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लखनऊ: केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (होम्योपैथी), ने बताई 100 दिनों की उपलब्धियाँ

लखनऊ: केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (होम्योपैथी), लखनऊ में आयुष मंत्रालय और केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद द्वारा 100 दिनों की प्रमुख उपलब्धियों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस अवसर पर संस्थान के प्रभारी अधिकारी डॉ. लिपिपुष्पा देबता ने संस्थान और आयुष मंत्रालय की उपलब्धियों को विस्तार से प्रस्तुत किया। उनके साथ डॉ.अमित श्रीवास्तव, डॉ.दिव्या वर्मा, और डॉ.प्रतिभा शिवहरे भी उपस्थित थे।

संस्थान का इतिहास और विकास

डॉ. लिपिपुष्पा देबता ने बताया कि होम्योपैथिक औषधि अनुसंधान संस्थान (एचडीआरआई) की स्थापना 1972 में लखनऊ स्थित राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक ड्रग प्रोविंग यूनिट के रूप में की गई थी। वर्ष 1987 में इसे एचडीआरआई में पदोन्नत किया गया और 2024 में नई इमारत का उद्घाटन माननीय केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. मुंजपारा महेंद्रभाई कालूभाई द्वारा किया गया। 14 सितंबर 2023 को संस्थान नए परिसर में स्थानांतरित हुआ और 18 सितंबर 2023 से ओपीडी की शुरुआत 85 मरीजों से हुई, जो अब 300 मरीज प्रतिदिन तक पहुंच चुकी है।

संस्थान की उपलब्धियां

संस्थान में क्लिनिकल रिसर्च, मौलिक अनुसंधान, और क्लिनिकल वेरिफिकेशन जैसी विभिन्न अनुसंधान परियोजनाएं सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं। डॉ. अमित श्रीवास्तव ने बताया कि संस्थान में एनएबीएल और एनएबीएच मान्यता हेतु कार्यवाही जारी है। मरीजों को मुफ्त हीमोग्लोबिन जांच के अलावा स्वच्छता अभियान और अन्य स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं।

आयुष मंत्रालय की 100 दिनों की प्रमुख उपलब्धियां

1. जरावस्था स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन: 100 दिनों में 14,000 से अधिक जरावस्था स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए, जो निर्धारित लक्ष्य से काफी अधिक थे।

2. आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM) प्रमाणन: 1005 आयुष आरोग्य मंदिरों को आयुष एंट्री लेवल सर्टिफिकेशन प्राप्त हुआ।

3. अंतरराष्ट्रीय सहयोग: भारत और वियतनाम के बीच औषधीय पौधों में सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए, जो पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देगा।

वैश्विक गतिविधियां और अनुसंधान परियोजनाएं

1. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: सीसीआरएच ने रॉयल लंदन हॉस्पिटल और इज़राइल के शारे ज़ेडेक मेडिकल सेंटर के साथ सहयोगी अध्ययन किए।

2. वैज्ञानिक प्रकाशन और पेटेंट: 11 शोध पत्र और 17 केस रिपोर्ट्स प्रकाशित की गईं, 1 पेटेंट दायर किया गया।

संस्थान की ओपीडी सेवाएं और अनुसंधान परियोजनाएं

डॉ. दिव्या वर्मा ने बताया कि संस्थान में 6 ओपीडी चल रही हैं, जिनमें विशेष ओपीडी के अंतर्गत लाइफस्टाइल डिसऑर्डर, पेडियाट्रिक, रूमेटोलॉजी, डर्मेटोलॉजी, गाइनकोलॉजी, और मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य क्लिनिक शामिल हैं। वर्तमान में 5 शोध परियोजनाएं, जैसे सर्वाइकल लिम्फ, माइग्रेन, हाइपोथायरायडिज्म, और क्लिनिकल वेरिफिकेशन पर अनुसंधान चल रहे हैं। इसके अतिरिक्त, 7 आगामी परियोजनाओं में डायबिटीज, विटामिन डी की कमी, और अन्य बीमारियों पर ध्यान दिया जा रहा है।

प्रयोगशाला और फार्मेसी सेवाएं

संस्थान में हेमेटोलॉजी, पैथोलॉजी, बायोकैमिस्ट्री और सीरोलॉजी जैसी उन्नत प्रयोगशाला सेवाएं उपलब्ध हैं। इसके साथ ही, सभी सामान्य और आवश्यक दवाएं जीएमपी प्रमाणित कंपनियों से खरीदी जाती हैं।

