ग्रेटर नोएडा में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के दूसके संस्करण में शनिवार को यूपी सूचना विभाग के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने किया स्टॉल्स का अवलोकन
सूचना विभाग समेत विभिन्न विभागों के स्टॉल्स का किया निरीक्षण, उद्यमियों से किया संवाद
मुलाकात के दौरान उद्यमी दिखे कारोबार में बढ़ोतरी को लेकर आशान्वित, बोले: आर्थिक उन्नति के नए मार्ग प्रशस्त कर रहा यूपीआईटीएस 2024
प्रमुख सचिव, सूचना ने जतायी उम्मीद, प्रदेश की औद्योगिक गति को तेजी देने का सशक्त माध्यम बन रहा है यूपीआईटीएस-2024
ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश को ‘उत्तम प्रदेश’ बनाने के लिए संकल्पित प्रदेश सरकार द्वारा औद्योगिक विकास को गति देने की दिशा में किए गए प्रयास मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। इन्हीं प्रयासों में से एक यूपीआईटीएस 2024 भी है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के दूसके संस्करण के अंतर्गत शनिवार को सूचना विभाग के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने स्टॉल्स का अवलोकन किया।
पांच दिवसीय कार्यक्रम के चौथे दिन प्रमुख सचिव (सूचना विभाग) संजय प्रसाद ने भ्रमण के दौरान इंडिया एक्सपो मार्ट में लगाए गए सूचना विभाग समेत विभिन्न विभागों के स्टालों का दौरा किया। साथ ही, स्टालों पर उपस्थित उद्यमियों से उन्होंने संवाद कायम किया और आयोजन के जरिए प्राप्त हो रहे अवसरों को लेकर चर्चा की।
कारोबार में बढ़ोतरी को लेकर आशान्वित दिखे उद्यमी
भ्रमण व अवलोकन के दौरान उद्यमियों ने संजय प्रसाद को आयोजन के माध्यम से कारोबार में बढ़ोतरी, व्यापक मार्केट तक पहुंच और आय में बढ़ोत्तरी जैसे विषयों की जानकारी दी। वह व्यापार को लेकर प्रगति के लिए भी आशान्वित दिखे। प्रमुख सचिव ने स्टालों का अवलोकन कर संबंधित विभागों के कार्यों की समीक्षा व सराहना भी की।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव ने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का द्वितीय संस्करण प्रथम संस्करण की भांति ही प्रदेश सरकार के कुशल नेतृत्व में सफल हो रहा है।
उनके अनुसार, पिछली बार की ही तरह इस बार भी हमारे उद्यमियों को कहीं ज्यादा कारोबार मिलने का मार्ग उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो के जरिए प्रशस्त होगा। संजय प्रसाद के अनुसार, यह आयोजन उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास को और अधिक गति देने का श्रेयस्कर माध्यम साबित हो रहा है।
लखनऊ, 28 सितम्बर 2024: उत्तर रेलवे के लखनऊ मण्डल चिकित्सालय में अब नवजात बच्चों का जन्म पंजीकरण के साथ ही आधार नामांकन किया जाएगा। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) और उत्तर रेलवे के संयुक्त प्रयास से यह नई सुविधा शुरू की गई है, जिससे बच्चों का आधार पंजीकरण जन्म के तुरंत बाद ही संभव हो सकेगा।
यह पहल देशभर में रेलवे द्वारा संचालित चिकित्सालयों और स्वास्थ्य केंद्रों में अपनी तरह की पहली सुविधा है, जहां भारतीय रेल अपने रजिस्ट्रार कोड का उपयोग करके नवजातों के लिए जन्म पंजीकरण आधारित आधार नामांकन करेगी। इस प्रक्रिया में रेलवे के कर्मचारी स्वयं आधार ऑपरेटर की भूमिका निभाएंगे, जिससे यह सुविधा और भी सुगम हो जाएगी।
विशिष्ट पहचान प्रणाली का विस्तार
कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI), लखनऊ के उप महानिदेशक प्रशांत कुमार सिंह की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में आधार नामांकन और अपडेट की प्रक्रिया को निरंतर गति दी जा रही है। वर्तमान में, राज्य में 15,508 आधार नामांकन और अपडेट मशीनें हर महीने लगभग 44.08 लाख निवासियों का आधार नामांकन और अपडेट कर रही हैं। लखनऊ जिले में 298 मशीनों की मदद से लगभग 1.35 लाख निवासियों का आधार नामांकन किया जाता है।
