लखनऊ: राजधानी लखनऊ की शहरी विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करने के उद्देश्य से नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात जी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में लखनऊ नगर निगम द्वारा संचालित विभिन्न प्रमुख शहरी परियोजनाओं की स्थिति की गहन समीक्षा की गई और इनके क्रियान्वयन की चुनौतियों पर चर्चा की गई। बैठक का आयोजन नगर विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, मंडलायुक्त की उपस्थिति में किया गया, जिसमें लखनऊ नगर निगम के आयुक्त, मिशन निदेशक, AMRUT-2.0 के अधिकारी, लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, और उत्तर प्रदेश जल निगम के प्रबंध निदेशक सहित अन्य अधिकारी शामिल थे।
बैठक में लखनऊ शहर की निम्नलिखित प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा की गई
बैठक में सिटी फ्लावर फेस्टिवल, मैंगो पार्क, शक्ति वन, क्लाइमेट म्यूजियम, वेस्ट तो वंडर पार्क, वर्किंग वीमेन हॉस्टल, डिजिटल लाइब्रेरी, मनोरथा गौशाला, सी.एम. ग्रिड्स, कुरिया घाट, साहित्य पार्क, गुलाला घाट, भैंसाकुंड विश्राम घाट, राइफल शूटिंग क्लब, जोनल ऑफिस, सीनियर केयर सेंटर, फ़ूड हब एवं अन्य परियोजनाओं की समीक्षा की गयी एवं समय सीमा पर कार्य पूर्ण करने के दिशा निर्देश दिए|
बैठक में कुकरैल नदी एवं किला मोहम्मद नाला के पुनरुद्धार में किये गए कार्यों की समीक्षा की गयी एवं योजना के अंतर्गत आने वाले विभिन्न विभागों को गुणवत्ता एवं समय सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। इस बैठक में अधिकारियों द्वारा शहरी परियोजनाओं की प्रगति पर गहन चर्चा की गई और यह सुनिश्चित किया गया कि परियोजनाओं की समयसीमा का पालन हो। बैठक में अधिकारियों ने परियोजनाओं के लिए आवश्यक वित्तीय और तकनीकी संसाधनों पर भी विचार किया, जिससे इन परियोजनाओं को तय समय पर पूरा किया जा सके।
नगर विकास विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि लखनऊ की शहरी परियोजनाओं का क्रियान्वयन तीव्र गति से किया जाए और नागरिकों को बेहतरीन शहरी सुविधाएं प्रदान की जा सकें। बैठक में अधिकारियों ने विभिन्न परियोजनाओं की चुनौतियों और अवसरों पर भी विचार किया, और अगले चरण के लिए आवश्यक कदम उठाने का प्रस्ताव रखा गया।
रिमोट सेन्सिंग प्रयोगशाला से पकड़े जा रहे अवैध खनन
प्रदेश में उच्च तकनीक के द्वारा पकड़े जा रहे अवैध खनन कर्ता
रिमोट सेन्सिंग प्रयोगशाला द्वारा उपखनिजों के नये क्षेत्रों का भी किया जा रहा है चिन्हांकन
लखनऊ : 23 अक्टूबर 2024: निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग माला श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में अवैध खनन व अवैध खनन परिवहन पर पूरी तरह से अंकुश लगाने व नियन्त्रण करने के लिए विभाग द्वारा खनन कार्यो पर पैनी नजर रखी जा रही है। अवैध खनन व अवैध खनन परिवहन को रोकने के प्रभावी व ठोस कदम उठाए गए हैं। प्रभावी रणनीति बनाकर प्रवर्तन की कार्यवाही तो की ही जा रही है साथ ही साथ उच्च व अत्यंत आधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
आईएएस माला श्रीवास्तव ने बताया कि भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग में फोटो जियोलॉजी एवं रिमोट सेन्सिंग प्रयोगशाला को संचालित किया जा रहा है, जिसके द्वारा प्रदेश में अवैध खनन को इस तकनीक के माध्यम से भी चिन्हांकित किया जाने लगा है, जिसके आधार पर दोषियों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जा रही है। अब तक प्रयोगशाला द्वारा 06 जनपदों में अवैध खनन क्षेत्रों का चिन्हांकन किया गया है।
