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विश्व शौचालय दिवस पर लखनऊ में दो दिवसीय नेशनल नॉलेज वर्कशॉप का आयोजन

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  • लखनऊ में दो दिवसीय नेशनल नॉलेज वर्कशॉप का उद्घाटन केंद्रीय राज्य मंत्री और नगर विकास मंत्री ने किया।
  • कार्यशाला में ओडीएफ से ओडीएफ प्लस-प्लस तक की प्रगति पर चर्चा की गई।
  • सफाई कर्मियों के लिए सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए नई तकनीकों पर जोर दिया गया।
  • सार्वजनिक शौचालयों की सफाई के लिए एक ट्रैकर और टूलकिट का प्रदर्शन किया गया।
  • एचयूएल और सुलभ इंटरनेशनल के साथ सामुदायिक शौचालयों के प्रबंधन पर दो एमओयू साइन हुए।

लखनऊ, 19 नवम्बर 2024: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विश्व शौचालय दिवस के अवसर पर शहरी स्वच्छता को लेकर दो दिवसीय नेशनल नॉलेज वर्कशॉप का शुभारंभ हुआ।

इस कार्यशाला का आयोजन जल प्रबंधन और स्वच्छता के विभिन्न आयामों को ध्यान में रखते हुए किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन केंद्रीय शहरी विकास राज्य मंत्री तोखन साहू, नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा, और भारत में अमेरिकी राजदूत एच.ई. एरिक गार्सेटी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान स्वच्छ भारत मिशन और यूज्ड वाटर मैनेजमेंट जैसे विषयों पर चर्चा हुई।

कार्यशाला का उद्देश्य:

    • शहरी स्वच्छता में सुधार, सीवेज नेटवर्क की पहुंच, और स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
    • सार्वजनिक एवं सामुदायिक शौचालयों के बेहतर रखरखाव और प्रबंधन को बढ़ावा देना।

    कार्यशाला में हुई चर्चाएं:

      • ओडीएफ से ओडीएफ प्लस-प्लस की दिशा में प्रगति।
      • मैनहोल से मशीन होल तकनीक का उपयोग।
      • शहरी क्षेत्रों में प्रयुक्त जल प्रबंधन (यूडब्ल्यूएम) के लिए नए समाधान।

      दो महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर:

        • एचयूएल के साथ सामुदायिक शौचालयों का संचालन।
        • सुलभ इंटरनेशनल के साथ भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में शौचालय निर्माण का समझौता।

        केंद्रीय और राज्य मंत्रियों के विचार:

          • तोखन साहू ने स्वच्छ भारत मिशन की सफलता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल को सराहा।
          • ए.के. शर्मा ने सफाई कर्मियों के सम्मान और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयासों पर जोर दिया।

          अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण:

            • अमेरिकी राजदूत एच.ई. एरिक गार्सेटी ने लखनऊ को स्वच्छता के लिए सराहा और भारत-अमेरिका के स्वच्छता उद्देश्यों को समान बताया।

            मुख्य तथ्य और उपलब्धियां:

            • 435 नगरीय निकाय ओडीएफ प्लस हो चुके हैं, जबकि 129 निकाय ओडीएफ प्लस-प्लस की स्थिति में हैं।
            • 2014 से 2019 के बीच उत्तर प्रदेश में 9 लाख से अधिक शौचालय बनाए गए।
            • शहरी क्षेत्रों में 97% वार्ड डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की सुविधा से लैस।
            • आगामी महाकुंभ 2025 को स्वच्छता के उच्च मानकों के साथ आयोजित करने का लक्ष्य।
            • विश्व शौचालय दिवस 2024: लखनऊ में स्वच्छता पर कार्यशाला का आयोजन
            • ओडीएफ प्लस प्लस और शहरी जल प्रबंधन में यूपी की बड़ी उपलब्धि
            • स्वच्छता में भारत और अमेरिका का सहयोग: राजदूत एरिक गार्सेटी

