मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को झारखंड में चार जनसभाएं करेंगे।
तीन दिन के यूपी चुनाव प्रचार के बाद, वे भाजपा प्रत्याशियों के लिए समर्थन मांगेंगे।
पहली सभा भवनाथपुर में, जहां भाजपा ने मनु प्रताप शाही को उतारा है।
पलामू जिले की हुसैनाबाद सीट पर दूसरी जनसभा कमलेश कुमार सिंह के लिए।
पांकी और डॉल्टनगंज में तीसरी और चौथी रैली, क्रमशः शशिभूषण मेहता और आलोक कुमार चौरसिया के लिए।
लखनऊ, 10 नवंबर 2024 : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तीन दिन तक यूपी में चुनाव प्रचार के बाद सोमवार को झारखंड पहुंचेंगे। यहां वे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशियों के लिए जनसभाएं करेंगे। मुख्यमंत्री की यह यात्रा झारखंड में चुनाव प्रचार का हिस्सा होगी। इससे पहले वे 5 नवंबर को झारखंड में चुनाव प्रचार कर चुके हैं।
रैली कार्यक्रम की जानकारी:
भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र: मुख्यमंत्री योगी की पहली जनसभा भवनाथपुर में होगी। भाजपा ने यहां से मनु प्रताप शाही को उम्मीदवार बनाया है।
हुसैनाबाद सीट, पलामू: दूसरी रैली हुसैनाबाद में होगी, जहां कमलेश कुमार सिंह भाजपा प्रत्याशी हैं।
पांकी विधानसभा क्षेत्र: मुख्यमंत्री की तीसरी जनसभा पांकी में होगी, शशिभूषण मेहता के लिए प्रचार करेंगे।
डॉल्टनगंज विधानसभा क्षेत्र: चौथी और अंतिम जनसभा डॉल्टनगंज में होगी, जहां से भाजपा ने आलोक कुमार चौरसिया को उम्मीदवार बनाया है।
प्रयागराज/लखनऊ: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने एक बार फिर से कानून व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कामयाबी हासिल की है। प्रयागराज में 50,000 रुपये का इनामी कुख्यात अपराधी अंशु गुप्ता, जो पिछले कई महीनों से पुलिस को चकमा दे रहा था, अंततः एसटीएफ के शिकंजे में आ गया है। अंशु गुप्ता को थाना कोतवाली में पंजीकृत मु0अ0सं0ः 84/2022, धारा 364/302/201/34 भादवि के तहत दर्ज मामले में वांछित घोषित किया गया था।
गिरफ्तारी का विवरण:
• गिरफ्तार अभियुक्त: अंशु गुप्ता पुत्र सदाशिव गुप्ता
• गिरफ्तारी का स्थान: ललित नगर, नई पानी की टंकी के पास, रेलवे कॉलोनी, थाना क्षेत्र कोतवाली, प्रयागराज
• गिरफ्तारी का दिनांक व समय: 10 नवंबर 2024, दोपहर 12:30 बजे
मामले की पृष्ठभूमि:
प्रयागराज के कोतवाली थाना क्षेत्र में 2022 में पंजीकृत एक हत्या के मामले में अंशु गुप्ता समेत कई अन्य आरोपियों के नाम सामने आए थे। प्राथमिकी के अनुसार, 1 अप्रैल 2022 को आदर्श केसरवानी का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई थी। इस घटना में शामिल अभियुक्तों में मोनू सारस्वत, नयन वैश्य, और सुमित चौरसिया का नाम भी सामने आया। पीड़ित आदर्श के पिता जितेंद्र केसरवानी ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी, जिसमें इन सभी पर संगठित साजिश के तहत हत्या का आरोप लगाया गया था।
एसटीएफ की कार्यवाही:
एसटीएफ की प्रयागराज फील्ड इकाई, श्री शैलेश प्रताप सिंह (पुलिस उपाधीक्षक) के पर्यवेक्षण में कार्यरत निरीक्षक जय प्रकाश राय की अगुवाई में अपराधियों की धर-पकड़ हेतु अभिसूचना एकत्र कर रही थी। दि. 10 नवंबर 2024 को एसटीएफ टीम, जिसमें उपनिरीक्षक रणेंद्र कुमार सिंह, मुख्य आरक्षी संतोष कुमार, अश्वनी कुमार सिंह, अमित शर्मा, आरक्षी किशन चन्द्र, और चालक राम लखन पाल शामिल थे, ने अपराधियों की संभावित गतिविधियों के बारे में जांच-पड़ताल करते हुए अंशु गुप्ता की गिरफ्तारी में सफलता पाई।
मुखबिर की सूचना से हुई गिरफ्तारी:
दोपहर 12:30 बजे के आसपास मुखबिर से सूचना मिली कि वांछित अपराधी अंशु गुप्ता, जो 50,000 रुपये का इनामी है, ललित नगर के पास मौजूद है और बाहर भागने की फिराक में है। एसटीएफ टीम ने सूचना को ध्यान में रखते हुए अभियुक्त को घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया।
अंशु गुप्ता का बयान:
गिरफ्तारी के बाद अंशु गुप्ता ने बताया कि आदर्श केसरवानी द्वारा मोनू सारस्वत की पत्नी कोमल को परेशान किया जाता था। मोनू, कोमल और उनके मित्रों ने मिलकर 1 अप्रैल 2022 को आदर्श का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद, मोनू ने पुलिस को अन्य शामिल लोगों के नाम बताने के कारण अंशु लंबे समय से फरार चल रहा था।
आगे की कार्यवाही:
गिरफ्तार अंशु गुप्ता को थाना कोतवाली, प्रयागराज पर पंजीकृत मु0अ0सं0ः 84/22 धारा 364/302/201/34 भादवि में दाखिल किया गया है। इसके पश्चात अभियुक्त के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्यवाही स्थानीय पुलिस द्वारा की जाएगी। एसटीएफ की यह कार्रवाई प्रयागराज के अपराधी नेटवर्क पर नकेल कसने की दिशा में एक प्रभावी कदम माना जा रहा है।
भारत में पहली बार बिजली का आगमन 1879 में कोलकाता (तब के कलकत्ता) में हुआ था, जहां बिजली की रोशनी का प्रदर्शन किया गया।
पी. डब्ल्यू. फ़्लेरी एंड कंपनी ने 24 जुलाई 1879 को कोलकाता में पहला विद्युत बल्ब प्रदर्शन आयोजित किया।
इस ऐतिहासिक घटना से पहले भारत में आधुनिक विद्युत सुविधाओं की कोई व्यवस्था नहीं थी।
बंगाल सरकार ने 1895 में कलकत्ता इलेक्ट्रिक लाइटिंग एक्ट पारित किया जिससे शहर में बिजली आपूर्ति का औपचारिक लाइसेंस दिया गया।
मुंबई में बिजली की व्यवस्था थोड़ी बाद में हुई, जबकि कलकत्ता ने भारत में बिजली के आगमन की नींव रखी।
लखनऊ/नई दिल्ली: भारत में बिजली के आगमन ने आधुनिकता और तकनीकी प्रगति की दिशा में पहला बड़ा कदम उठाया। यह भारत के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तनों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि कैसे और कब भारत में बिजली का आरंभ हुआ और यह कैसे विभिन्न क्षेत्रों में फैलता गया।
1. कोलकाता में बिजली की शुरुआत
24 जुलाई 1879 को, पी. डब्ल्यू. फ्लेरी एंड कंपनी ने कोलकाता (तब का कलकत्ता) में पहली बार बिजली से जलने वाली लाइट का प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शनी भारत के आधुनिक विद्युत युग की नींव साबित हुई। इसके कुछ समय बाद, 30 जून 1881 को, मैकिनन एंड मैकेंजी कंपनी की गार्डन रीच कॉटन मिल्स में 36 बिजली के बल्बों से मिल को रोशन किया गया, जिससे उद्योगों में बिजली के उपयोग का विस्तार हुआ।
2. कानूनी संरचना और विकास
भारत में बिजली के विस्तार को कानूनी आधार देने के लिए 1895 में ब्रिटिश भारत सरकार ने कलकत्ता इलेक्ट्रिक लाइटिंग एक्ट पारित किया। इससे बिजली आपूर्ति और उपयोग को औपचारिक रूप से मान्यता मिली। इसके बाद, 17 अप्रैल 1899 को, कलकत्ता इलेक्ट्रिक सप्लाई कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CESC) ने प्रिंसेप घाट के पास पहला थर्मल पावर प्लांट शुरू किया। यह कदम कोलकाता में बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता को मजबूत बनाने में सहायक रहा।
3. अन्य शहरों में विस्तार
कोलकाता के बाद, बिजली का विस्तार भारत के अन्य प्रमुख शहरों में भी हुआ। 1882 में मुंबई (तत्कालीन बंबई) में पहली बार बिजली पहुंचाई गई। इसके साथ ही बैंगलोर में 5 अगस्त 1905 को एशिया की पहली इलेक्ट्रिक स्ट्रीट लाइट जलाई गई। इससे भारत के विभिन्न क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता बढ़ी और बिजली ने आम जीवन में प्रवेश किया।
4. पनबिजली परियोजनाएं और देशभर में विकास
भारत में पहला पनबिजली संयंत्र 1897 में सिद्रपोंग (दार्जिलिंग) में स्थापित किया गया था। यह एशिया का पहला पनबिजली संयंत्र था जिसकी उत्पादन क्षमता 130 किलोवाट थी। इसी प्रकार, राजस्थान के डूंगरपुर में भी 1897 में बिजली का आगमन हुआ। उत्तर प्रदेश के कानपुर में पहली बार 1906 में बिजली उपलब्ध हुई, जिससे इस राज्य में भी विद्युत सेवा का विस्तार हुआ।
5. आधुनिक युग और परमाणु ऊर्जा
भारत में परमाणु ऊर्जा उत्पादन की शुरुआत 1969 में हुई जब महाराष्ट्र में पहला परमाणु विद्युत संयंत्र स्थापित किया गया। इसने भारत के ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत की। आज, भारत विभिन्न ऊर्जा स्रोतों से विद्युत उत्पादन करने की क्षमता रखता है, जैसे पनबिजली, थर्मल, और परमाणु ऊर्जा।
भारत में बिजली का आगमन और उसका विकास एक दीर्घकालिक प्रक्रिया रही है। कोलकाता में बिजली की शुरुआत से लेकर पूरे देश में इसके विस्तार तक, यह यात्रा तकनीकी प्रयासों और उपलब्धियों से भरी रही है। बिजली के आगमन ने न केवल उद्योगों और घरों में उजाला किया, बल्कि यह भारत की अर्थव्यवस्था के विकास और समाज में सामाजिक बदलावों का आधार भी बना।
लखनऊ: डॉ. राजेश्वर सिंह ने अखिलेश यादव के वार पर तीखा पलटवार करते हुए ट्वीट कर लिखा “आदरणीय सपा प्रमुख जी, हिन्दू धर्म में संत और सन्यासी सर्वश्रेष्ठ होते हैं, आपको इन मान्यताओं की जानकारी होनी ही चाहिए। योगी जी प्रदेश के सर्वप्रिय मुख्यमंत्री हैं, गोरक्षपीठाधीश्वर हैं, सत्य सनातन के धवल प्रतिबिम्ब हैं, सज्जनों को सम्मान देने वाले श्रेष्ठ सन्यासी हैं!