रिमोट सेन्सिंग प्रयोगशाला के द्वारा जन उपयोगी उपखनिज यथा- बालू/मोरम एवं बोल्डर आदि के नये क्षेत्रों का चिन्हांकन भी किया जा रहा है, जिससे कि आम जनमानस के उपयोग हेतु किफायतीऔर उचित दरों पर उपखनिज की उपलब्धता बनी रहे। इस हेतु कार्मिकों को रिमोट सेन्सिंग एप्लीकेशन सेन्टर, उ०प्र०, लखनऊ से प्रशिक्षित कराया गया है। इस पहल से अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी और राजस्व अपवंचन रोका जा सकेगा।
पर्व अवधि में प्रदेश के लोगों को सुरक्षित एवं सुगम यात्रा सुनिश्चित किया जायेगा
प्रोत्साहन अवधि में चालकों/परिचालकों को अतिरिक्त संचालन पर 350 रुपये प्रति दिवस की दर से मिलेगी प्रोत्साहन राशि
लखनऊ:23 अक्टूबर, 2024: उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने आगामी दीपावली एवं छठ पर्व पर (प्रोत्साहन अवधि) प्रदेश के लोगों को उनके गन्तव्य तक सुरक्षित एवं सुगम्य यात्रा के लिए अतिरिक्त परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि 29 अक्टूबर, 2024 से 10 नवम्बर, 2024 तक अधिक से अधिक बसें संचालित की जाएं। पूर्वांचल में बड़े पैमाने पर छठ पर्व का आयोजन होता है। इस पर्व पर महानगरों में रहने वाले पूर्वांचल के बहुत से लोग अपने गन्तव्य को जाते हैं। इसके दृष्टिगत सुव्यवस्थित आवागमन सुनिश्चित करने के निर्देश परिवहन मंत्री ने दिए है।
परिवहन मंत्री ने कहा कि दिल्ली से पूर्वी उत्तर प्रदेश के यात्रियों को आवागमन के लिए अधिक संख्या में बसें चलायी जाएं। लखनऊ व कानपुर नगरों के लिए भी इस अवधि में अतिरिक्त बसों के संचालन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों से यदि गाजियाबाद व दिल्ली एवं पश्चिमी क्षेत्रों के लिए प्रारम्भिक प्वाइंट से 60 प्रतिशत से अधिक लोड फैक्टर मिलने पर पूर्वी क्षेत्र से भी अतिरिक्त सेवाएं संचालित की जाएं। भैय्यादूज के अवसर पर स्थानीय व निकट जनपदों में अधिक आवागमन होता है। ऐसे स्थानीय स्तर पर क्षेत्रीय अधिकारी आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित कराएं।
परिवहन मंत्री ने प्रोत्साहन अवधि में निगम बसों को शतप्रतिशत ऑनरोड करने के निर्देश दिए साथ ही कहा कि बसों की असेम्बलीज व स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता भी परिवहन निगम के अधिकारी सुनिश्चित करा लें। उन्होंने कहा कि किसी भी दशा में अनफिट बसों का संचालन न किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रोत्साहन अवधि में अतिविशिष्ट परिस्थितियों को छोड़कर अधिकारियों/कार्मिकों का अवकाश स्वीकृत न किया जाए। उन्होंने अधिकारियों/कर्मचारियों की ड्यूटी रोस्टर पद्धति से लगाने के निर्देश दिए। परिवहन मंत्री ने निर्देश दिए कि प्रोत्साहन अवधि में अनुबन्धित बसों को अवकाश स्वीकृत न किया जाए। वाहन स्वामियों को सूचित कर दिया जाए कि अनुबन्ध पर लगी बसों का मरम्मत कराकर संचालन के लिए बसों की उपलब्धता सुनिश्चित कराएं। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रवर्तन दल क्षेत्रों में निकल कर जांच करें। सभी चालकों और परिचालकों का ब्रेथ एनेलाइजर टेस्ट किया जाए, जिससे कि सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जा सके।
प्रोत्साहन राशि, अतिरिक्त बसों का संचालन
प्रबन्ध निदेशक परिवहन निदेशक मासूम अली सरवर ने आश्वस्त किया कि परिवहन मंत्री के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने बताया कि सभी क्षेत्रीय/सहायक क्षेत्रीय प्रबन्धकों को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं। प्रोत्साहन अवधि में सुरक्षित एवं सुगम यात्रा प्रदेश के लोगों को उपलब्ध करायी जायेगी।
