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ग्रामोद्योग के माध्यम से नवाचार एवं रोजगार सृजन के अवसर उपलब्ध कराए जाए- मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ. उज्ज्वल कुमार

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जैविक कृषि आधारित उद्यमिता पर आयोजित हुई कार्यशाला

लखनऊ:23 अक्टूबर 2024: उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के मुख्यालय के सभागार में “जैविक कृषि आधारित कृषि उद्यमिता एवं ग्रामोद्योग से स्वरोजगार” विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुख्य कार्यपालक अधिकारी, उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड डॉ. उज्ज्वल कुमार ने कार्यशाला में उठाए गए महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्राथमिकता के आधार पर नाबार्ड, सीमैप, एन. बी. आर. आई. और उद्यान विभाग आदि से समन्वय स्थापित कर ग्रामोद्योग के माध्यम से नवाचार एवं रोजगार सृजन के अवसर उपलब्ध कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया।

इस कार्यशाला में पद्मश्री डॉ. भारत भूषण त्यागी ने ग्रामीण क्षेत्रों में जैविक कृषि आधारित उद्यमिता की स्थापना हेतु खादी ग्रामोद्योग बोर्ड की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी। कार्यशाला में पी. एस. ओझा, पूर्व राज्य सलाहकार, जैविक ऊर्जा सलाहकार बोर्ड ने सहकारिता एवं एफ.पी.ओ. के माध्यम से ग्रामोद्योगी रोजगार सृजन की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। साथ ही, सीमैप, नाबार्ड, उद्यान विभाग और एन. बी. आर. आई. से आए वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों ने भी बहुमूल्य जानकारी साझा की। कार्यशाला में खादी बोर्ड के मंडलीय ग्रामोद्योग प्रशिक्षण केंद्रों के प्राचार्य, परिक्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी, और खादी बोर्ड मुख्यालय के अधिकारीगण उपस्थित रहे।

शिक्षा समानता लाती है, जातिवाद की राजनीति युवाओं का भविष्य अंधकार की ओर ले जाती है – डॉ.राजेश्वर सिंह

  • ताराशक्ति केंद्रों की स्थापना के लिए सरोजनीनगर की महिलाओं में अद्भुत उत्साह, स्थापित हुए 135 ताराशक्ति केंद्र, 65 आवेदन प्रक्रियाधीन
  • नारी सशक्तिकरण की नयी इबारत लिख रखे विधायक राजेश्वर सिंह, 1500 सिलाई मशीनें प्रदान कर स्थापित कराये 135 ताराशक्ति केंद्र सिलाई सेंटर
  • खसरवारा में खुला 135वां ताराशक्ति सिलाई सेंटर, डॉ. राजेश्वर सिंह महिलाओं को उपलब्ध करवा रहे सिलाई कढाई मशीनें
  • वीमन एम्पॉवरमेंट का हब बना सरोजनीनगर, विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा स्थापित ताराशक्ति केंद्रों पर सिलाई कढ़ाई के गुर सीख स्वावलम्बी बन रहीं 7 हजार से अधिक महिलायें
  • डॉ. राजेश्वर सिंह ने किया खसरवारा में 135वें ताराशक्ति केंद्र का उद्घाटन, जनसंवाद कर सुनीं ग्रामीणों की समस्याएँ

लखनऊ: सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से ताराशक्ति केन्द्रों की स्थापना के सतत क्रम में बुधवार को ग्राम पंचायत खासरवारा में 135वां ताराशक्ति केंद्र सिलाई सेंटर स्थापित किया गया। इस केंद्र का संचालन महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा किया जाएगा, केंद्र पर विधायक डॉ. सिंह द्वारा सिलाई कढाई की मैन्युअल एवं ऑटोमैटिक मशीनें उपलब्ध कराई गईं है। इस दौरान डॉ. सिंह द्वारा जन संवाद कर उपस्थित ग्रामीणों की समस्याएँ भी सुनीं गईं और उनके शीघ्र समाधान के लिए आश्वस्त भी किया गया।

इस अवसर पर सरोजनीनगर विधायक ने उपस्थित जन समूह को संबोधित करते हुए कहा कि सरोजनीनगर की मातृशक्ति घर से निकलकर, सिलाई – कढ़ाई के हुनर को स्वावलंबन का माध्यम बना रही है, ताराशक्ति केन्द्रों से जुड़कर आर्थिक आत्मनिर्भर बन रही हैं, अब तक 1500 से अधिक सिलाई मशीनें प्रदान कर 135 केंद्र स्थापित किए गए, 65 से अधिक महिला स्वयं सहायता समूहों ने ताराशक्ति केंद्र की स्थापना के लिए आवेदन किया है, हमारा लक्ष्य सरोजनीनगर में इस तरह के 200 केंद्रों की स्थापना का है।

