।

बैंड के प्रमुख गाने और उनकी लोकप्रियता

‘Meri Zindagi’ बैंड के गाने अपनी अनूठी धुन और सामाजिक संदेशों के लिए प्रसिद्ध हैं। उनके कुछ प्रसिद्ध गाने ‘ढूंढों खुद को खुद से’ और ‘टैंपो रिक्शा’ वायरल हो चुके हैं। इन गानों ने न केवल आम जनता का ध्यान आकर्षित किया है, बल्कि कई एनजीओ और सामाजिक संगठनों ने भी उनके प्रोजेक्ट्स के लिए बैंड को आमंत्रित किया है। जया ने स्मार्ट स्टडीज, वाटर सेविंग, और नो स्मोकिंग जैसे मुद्दों पर भी गाने लिखे हैं।

बैंड के गाने भारतीय और पश्चिमी संगीत का मिश्रण होते हैं। जया कहती हैं, “हमने समाज के मुद्दों को उजागर करने के लिए रैप संगीत का भी इस्तेमाल किया है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के लोक संगीत से भी हम प्रेरणा लेते हैं।” बैंड का हर गाना महिलाओं के मुद्दों पर आधारित नहीं होता, बल्कि जल संकट, प्रदूषण, और तंबाकू के उपयोग जैसे विषयों पर भी गाने बनाए जाते हैं।

बिना पारंपरिक म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स के संगीत

‘Meri Zindagi’ बैंड का सबसे खास पहलू यह है कि ये महिलाएं पारंपरिक म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स की जगह किचन के बर्तनों का उपयोग करती हैं। बैंड के शुरुआती दिनों में, संसाधनों की कमी के कारण उन्होंने किचन के बर्तनों को ही म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट्स के रूप में इस्तेमाल किया। इससे उनके संगीत में एक अनूठी ध्वनि और शैली आई, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

बैंड की इस खासियत ने उन्हें संगीत की दुनिया में अलग पहचान दिलाई है। जया कहती हैं, “हमारा बैंड मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए काम करता है। हम पारंपरिक इंस्ट्रूमेंट्स की जगह किचन के बर्तनों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे हमारा संगीत श्रोताओं के लिए और भी खास हो जाता है।”

सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने का प्रयास, बैंड की अंतरराष्ट्रीय पहचान

बैंड के सदस्य विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने के लिए गाने लिखते हैं। उनका पहला टारगेट कन्या भ्रूण हत्या (Female Foeticide) था। इसके बाद उन्होंने बच्चियों की सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, और लड़कियों की शिक्षा जैसे मुद्दों पर गाने बनाए। उनके गीतों में सामाजिक बुराइयों को उजागर किया जाता है और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश की जाती है। बैंड को महिला सम्मान सेल, महिला बाल कल्याण विभाग, और 1090 वूमेन पावर हेल्पलाइन के लिए गाने बनाने का श्रेय भी दिया जाता है। उनके गाने स्वयं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा लॉन्च किए गए थे।

लखनऊ से शुरू होकर, ‘Meri Zindagi’ बैंड ने अब अंतरराष्ट्रीय पहचान भी बना ली है। बीबीसी लंदन, ऑस्ट्रेलिया न्यूज, और चीन के मॉर्निंग पोस्ट जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों ने भी उनके काम को कवर किया है। हाल ही में, बैंड ने कश्मीर में भारतीय सेना के लिए भी परफॉर्म किया था।

महिलाओं के लिए प्रेरणादायक संदेश

‘Meri Zindagi’ बैंड का संदेश सभी महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है। जया कहती हैं, “हमारा बैंड महिलाओं के मुद्दों को उठाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम पुरुष विरोधी हैं। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि समाज में महिलाओं को समानता और सम्मान मिले।”

उन्होंने कहा कि, “महिलाओं को अपने आपको अपडेट रखना चाहिए और समाज में एक-दूसरे का समर्थन करना चाहिए। हम महिलाओं के मुद्दों पर गाने बनाते हैं, लेकिन हमारे गानों का उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना है।”