संस्थान का विस्तार और भविष्य की योजनाएं

संस्थान में 50 बिस्तरों वाला अनुसंधान अस्पताल भी है, जिसमें पुरुष, महिला और बाल चिकित्सा वार्ड शामिल हैं। यह अस्पताल भविष्य में पूरी तरह से कार्यशील हो जाएगा।

कुल मिलाकर, केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (होम्योपैथी), लखनऊ ने 100 दिनों के भीतर अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, जो आयुष मंत्रालय और केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद की प्रमुख पहल का हिस्सा है।

सुप्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा का 86 वर्ष की उम्र में निधन, देश में शोक की लहर

मुंबई/लखनऊ: भारत के प्रतिष्ठित उद्योगपति और टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा का आज मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे और कुछ समय से उम्र से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे थे। उनके निधन की खबर से देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है। रतन टाटा को उनकी दूरदर्शिता, नैतिक नेतृत्व और परोपकारी कार्यों के लिए हमेशा याद किया जाएगा।

रतन टाटा का नाम भारत के व्यापार जगत में शीर्ष पर आता है। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ी सफलता हासिल की। 1991 में टाटा ग्रुप के चेयरमैन बनने के बाद, उन्होंने कंपनी को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित किया। उनके कार्यकाल में टाटा समूह ने टेटली, कोरस स्टील, और जगुआर लैंड रोवर जैसी बड़ी कंपनियों का अधिग्रहण किया, जिससे टाटा का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी देखने को मिला। उनकी मृत्यु की पुष्टि टाटा समूह ने करते हुए कहा, “यह न केवल टाटा समूह के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ी क्षति है। रतन टाटा ने न केवल व्यापार के क्षेत्र में, बल्कि समाज और परोपकार में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।” रतन टाटा के नेतृत्व में टाटा समूह ने अपने कर्मचारियों और समाज के कल्याण के लिए कई महत्वपूर्ण पहल कीं, जिनमें परोपकारी कार्यों पर विशेष ध्यान दिया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, “श्री रतन टाटा जी एक दूरदर्शी बिजनेस लीडर, एक दयालु आत्मा और एक असाधारण इंसान थे। उन्होंने भारत के सबसे पुराने और सबसे प्रतिष्ठित व्यापारिक घरानों में से एक को स्थिर नेतृत्व प्रदान किया। साथ ही, उनका योगदान बोर्डरूम से कहीं आगे तक गया। उन्होंने अपनी विनम्रता, दयालुता और हमारे समाज को बेहतर बनाने के लिए एक अटूट प्रतिबद्धता के कारण कई लोगों को अपना मुरीद बना लिया।”

उद्योगपति हर्ष गोयनका ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, “रतन टाटा ईमानदारी, नैतिक नेतृत्व और परोपकार की मिसाल थे। उन्होंने व्यापार के साथ-साथ मानवता पर भी अमिट छाप छोड़ी है।”

रतन टाटा का जन्म 1937 में हुआ था और उन्होंने अपने करियर की शुरुआत टाटा स्टील में एक साधारण कर्मचारी के रूप में की थी। उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने भारतीय उद्योग जगत में उच्च स्थान प्राप्त किया। उनके सामाजिक और आर्थिक योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था, जिनमें पद्म भूषण और पद्म विभूषण भी शामिल हैं। उनकी दूरदर्शिता और समाज के प्रति समर्पण उन्हें एक अद्वितीय उद्योगपति और मानवीय नेता के रूप में परिभाषित करता है। उनके जाने से देश ने न केवल एक महान उद्योगपति खोया है, बल्कि एक ऐसा व्यक्ति खोया है जिसने भारतीय समाज को एक बेहतर दिशा में आगे बढ़ाने का काम किया। रतन टाटा के निधन से भारतीय उद्योग जगत और समाज के हर वर्ग में शोक की लहर है। उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा, और वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।

