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यूक्रेन-रूस युद्ध: वैश्विक संकट की नई दिशा और इसके अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव

यूक्रेन-रूस युद्ध का व्यापक प्रभाव और विश्व पर पड़ता असर

लखनऊ/नई दिल्ली: यूक्रेन-रूस युद्ध फरवरी 2022 से चल रहा है और अभी तक इसका कोई समाधान नहीं निकला है। यह संघर्ष न केवल यूक्रेन और रूस को प्रभावित कर रहा है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था और मानवाधिकारों पर भी हो रहा है। इस लेख में, हम इस युद्ध के विभिन्न पहलुओं और इसके वैश्विक प्रभावों की विस्तार से चर्चा करेंगे।

यूक्रेन-रूस युद्ध का आरंभ: कैसे शुरू हुआ यह संघर्ष?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर अचानक सैन्य हमला किया, जिससे एक व्यापक युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो गई। रूस का उद्देश्य यूक्रेन को नाटो से दूर रखना और उसके पूर्वी हिस्से पर नियंत्रण स्थापित करना था। रूस के इस आक्रमण के बाद पश्चिमी देशों ने यूक्रेन के समर्थन में खड़े होकर उसे सैन्य और आर्थिक सहायता प्रदान की। रूस के इस कदम से न केवल यूक्रेन, बल्कि पूरे यूरोप में अस्थिरता पैदा हो गई।

युद्ध की प्रमुख घटनाएं और परिणाम

1. मानवीय संकट और आपदा

यूक्रेन-रूस युद्ध ने यूक्रेन में अभूतपूर्व मानवीय संकट उत्पन्न किया है। लाखों लोगों को अपने घरों से भागकर शरणार्थी बनना पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, इस युद्ध में अब तक हजारों नागरिकों और सैनिकों की जान जा चुकी है। इसके अलावा, यूक्रेन की बुनियादी ढांचा प्रणाली—बिजली, पानी, सड़कें और स्वास्थ्य सेवाएं—भारी क्षति का सामना कर रही हैं। युद्धग्रस्त क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा का अभाव गंभीर स्थिति पैदा कर रहा है।

2. पश्चिमी देशों की प्रतिक्रिया: आर्थिक प्रतिबंध और समर्थन

अमेरिका, यूरोपीय संघ और नाटो देशों ने इस युद्ध में रूस के खिलाफ कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था को कमजोर करना और उसके सैन्य अभियानों पर रोक लगाना है। रूस के तेल और गैस के निर्यात पर प्रतिबंध से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है। यूरोप, जो अपनी ऊर्जा आपूर्ति के लिए रूस पर निर्भर था, अब वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश कर रहा है। इसके अलावा, अमेरिका और यूरोपीय देशों ने यूक्रेन को सैन्य सहायता प्रदान की है, जिससे यूक्रेन अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने में सक्षम हुआ है।

3. वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर प्रभाव

रूस और यूक्रेन दोनों ही विश्व के प्रमुख कृषि उत्पादक देश हैं, विशेष रूप से गेहूं और जौ के उत्पादन में। युद्ध के चलते इन कृषि उत्पादों की आपूर्ति बाधित हो गई है, जिससे वैश्विक खाद्य संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। अफ्रीका और एशिया के कई विकासशील देशों को खाद्यान्न की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी भारी वृद्धि हुई है, जिससे गरीब देशों में भुखमरी और कुपोषण का खतरा बढ़ गया है।

4. रूस-नाटो के बीच बढ़ता तनाव

रूस और नाटो के बीच इस युद्ध के कारण तनाव और भी बढ़ गया है। नाटो ने यूक्रेन का समर्थन करने के लिए अपनी सैन्य उपस्थिति को बढ़ा दिया है, जिससे रूस के साथ टकराव की संभावना बढ़ गई है। रूस ने चेतावनी दी है कि अगर नाटो ने अपनी सैन्य उपस्थिति को और बढ़ाया, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। इस संघर्ष ने रूस और पश्चिमी देशों के बीच संबंधों में और अधिक कटुता पैदा कर दी है, जो कि वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा हो सकता है।