डॉ. सिंह ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा, शिक्षा समानता लाती है, जातिवाद की राजनीति युवाओं का भविष्य अन्धकार की ओर ले जाती है। राष्ट्र की प्रगति-उन्नति बच्चों की शिक्षा पर निर्भर है, भावी पीढ़ी के लिए Digital शिक्षा सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। सरोजनीनगर में अब तक 7 रण बहादुर सिंह डिजिटल शिक्षा एवं युवा सशक्तिकरण केन्द्रों की स्थापना की गयी, 27 कॉलेजों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की गईं, 12 कॉलेजों में डिजिटल स्मार्ट क्लास रूम स्थापित किये गए।

सरोजनीनगर में संचालित जन कल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए विधायक राजेश्वर सिंह ने आगे कहा कि 1,000 से अधिक दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराये गए,1000 से अधिक सोलर लाइट स्थापित की गईं, 1000 से अधिक मेधावियों को लैपटॉप, टेबलेट्स, साइकिल आदि प्रदान कर सम्मानित किया गया। सरोजनीनगर परिवार के लिए पिछले 92 सप्ताह से सतत आयोजित हो रहा है ‘आपका विधायक – आपके द्वार’ जनसुनवाई शिविर, अब तक 31 रामरथ श्रवण अयोध्या यात्रा (फ्री बस सेवा) का संचालन कर वृद्धजनों को अयोध्या दर्शन कराया गया।

विधायक डॉ. सिंह ने कार्यक्रम के दौरान उपस्थित युवाओं को वॉलीबॉल, फुटबॉल, क्रिकेट किट आदि प्रदान कर सम्मानित भी किया, इस दौरान सेंटर इंचार्ज रानी गौतम, सविता सिंह चौहान, रानी, राहुल कुमार, सुमन, भाजपा नेता राजेश सिंह चौहान, शंकरी सिंह, मंडल अध्यक्ष विवेक राजपूत, पार्षद लवकुश रावत, शिव कुमार सिंह ‘चच्चू’ आशु शुक्ला, सुभाष पासी, सुजीत सिंह, कपिल खत्री, धर्मेन्द्र सिंह व अन्य मौजूद रहे।

विद्यालयों को कौशल केंद्र के रूप में विकसित करने को योगी सरकार कर रही है शिक्षकों को प्रशिक्षित

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  • उच्च प्राथमिक/कम्पोजिट, पीएमश्री विद्यालयों और पायलट प्रोजेक्ट से चयनित विज्ञान और गणित के 2402 शिक्षकों को दिया जा रहा है प्रशिक्षण
  • विद्यार्थियों को व्यावसायिक कौशल और व्यवहारिक अनुभव के माध्यम से सिखाने पर है जोर
  • लखनऊ स्थित दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान में दिया जा रहा है प्रशिक्षण
  • विद्यार्थियों के शैक्षिक और व्यक्तिगत विकास में सहायक साबित होगा यह कार्यक्रम: संदीप सिंह

लखनऊ: विद्यालयों को कौशल केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की कोशिशें अब परवान चढ़ने लगी हैं। प्रदेश के उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट और पीएमश्री विद्यालयों में पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से चयनित विज्ञान और गणित के 2402 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाने लगा है। बता दें कि यह कार्यक्रम ‘लर्निंग बाई डूइंग’ के सिद्धांत पर आधारित है और इसमें विज्ञान आश्रम एवं यूनिसेफ का सहयोग मिल रहा है, जो 25 अक्टूबर तक चलता रहेगा।

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लखनऊ स्थित दीन दयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान में चल रहे इस प्रशिक्षण में 1772 उच्च प्राथमिक व कम्पोजिट, 570 पीएमश्री विद्यालयों और 60 पायलट प्रोजेक्ट से चयनित विज्ञान और गणित शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। यहाँ प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले शिक्षक, विद्यार्थियों को व्यावसायिक कौशल और व्यवहारिक अनुभव के माध्यम से सिखाने का प्रयास करेंगे। इस पहल से विद्यार्थियों के शैक्षिक और व्यक्तिगत विकास में सहायता मिलने की उम्मीद है।

योगी सरकार के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह के नेतृत्व में, बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत प्रदेश के इन विद्यालयों को कौशल केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से इस चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण में शिक्षकों को अनेक विधाओं में पारंगत किया जा रहा है।इस संबंध में उनका कहना है कि इस पायलट प्रोजेक्ट के लागू होने से न केवल विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति में वृद्धि हुई, बल्कि उनके विज्ञान और गणित के अधिगम स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया। विद्यार्थियों ने व्यावसायिक और तकनीकी कौशलों को सीखते हुए विषयों की गहरी समझ विकसित की, जो अब उनके शैक्षिक और व्यक्तिगत विकास में सहायक साबित हो रही है।