रतन टाटा का करियर और काम की शुरुआत

रतन टाटा ने 1961 में टाटा ग्रुप के साथ अपने करियर की शुरुआत की। शुरुआत में उन्होंने टाटा स्टील के शॉप फ्लोर पर काम किया, जहां उन्होंने मजदूरों के साथ काम करने का अनुभव प्राप्त किया। उनका व्यवसायिक दृष्टिकोण और दूरदर्शिता टाटा ग्रुप को नई ऊँचाइयों पर ले जाने में मददगार साबित हुई। 1991 में, उन्होंने टाटा समूह के चेयरमैन का पद संभाला और समूह को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई।

भारत में टाटा ग्रुप का योगदान

टाटा ग्रुप भारत के सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली उद्योग समूहों में से एक है, जिसने देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह समूह देश में इस्पात, ऑटोमोबाइल, आईटी सेवाओं, होटल और अन्य कई क्षेत्रों में सक्रिय है। टाटा मोटर्स ने देश में स्वदेशी कार निर्माण को बढ़ावा दिया, जबकि TCS (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) ने आईटी क्षेत्र में भारत को वैश्विक मंच पर स्थापित किया। टाटा ग्रुप द्वारा समाज के प्रति जिम्मेदारी को भी प्राथमिकता दी गई है, जिसमें टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस जैसे संस्थानों की स्थापना शामिल है।

रतन टाटा को मिले प्रमुख अवार्ड

रतन टाटा को उनके योगदान और समाजसेवा के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। इनमें प्रमुख हैं:

1. पद्म भूषण (2000) – भारत का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान।

2. पद्म विभूषण (2008) – भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान।

3. कारनेगी मैडल ऑफ फिलांथ्रॉपी (2007) – परोपकार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए।

4. लिज़न ऑफ ऑनर (2016) – फ्रांस द्वारा दिया गया सर्वोच्च नागरिक सम्मान।

इसके अलावा, उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा भी सम्मानित किया गया है।

रतन टाटा की सामाजिक सेवा में रुचि

रतन टाटा समाजसेवा और परोपकार के क्षेत्र में गहरी रुचि रखते हैं। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता और ग्रामीण विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। टाटा ट्रस्ट्स के माध्यम से, वे विभिन्न सामाजिक परियोजनाओं का संचालन करते हैं, जिनमें कैंसर की रोकथाम, ग्रामीण शिक्षा और महिला सशक्तिकरण शामिल हैं। रतन टाटा के नेतृत्व में टाटा ट्रस्ट ने समाज के सबसे कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर काम किया है।

इंडियन एयरलाइंस की सेवा और देश का सम्मान

रतन टाटा ने एयर इंडिया के निदेशक मंडल के प्रमुख के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं और इसे एक प्रतिस्पर्धी एयरलाइन बनाने का प्रयास किया। टाटा ने हमेशा इंडियन एयरलाइंस के महत्व को राष्ट्रीय सम्मान के साथ जोड़ा और इसे देश की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। वे चाहते थे कि एयर इंडिया न केवल देश में बल्कि वैश्विक मंच पर भी भारत की प्रतिष्ठा का प्रतिनिधित्व करे।

TATA TRUST का गठन और योगदान

टाटा ट्रस्ट्स भारत का सबसे बड़ा परोपकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 1892 में जमशेदजी टाटा ने की थी। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षा, चिकित्सा, ग्रामीण विकास और शोध को बढ़ावा देना है। रतन टाटा के नेतृत्व में, टाटा ट्रस्ट्स ने विभिन्न सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को हल करने में बड़ी भूमिका निभाई। इसका मुख्य सिद्धांत समाज के उत्थान के लिए निरंतर काम करना और भारत के विकास में योगदान देना रहा है। टाटा ट्रस्ट्स द्वारा स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर कार्य किए जा रहे हैं, जो इसे देश का सबसे प्रतिष्ठित और व्यापक ट्रस्ट बनाता है।

उपरोक्त सभी बिंदुओं से यह स्पष्ट होता है कि रतन टाटा का न केवल व्यावसायिक दृष्टिकोण उत्कृष्ट है, बल्कि उनकी सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति भी अत्यधिक जागरूकता और प्रतिबद्धता थी, उनके निधन से कहीं न कहीं देश को एक बड़ा आघात हुआ है और इस अपूर्णीय क्षति की पूर्ति नहीं की जा सकती है, ईश्वर उनकी आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें।