इस पहल के पीछे उद्देश्य
उत्तर रेलवे द्वारा शुरू की गई इस पहल का मुख्य उद्देश्य जन्म पंजीकरण और आधार नामांकन की प्रक्रिया को एकीकृत करना है, ताकि नवजात बच्चों को शुरुआत से ही आधार पहचान मिल सके। यह पहल न केवल सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में सहायक होगी, बल्कि भविष्य में पहचान संबंधी जटिलताओं को भी कम करेगी।
समारोह में विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
इस अवसर पर मण्डल चिकित्सालय, उत्तर रेलवे की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक संगीता सागर, मण्डल चिकित्सालय, पूर्वोत्तर रेलवे, बादशाह नगर की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक दीक्षा चौधरी, लखनऊ मंडल की एडीआरएम नीलिमा सिंह, UIDAI क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ के निदेशक ले. कर्नल डॉ. प्रवीण कुमार सिंह, आकाश दीप और उप निदेशक अमित सिंह भी उपस्थित थे।
रेलवे कर्मचारियों की भूमिका
इस पहल में रेलवे के कर्मचारी विशेष रूप से प्रशिक्षित होकर आधार ऑपरेटर के रूप में काम करेंगे। यह सुनिश्चित करेगा कि नवजात बच्चों का आधार नामांकन तेजी से और सही तरीके से हो सके। रेलवे द्वारा यह कदम डिजिटल इंडिया अभियान के तहत आधार की व्यापकता को बढ़ाने के साथ-साथ नागरिक सेवाओं में पारदर्शिता और सुगमता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
नवजात आधार पंजीकरण के लाभ
बच्चों का आधार पंजीकरण न केवल सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ उठाने में सहायक है, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य नागरिक सुविधाओं तक पहुंच को भी सुगम बनाता है। जन्म के साथ ही आधार पहचान मिलने से बच्चों को सरकारी योजनाओं जैसे कि टीकाकरण, आंगनवाड़ी सेवाएं, और स्कूल प्रवेश में भी सुविधा होगी।
उत्तर रेलवे मण्डल चिकित्सालय, लखनऊ में नवजात बच्चों के लिए आधार नामांकन की यह सुविधा एक महत्वपूर्ण कदम है जो देश के डिजिटल विकास में मील का पत्थर साबित होगी। यह पहल यह सुनिश्चित करती है कि हर नागरिक को उनके जन्म से ही डिजिटल पहचान मिले और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने में कोई कठिनाई न हो।
लखनऊ, 28 सितंबर 2023: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में डेंगू और मलेरिया के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। आज, 28 सितंबर को, शहर में 39 नए डेंगू और 3 मलेरिया के पॉजिटिव मामले सामने आए। इसके साथ ही, वर्ष 2024 की शुरुआत से अब तक जिले में कुल 429 डेंगू और 408 मलेरिया के पॉजिटिव मरीजों की पुष्टि हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अलीगंज, चंदरनगर, सरोजनीनगर, एन.के. रोड और इंदिरानगर जैसे क्षेत्रों में डेंगू के मामलों में वृद्धि देखी गई है।
डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए सघन सर्वेक्षण अभियान
लखनऊ के स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की टीमों ने लगभग 1,160 घरों और उनके आस-पास मच्छरजनित स्थितियों का सर्वेक्षण किया। इस सर्वेक्षण के दौरान 6 घरों में मच्छरों की ब्रीडिंग की स्थितियां पाई गईं, जिनके खिलाफ नोटिस जारी किए गए हैं। नगर मलेरिया इकाई और जिला मलेरिया अधिकारी की टीमों द्वारा जनपद के विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया गया और लार्वा रोधी रसायन का छिड़काव किया गया।
डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मच्छर रोधी अभियान को सघन रूप से शुरू किया है। इस अभियान के अंतर्गत शहर के विभिन्न क्षेत्रों जैसे सराय फाटक, दुर्विजय गंज, गणेशगंज, फैजुल्लागंज, मडियाव, अर्जुनगंज, हरिओम नगर, सोना विहार, सेक्टर-12 योगी पार्क और शारदा नगर के आस-पास मच्छर रोधी अभियान चलाया गया।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा मच्छरों की ब्रीडिंग रोकने के लिए आवश्यक कदम
स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की टीमें नागरिकों को मच्छरों की ब्रीडिंग रोकने के लिए कई आवश्यक कदम उठाने की सलाह दे रही हैं। विशेष रूप से डेंगू और मलेरिया जैसे मच्छर जनित रोगों को नियंत्रित करने के लिए लोगों को निम्नलिखित सुझाव दिए गए हैं:
वाटर टैंक और कंटेनरों को ढक कर रखें: घर के अंदर और आस-पास पानी जमा न होने दें। खुले में रखे किसी भी कंटेनर में पानी जमा होने से मच्छरों की ब्रीडिंग होती है, जिससे डेंगू और मलेरिया फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
कबाड़ और बेकार चीजों का निस्तारण करें: पुराने टायर, नारियल के खोल, टूटे हुए बर्तन और अनुपयोगी बोतलों में पानी जमा न होने दें। इन सभी वस्तुओं का उचित निस्तारण सुनिश्चित करें ताकि मच्छरों की ब्रीडिंग न हो सके।
कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें: हर सप्ताह कूलर का पानी बदलें और उसे सूखा और साफ रखें। कूलर में पानी जमा न होने दें, क्योंकि यह मच्छरों के लिए ब्रीडिंग ग्राउंड बन सकता है।
लार्वीवोरस फिश का उपयोग करें: घरों और होटलों में पानी के टैंक में लार्वीवोरस मछलियों का उपयोग करें, जो मच्छरों के लार्वा को खाकर उन्हें नष्ट कर सकती हैं।
बर्ड बाथ और फूलदान का पानी बदलें: बर्ड बाथ और फूलदान में रखे पानी को भी हर सप्ताह बदलें ताकि मच्छरों की ब्रीडिंग रोकी जा सके।
स्वयं को मच्छर जनित बीमारियों से बचाने के उपाय
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों को मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
मच्छरदानी का प्रयोग करें: रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें, ताकि मच्छरों के काटने से बचा जा सके।
पूरी बांह के कपड़े पहनें: विशेष रूप से दिन के समय मच्छरों के काटने से बचने के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनें। मच्छर डेंगू के वायरस को दिन में भी फैलाते हैं, इसलिए दिन के समय विशेष सतर्कता बरतें।
मच्छर रोधी क्रीम का उपयोग करें: शरीर के खुले हिस्सों पर मच्छर रोधी क्रीम लगाएं ताकि मच्छरों के काटने से बचा जा सके।
बुखार होने पर चिकित्सक से संपर्क करें: यदि किसी को बुखार होता है, तो बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें। चिकित्सक के परामर्श से ही दवाओं का सेवन करें, क्योंकि डेंगू और मलेरिया में स्व-उपचार घातक हो सकता है।
क्या न करें: मच्छरों की ब्रीडिंग रोकने के लिए आवश्यक सावधानियां
कूलर और बाल्टी में पानी जमा न होने दें: घर में या घर के आस-पास कूलर, बाल्टी, बैरल, फूलदान, बर्ड बाथ, फ्रीज, टायर और नारियल के खोल में पानी जमा न होने दें। ये वस्तुएं मच्छरों की ब्रीडिंग के लिए अनुकूल स्थान बन सकती हैं।
कबाड़ का सही निस्तारण करें: पुराने टायर, टूटे बर्तन, अनुपयोगी बोतलें, टिन और कबाड़ को घर में न रखें और न ही घर के पास फेंकें। इनका उचित निस्तारण सुनिश्चित करें ताकि मच्छरों की ब्रीडिंग न हो सके।
स्व-उपचार से बचें: यदि बुखार हो, तो स्व-उपचार करने से बचें। चिकित्सक की सलाह के बिना कोई भी दवा न लें, खासकर डेंगू और मलेरिया जैसे गंभीर मामलों में।
स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा किए जा रहे प्रयास
स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम लखनऊ की टीमें विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से मच्छर रोधी अभियान चला रही हैं। इन अभियानों के तहत निम्नलिखित कार्य किए जा रहे हैं:
साफ-सफाई अभियान: शहर के विभिन्न इलाकों में साफ-सफाई के कार्य किए जा रहे हैं। नागरिकों को भी अपने आस-पास की सफाई बनाए रखने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
लार्वा रोधी रसायन का छिड़काव: मच्छरों के लार्वा को नष्ट करने के लिए लार्वा रोधी रसायनों का छिड़काव किया जा रहा है, विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां मच्छरों की ब्रीडिंग की संभावना अधिक होती है।
फॉगिंग अभियान: मच्छरों को नष्ट करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में फॉगिंग का काम किया जा रहा है। इससे मच्छरों की संख्या में कमी आएगी और मच्छर जनित बीमारियों का प्रसार रुकेगा।
स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता अभियान
स्वास्थ्य विभाग द्वारा नागरिकों को मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के लिए “क्या करें, क्या न करें” संबंधी स्वास्थ्य शिक्षा प्रदान की जा रही है। विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में यह स्पष्ट किया गया है कि लोग अपने घरों के आस-पास पानी जमा न होने दें, पूरी बांह के कपड़े पहनें और मच्छरों के काटने से बचने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग करें।
मच्छर जनित बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए ठोस प्रयास
स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम लखनऊ के संयुक्त प्रयासों से शहर में मच्छर जनित बीमारियों के प्रसार को रोकने के लिए सघन अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों का उद्देश्य मच्छरों की ब्रीडिंग को रोकना, नागरिकों को जागरूक करना और डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों के प्रकोप को कम करना है।
मौसमी बीमारियों से जुड़ी जानकारी और सहयोग के लिए नागरिक मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, लखनऊ के कंट्रोल रूम नंबर 0522-2622080 पर संपर्क कर सकते हैं।
लखनऊ, 28 सितंबर 2024: उत्तर प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने नहरों की सिल्ट सफाई को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को चेतावनी दी है कि सिल्ट सफाई के कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह निर्देश उन्होंने सिंचाई और जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंताओं के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में दिए। बैठक में नहरों की सिल्ट सफाई के गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। मंत्री ने कार्यों का भौतिक सत्यापन, जियो टैगिंग, ड्रोन वीडियोग्राफी और सिल्ट के उचित डिस्पोजल की अनिवार्यता पर भी विशेष ध्यान देने को कहा।
सिल्ट सफाई में गुणवत्ता और पारदर्शिता जरूरी: जलशक्ति मंत्री
बैठक के दौरान जलशक्ति मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सिल्ट सफाई के सभी कार्य विभागीय मापदंडों के अनुसार किए जाएं और इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि नहरों की सिल्ट सफाई में शिथिलता या लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जलशक्ति मंत्री ने जोर देकर कहा कि नहरों की सिल्ट सफाई का कार्य शुरू करने से पहले, कार्य के दौरान और कार्य समाप्ति के बाद फोटोग्राफी अनिवार्य रूप से की जाए और इसकी जियो टैगिंग भी कराई जाए। इसके साथ ही, ड्रोन से वीडियोग्राफी कराई जाए ताकि कार्य की शुरुआत और अंत की स्थिति साफ तौर पर प्रदर्शित हो सके। इस प्रक्रिया से कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोका जा सकेगा।
ड्रोन वीडियोग्राफी और जियो टैगिंग से काम की निगरानी
