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लखनऊ की सोशल वर्कर गरिमा सिंह की अनूठी पहल: किन्नरों को समाज में सम्मान दिलाने के लिए आयोजित करवा रहीं किन्नर भोज

लखनऊ (11 अक्टूबर): समाज के तीसरे जेंडर, जिन्हें किन्नर, थर्ड जेंडर या हिजड़ा के नाम से जाना जाता है, को समाज में अक्सर हेय दृष्टि से देखा जाता है। समाज की इस अनदेखी और भेदभावपूर्ण मानसिकता को बदलने के लिए लखनऊ की प्रसिद्ध सोशल वर्कर गरिमा सिंह ने एक सराहनीय पहल की है। पिछले पांच वर्षों से गरिमा सिंह नवरात्र के समापन अवसर पर “किन्नर अर्धनारीश्वर भोज” का आयोजन कर रही हैं, जिससे किन्नर समुदाय को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने का संदेश दिया जा सके।

इस बार भी नवरात्र समापन के मौके पर, गरिमा सिंह ने गोमती नगर एक्सटेंशन स्थित होटल द लीफ में किन्नर भोज का आयोजन किया, जहां उन्होंने किन्नरों के पैरों को धोकर उनको भोजन कराकर और उन्हें सम्मानित किया। इस अनूठी पहल से उन्होंने न केवल किन्नर समुदाय को सम्मानित किया बल्कि पूरे प्रदेश और देश में लिंग आधारित भेदभाव को खत्म करने का संदेश भी दिया।

गरिमा सिंह: किन्नरों को उपदेवता के रूप में मान्यता देने वाली सनातन परंपरा की समर्थक

गरिमा सिंह का मानना है कि प्राचीन सनातन परंपरा में किन्नरों को उपदेवता का दर्जा दिया गया है। उन्होंने कहा, “प्राचीन काल में किन्नरों का समाज में बड़ा महत्व था। धार्मिक ग्रंथ भी किन्नरों को हेय दृष्टि से देखने की इजाजत नहीं देते। किन्नर समुदाय को सम्मान देना हमारे धर्म और परंपरा का हिस्सा है।”

गरिमा सिंह के अनुसार, समाज का ताना-बाना केवल पुरुष और महिला से नहीं, बल्कि तीसरे जेंडर से भी बनता है। दुर्भाग्यवश, सभ्य समाज आज भी इस समुदाय को अच्छी नजर से नहीं देखता और उन्हें केवल हंसी का पात्र मानता है।

समाज में लिंग आधारित भेदभाव पर गरिमा सिंह की टिप्पणी

गरिमा सिंह ने समाज में व्याप्त लिंग आधारित भेदभाव पर अपने विचार साझा करते हुए कहा, “समाज में सभी प्रकार के लोगों का अलग-अलग पेशा होता है और उसका सम्मान करना हर व्यक्ति का दायित्व है। लेकिन किन्नर समुदाय को आज भी वो सम्मान नहीं दिया जाता जो उन्हें मिलना चाहिए। यह वही समुदाय है जो हमारी खुशियों में शामिल होता है, हमें शुभ आशीर्वाद देता है। फिर भी समाज में उन्हें हाशिए पर रखा जाता है, जो समाज की दोहरी मानसिकता को दर्शाता है।”

किन्नर अर्धनारीश्वर भोज: समाज को संदेश

गरिमा सिंह की इस पहल का उद्देश्य किन्नरों के मान-सम्मान को बढ़ावा देना और समाज में उनके योगदान को पहचान दिलाना है। किन्नर भोज के आयोजन से न केवल उन्हें भोजन कराया जाता है, बल्कि उनका सम्मान भी किया जाता है। इस भोज में किन्नरों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है और समाज के लोगों को इस समुदाय के प्रति अपने विचारों को बदलने का संदेश दिया जाता है।