उत्तर प्रदेश में सड़क सुरक्षा को मिलेगा बड़ा बढ़ावा: परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह की मौजूदगी में परिवहन विभाग और मारुति सुजुकी के बीच 12 ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटरों के लिए एमओयू साइन

लखनऊ, 09 अक्टूबर 2024 – उत्तर प्रदेश सरकार और मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के बीच एक ऐतिहासिक एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिसके तहत राज्य में कुल 12 ड्राइविंग ट्रेनिंग और टेस्टिंग इंस्टीट्यूट (DTTI) और एडवांस्ड ड्राइविंग ट्रेनिंग टेस्टिंग इंस्टीट्यूट (ADTTI) स्थापित किए जाएंगे। इस कदम से सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा और राज्य में कुशल ड्राइवरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।

परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने इस मौके पर कहा कि यह एमओयू उत्तर प्रदेश की सड़क सुरक्षा को सुधारने में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश जनसंख्या और हाईवे नेटवर्क के मामले में देश में अग्रणी है, और सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ड्राइविंग ट्रेनिंग में सुधार की बेहद आवश्यकता थी। इस एमओयू के तहत 10 डीटीटीआई और 2 एडीटीटी का संचालन किया जाएगा, जिनमें मुरादाबाद, मेरठ, बस्ती, मिर्जापुर, बरेली, झांसी, अलीगढ़, देवीपाटन-गोण्डा, आजमगढ़ और मुजफ्फरनगर में डीटीटीआई और आजमगढ़ व प्रतापगढ़ में एडीटीटी का निर्माण होगा।

सड़क सुरक्षा के लिए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम

श्री सिंह ने कहा कि मारुति सुजुकी के साथ इस साझेदारी से प्रदेश में ड्राइविंग टेस्टिंग और ट्रेनिंग की बेहतर व्यवस्था होगी। साथ ही, उन्होंने सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने और कुशल ड्राइविंग ट्रेनिंग के महत्व पर जोर दिया। प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और कुशल ड्राइवर तैयार करने के लिए यह योजना बेहद अहम साबित होगी।

अब 17 ड्राइविंग ट्रेनिंग टेस्टिंग इंस्टीट्यूट संचालित होंगे

इससे पहले मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, और मथुरा में पहले से ही 5 DTTI संचालित हो रहे हैं। अब इस एमओयू के साथ कुल 17 इंस्टीट्यूट प्रदेश में काम करेंगे, जिससे ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया और अधिक सटीक और सुव्यवस्थित होगी।

मारुति सुजुकी का सहयोग

मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राहुल भारती ने बताया कि यह एमओयू सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को स्वचालित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी के माध्यम से केवल योग्य उम्मीदवारों को ही ड्राइविंग लाइसेंस मिलेगा, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव परिवहन एल.वेंकटेश्वर लू, परिवहन आयुक्त चंद्र भूषण सिंह और एमडी परिवहन निगम मासूम अली सरवर सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे। श्री लू ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में विभाग कुशल ड्राइवरों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा और सड़क सुरक्षा के नियमों के पालन में निरंतर सुधार करेगा। यह एमओयू उत्तर प्रदेश के परिवहन विभाग के साथ मिलकर प्रदेश में सड़क सुरक्षा को मजबूत करेगा और सड़क दुर्घटनाओं को कम करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगा।

दशहरा, दीपावली और छठ पूजा स्थलों के लिए सभी तैयारियां अभी से पूरी कर लें- मंत्री ए.के.शर्मा

  • नगर विकास मंत्री ए0के0शर्मा ने निकाय कार्यों की वर्चुअल समीक्षा की
  • त्योहारों के दृष्टिगत साफ सफाई, स्वच्छता पर विशेष ध्यान देंगे
  • सभी दुर्गा पूजा पंडालों के आसपास साफ सफाई, स्वच्छता, शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित कराए
  • संचारी रोगों, मच्छर मक्खी जनित बीमारियों, डेंगू, चिकनगुनिया व मलेरिया की रोकथाम, जल भराव न हो, संभावित क्षेत्रों में एंटी लार्वा और दवाओं का छिड़काव करें, फॉगिंग कराए
  • सभी कार्मिक निकायों में कराया जा रहे अच्छे कार्यों की जानकारी देने के लिए प्रचार प्रसार कराए, झूठी खबरों में अपना पक्ष रखते हुए खंडन कराए
  • सड़कों में दिख रहे निराश्रित पशुओं को पकड़ कर गौशालाओं में पहुंचाया जाए, पशुओं के सड़क पर दिखने से संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी
  • नगरीय क्षेत्रों की सड़कों को अतिशीघ्र गड्ढा मुक्त करने के साथ मार्ग प्रकाश व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के लिए सभी खराब स्ट्रीट लाइटों को ठीक किया जाए