विद्यार्थियों के हित में यह प्रयास, वर्ष 2022 में लागू हुआ था पायलट प्रोजेक्ट

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को विज्ञान और गणित जैसे जटिल विषयों को समझाने के साथ-साथ उन्हें व्यावसायिक कौशलों से भी परिचित कराना है। विद्यार्थियों के समग्र विकास को बढ़ावा देना भी इसके उद्देश्यों में शामिल है। इस प्रयास का मकसद उन्हें सिर्फ शिक्षाविद बनाना नहीं है, बल्कि व्यावहारिक जीवन में उनके कौशलों को विकसित करने का अवसर प्रदान करना भी है। वर्ष 2022 में इस कार्यक्रम का पायलट प्रोजेक्ट 15 जनपदों के 60 विद्यालयों में लागू किया गया था। इसके अंतर्गत विद्यार्थियों ने चार प्रमुख ट्रेड्स (इंजीनियरिंग एंड वर्कशॉप, एनर्जी एंड एनवायरनमेंट, एग्रीकल्चर, नर्सरी एंड गार्डनिंग और होम एंड हेल्थ केयर) के माध्यम से 60 से अधिक गतिविधियों में कौशल सीखा था। इस पहल से छात्रों में विषयों की व्यवहारिक समझ और रुचि दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई थी।

अपर मुख्य सचिव परिवहन एल. वेंकटेश्वर लू. बोले

प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ करते हुए अपर मुख्य सचिव परिवहन एल. वेंकटेश्वर लू और विशिष्ट अतिथि सुश्री एकता सिंह (IAS) ने कहा कि यह पहल विद्यार्थियों के कौशल विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। इसके जरिए न केवल छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी कौशल का विकास होगा, बल्कि यह उन्हें भविष्य में आत्मनिर्भर बनने के लिए आवश्यक व्यावसायिक क्षमताओं से भी सशक्त करेगा। विद्यालयों में व्यावहारिक शिक्षा का यह प्रयास प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को एक नई दिशा प्रदान करेगा और छात्रों को रोजगार के बेहतर अवसर प्रदान करने में सहायक होगा। इस मौके पर मुख्य रूप से माधव जी तिवारी, वरिष्ठ विशेषज्ञ सामुदायिक सहभागिता समग्र शिक्षा, बी. चौधरी अपर निदेशक संस्थान, मोहित यादव संकाय अधिकारी, विज्ञान आश्रम एवं यूनिसेफ की टीम के अलावा रजीत सिंह एवं डॉ. फैजान, राज्य सलाहकार सामुदायिक सहभागिता आदि उपस्थित थे।

महाकुम्भ 2025 से पहले हर हाल में पूरा करें गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण-औद्योगिक विकास मंत्री

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  • यूपीडा की समीक्षा बैठक में मंत्री नन्दी ने महाकुम्भ के दृष्टिगत गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण में तेजी लाने के दिए निर्देश
  • नवंबर या दिसम्बर में हो सकता है गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का उद्घाटन, 98.5 प्रतिशत कार्य पूर्ण
  • बलिया लिंक एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण का कार्य हुआ पूर्ण
  • 29 जनपदों में इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए खरीदी गई 8000 एकड़ भूमि, 12,000 एकड़ भूमि का है लक्ष्य
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लखनऊ: उतर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी ने बुधवार को पर्यटन भवन लखनऊ में उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। जिसमें मंत्री नन्दी ने महाकुम्भ 2025 के दृष्टिगत गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य की प्रगति धीमी मिलने पर रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए। कहा कि हर हाल में महाकुम्भ 2025 से पहले गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य पूरा किया जाए, ताकि महाकुम्भ के दौरान लाखों लोगों को पुण्य अर्जित करने का लाभ मिल सके। साथ ही मंत्री नन्दी ने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के बचे हुए डेढ़ प्रतिशत कार्य को जल्द से जल्द पूरा कर नवम्बर या फिर दिसम्बर महीने में उद्घाटन कराने के निर्देश दिए।

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मंत्री नन्दी ने कहा कि मेरठ को प्रयागराज और बीच में पड़ने वाले 12 जनपदों को आपस में जोड़ने और यात्रा की अवधि कम करने के लिए ही 594 किलोमीटर लम्बे गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। ताकि महाकुम्भ 2025 के दौरान लाखों लोगों को पुण्य अर्जन में इसका लाभ मिल सके। मंत्री नन्दी ने गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्य की प्रगति जानी। जिसके सम्बंध में अधिकारियों ने अब तक 98.5 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने और 30 अक्टूबर 2024 कार्य समाप्ति की निर्धारित तिथि की जानकारी दी। जिस पर मंत्री नन्दी ने बचे हुए डेढ़ प्रतिशत कार्य को जल्द से जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए। जिस पर अधिकारियों ने कहा कि नवम्बर या फिर दिसम्बर में 7,283 करोड़ की लागत से निर्मित 91.35 किलोमीटर लम्बे गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का लोर्कापण कराया जा सकता है।