प्रबन्ध निदेशक परिवहन निदेशक मासूम अली सरवर ने बताया कि प्रोत्साहन अवधि में चालकों/परिचालकों एवं कार्मिकों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की जायेगी। उन्होंने बताया कि ऐसे चालक/परिचालक जिसमें संविदा तथा आउटसोर्सिंग के चालक/परिचालक भी शामिल हैं, जो न्यूनतम 12 दिवसों में उपस्थित होकर दैनिक रूप से निर्धारित औसत 300 किमी0 प्रतिदिन का संचालन करते हैं तो 350 रुपये प्रति दिवस की दर से एकमुश्त 4200 रुपये का विशेष प्रोत्साहन का भुगतान किया जायेगा। यदि ये कार्मिक 13 की पूर्ण प्रोत्साहन अवधि तक कुल ड्यूटी करते हैं एवं किमी0 के उपरोक्त मानक पूर्ण करते हैं, तो 400 रुपये प्रति दिवस की दर से प्रोत्साहन राशि देय होगी तथा कुल 5200 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। संविदा/वाह्य स्रोत चालकों/परिचालकों को प्रोत्साहन अवधि में निर्धारित मानक से अधिक किमी0 अर्जित करने पर अतिरिक्त किमी0 पर 55 पैसे प्रति किमी0 की दर अतिरिक्त मानदेय दिया जायेगा।
प्रबन्ध निदेशक ने बताया कि प्रोत्साहन अवधि में 13 दिन लगातार ड्यूटी करने वाले डिपो कार्यशाला एवं क्षेत्रीय कार्यशाला में कार्यरत कार्मिंकों, जिसमें निगम के सीधे आबद्ध आउटसोर्स कार्मिक भी शामिल होंगे, को एकमुश्त 2100 रुपये तथा 12 दिन ड्यूटी करने वाले कार्मिकों को एकमुश्त 1800 रुपये प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। इसके अतिरिक्त सभी क्षेत्रीय प्रबन्धकों को 10,000 रुपये एवं सेवा प्रबंधकों को 5,000 रुपये दिये जायेंगे, जिसका वितरण वे क्षेत्रीय समिति की संस्तुति उत्कृष्ट कार्य करने वाले क्षेत्रीय कर्मचारियों/उपाधिकारियों में करेंगे। सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक 50 रुपये प्रति निगम एवं अनुबंधित बस के आधार पर डिपो के उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों एवं उपाधिकारियों को वितरित करेंगे। लिपिकीय/उपाधिकारी के संवर्ग के कार्मिकों को प्रोत्साहित करने के लिए 50 बसों तक के बेड़े वाले डिपो को 5,000 रुपये प्रति डिपो, 51 से 100 तक बेड़े वाले डिपो को 15,000 रुपये स्वीकृत हैं, जिसका वितरण नियमित रूप से प्रोत्साहन अवधि में उपस्थित रहने वाले कार्मिकों के मध्य सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक द्वारा किया जायेगा। इस अवधि में प्रोत्साहन की अन्य योजनाएं भी लागू रहेंगी।
प्रबन्ध निदेशक ने बताया कि प्रोत्साहन अवधि में दिल्ली से लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी, अयोध्या, कानपुर के लिए लगभग 4,000 अतिरिक्त बसों का संचालन परिवहन निगम द्वारा किया जायेगा। इसके अतिरिक्त गाजियाबाद, मुरादाबाद, मेरठ, बरेली, सहारनपुर, आगरा, अलीगढ़ एवं इटावा क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त बसों के संचालन के निर्देश दिए गए हैं। क्षेत्रीय प्रबंधक आवश्यकतानुसार बसों के संचालन को घटा-बढ़ा सकते हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मानस मर्मज्ञ पं. रामकिंकर उपाध्याय के जन्म शताब्दी वर्ष पर भावांजलि की अर्पित
सीएम ने कहा: रामकिंकर जी का संपूर्ण जीवन विशिष्टता का प्रतीक
उन्होंने कहा: रामकिंकर जी की स्मृतियों को एक स्मृति ग्रंथ के रूप में संजोकर लोगों तक पहुंचाना चाहिए
मुख्यमंत्री ने बताया लीक से हटकार कार्य करने वाले व्यक्ति ही विशिष्ट होते हैं
लखनऊ, 23 अक्टूबर2024: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ‘भावांजलि’ कार्यक्रम में भाग लिया। यह कार्यक्रम भारत के प्रतिष्ठित मानस मर्मज्ञ और पद्मभूषण सम्मानित पं. रामकिंकर उपाध्याय के जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पं. रामकिंकर उपाध्याय की महिमा का बखान करते हुए उनके योगदान और सनातन धर्म के प्रति उनके समर्पण को श्रद्धांजलि अर्पित की।