समाज को नई दिशा: गरिमा सिंह की पहल

गरिमा सिंह की इस पहल ने समाज को एक नई दिशा दिखाई है, जहां लिंग के आधार पर भेदभाव समाप्त करने की जरूरत है। किन्नर समुदाय को समाज में सम्मान दिलाने के लिए गरिमा सिंह का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। उनकी यह पहल पूरे प्रदेश और देश के लिए प्रेरणादायक है और इससे समाज में एक सकारात्मक बदलाव की उम्मीद की जा रही है।

Social Media से सावधान: कहीं आप फ़ेक न्यूज़ तो नहीं पढ़ रहे हैं, हमारी इस खबर में फेक न्यूज़ और तथ्य-जांच (Fact-Checking) को विस्तार से जानिए

लखनऊ: आज के डिजिटल युग में सूचना का प्रवाह जितना तेज़ हुआ है, उतनी ही तेजी से नकली खबरें (Fake News) भी फैल रही हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया के आने से जानकारी और समाचारों का आदान-प्रदान आसान हो गया है, लेकिन साथ ही इसने गलत और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार की भी ज़मीन तैयार कर दी है। ऐसे में फेक न्यूज़ से समाज और लोकतंत्र को भारी नुकसान हो सकता है। इस लेख में हम फेक न्यूज़ की पहचान, उसके प्रभाव और तथ्य-जांच (Fact-Checking) के महत्व पर चर्चा करेंगे।

फेक न्यूज़ क्या है?

फेक न्यूज़ वे खबरें होती हैं जो जानबूझकर गलत या भ्रामक जानकारी के रूप में फैलाई जाती हैं। इसका उद्देश्य लोगों को भ्रमित करना, उनकी भावनाओं को भड़काना, या किसी विशेष राजनीतिक या सामाजिक एजेंडा को बढ़ावा देना होता है। फेक न्यूज़ न केवल समाज में विभाजन को बढ़ावा देती है बल्कि जनमत को भी गलत दिशा में प्रभावित करती है।

इसके साथ ही फेक न्यूज़ का प्रभाव बहुत गंभीर हो सकता है। यह समाज में तनाव और डर का माहौल पैदा करती है और लोगों के बीच अविश्वास की भावना को जन्म देती है। इसके अलावा, राजनीतिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील मुद्दों पर फेक न्यूज़ जनमत को विकृत कर सकती है।

    फेक न्यूज़ के प्रकार एवं इसके प्रभाव

    संपादित (Manipulated) खबरें: ऐसी खबरें जिसमें वास्तविक तथ्यों को इस प्रकार प्रस्तुत किया जाता है कि वे गलत या आधे-अधूरे प्रतीत हों।
    मनगढ़ंत (Fabricated) खबरें: ये पूरी तरह से झूठी होती हैं और उनका कोई आधार नहीं होता।
    गलत संदर्भ (Misleading Context): जब वास्तविक खबरों को ऐसे संदर्भ में प्रस्तुत किया जाता है जो उनका सही मतलब नहीं बताता।

    फेक न्यूज़ से होने वाले मुख्य नुकसान:

    लोकतंत्र पर प्रभाव: गलत सूचनाओं के आधार पर मतदाता गलत निर्णय ले सकते हैं, जिससे लोकतंत्र को खतरा हो सकता है।
    सामाजिक विभाजन: फेक न्यूज़ समाज के विभिन्न वर्गों के बीच तनाव और टकराव का कारण बन सकती है।
    विश्वास की कमी: मीडिया और सरकारी संस्थानों के प्रति लोगों का विश्वास कम हो सकता है।

    तथ्य-जांच कैसे की जाती है?