स्वतंत्र देव सिंह ने बैठक में यह भी कहा कि नहरों की सिल्ट सफाई के दौरान ड्रोन से वीडियोग्राफी कराना अनिवार्य होगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वीडियोग्राफी में कार्य की शुरुआत और कार्य के बाद की स्थिति दोनों स्पष्ट रूप से दिखाई दें। इसके साथ ही, नहरों की स्थिति का रिकॉर्ड रखा जाएगा ताकि भविष्य में इसका उपयोग जांच और सत्यापन के लिए किया जा सके।
उन्होंने निर्देश दिए कि नहरों से निकाली गई सिल्ट का उचित ढंग से डिस्पोजल किया जाए। सिल्ट को नहर के आंतरिक भाग में न छोड़ा जाए, और इसका उचित निस्तारण सुनिश्चित हो। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सिल्ट के निपटान की जिम्मेदारी अवर अभियंता और सहायक अभियंता की होगी। वे व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करेंगे कि सिल्ट का सही ढंग से निपटान किया गया हो।
सिल्ट सफाई के लिए ठोस कदम: डिस्पोजल और सत्यापन पर विशेष जोर
जलशक्ति मंत्री ने यह भी कहा कि सिल्ट सफाई के बाद नहरों के हेड और टेल का फोटोग्राफ लेकर रिकॉर्ड में रखा जाए। इससे यह पता चलेगा कि सफाई का अंतिम परिणाम क्या है। इसके अलावा, नहरों के सिल्ट सफाई की सूची भी तैयार की जाएगी जिसमें जनपद, विकासखंड और विधानसभा क्षेत्र का नाम दर्ज होगा। इस सूची में नहर के आंतरिक भाग में की जाने वाली सिल्ट सफाई की लंबाई और स्क्रैपिंग की जानकारी दी जाएगी।
सफाई के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नहर का संरेखण और घुमाव सही बना रहे। पुलों के नीचे जमा सिल्ट को विशेष ध्यान देकर साफ किया जाएगा, ताकि पानी का प्रवाह बाधित न हो।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि नहरों से निकाली गई सिल्ट का संतोषजनक डिस्पोजल सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए अल्पिकाओं (छोटी नहरें) के लिए अवर अभियंता और राजवाहों (बड़ी नहरें) के लिए सहायक अभियंता उत्तरदायी होंगे। वे प्रत्येक माइनर या राजवाहा की जांच कर यह सुनिश्चित करेंगे कि सिल्ट का सही निपटान किया गया है और इसके प्रमाण के रूप में एक सर्टिफिकेट भी देंगे।
सिल्ट सफाई में तकनीकी साधनों का उपयोग: ड्रोन और जियो टैगिंग अनिवार्य
बैठक में मंत्री ने निर्देश दिए कि सिल्ट सफाई के कार्य की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए इसे जियो टैगिंग और ड्रोन वीडियोग्राफी के माध्यम से मॉनिटर किया जाए। उन्होंने कहा कि कार्य स्थल की फोटोग्राफी में नहर का नाम, जनपद का नाम और स्थान के अक्षांश और देशांतर भी दर्ज होना चाहिए। इसके साथ ही, नहरों की सिल्ट सफाई के कार्यों का अभिलेखीकरण भी समुचित रूप से किया जाए।
मंत्री ने यह भी कहा कि नहरों की सिल्ट सफाई और स्क्रैपिंग के लिए एक सूची तैयार की जाए जिसमें नहर के नाम, जनपद, विकासखंड और विधानसभा क्षेत्र की जानकारी के साथ सफाई की लंबाई भी दी जाए। नहर के हेड पर या किसी प्रमुख स्थान पर एक बोर्ड लगाया जाएगा, जिसमें खंड का नाम, नहर का नाम, सफाई की लागत, सहायक अभियंता, अवर अभियंता और ठेकेदार का नाम और मोबाइल नंबर अंकित किया जाएगा। इससे स्थानीय लोगों को भी जानकारी मिल सकेगी और काम की पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
समीक्षा बैठक में मुख्य अभियंताओं की मौजूदगी
समीक्षा बैठक में प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, अनिल गर्ग, प्रमुख अभियंता एवं विभागाध्यक्ष अखिलेश सचान, प्रमुख अभियंता परिकल्प एवं नियोजन संदीप कुमार सहित कई मुख्य अभियंता और अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। सभी अधिकारियों ने सिल्ट सफाई कार्यों की समीक्षा की और इस दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी दी।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे नियमित रूप से नहरों का निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि सिल्ट सफाई के कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुसार हो रहे हैं। किसी भी प्रकार की अनियमितता या लापरवाही पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