5. रूस की सैन्य क्षमताओं पर सवाल

यूक्रेन ने पश्चिमी देशों से मिली सैन्य सहायता का उपयोग करके रूस के खिलाफ कड़ा प्रतिरोध किया है। यूक्रेन की सेना ने कई मोर्चों पर रूस को पीछे धकेलने में सफलता प्राप्त की है। इससे रूस की सैन्य रणनीति और क्षमताओं पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, रूस ने भी यूक्रेन के महत्वपूर्ण ठिकानों पर भारी नुकसान पहुंचाया है। दोनों देशों की सैन्य रणनीतियां और क्षमताएं इस युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

वैश्विक ऊर्जा संकट और आर्थिक मंदी की आशंका

यूक्रेन-रूस युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा संकट को और भी गंभीर बना दिया है। रूस दुनिया का प्रमुख तेल और गैस निर्यातक है, और उसके खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों के कारण ऊर्जा की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। यूरोप, जो अपनी ऊर्जा आपूर्ति के लिए रूस पर निर्भर था, अब वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की तलाश कर रहा है। यह संकट वैश्विक आर्थिक अस्थिरता का कारण बन रहा है, और दुनिया भर में मुद्रास्फीति की दर में वृद्धि हो रही है।

आर्थिक मंदी की आशंका

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि यूक्रेन-रूस युद्ध वैश्विक आर्थिक मंदी का कारण बन सकता है। ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी से दुनिया के कई देश आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। वैश्विक सप्लाई चेन की रुकावट और मुद्रास्फीति से विकासशील देशों में गरीबी और बेरोजगारी की स्थिति और गंभीर हो रही है।

रूस-चीन गठबंधन: नई कूटनीतिक समीकरण

इस युद्ध के बीच, रूस और चीन के बीच बढ़ते संबंधों ने वैश्विक कूटनीति में नया मोड़ ला दिया है। चीन ने रूस पर पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का विरोध किया और रूस के साथ अपने व्यापारिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत किया है। इस नए गठबंधन से वैश्विक भू-राजनीतिक संतुलन बदल रहा है। चीन का यह रुख पश्चिमी देशों के लिए एक नई चुनौती पेश कर रहा है और इससे शीत युद्ध जैसी स्थिति का पुनर्जन्म हो सकता है।

भविष्य के लिए चुनौतियाँ और दीर्घकालिक प्रभाव

यह युद्ध न केवल वर्तमान के लिए बल्कि भविष्य के लिए भी गंभीर खतरे उत्पन्न कर रहा है। यूरोप में शांति और स्थिरता के लिए यह युद्ध एक बड़ा खतरा बन चुका है। इसके दीर्घकालिक प्रभाव निम्नलिखित हो सकते हैं:

1. वैश्विक ऊर्जा नीति में बदलाव

रूस के खिलाफ प्रतिबंधों के कारण यूरोपीय देशों ने वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है। इससे भविष्य में ऊर्जा नीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

2. भू-राजनीतिक ध्रुवीकरण

रूस और चीन के गठबंधन ने वैश्विक कूटनीति को दो ध्रुवीय बना दिया है। एक तरफ पश्चिमी देश (अमेरिका, यूरोप) और दूसरी तरफ रूस-चीन का ध्रुवीकरण हो रहा है।

3. मानवीय संकट

युद्ध के चलते उत्पन्न हुआ शरणार्थी संकट लंबे समय तक दुनिया के लिए मानवीय और आर्थिक चुनौती बना रहेगा।

4. अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विकास

युद्ध के चलते व्यापार में आए व्यवधान और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़े असर से विकासशील देशों के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

यूक्रेन-रूस युद्ध ने विश्व को एक ऐसे संकट में डाल दिया है, जिसका समाधान निकट भविष्य में नहीं दिखता। इस युद्ध के कारण उत्पन्न मानवीय संकट, ऊर्जा संकट और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता ने पूरी दुनिया को हिला दिया है। आने वाले समय में, इस संघर्ष के परिणामस्वरूप वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में व्यापक बदलाव हो सकते हैं। यह समय है कि वैश्विक समुदाय इस युद्ध को समाप्त करने के लिए ठोस कूटनीतिक प्रयास करे और स्थिरता की दिशा में कदम बढ़ाए।

अस्वीकरण: इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं और न्यूज पोर्टल की नीतियों का प्रतिनिधित्व नहीं करते।