    तथ्य-जांच (Fact-Checking) का महत्व: तथ्य-जांच का उद्देश्य किसी भी जानकारी या समाचार की प्रामाणिकता की पुष्टि करना है। जब भी कोई सूचना प्रकाशित होती है, उसकी जांच की जानी चाहिए कि वह सही है या नहीं। तथ्य-जांच के बिना खबरें समाज को गलत दिशा में ले जा सकती हैं, और इससे अविश्वास की भावना पैदा हो सकती है।

    सूत्रों का सत्यापन: जिस स्रोत से खबर आ रही है, उसकी प्रामाणिकता की जांच की जाती है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि जानकारी विश्वसनीय और प्रमाणिक है।

    तस्वीरों और वीडियो का विश्लेषण: फेक न्यूज़ में अक्सर फोटो और वीडियो को संपादित कर पेश किया जाता है। ऐसे में डिजिटल टूल्स की मदद से इनका विश्लेषण किया जाता है।

    क्रॉस-चेकिंग: विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों से खबर की पुष्टि की जाती है।

    तथ्य-जांच के टूल्स, तकनीक व बचाव के उपाय

    आजकल कई ऐसे ऑनलाइन टूल्स उपलब्ध हैं जो खबरों की तथ्य-जांच में मदद करते हैं। इन टूल्स का उपयोग कर पत्रकार और आम लोग भी खबरों की सच्चाई की पुष्टि कर सकते हैं। कुछ प्रमुख टूल्स हैं:

    Google Fact-Check Explorer: यह टूल विभिन्न समाचारों की सटीकता की जांच करता है।

    TinEye और Google Reverse Image Search: ये टूल्स इमेज की असलियत और उसके स्रोत की जांच में मदद करते हैं।

    PolitiFact और FactCheck.org: ये वेबसाइट्स राजनीतिक खबरों और बयानों की तथ्य-जांच करती हैं।

      किसी भी व्यक्ति को फेक न्यूज़ से बचने के लिए सतर्क रहना चाहिए और कुछ मुख्य बातों का ध्यान रखना चाहिए:

        विश्वसनीय स्रोतों से ही जानकारी लें: केवल उन्हीं समाचार वेबसाइट्स और मीडिया आउटलेट्स पर भरोसा करें जिनकी साख अच्छी हो।

        समाचारों की पुष्टि करें: कोई भी खबर या जानकारी शेयर करने से पहले उसकी जांच करें।

        सोशल मीडिया पर सावधानी बरतें: सोशल मीडिया पर फैली खबरें अक्सर बिना जांच के होती हैं, इसलिए उन्हें सच मानने से पहले उनकी सत्यता की जांच करें।

        फैक्ट-चेकिंग प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करें: यदि किसी खबर पर संदेह हो तो फैक्ट-चेकिंग टूल्स और वेबसाइट्स का उपयोग करें।

        फेक न्यूज़ और सोशल मीडिया का रिश्ता: सोशल मीडिया फेक न्यूज़ के प्रसार का एक मुख्य माध्यम बन चुका है। सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स जैसे फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप आदि पर लोग बड़ी आसानी से खबरें शेयर कर देते हैं, और कई बार बिना सत्यापन के ये खबरें वायरल हो जाती हैं। इसके कारण गलत सूचनाएँ बहुत तेजी से लोगों तक पहुँच जाती हैं।

          सोशल मीडिया कंपनियाँ भी अब फेक न्यूज़ के खिलाफ लड़ाई में शामिल हो रही हैं। वे फेक न्यूज़ की पहचान करने के लिए AI और मशीन लर्निंग तकनीकों का उपयोग कर रही हैं, और झूठी खबरों को फैलने से रोकने के लिए कदम उठा रही हैं।

          पत्रकारिता और तथ्य-जांच की नैतिक जिम्मेदारी

          पत्रकारों और मीडिया हाउस की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे सटीक और प्रमाणित खबरें ही प्रकाशित करें। तथ्य-जांच एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिससे पत्रकारिता की साख बनी रहती है। अगर पत्रकार बिना जांच किए खबरें प्रकाशित करेंगे, तो इससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकते हैं। तथ्य-जांच न केवल खबरों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करती है बल्कि पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों का पालन करने में भी मदद करती है। तथ्य-जांच के बिना पत्रकारिता में फेक न्यूज़ के बढ़ने का खतरा हमेशा बना रहेगा।