लखनऊ: प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में त्योहारों की दृष्टिगत साफ सफाई, स्वच्छता पर विशेष ध्यान देंगे, नगरीय क्षेत्रों में स्थापित सभी दुर्गा पूजा पंडालों के आसपास साफ सफाई, स्वच्छता, शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित कराए। दशहरा, दीपावली और छठ पूजा स्थलों के लिए सभी तैयारियां अभी से पूरी कर लें। धार्मिक स्थलों, ऐतिहासिक, पुरातात्विक व प्राचीन स्मारकों के रखरखाव, साफ-सफाई पर ध्यान देंगे, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को परेशानी न हो। नगर विकास मंत्री ने सभी निकाय कार्मिकों को यह निर्देश दिए।

नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के.शर्मा ने बुधवार को अधिकारियों के साथ निकाय कार्यों की वर्चुअल समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सभी निकाय अपने क्षेत्रों में साफ किए गए कूड़ा स्थलों को फिर से गंदा होने से बचाने के लिए ऐसे स्थलों की फेंसिंग या पौधारोपण कराए, ऐसे स्थलों को उपयोगी बनाने के लिए वहां पर वेंडिंग जोन, बच्चों के क्रीड़ा स्थल व पार्क, बुजुर्गों के बैठने के स्थान आदि बनाये जा सकते है, इसके लिए प्रयास करें। उन्होंने कहा कि सभी निकाय कार्मिक संचारी रोगों, मच्छर मक्खी जनित बीमारियों, डेंगू, चिकनगुनिया व मलेरिया की रोकथाम के लिए कहीं पर भी जल भराव न हो, संभावित क्षेत्रों में एंटी लार्वा और दवाओं का छिड़काव करें, फॉगिंग कराए। सभी कार्मिक निकायों में कराया जा रहे अच्छे कार्यों की जानकारी देने के लिए प्रचार प्रसार कराए, झूठी खबरों में अपना पक्ष रखते हुए खंडन कराए। इस दौरान उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी विभागीय कार्यों के प्रति सक्रिय होकर कार्य करें। नगरीय क्षेत्रों में सड़कों में दिख रहे निराश्रित पशुओं को पकड़ कर गौशालाओं में पहुंचाया जाए, जिससे पशुओं की सुरक्षा हो सके। साथ ही नागरिकों को भी किसी भी प्रकार की समस्याओं का सामना न करना पड़े। गौशालाओं में पशुओं के भरण पोषण और उनके संरक्षण की भी समुचित व्यवस्था की जाए।

उन्होंने कहा कि निराश्रित पशु सड़क पर दिखेंगे तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने कहा कि जो भी अधिशासी अधिकारी अपने निकाय मुख्यालय पर अधिवास नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। अब उनकी आवारागर्दी को और नहीं बर्दाश्त किया जाएगा, ऐसे कार्मिकों की कार्यों के प्रति लापरवाही और शिथिलिता पर कार्यवाही होगी। उन्होंने नगरीय क्षेत्रों की सड़कों को अतिशीघ्र गड्ढा मुक्त करने तथा मार्ग प्रकाश व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के लिए सभी खराब स्ट्रीट लाइटों को ठीक करने के भी निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव नगर विकास अमृत अभिजात, सचिव अजय कुमार शुक्ला, प्रबंध निदेशक जल निगम, निदेशक नगरीय निकाय अनुज कुमार झा, निगमों के नगर आयुक्त, निकायों के अधिशासी अधिकारी और अन्य कार्मिकों ने वर्चुअल प्रतिभाग किया।

स्वच्छ आहार दिवस: पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल पर विशेष स्वच्छता अभियान

