डीएम ने व्यापारियों के सम्मुख आने वाली समस्याओं का त्वरित गति के साथ निस्तारण के निर्देश दिये
गौतमबुद्धनगर/लखनऊ: जनपद गौतम बुद्ध नगर में व्यापारिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने एवं व्यापारियों के सम्मुख आने वाली समस्याओं का त्वरित गति के साथ निस्तारण संभव कराने के उद्देश्य से आज जिला अधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने कैंप कार्यालय सेक्टर 27 नोएडा के सभागार में व्यापार बंधु की बैठक की अध्यक्षता करते हुए सभी व्यापार बंधुओं की समस्याओं को बहुत ही गहनता के साथ अनुश्रवण किया।
आयोजित बैठक में विभिन्न व्यापारिक प्रतिनिधियों के द्वारा जीएसटी विभाग एवं भंगेल एलिवेटेड रोड, दादरी अतिक्रमण, जाम एवं पार्किंग, सड़कों की मरम्मत, बिजली चोरी आदि समस्याओं जिलाधिकारी को अवगत कराया गया।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी अधिकारी गण व्यापारियों की समस्याओं का निराकरण तत्परता के साथ सुनिश्चित करें ताकि जनपद का व्यापार और अधिक तेजी से आगे बढ़ सके। उन्होंने जी०एस०टी० विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि उनके द्वारा अभियान चलाकर जनपद में अपंजीकृत व्यापारियों को पंजीयन जारी किये जाने की कार्यवाही सुनिश्चित की जाये। साथ ही नगर पालिका दादरी के अधिकारियों को निर्देश दिये कि दादरी में अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाये जाने की कार्यवाही सुनिश्चित की जायें।बैठक में उपायुक्त (प्रशासन) राज्य कर अधिकारी, ए०आर०टी०ओ० (ई), ए०सी०पी० ट्रैफिक एवं अन्य संबंधित अधिकारियों तथा व्यापार मण्डल के पदाधिकारीगणों के द्वारा भाग लिया गया। सौजन्य से सूचना विभाग गौतमबुद्धनगर।
लखनऊ, 28 सितंबर 2024: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रतिबंधित चाइनीज लहसुन की बिक्री का मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए खाद्य सुरक्षा आयुक्त और लखनऊ के डीएम को तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब 2014 से चाइनीज लहसुन पर प्रतिबंध लगा हुआ है, तो यह कैसे खुलेआम बाजारों में बिक रहा है?
चाइनीज लहसुन की बिक्री पर क्यों लगा प्रतिबंध?
चाइनीज लहसुन, जो चीन के शेडोंग प्रांत में उगाया जाता है, आकार में बड़ा और देखने में अधिक आकर्षक होता है। इसका रंग सफेद और चमकदार होता है, जो इसे सामान्य लहसुन से अलग करता है। हालांकि, यही लहसुन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना गया है क्योंकि इसमें कई खतरनाक धातुएं जैसे जिंक, आर्सेनिक, और सिंथेटिक रसायन पाए जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह लहसुन खाने से लीवर संबंधी समस्याएं और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा हो सकता है।
चाइनीज लहसुन पर भारत में 2014 में प्रतिबंध लगा दिया गया था, क्योंकि इसके सेवन से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी खतरों की पुष्टि की गई थी। इसके बावजूद, लखनऊ सहित कई बाजारों में यह धड़ल्ले से बिक रहा है, जो खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है।
कोर्ट में पहुंचे वकील, साथ लाए चाइनीज लहसुन
मामले की सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ता मोतीलाल यादव ने अदालत के सामने चाइनीज लहसुन से जुड़े खतरे और उसकी बिक्री के बारे में विस्तार से जानकारी दी। यादव ने चिनहट के बाजार से खरीदा गया चाइनीज लहसुन कोर्ट में पेश किया, जिसे देखकर जज भी हैरान रह गए। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत खाद्य सुरक्षा आयुक्त और लखनऊ के जिलाधिकारी को जांच के आदेश दिए।
हाईकोर्ट ने कहा, “2014 से चाइनीज लहसुन पर प्रतिबंध है, फिर भी यह बाजार में बिक रहा है। प्रशासन इसे रोकने के लिए क्या कदम उठा रहा है?” कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि खाद्य सुरक्षा विभाग और STF (स्पेशल टास्क फोर्स) ने अब तक क्या कार्रवाई की है?