            सुदृढ लॉजिस्टिक्स रेग्युलेटरी इकोसिस्टम की जरूरत, तैयार करें स्टेट लॉजिस्टिक्स प्लान: मुख्यमंत्री

            truenewsup yogi sarkar
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            • मुख्यमंत्री का निर्देश, लॉजिस्टिक्स सेक्टर के प्रभावी प्रशासन के लिए संस्थागत तंत्र बनाया जाए
            • ट्रकों के लिए निर्धारित पार्किंग स्थलों की है कमी है, ट्रक ड्राइवरों के विश्राम सुविधाओं को भी बढ़ाने की है जरूरत: मुख्यमंत्री
            • लीड्स रैंकिंग में उत्तर प्रदेश 13वें रैंक से ऊपर उठकर आज अचीवर स्टेट के रूप में उभरा
            • अंतिम मील तक सुगम डिलीवरी के लिए यूपी में तैयार होगी परिवहन अवस्थापना तथा यातायात योजना
            • मुख्यमंत्री ने स्टेट लॉजिस्टिक्स प्लान तैयार करने के निर्देश दिये, कहा, आम जन से भी लें सुझाव
            • स्टेट लॉजिस्टिक्स प्लान को औपचारिक रूप देने के लिए लॉजिस्टिक्स डिवीजन का भी होगा गठन

            लखनऊ, 19 नवम्बर 2024: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए सुदृढ़ नीतिगत ढांचा तैयार करने की आवश्यकता बताई है। उन्होंने कहा है कि राज्य में अंतिम मील तक सुगम डिलीवरी के लिए परिवहन अवस्थापना तथा यातायात योजना बनाया जाना चाहिए। एक ऐसी योजना हो जो राज्य में वेयरहासिंग एवं अन्य टर्मिनल अवस्थापना को समर्थन प्रदान करे, साथ ही, एक सुरक्षित एवं सुदृढ लॉजिस्टिक्स रेग्युलेटरी इकोसिस्टम का निर्माण करने वाली हो। ऐसे में प्रदेश का एकीकृत स्टेट लॉजिस्टिक्स प्लान तैयार किया जाए।

            मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि सतत नियोजित प्रयासों का ही परिणाम है कि भारत सरकार की लीड्स रैंकिंग में उत्तर प्रदेश 13वें रैंक से ऊपर उठकर आज अचीवर स्टेट के रूप में उभरा है। इन प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए लॉजिस्टिक्स उद्योग को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में निवेश आकर्षित किया जाए, राज्य में वेयरहाउसिंग सुविधाओं की स्थापना के लिए सुविधाजनक वातावरण सुनिश्चित किया जाए। आवश्यकता है कि इस सेक्टर के प्रभावी प्रशासन के लिए संस्थागत तंत्र बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कृषि उपज और उत्पादों के लिए आर्थिक केंद्रों और एकत्रीकरण बिंदुओं की पहचान करने और संबंधित लॉजिस्टिक्स संबंधी चुनौतियों का समाधान करने, सड़क, वायु, जल और रेल नेटवर्क के सामंजस्य को बढ़ावा देकर ट्रैफिक लिंकेज बढ़ाने, राज्य में भंडारण क्षमता बढाने के लिए नियोजित प्रयास आवश्यक है। स्टेट लॉजिस्टिक प्लान को तैयार करते समय हमें यह ध्यान देना होगा कि चोरी/आगजनी/दंगों आदि के कारण माल को कम से कम हानि हो। सड़क पर माल की आवाजाही के न्यूनतम निरीक्षण व न्यूनतम रुकावटों के लिए इकोसिस्टम को बढ़ावा दिया जा सके। उन्होंने कार्गो की सुरक्षित आवाजाही और ट्रैकिंग सुनिश्चित करने के लिए टेक्नोलॉजी अपनाने पर बल दिया साथ ही कहा कि राज्य में लॉजिस्टिक्स क्षेत्र से संबंधित कौशल विकास/प्रशिक्षण सुविधाओं में वृद्धि भी की जाए। आवश्यक प्रशिक्षित ड्राइवरों की मांग-आपूर्ति के अंतर को दूर करने की जरूरत बताते हुए मुख्यमंत्री ने उद्योग से संबंधित कौशल प्रदान करने के लिए पाठ्यक्रमों को कस्टमाइज़ करने के निर्देश भी दिए।

            प्रस्तावित स्टेट लॉजिस्टिक्स प्लान पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में ट्रकों के लिए निर्धारित पार्किंग स्थलों की कमी है, जिससे ट्रैफिक जाम होता है। भारी ट्रैफिक, अतिक्रमण और निर्माण के कारण जाम की स्थिति बनती है। वहीं, नो-एंट्री जोन और रेलवे क्रॉसिंग पर अपर्याप्त पुल जैसी बाधाएँ, जिससे माल की आवाजाही प्रभावित होती है। यही नहीं, लंबी दूरी की यात्रा करने वाले ड्राइवरों के लिए विश्राम करने और पार्किंग क्षेत्र जैसी पर्याप्त सुविधाओं का अभाव का अनुभव किया गया है। नई योजना में इन समस्याओं के स्थायी समाधान भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टेट लॉजिस्टिक्स प्लान को औपचारिक रूप देने के लिए लॉजिस्टिक्स डिवीजन का गठन भी होना चाहिए। यह डिवीजन लॉजिस्टिक्स योजना के अंतर्गत योजना की प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग करने वाला होगा।