          फेक न्यूज़ एक गंभीर समस्या है जो समाज और लोकतंत्र को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। ऐसे में तथ्य-जांच का महत्व बहुत बढ़ जाता है। हर व्यक्ति को सतर्क रहकर किसी भी खबर या जानकारी की सत्यता की जांच करनी चाहिए। पत्रकारिता में भी तथ्य-जांच को एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में अपनाया जाना चाहिए ताकि पाठकों तक सही और प्रमाणित जानकारी पहुँच सके। सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ का प्रसार तेजी से होता है, इसलिए हमें इससे बचने के लिए तथ्य-जांच टूल्स और प्लेटफ़ॉर्म्स का उपयोग करना चाहिए। फेक न्यूज़ से बचाव और तथ्य-जांच के सही उपयोग से हम समाज को अधिक जागरूक और सुरक्षित बना सकते हैं।

          नवरात्रि महानवमी: देवी दुर्गा के नव रूपों का पूजन और आध्यात्मिक महत्व

          लखनऊ: नवरात्रि का पर्व हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह नौ दिनों का पर्व देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की आराधना और शक्ति की उपासना का प्रतीक है। नवरात्रि के अंतिम दिन, जिसे महानवमी कहा जाता है, विशेष महत्त्व रखता है। इस दिन देवी दुर्गा की नौवीं शक्ति ‘सिद्धिदात्री’ की पूजा की जाती है, जो भक्तों को सिद्धियाँ प्रदान करती हैं।

          महानवमी का दिन शक्ति, भक्ति और आस्था का संगम होता है। इस दिन देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करके साधक अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और सिद्धियाँ प्राप्त करते हैं। इस लेख में हम महानवमी का महत्व और देवी दुर्गा के नौ रूपों का विस्तार से वर्णन करेंगे।

          नवरात्रि में महानवमी का महत्व

          महानवमी नवरात्रि का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन देवी दुर्गा की पूर्ण कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष पूजा और हवन का आयोजन किया जाता है। कई स्थानों पर कन्या पूजन (कन्या भोज) की भी परंपरा है, जिसमें नौ कन्याओं को देवी के नौ रूपों का प्रतीक मानकर भोजन कराया जाता है।

          महानवमी के दिन साधक अपनी साधनाओं को पूर्णता की ओर ले जाते हैं और देवी से मोक्ष, सिद्धि और आशीर्वाद की प्राप्ति की कामना करते हैं। देवी दुर्गा के सभी रूप इस दिन जागृत होते हैं और भक्तों की इच्छाओं को पूर्ण करते हैं।

          देवी दुर्गा के नौ रूप: नवदुर्गा

          माता के नवरूपों के दर्शन

          1. शैलपुत्री देवी

          नवरात्रि के पहले दिन देवी दुर्गा के शैलपुत्री रूप की पूजा की जाती है। शैलराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। यह देवी प्रकृति और पर्वतों की अधिष्ठात्री हैं और साधक को शांति और धैर्य प्रदान करती हैं।

          2. ब्रह्मचारिणी देवी

          दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी देवी की आराधना होती है। यह देवी तपस्या और आत्मसंयम की प्रतीक हैं। उनकी पूजा करने से साधक को मानसिक और आत्मिक शक्ति प्राप्त होती है। देवी ब्रह्मचारिणी जीवन में धैर्य, साधना और तप के मार्ग पर चलने का संदेश देती हैं।

          3. चंद्रघंटा देवी

          नवरात्रि के तीसरे दिन चंद्रघंटा देवी की पूजा की जाती है। उनके मस्तक पर आधे चंद्र का आभूषण होता है, जिसे ‘चंद्रघंटा’ कहा जाता है। यह देवी साहस, वीरता और शक्ति की प्रतीक हैं। इनकी आराधना से साधक भयमुक्त होकर अपने जीवन में विजय प्राप्त करता है।

          4. कूष्माण्डा देवी

          चौथे दिन कूष्माण्डा देवी की पूजा होती है, जिन्हें ब्रह्मांड की सृजनकर्ता माना जाता है। उनकी पूजा से साधक को स्वास्थ्य, समृद्धि और ऊर्जा की प्राप्ति होती है। यह देवी जीवन में सकारात्मकता और उत्साह भरती हैं।