लखनऊ का ‘Meri Zindagi’ बैंड न केवल भारत का पहला ऑल-वीमेन रॉक बैंड है, बल्कि इसका संगीत और उद्देश्य भी इसे खास बनाता है। किचन के बर्तनों से संगीत बनाते हुए और सामाजिक मुद्दों पर गाने लिखते हुए, यह बैंड समाज में बदलाव की आवाज बन गया है। उनके गाने महिलाओं और लड़कियों को उनकी शक्ति का एहसास दिलाते हैं और उन्हें अपने अधिकारों के लिए खड़े होने के लिए प्रेरित करते हैं।

स्वास्थ्य विभाग: एक बेड पर 3 रोगी, डिप्टी सीएम ने जताई नाराजगी

लोहिया के मातृ एवं शिशु रेफरल हॉस्पिटल की व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश, निदेशक हर 15 दिन में करें निरीक्षण

लखनऊ: लोहिया संस्थान के शहीद पथ स्थित मातृ शिशु एवं रेफरल हॉस्पिटल में बदइंतजामी पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने नाराजगी जाहिर की है। एक बेड पर तीन रोगियों को लिटाने का मामला सामने आया है। तीमारदार की शिकायत का संज्ञान लेते हुए डिप्टी सीएम ने बदइंतजामी को दूर करने के निर्देश दिए हैं।
शहीद पथ स्थित मातृ शिशु एवं रेफरल हॉस्पिटल में महिलाओं और बच्चों को इलाज उपलब्ध कराया जाता है। एक तीमारदार ने हॉस्पिटल में एक बेड पर 3 रोगियों के लिटाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में तीमारदार ने फोटो भी संलग्न किये हैं।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए निदेशक को व्यवस्था सुधारने की हिदायत दी है।

उन्होंने कहा कि रोगियों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराया जाये। इस तरह की घटनाओं से सरकार की छवि धूमिल हो रही है। रोगियों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने में किसी भी तरह की लापरवाही ठीक नहीं है। पूरे प्रकरण की एक सप्ताह में जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रेषित करें। उन्होंने कहा कि निदेशक कम से कम 15 दिन में एक बार हॉस्पिटल का औचक निरीक्षण करें। जो भी कमियां मिलें। उन्हें दूर करें।

पशुपालन विभाग: पशुधन मंत्री ने विभाग के विगत 06 माह की योजनाओं एवं बजट व्यय की समीक्षा की

  • गोसंरक्षण कार्यों में धनराशि के अभाव में किसी प्रकार का विलम्ब न होने पाए
  • गोशालाओं को आवंटित धनराशि समय से प्रतिमाह उपलब्ध कराई जाए
  • पशुओं हेतु उपलब्ध करायी जाने वाली दवाओं और वैक्सीन की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए
  • चारागाह की भूमि को कब्जामुक्त कराकर हरा चारा उत्पादन किया जाये

  • लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पशुधन विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने आज यहां विधान भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में विगत 06 माह में विभिन्न योजनाओं की अद्तन प्रगति, आवंटित बजट व व्यय विवरण की गहन समीक्षा की। श्री सिंह ने विभाग द्वारा 52 प्रतिशत बजट का उपयोग करने की स्थिति से अवगत होते हुए अधिकारियों को माह फरवरी, 2025 तक शत-प्रतिशत बजट के सदुपयोग करने के सख्त निर्देश दिये। श्री सिंह ने कहा कि सभी योजनाओं के क्रियान्वयन हेतु आवंटित धनराशि को ससमय व्यय किया जाए और गोशालाओं हेतु आवंटित धनराशि प्रतिमाह दी जाए और गोसंरक्षण कार्यों में धनराशि के अभाव में किसी प्रकार का विलम्ब न होने पाए।

श्री सिंह ने निर्देश दिये कि पशुओं हेतु उपलब्ध करायी जाने वाली दवाओं और वैक्सीन की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए और इसमें किसी प्रकार का समझौता न किया जाए। पशुओं के उत्तम स्वास्थ्य और पौष्टिक चारे के आधार पर ही कृत्रिम गर्भाधान के लक्ष्यों को पूर्ण और सफल बनाया जा सकता है।मण्डल एवं जनपद स्तर पर आयोजित होने वाले पशु मेलों को और अधिक उपयोगी व सार्थक बनाया जाए। किसानों और अच्छे पशुपालकों को प्रोत्साहित भी किया जाए। गोआश्रय स्थल मंे साफ-सफाई की उत्तम व्यवस्था की जाए। वर्तमान में प्रदेश में 7558 गोआश्रय स्थलों पर 12,01,238 गोवंश का संरक्षण किया गया है।