            सीएम योगी के निर्देश पर उत्तरप्रदेश में जल्द तैयार होगी नई पीपीपी नीति: इन्वेस्ट यूपी में बनेगा विशेष पीपीपी सेल, अंतरविभागीय सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

            cmyogi on ppp
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            • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) नीति को और अधिक सरल और व्यवस्थित बनाने के निर्देश दिए।
            • ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 में प्राप्त कुल निवेश प्रस्तावों का लगभग 10% हिस्सा पीपीपी परियोजनाओं के लिए था।
            • नई पीपीपी नीति परियोजना चयन, स्टेकहोल्डर परामर्श, प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया और अनुबंध प्रबंधन को सुगम बनाएगी।
            • इन्वेस्ट यूपी में एक समर्पित पीपीपी सेल का गठन किया जाएगा, जो अंतरविभागीय सहयोग और परियोजना कार्यान्वयन को सुविधाजनक बनाएगा।
            • इस पहल का उद्देश्य निजी निवेशकों को आकर्षित करते हुए सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है।

            लखनऊ, 19 नवंबर 2024: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने और पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) परियोजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए एक नई और सरल पीपीपी नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने इस नीति को वर्तमान और भविष्य की जरूरतों के अनुसार विकसित करने पर जोर दिया है।

            • ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023: इस समिट में प्राप्त निवेश प्रस्तावों में से लगभग 10% पीपीपी आधारित परियोजनाओं के लिए थे, जो इस नीति की सफलता को दर्शाते हैं।
            • नई पीपीपी नीति की जरूरत: मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नीति परियोजनाओं की पहचान, स्टेकहोल्डर परामर्श, बिड तैयार करने, प्रोक्योरमेंट प्रक्रिया, अनुबंध प्रबंधन आदि को व्यवस्थित करेगी।
            • इन्वेस्ट यूपी में पीपीपी सेल का गठन: इस सेल के माध्यम से अंतरविभागीय समन्वय और परियोजनाओं के कार्यान्वयन को सुगम बनाया जाएगा।
            • निजी निवेशकों को मिलेगा प्रोत्साहन: नई नीति निजी क्षेत्र के निवेशकों को अधिक आकर्षित करेगी और राज्य की विकास परियोजनाओं में भागीदारी बढ़ाएगी।
            • सरकारी और निजी क्षेत्र का तालमेल: इस नीति का उद्देश्य सरकारी योजनाओं और निजी निवेश के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है।

            उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए नई पीपीपी नीति पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को एक अहम बैठक में इस नीति को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक सरल और व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2023 में 10% निवेश प्रस्ताव पीपीपी परियोजनाओं से संबंधित थे, जो राज्य की मौजूदा नीति की सफलता को दर्शाते हैं।

            मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नई नीति में पीपीपी परियोजनाओं के चयन से लेकर उनके अनुबंध प्रबंधन और कार्यान्वयन तक की सभी प्रक्रियाओं को सुगम बनाया जाएगा। इसके साथ ही, इन्वेस्ट यूपी में एक विशेष पीपीपी सेल का गठन किया जाएगा, जो विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने और परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करने में मदद करेगा।

            मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश:

            • नई पीपीपी नीति को सरल, व्यवस्थित और निवेशकों के लिए आकर्षक बनाया जाए।
            • राज्य में पीपीपी परियोजनाओं के लिए एक समर्पित फ्रेमवर्क तैयार किया जाए।
            • इन्वेस्ट यूपी में एक डेडिकेटेड पीपीपी सेल स्थापित किया जाए, जो परियोजनाओं के क्रियान्वयन में मदद करेगा।

            इस नई पहल से उत्तर प्रदेश में न केवल बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि राज्य में रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे।

            महाकुंभ 2025: बॉलीवुड के आर्ट डायरेक्टर 07 दिन में तैयार कर देंगे महाकुंभ का कंट्रोल रूम

            control room mahakumbh 2025 prayagraj
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            • 50 अफसरों की टीम यहीं से रखेगी महाकुंभ में चप्पे चप्पे पर नजर
            • कंट्रोल रूम में बनेगी रणनीति, होगी वीआईपी मीटिंग, कॉन्फ्रेंस हॉल और मीडिया के बन रहे अलग ब्लॉक
            • सीएम योगी के निर्देश पर युद्ध स्तर पर चल रहा काम, 25 नवंबर तक बनकर तैयार होगा कंट्रोल रूम