          5. स्कंदमाता देवी

          पाँचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है, जो भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। इनकी पूजा से साधक को संतान सुख और बुद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। स्कंदमाता जीवन में प्रेम, करुणा और मातृत्व का प्रतीक हैं।

          6. कात्यायनी देवी

          छठे दिन देवी कात्यायनी की पूजा की जाती है। यह देवी अत्यंत शक्तिशाली और वीरता की प्रतीक हैं। इन्हें आदिशक्ति का अवतार माना जाता है, जिन्होंने महिषासुर का संहार किया था। इनकी पूजा से साधक को साहस और आत्मबल प्राप्त होता है।

          7. कालरात्रि देवी

          सातवें दिन देवी कालरात्रि की आराधना की जाती है। यह देवी अत्यंत भयंकर रूप धारण करके राक्षसों और बुराई का नाश करती हैं। इनकी पूजा से साधक सभी प्रकार के भय और बाधाओं से मुक्त हो जाता है। देवी कालरात्रि जीवन में सुरक्षा और विजय का प्रतीक हैं।

          8. महागौरी देवी

          नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी की पूजा की जाती है। यह देवी सफेद वस्त्र धारण किए हुए हैं और उनकी पूजा से साधक को पवित्रता, शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। महागौरी देवी जीवन में सुख और समृद्धि लाती हैं और सभी पापों का नाश करती हैं।

          9. सिद्धिदात्री देवी

          नवरात्रि के अंतिम दिन यानी महानवमी पर सिद्धिदात्री देवी की पूजा की जाती है। यह देवी सभी सिद्धियों की दात्री हैं और साधक को अष्ट सिद्धियों का वरदान प्रदान करती हैं। इनकी पूजा से साधक को ज्ञान, सफलता और सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है।

          महानवमी की पूजा विधि

          महानवमी के दिन विशेष पूजा और हवन का आयोजन किया जाता है। इस दिन माता सिद्धिदात्री की मूर्ति को स्थापित कर उनका विधिवत पूजन किया जाता है। साधक मंत्रों और श्लोकों का जाप करते हुए देवी से आशीर्वाद की कामना करते हैं। कन्या पूजन और हवन के माध्यम से देवी को प्रसन्न करने का प्रयास किया जाता है।

          महानवमी का आध्यात्मिक संदेश

          महानवमी का दिन हमें आत्म-शक्ति और भक्ति के माध्यम से जीवन की चुनौतियों का सामना करने की प्रेरणा देता है। देवी के नव रूप हमें जीवन के विभिन्न पहलुओं से निपटने की शक्ति और साहस प्रदान करते हैं। यह पर्व हमें सकारात्मकता, शक्ति, शांति और समृद्धि के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा देता है।

          नवरात्रि की महानवमी देवी दुर्गा की पूजा का समापन दिवस है, जिसमें भक्त देवी के नव रूपों की आराधना करते हैं। यह पर्व आस्था, भक्ति और शक्ति का प्रतीक है, जो जीवन में शांति, समृद्धि और सिद्धियाँ प्रदान करता है।

          लखनऊ: सामूहिक नवरात्रि व्रत प्रसाद कार्यक्रम पश्चिमी भाग के बालागंज में संपन्न, लोक भारती के शीर्ष नेतृत्व ने दी प्रेरणादायक बातें

          लखनऊ: गुरुवार को लोक भारती लखनऊ महानगर के पश्चिमी भाग के बालागंज क्षेत्र में सामूहिक नवरात्रि व्रत प्रसाद कार्यक्रम धूमधाम से संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम विमल चौधरी के आवास पर आयोजित किया गया, जिसमें लोक भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय बहादुर सिंह, राष्ट्रीय संगठन मंत्री बृजेंद्र पाल सिंह, सह संगठन मंत्री गोपाल उपाध्याय, पश्चिम भाग के संयोजक चाणक्य चौहान और सह संयोजक राम सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