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समीक्षा बैठक में बताया गया कि गाजीपुर से मांझीघाट 131 किलोमीटर लम्बे ग्रीन फील्ड परियोजना एनएच 31 का निर्माण कार्य कराया जाना है। जिसके लिए 822.05 हेक्टेयर भूमि के सापेक्ष 744 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण एवं क्रय करने का कार्य पूरा कराया जा चुका है। जल्द ही अब आगे की प्रक्रिया को अपनाया जाएगा।
बुन्देलखण्ड एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे व गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे 28 जनपदों में 29 स्थलों पर औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किए जाने हैं, जिसके लिए 12,000 एकड़ भूमि एकत्रित करने का लक्ष्य है। जिसके सापेक्ष 8000 एकड़ भूमि क्रय की जा चुकी है। जिस पर मंत्री नन्दी ने शेष भूमि को भी जल्द से जल्द क्रय करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर के सभी 6 नोड में 1649 हेक्टेयर भूमि चिहिन्त की गई है। जिसमें से 1301 हेक्टेयर भूमि अलॉट की जा चुकी है। अभी तक 8000 करोड़ का इन्वेस्ट हो चुका है। पांच प्लांट से प्रोडक्शन भी शुरू हो गया है। कानपुर नोड में इजराइल की कम्पनियां इनवेस्ट के लिए आ रही हैं।
मंत्री नन्दी ने एक्सप्रेसवे पर चलने वाले सभी वाहन तथा एम्बुलेंस, कैटल कैचर क्रेन, जिनमें जीपीएस की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, उनकी लाइव लोकेशन यूपीडा के मुख्यालय में स्थित बोर्ड रूम में दिखाए जाने जाने के निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश शासन एवं सीईओ यूपीडा मनोज कुमार सिंह, प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास अनिल कुमार सागर, एसीईओ यूपीडा हरि प्रताप शाही व अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।

कृषि मंत्री ने गोरखपुर में मंडलीय रबी उत्पादकता गोष्ठी- 2024 में भाग लिया

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  • कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने गोरखपुर में “मंडलीय रबी उत्पादकता गोष्ठी – 2024” में भाग लिया।
  • ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना’ के तहत लाभार्थियों को प्रोत्साहन राशि के चेक वितरित किए गए।
  • ‘प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना’ के तहत ₹ 4 लाख की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।
  • कृषोन्नति योजना के अंतर्गत राज्यांश के रूप में ₹ 16.45 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति दी गई।

गोरखपुर/लखनऊ, 23 अक्टूबर 2024: उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बुधवार को गोरखपुर में आयोजित “मंडलीय रबी उत्पादकता गोष्ठी – 2024” में हिस्सा लिया। इस गोष्ठी में गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडलों के किसान शामिल हुए।

गोष्ठी में कृषि मंत्री ने किसानों को संबोधित करते हुए रबी फसल उत्पादन और कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों के प्रयोग पर बल दिया। उन्होंने ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना’ के अंतर्गत कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा देने के लिए लाभार्थियों को प्रोत्साहन राशि के चेक वितरित किए। साथ ही, ‘जिला औद्यानिक मिशन योजना’ के अंतर्गत लाभार्थियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। इसके अलावा, ‘प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकरण योजना’ के तहत किसानों को ₹ 4 लाख की प्रोत्साहन राशि के चेक भी दिए गए, जिससे सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।

प्रमुख घोषणाएँ और वित्तीय स्वीकृतियाँ:

  • आज ही कृषोन्नति योजना के तहत, राज्यांश के रूप में ₹ 16.45 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति दी गई, जिसका उद्देश्य फूड और न्यूट्रिशन सिक्योरिटी को सुनिश्चित करना है।
  • किसानों की उपज बढ़ाने और उत्पादन में सुधार के लिए सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के सफल क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।

उपस्थित गणमान्य लोग:

इस अवसर पर गोरखपुर के सांसद रवि किशन शुक्ल, कृषि उत्पादन आयुक्त मोनिका गर्ग, कृषि सचिव अनुराग यादव, ग्राम्य विकास सचिव सुखलाल भारती, और गोरखपुर, बस्ती, आजमगढ़ के मंडलीय आयुक्त अनिल ढींगरा, मनीष चौहान, और अखिलेश सिंह उपस्थित रहे।