नेपाल के रास्ते भारत में आ रहा है चाइनीज लहसुन
जांच में सामने आया है कि चाइनीज लहसुन नेपाल के रास्ते भारत में लाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों, जैसे महराजगंज, बहराइच, और लखीमपुर खीरी, से चाइनीज लहसुन की तस्करी हो रही है। इन जिलों की सीमा नेपाल से सटी हुई है, जिससे तस्करों के लिए यह रास्ता आसान हो जाता है। भारत-नेपाल की खुली सीमा का फायदा उठाकर चाइनीज लहसुन को अवैध तरीके से देश में प्रवेश कराया जा रहा है।
चाइनीज लहसुन की पहचान और स्वास्थ्य पर असर
चाइनीज लहसुन को आसानी से पहचाना जा सकता है। इसका आकार सामान्य लहसुन से बड़ा होता है और रंग अत्यधिक सफेद और चमकीला होता है। यह लहसुन दिखने में बेहद आकर्षक होता है, जिससे लोग इसे खरीदने में झिझक नहीं करते। हालांकि, यह लहसुन स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। इसमें जिंक और आर्सेनिक जैसी खतरनाक धातुएं पाई जाती हैं, जो शरीर में घातक बीमारियों का कारण बन सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, चाइनीज लहसुन में इस्तेमाल होने वाले सिंथेटिक रसायन लीवर के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं। लंबे समय तक इसका सेवन करने से लीवर की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, इसमें मौजूद हानिकारक धातुएं शरीर में जमा होकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं।
एफएसडीए (खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन) और STF की कार्रवाई
हाईकोर्ट के आदेश के बाद, खाद्य सुरक्षा विभाग और STF की संयुक्त टीम ने लखनऊ की मंडियों में छापेमारी शुरू कर दी है। टीमों ने कई बाजारों में जाकर चाइनीज लहसुन की बिक्री की जांच की और कुछ दुकानों से नमूने भी एकत्रित किए। चिनहट बाजार, जहां चाइनीज लहसुन धड़ल्ले से बिक रहा था, वहां कई दुकानों पर छापेमारी की गई।
STF ने चाइनीज लहसुन के व्यापार से जुड़े तस्करों का भी पता लगाने के लिए कार्रवाई शुरू की है। नेपाल से लाकर इसे यूपी के विभिन्न जिलों में वितरित किया जा रहा है, जिसमें कुछ बड़ी मंडियों का भी नाम सामने आया है।
कोर्ट ने तंत्र बनाने के दिए निर्देश
हाईकोर्ट ने यह भी पूछा कि प्रशासन चाइनीज लहसुन की बिक्री को रोकने के लिए क्या तंत्र अपना रहा है। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाजारों में नियमित रूप से जांच की जाए और अगर किसी दुकान पर प्रतिबंधित चाइनीज लहसुन पाया जाता है, तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
अदालत ने यह भी कहा कि चाइनीज लहसुन के खतरों के बारे में आम जनता को जागरूक करना बेहद जरूरी है। बाजारों में जो लोग इस लहसुन को बेच रहे हैं, उन्हें इसके स्वास्थ्य संबंधी खतरों के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि वे इसे बेचना बंद कर दें।
आखिर क्यों बिक रहा है चाइनीज लहसुन?