लेफ्टिनेंट जनरल कविता सहाय ने एक विशेष सैनिक सम्मेलन को संबोधित किया

लखनऊ: एएमसी सेंटर एवं कॉलेज की कमांडेंट तथा ओआईसी रिकॉर्ड्स और एएमसी के कर्नल कमांडेंट, लेफ्टिनेंट जनरल कविता सहाय, एसएम, वीएसएम को रक्षा मंत्रालय, नौसेना, नई दिल्ली के एकीकृत मुख्यालय में महानिदेशक चिकित्सा सेवा (नौसेना) के रूप में नई नियुक्ति दी गई है ।

एएमसी सेंटर एवं कॉलेज की कमांडेंट का पदभार छोड़ने से पहले लेफ्टिनेंट जनरल कविता सहाय ने 08 अक्टूबर 2024 को मेजर एलजे सिंह एसी ऑडिटोरियम में एक विशेष सैनिक सम्मेलन में आर्मी मेडिकल कोर सेंटर और कॉलेज के सभी अधिकारियों, नर्सिंग अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों, जवानों और रंगरूटों को संबोधित किया।

इस दौरान लेफ्टिनेंट जनरल कविता सहाय ने आयोजित एक पारंपरिक ‘बड़ाखाना’ में एएमसी सेंटर और कॉलेज के पूरे रैंक के साथ दोपहर का भोजन किया। सैन्य परम्पराओं के अनुरूप जब कोई जनरल अफसर नई तैनाती पर जाता है तो एक ही छत के नीचे “बड़ा खाना”में सम्मिलित होता है।

लखनऊ: भव्य श्रीराम कथा आयोजन की प्रथम बैठक सम्पन्न, 25 दिसंबर से शुरू होगा महोत्सव

लखनऊ: 25 दिसंबर 2024 से 2 जनवरी 2025 तक श्रीराम कथा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। लखनऊ में आगामी दिसम्बर माह में 25 दिसंबर से 2 जनवरी तक बाल्मीकीय रामायण की दिव्य श्रीराम कथा का आयोजन किया जाएगा। इस भव्य आयोजन को लेकर तैयारियों की समीक्षा हेतु मोती महल लॉन में उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री और भारत सेवा संस्थान के अध्यक्ष डॉ.अशोक बाजपेई की अध्यक्षता में श्रीराम कथा सेवा समिति की पहली बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में इस महत्वपूर्ण आयोजन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और तैयारियों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।

आयोजन का मुख्य आकर्षण

आयोजन के संयोजक डॉ. सप्तर्षि मिश्र और अधिवक्ता संजीव पाण्डेय ने जानकारी दी कि अयोध्या से पधारे विश्व विख्यात कथा व्यास स्वामी राघवाचार्य जी महाराज के श्रीमुख से 25 दिसंबर से एक सप्ताह तक भक्ति और ज्ञान की गंगा बहेगी। भक्तजन इस अवसर पर रामायण के विभिन्न प्रसंगों से जुड़ी दिव्य कथाओं का आनंद ले सकेंगे।

श्रीराम कथा का शुभारंभ 25 दिसंबर को लोक विख्यात आचार्य अजय याग्निक जी द्वारा सुंदर काण्ड पाठ से किया जाएगा, जो भक्तों के बीच विशेष श्रद्धा और भक्ति का माहौल बनाएगा।

प्रमुख निर्णय और समिति की बैठक की चर्चा

बैठक में एक प्रमुख निर्णय लिया गया कि श्रीराम कथा सेवा समिति का मुख्य कार्यालय भारत सेवा संस्थान, मोती महल लॉन, लखनऊ में स्थापित किया जाएगा। आयोजन से संबंधित सभी जानकारी भक्तजन इस कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं।

बैठक में उपस्थित प्रमुख गणमान्य सदस्यों में डॉ. जे.एन. मिश्र, वेद प्रकाश त्रिपाठी, श्रीमती प्रज्ञा सिंह, ओंकार नाथ सिंह, सुशील दुबे, कैप्टन बंशीधर मिश्र, उदय शुक्ल, संजय मिश्रा, और जे.पी. मिश्र प्रमुख रूप से शामिल रहे।