  • श्री सिंह ने विभिन्न जनपदों से निराश्रित गोवंश के संबंध में प्राप्त शिकायतों के संबंध में निर्देशित किया कि छुट्टा गोवंशों को गोआश्रय स्थलों पर भेजा जाए और प्रतिदिन इसकी रिपोर्ट मुख्यालय मंगाई जाए। नवीन और निर्माणाधीन गोआश्रय स्थलों के निर्माण कार्य में तेजी लाकर उन्हें शीघ्र क्रियाशील किया जाये। हर गौशाला में चारे भूसे की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। सभी मुख्य पशुचिकित्साधिकारी स्थानीय प्रशासन के सहयोग से चारागाह की भूमि को कब्जा मुक्त करायें और कब्जामुक्त भूमि पर बरसीन, जैई आदि गोवंश हेतु उपयोगी चारा बोआई का कार्य करायें।

बैठक में प्रमुख सचिव के0रवीन्द्र नायक ने मंत्री जी को विभाग की योजनाओं एवं बजट की अद्यतन स्थिति से अवगत कराया और आश्वस्त किया कि उनसे प्राप्त दिशा निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जायेगा। प्रमुख सचिव ने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि गोआश्रय स्थलों पर सभी आवश्यक सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि वृहद गो संरक्षण केन्द्रों के निर्माण में कार्यों को शीघ्र पूरा किया जाये।

बैठक में पशुधन विभाग के विशेष सचिव देवेन्द्र पाण्डेय, पशुपालन विभाग के निदेशक डा0पी0एन0 सिंह, अपर निदेशक डा0 अरविन्द कुमार सिंह, अपर निदेशक डा0 जयकेश पाण्डेय, एलडीडीबी के डा0 नीरज गुप्ता सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

डॉ.अंजना सिंह सेंगर को मॉरिशस के विश्व हिंदी सचिवालय और यांगून में मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान

विश्व हिंदी सचिवालय की महासचिव डॉ.माधुरी रामधारी से सम्मान पत्र लेती हुई डॉ.अंजना सिंह सेंगर

लखनऊ: साहित्य जगत में अपनी उत्कृष्ट रचनाओं के माध्यम से पहचान बनाने वाली डॉ. अंजना सिंह सेंगर को हाल ही में मॉरिशस और म्यांमार (यांगून) में उनके साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। मॉरिशस के विश्व हिंदी सचिवालय और यांगून स्थित भारतीय दूतावास ने हिंदी साहित्य में उनके योगदान को मान्यता दी है।

मॉरिशस में विश्व हिंदी सम्मेलन में सम्मान

मॉरिशस के रेडियो चैनल के स्टूडियो में डॉ.अंजना सिंह सेंगर

अगस्त महीने में मॉरिशस में आयोजित तीन दिवसीय विश्व हिंदी सचिवालय के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में डॉ. अंजना सिंह सेंगर को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। इस सम्मेलन में मॉरिशस के राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन, प्रधानमंत्री प्रवीण कुमार जगनोथ, उप प्रधानमंत्री लीला देवी दुकन, और भारत की उच्चायुक्त नंदिनी के. सिंगला सहित अन्य प्रमुख हिंदी विद्वानों ने हिस्सा लिया। डॉ. अंजना सिंह को उनकी उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों के लिए सम्मानित किया गया, और उनका साक्षात्कार तथा काव्य पाठ मॉरिशस के रेडियो चैनल पर प्रसारित किया गया।

यांगून में हिंदी दिवस पर विशिष्ट काव्य पाठ

यांगून दूतावास में वक्तव्य देती हुई डॉ.अंजना सिंह सेंगर

मॉरिशस के बाद, डॉ.अंजना सिंह सेंगर को म्यांमार की राजधानी यांगून में स्थित भारतीय दूतावास और स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र द्वारा आयोजित हिंदी दिवस समारोह में आमंत्रित किया गया। इस अवसर पर उन्होंने “डिजिटल युग में हिंदी की भूमिका” विषय पर वक्तव्य दिया और अपने ओजस्वी काव्य पाठ से वहां उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भारतीय राजदूत अभय ठाकुर ने उनके काव्य पाठ की सराहना करते हुए कहा, “डॉ.सेंगर की पंक्तियां हारे हुए इंसान में जीत का जोश भर देती हैं।”