            प्रयागराज/लखनऊ , 19 नवम्बर 2024: महाकुंभ 2025 को सनातन धर्म का सबसे बड़ा आयोजन बनाने के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार हर आपात स्थिति से निपटने की तैयारी कर रही है। दुनिया के सबसे बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम में किसी तरह की कोई बाधा न पहुंचे और साथ ही यहां आने वाले 45 करोड़ लोगों की सुरक्षा का पूरा प्लान तैयार कर लिया गया है। इसके लिए मेला क्षेत्र में बाकायदा हाईटेक कंट्रोल रूम बनाया जा रहा है। इस कंट्रोल रूम में हाई लेवल मीटिंग के अलावा आला अफसरों की टीमें बैठकर महाकुंभ के लिए रणनीति तैयार करेंगी। खास बात ये है कि इस कंट्रोल रूम का निर्माण बॉलीवुड के प्रसिद्ध आर्ट डायरेक्टर द्वारा कराया जा रहा है। उनका दावा है कि विशेष सुविधाओं वाला यह कंट्रोल रूम 7 दिन के भीतर बनकर तैयार हो जाएगा।

            50 से अधिक होंगे केबिन

            अपर मेलाधिकारी विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि कंट्रोल रूम में श्रद्धालुओं को लेकर होने वाले जरूरी इंतजाम के लिए वीआईपी मीटिंग होंगी। साथ में कॉन्फ्रेंस हॉल और करोड़ों लोगों तक सही समय पर उचित जानकारी पहुंचाने के लिए मीडिया के ब्लॉक भी बनाए जा रहे हैं। इस कंट्रोल रूम में 50 से अधिक अफसरों के अलग-अलग प्रकार के केबिन बनाए जा रहे हैं। जिसमें सुरक्षा, प्रशासनिक कार्यों के साथ साथ चिकित्सा, पेयजल संबंधित कार्यों की निगरानी की जाएगी।

            शुरू हो सकेगी मॉनिटरिंग

            मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर महाकुंभ में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर मेला प्राधिकरण ने
            विशेष इंतजाम किया है। इसी के तहत हाईटेक कंट्रोल रूम बनाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। इसके निर्माण में जुटे मुंबई से आए आर्ट डायरेक्टर और वास्तुकार पवन पांडे ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप कंट्रोल रूम को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सात दिनों के भीतर इसे पूरी तरह तैयार कर लिया जाएगा। जिसमें बड़े पैमाने पर महाकुंभ से जुड़ी योजनाओं की जल्द से जल्द मॉनिटरिंग शुरू हो सकेगी। देश-विदेश से महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की कोई असुविधा न होने पाए, इसके लिए बाकायदा रणनीति बनाने का काम भी इसी कंट्रोल रूम से किया जाएगा। विभागीय समन्वय के लिए यहीं पर कॉन्फ्रेंस हॉल रहेंगे और जन सुविधाओं से संबंधित जानकारी के लिए मीडिया के ब्लॉक भी यहीं पर अलग से बनाए जा रहे हैं।

            ड्रोन से रखी जाएगी नजर

            महाकुंभ के दौरान चप्पे चप्पे पर नजर रखने के लिए कंट्रोल रूम तो बनाया ही जा रहा है, साथ में इस कंट्रोल रूम के चारों तरफ ड्रोन से हर गतिविधि पर निगरानी रखी जाएगी। सुविधा के लिहाज से इस कंट्रोल रूम को एल शेप का आकर दिया जा रहा है, जिसमें अफसर से लेकर उनके स्टाफ तक के लिए हाईटेक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। कंट्रोल रूम में एंट्री के लिए तीन विशेष दरवाजे भी बनाए जा रहे हैं, जिसका काम अंतिम चरण में चल रहा है।

            धुरियापार इंडस्ट्रियल कॉरिडोर: धुरियापार में बनेगा पूर्वांचल का सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर

            धुरियापार इंडस्ट्रियल कॉरीडोर
            धुरियापार इंडस्ट्रियल कॉरीडोर
            • 5500 एकड़ भूमि में पूर्वांचल का सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित हो रहा है।
            • योगी सरकार ने धुरियापार क्षेत्र को ग्रेटर गीडा के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है।
            • गीडा ने 17 गांवों की ऊसर भूमि का अधिग्रहण शुरू किया, अब तक 500 एकड़ भूमि अधिग्रहित।
            • गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और प्रस्तावित नई रेल लाइन परियोजना से शानदार कनेक्टिविटी।
            • अडानी और जेके ग्रुप जैसी बड़ी कंपनियां इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में निवेश के लिए इच्छुक।
            • 10,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।