श्रीराम कथा की तैयारियों की विस्तृत जानकारी

इस आयोजन को भव्य रूप देने के लिए समर्पित टीम दिन-रात कार्य कर रही है। सभी तैयारियां भक्तजनों के उत्साह और श्रद्धा को ध्यान में रखते हुए की जा रही हैं। आयोजकों ने यह भी जानकारी दी कि श्रीराम कथा के आयोजन स्थल पर विशेष भक्ति मंडप, भक्तों के लिए बैठने की व्यापक व्यवस्था, पार्किंग की सुविधा और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।

यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसमें स्थानीय जनता और देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक विशाल मंच होगा। यह महोत्सव लखनऊ के सांस्कृतिक परिदृश्य को और भी समृद्ध करेगा।

आयोजन से जुड़ी मुख्य जानकारी

• आयोजन तिथि: 25 दिसंबर 2024 से 2 जनवरी 2025

• स्थल: मोती महल लॉन, लखनऊ

• मुख्य कथा वाचक: स्वामी राघवाचार्य जी महाराज (अयोध्या)

• शुभारंभ: सुंदर काण्ड पाठ द्वारा (आचार्य अजय याग्निक जी)

सम्पर्क सूत्र: आयोजन से जुड़ी अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए भक्तजन भारत सेवा संस्थान, मोती महल लॉन, लखनऊ के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

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सरोजनीनगर: स्कूटर इंडिया से रवाना हुई ‘रामरथ-श्रवण अयोध्या यात्रा’, महिलाओं व बुजुर्गों ने किए रामलला के दर्शन

  • 30 वीं रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा से अयोध्या पहुंचे सरोजनीनगर के श्रद्धालु : विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह करवा रहे हैं, निःशुल्क यात्रा
  • डॉ.राजेश्वर सिंह ने पुनः 4 आरडब्लूए में स्थापित कराई लाइब्रेरी, अब तक 11 आरडब्लूए में स्थापित हुई लाइब्रेरी, लक्ष्य सभी 104 आरडब्लूए
  • उन्होंने नियमित संचालित रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा, सरोजनीनगर परिवार के सहयोग समर्थन का सुखद परिणाम

लखनऊ: सरोजनीनगर के समग्र विकास के लिए दृढ़ संकल्पित सरोजनीनगर विधायक डॉ.राजेश्वर सिंह की अनुपम पहल ‘रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा’ पिछले दो वर्ष से अधिक समय से वृद्धजनों के तीर्थयात्रा के सपने को पूरा कर रही है। मंगलवार को स्कूटर इंडिया चौराहा, सरोजनीनगर से संचालित हुई तीसवीं रामरथ श्रवण अयोध्या फ्री बस सेवा के माध्यम से ताराशक्ति केंद्र स्कूटर इंडिया एवं ताराशक्ति केंद्र गहरु की मातृशक्ति तथा क्षेत्र के वृद्धजनों को अयोध्या दर्शन कराया गया। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए खाने-पीने की व्यवस्था से लेकर आवश्यक सुविधाओं का प्रबंध भी किया गया।

अयोध्या पहुंच श्रद्धालुओं ने रामलला के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। यात्रा के अंत में श्रद्धालुओं को रामचरितमानस की प्रति भेंट की गई। विधायक की टीम और अन्य वालंटियर्स ने पूरे सफर में वृद्धजनों और अन्य दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की समस्या नहीं होने दी। अयोध्या यात्रा कर बुजुर्ग बेहद खुश और संतुष्ट दिखे। उन्होंने अपने विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की इस विशेष पहल की सराहाना की तथा उनका आभार व्यक्त किया। बता दें कि ‘रामरथ-श्रवण अयोध्या यात्रा’ पहल के अंतर्गत डॉ.राजेश्वर सिंह द्वारा महीने में दो बार फ्री बस सेवाओं का संचालन किया जाता है। जिनके माध्यम से सरोजनीनगर के वृद्धजनों व महिलाओं को ये सेवा निःशुल्क अयोध्या दर्शन करवाती है, जिसका पूर्ण व्यय विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा किया जाता है।

इस बारे में डॉ. राजेश्वर सिंह कहना है कि वृद्धजनों को तीर्थ यात्रा करवाना मेरा सौभाग्य है। तीर्थयात्रा के दौरान वरिष्ठजनों के चेहरे की खुशी और संतुष्टि देखना सुखद है, उनका आशीर्वाद ही मेरी सामर्थ्य है।’रामरथ-श्रवण अयोध्या यात्रा’ की सफलता माता तारा सिंह की प्रेरणा, वृद्धजनों का आशीर्वाद और क्षेत्रवासियों का समर्थन का ही सुखद परिणाम है। क्षेत्रवासियों को तीर्थयात्रा करवाने के लिए ‘रामरथ-श्रवण अयोध्या यात्रा’ अनवरत जारी रहेगी।