लखनऊ: भारतीय रेलवे द्वारा ‘स्वच्छ रेल-स्वच्छ भारत मिशन’ के अंतर्गत 1 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2024 तक ‘स्वच्छता पखवाड़ा-2024’ मनाया जा रहा है। इस विशेष स्वच्छता अभियान के तहत पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल में आज ‘स्वच्छ आहार दिवस’ मनाया गया। मंडल रेल प्रबंधक श्री आदित्य कुमार के मार्गदर्शन में यह अभियान संचालित किया गया, जिसमें मंडल के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर खानपान सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विशेष जांच की गई।

स्वच्छता पखवाड़ा-2024: विशेष स्वच्छता अभियान 4.0

इस अभियान के तहत लखनऊ जंक्शन, गोंडा जंक्शन, गोरखपुर जंक्शन, मैलानी जंक्शन, सीतापुर जंक्शन, मनकापुर, बढ़नी, बस्ती, खलीलाबाद और ऐशबाग जंक्शन जैसे प्रमुख स्टेशनों पर विशेष निरीक्षण किए गए। रेलवे के नामित अधिकारियों, रेलवे चिकित्सकों, स्टेशन अधीक्षकों और संबंधित सुपरवाइजरों की देखरेख में खानपान स्टालों पर खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, साफ-सफाई और अन्य महत्वपूर्ण मानकों की जांच की गई।

स्टेशनों पर खानपान सेवाओं की विस्तृत जांच

स्वच्छ आहार दिवस के अवसर पर खानपान स्टालों पर उपलब्ध भोजन की गुणवत्ता, बर्तनों की सफाई, वेंडरों के मेडिकल प्रमाणपत्र, फूड लाइसेंस, यूनिफार्म, नेम प्लेट और मूल्य सूची की जांच की गई। इसके साथ ही, स्टेशनों पर डस्टबिन की उपलब्धता और कचरा निपटान की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। यह सुनिश्चित किया गया कि स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों को स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य सामग्री उपलब्ध हो।

ट्रेनों की पैंट्री कारों में भी खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और सफाई का निरीक्षण किया गया। यात्रियों से भोजन की गुणवत्ता के संबंध में फीडबैक लिया गया और उनकी शिकायतों का तत्काल निराकरण किया गया। इस दौरान, खानपान स्टालों पर रखे गए खाद्य सामग्री के नमूनों को जांच हेतु लिया गया, ताकि भविष्य में भी स्वच्छता के मानकों का पालन हो सके।

यात्रियों में जागरूकता का प्रसार

स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान रेलवे स्टेशनों पर पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के माध्यम से स्वच्छता संबंधी संदेशों का प्रसार किया गया। यात्रियों और रेलवे कर्मचारियों को रेल परिसरों को स्वच्छ रखने में सहयोग देने का आग्रह किया गया। यह अभियान यात्रियों के स्वास्थ्य और सफाई को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से संचालित किया जा रहा है।

स्वच्छ आहार दिवस के अंतर्गत यात्रियों को स्वच्छ और उच्च गुणवत्ता का भोजन उपलब्ध कराने के प्रयासों को मजबूत किया गया है। स्वच्छता पखवाड़ा के तहत 10 अक्टूबर 2024 को भी ‘स्वच्छ आहार दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा।

अभियान के मुख्य बिंदु:

• खानपान स्टालों पर जांच: भोजन की गुणवत्ता, बर्तनों की सफाई, वेंडरों के मेडिकल प्रमाणपत्र और फूड लाइसेंस की जांच की गई।

• डस्टबिन की उपलब्धता: स्टेशनों और ट्रेनों में पर्याप्त डस्टबिन और कचरा निपटान व्यवस्थाओं का निरीक्षण।

• यात्रियों से फीडबैक: खानपान सेवाओं पर यात्रियों से फीडबैक लेकर उनकी समस्याओं का निराकरण।

• स्वच्छता संदेश: पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम द्वारा स्वच्छता संबंधी संदेशों का प्रसार।

पूर्वोत्तर रेलवे द्वारा चलाया गया यह विशेष अभियान यात्रियों के लिए साफ-सफाई और स्वास्थ्यवर्धक खानपान सेवाएं सुनिश्चित करने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। स्वच्छ रेल-स्वच्छ भारत मिशन के तहत इस प्रकार के प्रयास देशभर के रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छता और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का संदेश देते हैं।