          आदि शक्ति की पूजा और प्रसाद वितरण

          कार्यक्रम की शुरुआत दुर्गा माता की पूजा-अर्चना से हुई, जिसमें सभी उपस्थित सदस्यों ने मां दुर्गा के चरणों में भोग अर्पित किया। इसके बाद, उपस्थित लोगों को प्रसाद वितरित किया गया, जिससे माहौल भक्तिमय और सौहार्दपूर्ण बन गया।

          लोक भारती के विभिन्न आयामों पर चर्चा

          सह संगठन मंत्री गोपाल उपाध्याय ने लोक भारती के विविध विषयों और आयामों पर गहन चर्चा की। उन्होंने बताया कि लोक भारती संगठन किस प्रकार से समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला रहा है और इसके कार्यक्षेत्र में कौन-कौन से महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। उनकी इस प्रस्तुति को उपस्थित सभी सदस्यों ने सराहा और इसे व्यक्तिगत जीवन में लागू करने की प्रेरणा ली।

          राष्ट्रीय संगठन मंत्री का संबोधन

          राष्ट्रीय संगठन मंत्री बृजेंद्र पाल सिंह ने अपने संबोधन में परिवार और समाज के महत्व पर बल दिया। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपने परिवार को “मंगल परिवार” की ओर अग्रसर करें। इसके साथ ही उन्होंने वंशावली की जानकारी को परिवार के भीतर बनाए रखने पर जोर दिया ताकि सभी वास्तविक रिश्तों का पता चलता रहे। उनके इस संदेश को सभी ने गंभीरता से सुना और सराहा।

          विमल चौधरी के परिवार का सम्मान

          कार्यक्रम के समापन के अवसर पर, राष्ट्रीय संगठन मंत्री बृजेंद्र पाल सिंह ने विमल चौधरी के बड़े भाई साहब को अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। यह परिवार अपने 22 सदस्यों के साथ एक ही छत के नीचे सामूहिक जीवन जी रहा है, जो आज के समाज के लिए एक प्रेरणा स्रोत है।

          अन्य गणमान्य उपस्थित लोग

          कार्यक्रम में स्थानीय लोग और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े कई वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें विमल चौधरी के निकटतम पड़ोसी सुषमा मौर्य, शुभम मौर्य, अश्विनी त्रिवेदी, अजय द्विवेदी, सीताराम मिश्रा, सुनील मिश्रा, पुनीत मिश्रा, और रतीभान सिंह चौहान जैसे व्यक्तित्व शामिल थे।

          समाज और संगठन के लिए प्रेरणादायक संदेश

          लोक भारती के इस कार्यक्रम ने समाज में एकता और परिवारिक मूल्यों को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण संदेश दिया। राष्ट्रीय और स्थानीय नेतृत्व की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और भी विशेष बना दिया। कार्यक्रम में उठाए गए मुद्दों और विचारों ने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए एक सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान किया।

          लखनऊ: पूर्वी ज़ोन की पुलिस ने किए दो शातिर अंतरराज्यीय चोर गिरफ्तार, नकदी और सोने के आभूषण बरामद

          लखनऊ: पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ के पूर्वी जोन अंतर्गत थाना विभूतिखण्ड क्षेत्र में पुलिस ने दो शातिर अंतरराज्यीय पेशेवर चोरों को गिरफ्तार किया है। डीसीपी पूर्वी ज़ोन शशांक सिंह के कुशल नेतृत्व में एडीसीपी पंकज सिंह और एसीपी राधारमण सिंह की टीम ने इस मामले का खुलासा किया। पुलिस ने आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में नकदी और सोने के आभूषण बरामद किए हैं।

