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यूपी राजभवन में कर्नाटक और तमिलनाडु राज्य का स्थापना दिवस समारोह सम्पन्न

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  • कर्नाटक और तमिलनाडु राज्य की लोक संस्कृति को दर्शाने वाले लोक नृत्यों का हुआ प्रदर्शन
  • राज्यपाल ने कर्नाटक और तमिलनाडु राज्य की संस्कृति पर आधारित प्रदर्शनी तथा आकर्षक रंगोली का भी किया अवलोकन
  • विभिन्न राज्यों की भाषा और संस्कृति को सीखने से एक भारत श्रेष्ठ भारत का सपना साकार होगा
  • विद्यार्थियों को यह जानकारी होनी चाहिए कि विभिन्न भारतीय राज्यों का निर्माण किस प्रकार हुआ
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लखनऊ: 07 नवम्बर, 2024: प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आज राजभवन में कर्नाटक और तमिलनाडु राज्यों के स्थापना दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कर्नाटक और तमिलनाडु राज्य की समृद्ध लोक संस्कृति पर आधारित लोक नृत्य की प्रस्तुति के साथ-साथ राज्यों की सांस्कृतिक विविधता एवं अद्यतन विकास पर आधारित डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन भी किया गया। अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि सामान्यतः दक्षिण भारत की संस्कृति को जानने का प्रयास कम होता है और इस तरह के कार्यक्रमों से इन राज्यों की समृद्ध संस्कृति और इतिहास को जानने का अवसर मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न प्रदेशों के युवा विद्यार्थीगण परस्पर एक-दूसरे राज्य में जाकर वहाँ की भाषा और संस्कृति सीखते हैं, जिससे ’एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को साकार करने में मदद मिलती है।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों को जानें, क्योंकि जब तक हम विभिन्न भाषाएं नहीं सीखेंगे, हम क्षेत्रीय साहित्य और ज्ञान तक नहीं पहुंच सकते। उन्होंने अपनी भाषा का महत्व समझने की आवश्यकता पर भी बल दिया। कार्यक्रम में कर्नाटक और तमिलनाडु के लोक नृत्यों की ऊर्जावान प्रस्तुति करने वाले कलाकारों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि कलाकारों की अभिव्यक्तियों और भावभंगिमाओं से उनके संदेश को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे इन कलाकारों की मुद्राओं और भाषाओं को सीखें, जो सांस्कृतिक अध्ययन का अहम हिस्सा हैं।

उन्होंने तमिलनाडु में स्थित ‘विवेकानंद स्टैचू‘ को महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केन्द्र बताया और ‘काशी तमिल‘ समागम का उल्लेख करते हुए कहा कि इन स्थलों से लोगों को एकजुट करने और हमारी साझा संस्कृति को समझने का अवसर मिलता है। उन्होंने तमिलनाडु के विश्व धरोहर स्थल महाबलीपुरम का भी जिक्र किया, जहाँ पाँच पांडवों का मंदिर स्थित है। राज्यपाल ने रामेश्वरम, कांचीपुरम और अन्य महत्वपूर्ण स्थलों को दर्शनीय तथा ऐतिहासिक बताया। रामेश्वरम और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ0 ए0पी0जे0 अब्दुल कलाम जी की चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि रामेश्वरम न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह हमारे देश के समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि डॉ0 कलाम को ’मिसाइल मैन’ के रूप में जाना जाता है और उनके योगदान से भारत की सामरिक शक्ति सुदृढ़ हुई। साथ ही उन्होंने भारतीय प्राचीन ग्रंथों में हुए आविष्कारों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय इतिहास अत्यधिक समृद्ध था, लेकिन एक कालखंड ऐसा आया जब कई महत्वपूर्ण जानकारियां नष्ट हो गईं। आजादी के बाद माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में इन ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण का प्रयास किया जा रहा है। अपने संबोधन में राज्यपाल ने कर्नाटक राज्य की ऐतिहासिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मैसूर महल एक स्वर्ण महल था, जो कर्नाटक की ऐतिहासिक महिमा का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि दक्षिण भारत में विशेषकर कर्नाटक और तमिलनाडु में लड़कियों को कला और संस्कृति सिखाने पर जोर दिया जाता है। राज्यपाल ने कर्नाटक के प्रसिद्ध लोक नृत्य शिव तांडव की भी चर्चा की और उसके ऐतिहासिक महत्व को बताया।