यांगून में भारत के राजदूत अभय ठाकुर के साथ डॉ.अंजना सिंह सेंगर

यांगून में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान स्थानीय महिलाओं ने डॉ. अंजना सिंह के साथ ऑटोग्राफ और सेल्फी लेने की होड़ मचा दी। स्त्री विमर्श पर आधारित उनकी कविताओं ने वहां की महिलाओं को गहराई से प्रभावित किया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें पुनः यांगून आने का निमंत्रण दिया गया।

भारतीय प्रतिनिधि मंडल का हिस्सा

यांगून में भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित रात्रि भोज में डॉ. अंजना सिंह के साथ भारत के प्रसिद्ध ग़ज़लकार सुशील साहिल, डॉ. इंद्रजीत शर्मा, अंजू शर्मा, डॉ. प्रेम भारद्वाज, पत्रकार सनोज तिवारी और रविंद्र शुक्ला ने भी हिस्सा लिया।

डॉ.अंजना सिंह सेंगर की यह अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक यात्रा उनके समर्पण और साहित्यिक कौशल का प्रतीक है। मॉरिशस और यांगून में उन्हें मिले ये सम्मान न केवल उनके लेखन की शक्ति को दर्शाते हैं, बल्कि यह हिंदी साहित्य के वैश्विक विस्तार की भी पुष्टि करते हैं।

स्वास्थ्य विभाग: लिफ्ट की मरम्मत में लापरवाही बरतने वाली कंपनी होगी ब्लैक लिस्ट

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने झांसी मेडिकल कॉलेज में लिफ्ट की व्यवस्थाएं सुधारने के दिए निर्देश

लखनऊ: झांसी के महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में नौ माह से खराब पड़ीं पांच लिफ्ट जल्द ही ठीक कराई जायेंगी। जिन लिफ्ट की मरम्मत नहीं हो सकेंगी, उनके स्थान पर नई लिफ्ट स्थापित की जायेंगी। लिफ्ट की मरम्मत में लापरवाह कंपनी को तत्काल ब्लैकलिस्ट करने एवं भुगतान रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने गुरुवार को समाचार पत्रों में झांसी के मेडिकल कॉलेज में खराब लिफ्ट की खबर का संज्ञान लिया। डिप्टी सीएम ने कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. एनएस सेंगर से तुरंत विकल्पों के माध्यम से खराब लिफ्ट को चालू कराने के निर्देश दिए हैं। जो कंपनी लिफ्ट की मरम्मत का काम देख रही थी उसे ब्लैक लिस्ट करते हुए सभी भुगतान रोकने के निर्देश दिए हैं। डिप्टी सीएम ने प्रधानाचार्य को जल्द ही नई लिफ्ट लगाने के लिए जरूरी कार्रवाई के भी निर्देश दिये हैं। तीन दिन के भीतर रिपोर्ट तलब की है।

झोलाछाप डॉक्टर के खिलाफ होगी जांच

आजमगढ़ में नर्सिंग होम को झोलाछाप डॉक्टर द्वारा संचालित करने के मामले का संज्ञान डिप्टी सीएम ने लिया है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने आजमगढ़ सीएमओ को मामले की जांच के निर्देश दिये हैं। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर अस्पताल का पंजीकरण रद्द किया जायेगा। दोषियों के विरूद्ध कठोर विधिक कार्यवाही की जायेगी। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जायेगी।

एमसीएच विंग की दिक्कतें दूर होंगी, रिपोर्ट तलब

वाराणसी के कबीरचौरा स्थित राजकीय महिला अस्पताल के मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) विंग में अव्यवस्थाएं जल्द दूर होंगी। अखबार में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मुख्य चिकित्साधिकारी को व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिये हैं। अफसरों को मौके पर जाकर जाँच करने एवं समस्त अव्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने के निर्देश दिए हैं। लापरवाही बरतने वाले अधिकारी एवं कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। एक सप्ताह में रिपोर्ट से अवगत कराने के निर्देश दिए गए हैं।