चाइनीज लहसुन, अपने बड़े आकार और आकर्षक रंग के कारण, भारतीय बाजार में लोकप्रिय है। लोग इसकी ओर आकर्षित होते हैं, लेकिन उन्हें इसके खतरों के बारे में जानकारी नहीं होती। चूंकि यह लहसुन सामान्य लहसुन की तुलना में दिखने में बेहतर होता है, इसलिए दुकानदार इसे आसानी से बेच देते हैं।
इसके अलावा, इसका मूल्य भी सामान्य लहसुन की तुलना में कम होता है, जिससे इसकी बिक्री बढ़ जाती है। लेकिन इसकी सस्ती कीमत के पीछे छिपे स्वास्थ्य खतरों के बारे में लोगों को शायद ही पता हो।
हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणियां
हाईकोर्ट ने चाइनीज लहसुन की अवैध बिक्री पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह गंभीर स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकता है। कोर्ट ने खाद्य सुरक्षा विभाग से यह सुनिश्चित करने को कहा कि बाजारों में इस लहसुन की बिक्री तुरंत रोकी जाए। कोर्ट ने अधिकारियों से यह भी कहा कि वे सुनिश्चित करें कि किसी भी बाजार में चाइनीज लहसुन की खेप न पहुंचे।
अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच इस मामले में 1 अक्टूबर 2024 को फिर से सुनवाई करेगी, जिसमें खाद्य सुरक्षा आयुक्त और डीएम लखनऊ को अपनी जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि अगर जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गैर-जिम्मेदाराना रवैया सामने आया, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस मुद्दे पर अब सभी की नजरें 1 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें यह स्पष्ट होगा कि चाइनीज लहसुन की बिक्री पर रोक लगाने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाएगा और तस्करों के खिलाफ किस प्रकार की कार्रवाई की जाएगी।
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लखनऊ, 28 सितंबर 2024: संचारी रोगों और दस्तक अभियान को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक मंडलायुक्त डॉ. रोशन जैकब की अध्यक्षता में आयुक्त सभागार कार्यालय में सम्पन्न हुई। बैठक में सयुक्त विकास आयुक्त केके सिंह, अपर नगर आयुक्त ललित कुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी मनोज अग्रवाल समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे। बैठक का मुख्य उद्देश्य संचारी रोगों और जलजनित बीमारियों के प्रति जागरूकता फैलाने और इन बीमारियों की रोकथाम के लिए प्रभावी उपायों पर चर्चा करना था।
संचारी रोग एवं दस्तक अभियान का उद्देश्य
डॉ.रोशन जैकब ने बैठक में कहा कि संचारी रोगों और दस्तक अभियान का मुख्य उद्देश्य दिमागी बुखार, डायरिया, मलेरिया, डेंगू और अन्य जलजनित रोगों की रोकथाम करना है। इसके लिए आशा कार्यकर्ता और अन्य स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करेंगे। इस अभियान के तहत 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की खून की कमी की जांच की जाएगी। गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें उपचार और जरूरी पोषण उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को विटामिन ‘ए’ का घोल दिया जाएगा।
बच्चों को मिलेगी मुफ्त जांच और उपचार सेवाएं
बैठक में यह भी चर्चा की गई कि दस्तक अभियान के तहत बच्चों को दस्त रोग, निमोनिया और जन्मजात बीमारियों से पीड़ित बच्चों की पहचान कर उन्हें मुफ्त जांच, उपचार और परिवहन सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इस अभियान के माध्यम से गंभीर बीमारियों से ग्रसित बच्चों को त्वरित और मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
साफ-सफाई पर विशेष जोर
मंडलायुक्त ने साफ-सफाई को लेकर भी सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में संचारी रोगों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए साफ-सफाई को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। नालियों में जमी हुई शिल्ट को तत्काल साफ किया जाए और नियमित रूप से फॉगिंग और एंटी लार्वा छिड़काव कराया जाए। उन्होंने कहा कि टूटे-फूटे नालियों की मरम्मत तत्काल कराई जाए और खाली प्लॉटों में कूड़ा न जमा होने पाए।
साथ ही, उन्होंने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि वाटर लाइन और सीवर लाइन में किसी भी प्रकार का रिसाव न हो। रिसाव की स्थिति में इसे तुरंत ठीक किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि मच्छरों के प्रजनन को रोकने के लिए घरों और सार्वजनिक स्थानों पर पानी जमा न होने दें। मच्छरजनित रोगों जैसे मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया से बचाव के लिए लोगों को जागरूक किया जाना बेहद जरूरी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेष ध्यान