महापुरुषों के योगदान को याद रखना हमारा दायित्व
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे लिए यह अत्यंत गौरव का क्षण है कि हम एक ऐसे महापुरुष के शताब्दी समारोह के आयोजन से जुड़े हैं, जिनका जीवन सनातन धर्म और प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर आधारित था। युग तुलसी पं. रामकिंकर जी का संपूर्ण जीवन श्रीराम और तुलसी साहित्य के प्रति समर्पित था। उनकी व्याख्याएं और चिंतन अनूठी थी, जो सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत बनी रहेंगी। सीएम योगी ने यजुर्वेद का उल्लेख करते हुए महापुरुषों के लक्षणों की बात की और कहा कि शास्त्रों में दो प्रकार के पुरुषों की चर्चा होती है, प्राकृत पुरुष और विशिष्ट पुरुष। रामकिंकर जी का संपूर्ण जीवन विशिष्टता का प्रतीक रहा है। उनका कार्य और उसके परिणाम बताते हैं कि उन्होंने लीक से हटकर समाज को प्रेरणा दी है।
पं. रामकिंकर उपाध्याय की श्रीराम कथा की विशिष्ट शैली का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने रामकथा को एक नई दिशा दी। उनकी कथाएं न केवल आम जनमानस, बल्कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जैसे गणमान्य लोगों को भी प्रभावित करती थीं। लगभग छह दशकों तक उन्होंने मानस के माध्यम से सनातन धर्म की सेवा की। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह हमारा दायित्व है कि हम ऐसे महापुरुषों के प्रति सम्मान का भाव रखें और उनकी शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाएं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पं. रामकिंकर उपाध्याय का जन्म शताब्दी वर्ष एक विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह वही वर्ष है जब 500 वर्षों के बाद श्रीरामलला अयोध्या में विराजमान हो चुके हैं। यह सच्ची श्रद्धा और भक्तिभाव का अद्वितीय उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने इस महान संयोग को रामकिंकर जी की श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामजन्मभूमि आंदोलन के दौरान पं. रामकिंकर उपाध्याय की कथाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। रामकिंकर जी की कथाओं ने ठीक उसी प्रकार जनजागरण का कार्य किया, जैसे तुलसीदास जी ने विदेशी आक्रांताओं के समय किया था। तुलसीदास जी ने तब के बादशाह का दरबारी बनने से इनकार करते हुए प्रभु श्रीराम को भारत का एकमात्र राजा बताया था। उन्होंने गांव-गांव में रामलीलाओं का आयोजन शुरू करवाया था और वह परंपरा आज भी बिना सरकारी सहायता के चल रही है, जिससे सनातन धर्म के मूल्य और अधिक सुदृढ़ हो रहे हैं।
प्रखर हिन्दुनिष्ठ बिशन चंद्र सेठ को सीएम ने किया याद
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि महापुरुषों की स्मृतियों को सहेजना और उन्हें आम जनमानस तक पहुंचाना आवश्यक है। यह वर्ष पं. रामकिंकर उपाध्याय की जन्मशताब्दी का वर्ष है। हमें उनकी स्मृतियों को एक स्मृति ग्रंथ के रूप में संजोकर लोगों तक पहुंचाना चाहिए, ताकि उनका जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायी बन सके। मुख्यमंत्री ने भावांजलि कार्यक्रम के आयोजक किशोर टंडन के बारे में बताते हुए कहा कि इनके नाना बिशन चंद्र सेठ जी गोरक्षपीठ के परम भक्त थे। सीएम योगी ने कहा कि बिशन चंद्र सेठ जी प्रखर हिन्दुनिष्ठ और अपने समय के अद्भुत व्याख्याकार थे, जो अपने तथ्यों के आगे कभी किसी के सामने नहीं झुके। इनका परिवार आज भी उसी निष्ठा के साथ धर्म पारायण होकर कार्य कर रहा है।