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बयान पर लखनऊ के सरोजनीनगर से जनप्रिय भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने ट्वीट कर दिया जवाब
डॉ. सिंह ने अखिलेश यादव को सलाह देते हुए कहा है कि राजनीति में व्यक्तिगत टिप्पणियां ठीक नहीं हैं, आपने अपने बड़ों को कैसा सम्मान दिया उसका उल्लेख करना ठीक नहीं, परन्तु एक सर्वमान्य संत पर व्यक्तिगत आक्षेप करना भी ठीक नहीं है! उन्होंने लिखा कि श्रद्धेय योगी अदित्यनाथ जी का व्यक्तित्व बड़ा है, कृतित्व बड़ा है, धार्मिक उत्तरदायित्व बड़ा है, वे श्रेष्ठ हैं, वे पूज्य हैं!!”
गौरतलब है कि शनिवार को अखिलेश यादव ने सीएम योगी पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा था, जो खुद से बड़ा किसी और को नहीं मानते, वो कैसे ‘योगी’ हैं? योगी की योग्यता की जांच करानी होगी।
पूर्व मंत्री ‘गोपाल जी’ की पुण्यतिथि पर लखनऊ में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन
सीएम योगी बोले- आशुतोष टंडन का निधन प्रदेश और लखनऊ के लिए अपूर्णीय क्षति
लखनऊ: प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता स्वर्गीय आशुतोष टंडन ‘गोपाल जी’ की प्रथम पुण्यतिथि पर राजधानी में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, सरोजनीनगर से भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह, राज्य सभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं ने गोपाल जी से जुड़े स्मरण सुनाए और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने भी पूर्व मंत्री आशुतोष टंडन की प्रथम पुण्यतिथि के अवसर पर शनिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित राजनीति में शालीनता, सुचिता एवं सेवा विषय पर परिचर्चा कार्यक्रम में सहभागिता की। इस अवसर पर डॉ. सिंह ने पूर्व मंत्री को याद करते हुए कहा, ‘ गोपाल जी, सीधी बात, सटीक विचार वाले व्यक्तित्व थे, स्व. लालजी टंडन के संस्कारों और आदर्शों की छवि थी उनमें।
श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गोपाल जी के निधन से लखनऊ के सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में एक अपूरणीय क्षति हुई है। मेरी उनसे पहली मुलाकात स्वर्गीय लाल जी टंडन ने गोरखपुर में कराई थी। हमारी घनिष्ठता समय के साथ बढ़ती गई। 2014 में जब वह प्रत्याशी बने, तो एक अवसर पर शरारतन सभा की परमिशन रद्द कर दी गई थी। मैंने उन्हें संकेत दिया और हम सभा के लिए अलग मार्ग से निकल गए।
सी एम योगी के नेतृत्व में उन्होंने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री की भूमिका/ नगर विकास विभाग की जिम्मेदारी को बखूबी निर्वहन किया। नगर विकास मंत्री के पद पर रहते हुए उन्होंने लखनऊ को स्मार्ट सिटी के रूप में पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई। शहरवासियों की सुलभता, सुविधा उनकी प्राथमिकता थी। घर बैठे हर समस्या का समाधान हो इसलिए/ नगर निगम से जुड़ी जनसमस्याओं के त्वरित निस्ताण के लिए लखनऊ वन सिटीजन एप उनकी ही दूरदर्शिता थी। स्व. आशुतोष टंडन जी का योगदान लखनऊ के विकास और उत्तर प्रदेश की राजनीति में सदैव अविस्मरणीय रहेगा।