सुशांत गोल्फ सिटी स्थित सेलिब्रिटी गार्डन की चार आरडब्लूए में डॉ.राजेश्वर सिंह ने स्थापित कराई लाइब्रेरी

लाइब्रेरी बौद्धिक विकास का महान मंच है, जो सीखने की क्षमता और ज्ञान में वृद्धि करती है इसी संकल्प के साथ सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र की सभी आरडब्लूए में लाइब्रेरी की स्थापना करवा रहे डॉ.राजेश्वर सिंह ने पुनः सुशांत गोल्फ सिटी स्थित सेलिब्रिटी गार्डन की चार आरडब्लूए, चिन्मय वेलफेयर एसोसिएशन, एफ & एन टावर, सेलिब्रिटी ग्रीन और रिश्ता अपार्टमेंट में विज्ञान, अध्यात्म, कला और ज्ञान से संबंधित पुस्तकें उपलब्ध करवाकर लाइब्रेरी स्थापित करवाई। सरोजनीनगर में अब तक 11 आरडब्लूए में लाइब्रेरी की स्थापना की जा चुकी है, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह का लक्ष्य सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र की सभी आरडब्लूए में लाइब्रेरी स्थापित कराना है। इस दौरान के महासचिव रतन श्रीवास्तव, रिश्ता के प्रेसिडेंट के. के. गुप्ता, एफ & एन टावर कोषाध्यक्ष अरुण कुमार गुप्त, एवं सेलिब्रिटी ग्रीन से रत्ना सिंह तथा अर्जुनगंज मंडल के भाजपा अध्यक्ष मोहित तिवारी, इब्राहिमपुर प्रथम की वार्ड मंत्री सुमन सिंह राठौड़ एवं अन्य रेजिडेंट्स उपस्थित रहे।

बहुत जल्द करेंगे शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों की समस्याओं का समाधान: मंत्री संदीप सिंह

  • बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने शिक्षामित्रों, अंशकालिक अनुदेशकों और रसोइयों से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ की बैठक
  • परिषदीय विद्यालयों के कर्मचारियों की समस्याओं से रूबरू हुए बेसिक शिक्षा मंत्री
  • मंत्री ने अंशकालिक अनुदेशक, शिक्षामित्रों और रसोइयों की समस्याओं को जाना
  • मध्याह्न भोजन और कर्मचारियों की समस्याओं पर हुई चर्चा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों, अंशकालिक अनुदेशकों और रसोइयों की विभिन्न मांगों और समस्याओं पर विचार-विमर्श के लिए मंगलवार को एक बैठक आयोजित की गई। यह बैठक विधानसभा स्थित राज्य मंत्री, बेसिक शिक्षा विभाग (स्वतंत्र प्रभार) के कार्यालय में संपन्न हुई।

मध्याह्न भोजन और कर्मचारियों की समस्याओं पर विचार

बैठक के दौरान छात्रों के मध्याह्न भोजन से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ शिक्षामित्रों, रसोइयों और अनुदेशकों के मानदेय, उनकी उपस्थिति और अन्य समस्याओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इसमें शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए कर्मचारियों की भूमिका पर भी चर्चा हुई।

सरकार की प्रतिबद्धता: समस्याओं का शीघ्र समाधान

बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि सरकार संगठनों के सुझावों पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों की समस्याओं का समाधान बहुत जल्द किया जाएगा। साथी इनके मानदेय बढ़ाने के संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर उनके समक्ष इस विषय को रखा जाएगा। इसके अलावा मंत्री संदीप ने शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों की महत्वपूर्ण भूमिका को भी सराहा।

संगठनों के इन प्रतिनिधियों की रही उपस्थिति

बैठक में शिक्षामित्रों, अंशकालिक अनुदेशकों और रसोइयों के पंजीकृत संगठनों के राज्य स्तरीय अध्यक्ष, महामंत्री और उनके प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने विचार और समस्याएं सरकार के सामने रखीं।