            गोरखपुर/लखनऊ, 19 नवंबर 2024 : योगी सरकार ने गोरखपुर के दक्षिणांचल में धुरियापार क्षेत्र को औद्योगिक केंद्र में तब्दील करने की एक बड़ी योजना तैयार की है। धुरियापार इंडस्ट्रियल कॉरिडोर 5500 एकड़ भूमि पर बनेगा, जो इसे पूर्वांचल का सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल लैंड बैंक बनाएगा। यह परियोजना न केवल क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति देगी बल्कि हजारों लोगों को रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगी।

            इस कॉरिडोर को गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे से शानदार कनेक्टिविटी मिलेगी और भविष्य में इसे नई रेल लाइन परियोजना से भी जोड़ा जाएगा। इसके माध्यम से उद्योगों के लिए कच्चा माल लाने और तैयार उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी।

            परियोजना का विस्तृत विवरण

            भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज

            • गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) ने इस परियोजना के लिए 17 गांवों की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब तक 500 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जा चुकी है।
            • पहले चरण में 1600 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जाएगी। इसमें प्रमुख रूप से सकरदेइया, हरपुर और काश्तकाशी नायक गांव शामिल हैं।

            ऊसर भूमि पर उद्योगों की फसल

            • परियोजना के लिए उन जमीनों का चयन किया गया है, जो कृषि के लिए अनुपजाऊ (ऊसर) हैं।
            • किसानों को उनकी भूमि के लिए उचित मुआवजा दिया जा रहा है, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें।

            चरणबद्ध विकास

            • मास्टर प्लान के तहत कुल भूमि का उपयोग निम्न प्रकार होगा:
            • औद्योगिक क्षेत्र: 32.04%
            • आवासीय क्षेत्र: 19.39%
            • हरित क्षेत्र: 15.70%
            • व्यावसायिक क्षेत्र: 4.21%
            • परिवहन सुविधाएं: 4.17%
            • यह परियोजना इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के रूप में विकसित होगी।

            उद्योगों के लिए विशेष आकर्षण

            • अडानी समूह और जेके ग्रुप जैसी बड़ी कंपनियों ने निवेश में रुचि दिखाई है।
            • अडानी समूह ने 65 एकड़ और जेके ग्रुप ने 50 एकड़ भूमि पर सीमेंट फैक्ट्री लगाने का प्रस्ताव दिया है।
            • इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में अन्य बड़ी कंपनियों के निवेश की भी संभावना है।

            उद्योगों के लिए शानदार कनेक्टिविटी

            • यह कॉरिडोर गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे से जुड़ा होगा।
            • प्रस्तावित सहजनवा-दोहरीघाट रेल लाइन परियोजना इस क्षेत्र से होकर गुजरेगी।
            • उद्योगों को कच्चा माल लाने और तैयार माल भेजने के लिए रेलवे साइडिंग की भी व्यवस्था होगी।

            रोजगार और विकास का केंद्र

            धुरियापार इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से 10,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।

            • क्षेत्र में पहले से मौजूद बंद चीनी मिल को इंडियन ऑयल के कम्प्रेस्ड बायो गैस प्लांट में बदला गया है।
            • इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के आने से इस क्षेत्र की पहचान बदल जाएगी।

            धुरियापार के लिए नया अध्याय

            धुरियापार, जिसे अब तक अति पिछड़े क्षेत्र के रूप में जाना जाता था, आने वाले समय में गोरखपुर के औद्योगिक गेटवे के रूप में पहचाना जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से यह क्षेत्र औद्योगिक और आर्थिक प्रगति का नया केंद्र बनेगा।

            प्रमुख गांव जिनकी भूमि अधिग्रहित की जा रही है

            1. बाथ बुजुर्ग
            2. बाथ खुर्द
            3. भिसमपट्टी
            4. चाडी
            5. धौरहरा
            6. दिघरूआ
            7. दोदापार
            8. दुबरीपुरा
            9. गजपुर
            10. गौरखास
            11. हरपुर
            12. काश्तकाशी नायक
            13. मठदुर्वाशा
            14. नारायण खुर्द
            15. परसा बुजुर्ग
            16. पुरादयाल
            17. सकरदेइया