          गिरफ्तारी और बरामदगी

          दिनांक 20 अगस्त 2024 को श्रीमती सांझ वर्मा ने थाना विभूतिखण्ड में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके कार्यालय वसुधा रियल्टी, वास्तुखण्ड, गोमतीनगर में ताला तोड़कर अज्ञात चोरों ने 6 सोने की बिस्किट और 3.25 लाख रुपये की चोरी की है। इस पर थाना विभूतिखण्ड पुलिस ने मु.अ.सं. 0290/2024 धारा 305/331(4) बीएनएस 2023 के तहत मामला दर्ज किया और जांच शुरू की।

          पुलिस टीम ने 9 अक्टूबर 2024 को मुखबिर की सूचना के आधार पर सिनेपोलिस मॉल के पास रेलवे यार्ड से दो अभियुक्तों मिंटू विश्वास (50 वर्ष) और रामभरोसे कश्यप (35 वर्ष) को गिरफ्तार किया। इनके पास से 87,400 रुपये नकद, 2 पीली धातु के बिस्किट (100 ग्राम), सोने की चेन, नथ, मांग टीका और अंगूठी बरामद की गई। बरामदगी के आधार पर अभियोग में धारा 317(2) बीएनएस की भी वृद्धि की गई है।

          चोरों का आपराधिक इतिहास

          गिरफ्तार किए गए आरोपी मिंटू विश्वास और रामभरोसे कश्यप ने पुलिस को बताया कि वे भारत के विभिन्न राज्यों में बंद घरों और कार्यालयों की रेकी करते थे और मौका पाकर ताला तोड़कर चोरी करते थे। चोरी के बाद वे सामान को आपस में बांट लेते थे और दूसरे राज्य में भाग जाते थे ताकि पुलिस उन्हें पकड़ न सके।

          मिंटू विश्वास का लंबा आपराधिक इतिहास है। इसके खिलाफ विभिन्न राज्यों में 12 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें अलीगढ़, दिल्ली, जयपुर और बैंगलोर जैसे स्थान शामिल हैं। इसके ऊपर गैंगस्टर एक्ट और एनडीपीएस एक्ट के तहत भी मामले दर्ज हैं। रामभरोसे कश्यप के खिलाफ भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें लखनऊ और सम्भल में चोरी और आर्म्स एक्ट के मामले शामिल हैं। पकड़े गए चोरों ने पुलिस को बताया कि वे बंद मकानों और कार्यालयों की रेकी कर ताले तोड़कर चोरी करते थे। चोरी के बाद वे दूसरे राज्य में भाग जाते थे ताकि पुलिस उनकी तलाश न कर सके। त्यौहारों के दौरान, जब लोग घरों से बाहर जाते हैं, तब वे विशेष रूप से इन जगहों को निशाना बनाते थे।

          पुलिस की सफलता व आगे की कार्यवाही

          इस मामले को सुलझाने में थाना विभूतिखण्ड और क्राइम टीम की संयुक्त पुलिस टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उ.नि. संदीप सिंह गौर के नेतृत्व में पुलिस टीम ने अभियुक्तों को पकड़ने में सफलता प्राप्त की। गिरफ्तारी टीम में पुलिस उपायुक्त पूर्वी और अन्य पुलिस अधिकारियों का भी सहयोग रहा। पुलिस अन्य संलिप्त अभियुक्तों की गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है और इन चोरों के आपराधिक इतिहास को खंगालने के लिए अन्य थानों और इकाइयों से जानकारी जुटाई जा रही है।

          गिरफ्तार करने वाली टीम व सफलता का मेसेज

          उ.नि. संदीप सिंह गौर, उ.नि. सतीश कुमार, उ.नि. आसित कुमार यादव, हे.कां. परशुराम राय, हे.कां. मनोज सिंह, कां. विशाल कुमार, और अन्य पुलिसकर्मियों ने इस सफल अभियान में हिस्सा लिया।

          लखनऊ पुलिस की यह सफलता न केवल अपराधियों को पकड़ने में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह नागरिकों को सुरक्षा का आश्वासन भी देती है। पुलिस की मुस्तैदी से त्यौहारों के दौरान होने वाली चोरी की घटनाओं पर काबू पाया जा सकेगा।