ग्रामीण इलाकों में वेक्टर जनित रोगों और जलजनित बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए। मंडलायुक्त ने कहा कि उथले हैंडपंपों को लाल रंग से चिन्हित किया जाए और इंडिया मार्क हैंडपंपों और प्लेटफार्मों की मरम्मत को प्राथमिकता दी जाए।
मच्छर नियंत्रण और हाई-रिस्क एरिया की निगरानी
बैठक में मच्छरों के प्रजनन और घनत्व की सतत निगरानी के लिए संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए। मंडलायुक्त ने कहा कि हाई-रिस्क एरिया में अंतर विभागीय सहयोग के साथ सघन मच्छर नियंत्रण गतिविधियां चलाई जाएं। घरों के अंदर मच्छरों के प्रजनन के अनुकूल स्थितियों की जांच की जाए और इसे प्राथमिकता पर किया जाए। आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर लोगों को मच्छरों से बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी जाए।
संचारी रोगों से बचाव के उपाय
मंडलायुक्त ने कहा कि संचारी रोगों से बचाव के लिए सबसे जरूरी है कि हम अपने आस-पास सफाई रखें। बच्चों को खाना खाने से पहले और शौच के बाद हाथ धोने की आदत डालें। इसके अलावा, घर के आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि यह मच्छरों के प्रजनन का कारण बनता है। नियमित फॉगिंग और साफ-सफाई से मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों को रोका जा सकता है।
इस बैठक के जरिए शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में संचारी रोगों की रोकथाम और सफाई व्यवस्था को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए। मंडलायुक्त ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए सभी अधिकारियों से पूरी तत्परता और समर्पण के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
युद्धस्तर पर एंटीलार्वा का छिड़काव करने के दिए निर्देश
लखनऊ: फैजुल्लागंज में आये डेंगू के नये मामलों को गंभीरता से लेते हुए विधायक डा. नीरज बोरा ने नगर आयुक्त को फागिंग व एंटीलार्वा दवाओं के छिड़काव का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू करने का निर्देश दिया है। डेंगू से हुई मौत की खबर को अफसोसजनक बताते हुए शुक्रवार को डा. बोरा ने क्षेत्र का भ्रमण करते हुए स्थानीय नागरिकों से बात की और साफ सफाई की स्थिति भी देखी।
विधायक डा. बोरा ने कहा कि राज्य सरकार के विशेष प्रयासों से डेंगू पर काफी हद तक नियंत्रण हुआ था किन्तु पुनः डेंगू के नये मामले चिन्ताजनक हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में विधायक निधि से कुल 9 टैंकर व ट्रैक्टर खरीद कर नगर निगम को उपलब्ध कराये गये थे उनमें से आवश्यकतानुसार टैंकरों में एंटीलार्वा दवाइयों का मिश्रण कर छिड़काव कराने तथा युद्धस्तर पर फागिंग कराने के लिए हमने नगर आयुक्त को निर्देशित किया है। विधायक डा. बोरा ने कहा कि अपने पास पड़ोस की साफ सफाई और जलभराव न होने देने के लिए स्थानीय नागरिकों को भी सचेत होना पड़ेगा। बरसात के समय बुखार व अन्य वैक्टरजनित रोगों के आक्रमण बढ़ जाते हैं जिनसे बचाव किया जाना जरुरी है। विधायक डा. बोरा ने कहा कि लखनऊ उत्तर की मलीन बस्तियों समेत विभिन्न वार्डों की साफ-सफाई, फागिंग, एण्टी लार्वा छिड़काव, शिविर लगाने आदि के साथ ही सघन जागरुकता कार्यक्रम कराने के लिए हमने मुख्य चिकित्सा अधिकारी और नगर निगम प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिये हैं। उन्होंने उम्मीद जतायी कि शनिवार की सुबह से डेंगू रोधी अभियान को और तेजी मिलेगी।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के परिवहन आयुक्त चंद्रभूषण सिंह ने आज बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रदेश के 53 जनपदों के एआरटीओ (प्रवर्तन) का सितंबर माह का वेतन रोकने के निर्देश जारी किए हैं। यह जानकारी अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) एक सिंह ने दी।
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1 जुलाई 2024 से 31 अगस्त 2024 तक प्रशमन शुल्क के निर्धारित लक्ष्य को प्रदेश के 53 जनपदों में प्राप्त नहीं किया जा सका,जिसके कारण ए आर टी ओ (प्रवर्तन) का सितंबर माह का वेतन रोके जाने का निर्णय मुख्यालय स्तर से लिया गया है। अपर परिवहन आयुक्त ने बताया कि मुख्यालय स्तर से लगातार निर्देश दिए जाते हैं कि प्रशमन शुल्क के निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त किये जाने हेतु फील्ड में तैनात अधिकारी प्रयास करें। फील्ड में तैनात प्रवर्तन अधिकारी अपने-अपने जनपदों में प्रशमन शुल्क प्राप्ति में रुचि नहीं दिखा रहे हैं जो कि शासन एवं मुख्यालय के निर्देशों की अवहेलना है।