समर्पण और भक्ति का प्रतीक थे रामकिंकर जी
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पं. रामकिंकर उपाध्याय को भावांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन रामचरित मानस और तुलसी साहित्य के प्रति समर्पित था। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि वे अपने परम भक्त की अमरता और यशस्वी परंपरा को आगे बढ़ाएं, जो सनातन धर्म के अनुयायियों का मार्गदर्शन करती रहे। भावांजलि कार्यक्रम में प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, श्रीरामायण ट्रस्ट की अध्यक्ष साध्वी मंदाकिनी, प्रख्यात कथा व्यास पं. उमाशंकर शर्मा और किशोर टंडन समेत अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
मुख्य निर्वाचन कार्यालय में आयोजित हुयी राज्य स्तरीय स्वीप कोर कमेटी की बैठक
18-19 आयु वर्ग के पंजीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाए
विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण और मतदाता जागरूकता अभियान के निर्देश, युवा मतदाताओं पर विशेष जोर
मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा तय, 6 जनवरी 2025 को अंतिम सूची का प्रकाशन
युवा मतदाताओं के लिए विशेष जागरूकता अभियान
लखनऊ: मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में बुधवार को भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार विधानसभा निर्वाचन नामावलियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कार्यक्रम और मतदाता जागरूकता अभियान के संचालन के लिए राज्य स्तरीय स्वीप कोर कमेटी की बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न सहयोगी विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और मतदाता जागरूकता अभियान से संबंधित सभी विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी चन्द्रशेखर ने जानकारी दी कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मतदाता सूची का आलेख्य प्रकाशन 29 अक्टूबर 2024 को किया जाएगा। दावे और आपत्तियाँ दर्ज करने की अवधि 29 अक्टूबर से 28 नवम्बर 2024 तक निर्धारित की गई है। पुनरीक्षण के दौरान विशेष अभियान दिवस 9, 10, 23 और 24 नवम्बर को आयोजित किए जाएंगे। अंतिम मतदाता सूची 06 जनवरी 2025 को प्रकाशित की जाएगी।
बैठक से संबंधित प्रमुख बिंदु:
मतदाता जागरूकता बैनर: सभी विभागों से अपेक्षित है कि वे अपने वेबसाइट पर मतदाता पंजीकरण अभियान का प्रचार-प्रसार करें।
जागरूकता कार्यक्रम: 18-19 आयु वर्ग के युवा मतदाताओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अर्हता पूर्ण करने वाले युवा मतदाता 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2025 को अग्रिम फार्म-06 भर सकते हैं।
इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब (ELC): उच्च और माध्यमिक शिक्षा विभाग के माध्यम से शैक्षणिक संस्थानों में विशेष अभियान चलाया जाएगा।
स्वयंसेवक भागीदारी: एनएसएस, भारत स्काउट एंड गाइड, और नेहरू युवा केंद्र के वालंटियर्स जिले में मतदाता जागरूकता कार्यक्रम संचालित करेंगे।
दिव्यांग मतदाता: दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा दिव्यांग मतदाताओं के पंजीकरण के लिए विशेष अभियान का आयोजन किया जाएगा।
महिलाओं की सहभागिता: महिलाओं को जागरूक कर उन्हें मतदाता बनने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
यह बैठक सभी संबंधित विभागों को एकजुट होकर मतदाता जागरूकता को बढ़ाने के लिए प्रेरित करती है, ताकि हर नागरिक मतदान प्रक्रिया में भाग ले सके और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग कर सके।