राज्यपाल ने भारतीय राज्यों के विकास की चर्चा करते हुए कहा कि प्राचीन भारत में सात प्रमुख राज्यों में से एक मद्रास था और विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों को यह जानकारी होनी चाहिए कि विभिन्न भारतीय राज्यों का निर्माण किस प्रकार हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि आजकल रेलवे स्टेशनों और एयरपोर्ट्स पर पेंटिंग के माध्यम से प्रत्येक राज्य की सांस्कृतिक झलक दिखाई जाती है, जिससे सम्बन्धित राज्य के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति को समझने का अवसर मिल सके। कार्यक्रम में उत्तर मध्य सांस्कृतिक क्षेत्र प्रयागराज, संस्कृति विभाग एवं भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ के कलाकारों द्वारा कर्नाटक और तमिलनाडु राज्य की लोक संस्कृति को दर्शाने वाले कई शानदार नृत्य प्रस्तुत किए गए, जिनमें कर्नाटक के महत्वपूर्ण लोकनृत्य सुग्गी, करगा तथा तमिलनाडु के कोलाट्टम, भरतनाट्यम, शिवतांडव, कावड़ी चिन्दू, तिललाना नृत्य आदि की मनमोहक प्रस्तुतियां शामिल थीं। नृत्य कलाकारों की अभिव्यक्ति और भावभंगिमा ने दर्शकों के बीच एक गहरी छाप छोडी़। इस अवसर पर राज्यपाल जी ने कर्नाटक और तमिलनाडु राज्य की संस्कृति, खान-पान, परिधान, प्रमुख स्थलों, महान विभूतियों एवं लोक संस्कृति पर आधारित एक प्रदर्शनी तथा आकर्षक रंगोली का भी अवलोकन किया।

इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, राज्यपाल डॉ0 सुधीर महादेव बोबडे, ए0डी0जी0 रेलवे प्रकाश डी0, ए0डी0जी0 सी0बी0सी0आई0डी0 एल0 वी0 एन्टोनी, आई0जी0 कानून व्यवस्था एल0आर0 कुमार, डी0आई0जी0 टेक्निकल रोहन पी0 कनय, आई0पी0एस0 एम0 अरूण व तमिलनाडु तथा कर्नाटक राज्य से आए गणमान्य अतिथिगण, लखनऊ स्थित विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए विद्यार्थीगण, राजभवन के अधिकारी और कर्मचारी आदि उपस्थित रहेे।

महापर्व छठ: नगर विकास मंत्री ने संझिया घाट और लक्ष्मण मेला मैदान में आयोजित पूजा महोत्सव कार्यक्रम में प्रतिभाग किया

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  • सूर्य उपासना सनातन संस्कृति का अभिन्न अंग है,भगवान श्री राम ने भी आदित्य स्त्रोत की स्तुति कर भगवान सूर्य की पूजा की
  • ए.के. शर्मा ने छठी मइया और सूर्य भगवान से श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी करने की कामना की

लखनऊ: 07 नवम्बर, 2024: प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा जी गुरुवार को शाम 7:00 बजे लखनऊ में डालीगंज के संझिया घाट, पक्का पुल में भोजपुरी छठ पूजा समिति द्वारा आयोजित पूजा महोत्सव कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। साथ ही लक्ष्मण मेला मैदान में अखिल भारतीय भोजपुरी समिति द्वारा आयोजित पूजा महोत्सव कार्यक्रम में भी शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने समिति के कार्यकर्ताओं को छठ पर्व पर पूजा कार्यक्रम आयोजित करने के लिए बधाई व शुभकामनाएं दी और छठी मइया की पूजा अर्चना कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने छठी मैया और सूर्य भगवान से श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी करने की कामना की।

नगर विकास मंत्री ने कहा कि छठ पर्व में सभी घाटों की साफ सफाई, प्रकाश आदि की व्यवस्था नगर विकास और विद्युत् विभाग कर रहा है। कहीं पर भी कोई समस्या नहीं है। सभी जगह व्यवस्थाएं अच्छी की गई हैं। उन्होंने कहा कि छठ पर्व प्रकृति की पूजा अर्चना का पर्व होता है। सनातन संस्कृति में पर्व और त्योहार को प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर मनाए जाते हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से निवेदन किया कि इस पर्व को स्वच्छ छठ के रूप में मनाए। कूड़ा कचरा को डस्टबिन में डालें। इसी प्रकार पूजा सामग्री को भी अर्पण कलश में डालें न कि पानी में बहाए। इससे हम स्वच्छ छठ मनाने में अपना योगदान दे सकेंगे और नदियों व जलाशयों को गंदा होने से भी बचा पाएंगे। सभी श्रद्धालु इसका ध्यान रखेंगे।

उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में सभी बुराइयों को खत्म करने के लिए प्रयास किए गए हैं, अभी सुधार की प्रक्रिया जारी है। सूर्य उपासना सनातन संस्कृति का अभिन्न अंग है। भगवान श्री राम ने भी आदित्य स्त्रोत की स्तुति कर भगवान सूर्य की पूजा की थी। छठ पूजा में पांच तत्वों की पूजा की जाती है। सभी लोग अपने आसपास के वातावरण को साफ-स्वच्छ रखें। कोई भी श्रद्धालु सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग न करें। जल में भी प्लास्टिक और गंदी चीजे को प्रवाहित न करें, जिससे जाली जीवन के अस्तित्व में संकट पैदा हो, जलीय जीवन को भी बचाना बहुत जरूरी है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय विधायक तथा समिति के संरक्षक डॉo नीरज बोरा ने कहा कि इस घाट में 28 वर्षों से छठ पूजा की जा रही है। नगर विकास के प्रयासों से छठ घाटों में बेहतरीन व्यवस्था की गई है। छठ पूजा देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अब मनाया जा रहा है। लाखों श्रद्धालु आज लखनऊ में इस पूजा में भाग ले रहे हैं। आने वाले समय में छठ पूजा में और बड़े आयोजन किए जाएंगे।

कार्यक्रम में नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह, अखिल भारतीय भोजपुरी समाज के प्रभुनाथ राय, पी.एन. तिवारी, भोजपुरी छठ पूजा समिति के अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा, क्षेत्रीय पार्षद नदीम, विनोद कुमार सिंह, राम नरेश प्रसाद, राधेश्याम वर्मा, संजय सिंह, अमन राय, सतीश कुमार आदि लोग उपस्थित रहें।

उत्तरप्रदेश : लहसुन की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत विशेष योजना

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  • भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित इस योजना को 45 जनपदों में लागू किया जा रहा
  • योजना के तहत प्रदेश में प्रति हेक्टेयर 30,000 रुपये की अनुमान्य इकाई लागत तय की गई है
  • इसमें किसानों को प्रति हेक्टेयर 40 प्रतिशत, यानी अधिकतम 12,000 रुपये का अनुदान दिया जाएगा
  • लहसुन का बीज राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, नई दिल्ली द्वारा किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा
  • मसाला क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम के तहत 10,000 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में लहसुन की खेती का लक्ष्य रखा है
  • 45 जनपदों में लहसुन की खेती को बढ़ावा देने के लिए मसाला क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम प्रति हेक्टेयर 40 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान

लखनऊ: 07 नवम्बर, 2024: प्रदेश के उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने बताया कि प्रदेश में लहसुन की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत विशेष योजना बनाई है। यह मिशन भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित है और इसे 45 जनपदों में लागू किया जा रहा है। इन जनपदों में सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलन्दशहर, गाजियाबाद, बरेली, मुरादाबाद, आगरा, मथुरा, मैनपुरी, हाथरस, कानपुर, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, उन्नाव, सीतापुर, रायबरेली, बाराबंकी, सुल्तानपुर, प्रयागराज, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, वाराणसी, जौनपुर, गाजीपुर, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, बलिया, कुशीनगर, महराजगंज, बांदा, हमीरपुर, जालौन, चित्रकूट, महोबा, ललितपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही, गोरखपुर, झांसी, अयोध्या एवं फर्रूखाबाद शामिल हैं। इस मिशन के अंतर्गत केन्द्रांश 60 प्रतिशत तथा राज्यांश 40 प्रतिशत निर्धारित किया गया है।

इस योजना के तहत प्रदेश में उद्यान विभाग द्वारा प्रति हेक्टेयर 30 हजार रुपये की अनुमन्य इकाई लागत तय की गई है। इसमें किसानों को प्रति हेक्टेयर 40 प्रतिशत, यानी अधिकतम 12 हजार रुपये का अनुदान दिया जाएगा। यह अनुदान प्रति किसान न्यूनतम 0.2 हेक्टेयर से अधिकतम 4.0 हेक्टेयर तक की भूमि पर उपलब्ध होगा। लहसुन का बीज राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान, नई दिल्ली द्वारा किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। बीज की कीमत 370 से 390 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच रखी गई है।

किसान इस योजना का लाभ प्रथम आवक-प्रथम पावक के आधार पर प्राप्त कर सकते हैं। इच्छुक किसानों को अपने जनपद के जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय में संपर्क करना होगा। इसके साथ ही, किसान योजना में पंजीकरण करने के लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट http://dbt.uphorticulture.in पर भी ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं।
लहसुन की बढ़ती मांग और उसकी गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए, प्रदेश सरकार ने मसाला क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम के तहत 10 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में लहसुन की खेती का लक्ष्य रखा है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए इस योजना के प्रस्ताव को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, उद्यान अनुभाग, भारत सरकार को भेजा था, जिस पर केंद्र सरकार ने अनुमति प्रदान की है।

मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है श्रीमद् भागवत महापुराण की कथा : योगी आदित्यनाथ

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  • प्रतापगढ़ में श्रीमद् भागवत कथा में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
  • पूर्व मंत्री महेन्द्र सिंह के आवास पर भागवत कथा के आयोजन में पहुंचे सीएम योगी
  • जगतगुरू स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज द्वारा सुनाई जा रही भागवत कथा का मुख्यमंत्री ने किया श्रवण
  • तीर्थस्थलों के विकास और अयोध्या नगरी के संवर्धन से प्रदेश को प्राप्त हो रही वैश्विक ख्याति : जगतगुरू स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज

प्रतापगढ़/लखनऊ, 7 नवंबर2024: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार को प्रतापगढ़ के बेलखरनाथ धाम के निकट करमाही गांव में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में शामिल हुए। सीएम योगी यहां पूर्व जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह के आवास पर चल रही कथा का श्रवण किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कथाव्यास जगतगुरू स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज का आशीर्वाद लिया। साथ ही उन्हें अंगवस्त्र और माला पहनाकर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान डॉ. महेंद्र सिंह के पूर्वजों को पुष्प माला अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। सीएम योगी ने श्रीमद् भागवत महापुराण को मोक्ष ग्रंथ बताते हुए कहा कि यह कथा मोक्ष अर्थात मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है।

कार्यक्रम में जगतगुरू स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज ने मुख्यमंत्री के कार्यों की प्रशंसा की और कहा कि उत्तर प्रदेश में तीर्थस्थलों के विकास और अयोध्या नगरी के संवर्धन के प्रयासों से प्रदेश को वैश्विक ख्याति प्राप्त हो रही है।

मुख्यमंत्री ने श्रीमद् भागवत महापुराण कथा को सुनने के अवसर को पावन और सौभाग्यशाली बताया। उन्होंने जगतगुरू स्वामी श्री राघवाचार्य जी का अभिनंदन करते हुए कहा कि स्वामी जी की विद्वता कथा के जरिए समाज की समसामायिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करती है। उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति के लिए कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त करना ही उसकी मुक्ति का मार्ग हो सकता है।

इस अवसर पर डॉ. महेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने भी कथाव्यास जगतगुरू स्वामी श्री राघवाचार्य और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अंगवस्त्र भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

कार्यक्रम में विधायक राजेंद्र कुमार मौर्य, विधायक जीत लाल पटेल, भाजपा जिलाध्यक्ष आशीष श्रीवास्तव, पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व विधायक धीरज ओझा और भाजपा के कई अन्य पदाधिकारी सहित प्रयागराज मण्डल के एडीजी भानु भास्कर, आईजी प्रेम कुमार गौतम, मण्डलायुक्त विजय विश्वास पंत, जिलाधिकारी संजीव रंजन, पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार और मुख्य विकास अधिकारी डॉ. दिव्या मिश्रा सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे।

वरिष्ठ नागरिकों, मान्यता प्राप्त पत्रकारों, सैनिकों, भूतपूर्व सैनिकों एवं महिलाओं के लिए अलग से बनेंगे काउन्टर- मंत्री दयाशंकर सिंह

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लखनऊ: 07 नवम्बर, 2024: संभागीय/उपसंभागीय परिवहन कार्यालयों में वरिष्ठ नागरिकों, मान्यता प्राप्त पत्रकारों/सैनिकों/भूतपूर्व सैनिकों एवं महिलाओं को सुविधा हेतु पृथक से काउन्टर बनाये जायेंगे। यह जानकारी परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि परिवहन विभाग का कार्यालय प्रत्यक्ष रूप से आमजन मानस से जुड़ा हुआ है। हमारे यहां ड्राइविंग लाइसेंस, वाहनों के फिटनेस, पंजीयन एवं अन्य वाहन संबंधी कार्यों का निष्पादन प्रतिदिन होता है। ऐसे में परिवहन विभाग के कार्यालयों में आने वाले वरिष्ठ नागरिकों, सैनिकों, महिलाओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। इसी के दृष्टिगत यह निर्णय लिया गया है।

मंत्री ने बताया कि परिवहन कार्यालयों में प्रत्येक कार्य के लिए अलग काउन्टर बने हुए हैं, जिन पर आवेदक अपने कार्यों को कराते हैं। आवेदको की संख्या अधिक होने के कारण वरिष्ठ नागरिकों, मान्यता प्राप्त पत्रकारों, सैनिकों एवं महिलाओं को अपने कार्य कराने में असुविधा हो रही थी। अब अलग से काउन्टर बन जाने से इन सभी को काफी सुविधा होगी। डीएल, वाहन फिटनेस इत्यादि संबंधी कार्य आसानी से हो सकेंगे।