नहरों की सफाई का प्रभाव: किसानों को मिलेगा फायदा
नहरों की सिल्ट सफाई से सबसे अधिक लाभ किसानों को मिलेगा, क्योंकि इससे नहरों में जल प्रवाह सुचारू रहेगा और सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ेगी। नहरों में सिल्ट जमा होने से जल प्रवाह धीमा हो जाता है, जिससे खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाता। सिल्ट सफाई से यह समस्या दूर होगी और किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा मिलेगी।
इसके अलावा, नहरों की सिल्ट सफाई से बाढ़ और जलजमाव की समस्याओं को भी रोका जा सकेगा। नहरों में जमा सिल्ट के कारण जल प्रवाह बाधित होता है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। सिल्ट सफाई से यह खतरा कम होगा और जलस्रोतों का समुचित उपयोग हो सकेगा।
सिल्ट सफाई का काम पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से होना चाहिए: स्वतंत्र देव सिंह
जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने स्पष्ट किया कि सिल्ट सफाई का काम पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से होना चाहिए। सभी कार्य निर्धारित मापदंडों के अनुसार पूरे किए जाएं और इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे समय-समय पर कार्यों का निरीक्षण करें और सुनिश्चित करें कि नहरों की सफाई ठीक प्रकार से हो रही है।
अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे नहरों की सफाई के लिए नवीनतम तकनीकों का उपयोग करें और कार्यों का पूर्ण रिकॉर्ड रखें। इससे भविष्य में किसी भी जांच या सत्यापन के दौरान आवश्यक साक्ष्य उपलब्ध होंगे और पारदर्शिता बनी रहेगी।
लखनऊ: ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन को सर्वश्रेष्ठ स्टॉल का पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस आयोजन में यूपी कौशल विकास मिशन का पवेलियन आगंतुकों के बीच खास आकर्षण का केंद्र रहा, जहां पर विभिन्न उभरते हुए तकनीकी और व्यावसायिक कौशलों का लाइव प्रदर्शन किया गया।
इस मौके पर केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह और उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग राकेश सचान ने कौशल विकास मिशन की अपर मिशन निदेशक प्रिया सिंह को सर्वश्रेष्ठ स्टॉल का पुरस्कार स्वरूप ट्रॉफी भेंट कर सम्मानित किया। यह पुरस्कार मिशन के उत्कृष्ट प्रदर्शन और युवाओं के कौशल विकास के प्रति समर्पण का प्रमाण है।
प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को नई तकनीकों से प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे वे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें। इस स्टॉल को मिले सम्मान से यह सिद्ध होता है कि हमारा प्रदेश कौशल के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है।
प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने बताया कि इस पवेलियन में कई महत्वपूर्ण कौशलों का लाइव प्रदर्शन किया जा रहा है, जिनमें मेडिकल सपोर्ट, सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, वर्चुअल रियलिटी (माइनिंग सिम्युलेटर और पेंटिंग एवं फायर फाइटिंग सिम्युलेटर), हैंड एम्ब्रॉयडरी, फॉरेन लैंग्वेज लर्निंग, मेटल एनग्रेविंग, एनिमेशन, ड्रोन टेक्नोलॉजी और पंचकर्म टेक्नीशियन शामिल हैं। इन कौशलों के प्रति आगंतुकों में विशेष रुचि देखी जा रही है, जो राज्य के युवाओं के लिए संभावनाओं का एक नया द्वार खोल रही है।