नई दिल्ली: एक तरफ जहां पूरा प्रदेश 1905 के भूकंप त्रासदी जैसी आपदा से बचने के लिए गुरुवार को मॉकड्रिल कर अपनी तैयारियों की परख कर रहा था, उसी बीच भूकंप के झटकों ने सारे हिमाचल की नींद उड़ा दी। गुरुवार रात्रि 9.29 मिनट पर आया भूकंप कोई चलता-फिरता भूकंप नहीं था। बल्कि इसकी तीव्रता 5.3 थी। भूकंप का केंद्र भी हिमाचल का चंबा था।
जैसे ही भूकंप की हलचल हुई प्रदेशभर में लोग घरों से बाहर निकल आए और एक-दूसरे को अलर्ट किया। लोगों के मन में खौफ था कि कहीं यह 1905 की पुर्नावृति तो नहीं है। हालांकि समाचार लिखे जाने तक कहीं से भी जानमाल की सूचना नहीं थी। चंबा, कांगड़ा, सोलन, सिरमौर, मंडी, कुल्लू के कई हिस्सों में भूकंप की तीव्रता का खासा असर दिखा।
मंडुआडीह थाना क्षेत्र के महेशपुर के पास चलती बस में अचानक लगी आग
पुलिस ने सभी यात्रियों को सकुशल निकाला
अग्निशमन दल ने आग पर पाया काबू
आग से बस जलकर पूरी तरह से नष्ट हुई
वाराणसी: गर्मी की शुरुआत होते ही आग का कहर भी शुरू हो गया है। आज सुबह करीब 03.00 बजे बस नम्बर UP62AT 7070 से झारखंड के दुमका से करीब 70 दर्शनार्थी भारत भ्रमण के उद्देश्य से अयोध्या से होते हुए वाराणसी आ रहे थे कि महेशपुर के पास चलती बस में अचानक आग लग गई।
बस में आग देख पास ही मौजूद पुलिस के जवानो ने तत्काल ओवरटेक कर बस को रुकवाया, लगभग सभी यात्री सो रहे थे पुलिस बल की मदद से बस में सवार सभी व्यक्तियों को सकुशल बस में से उतरवा लिया गया, किसी प्रकार की कोई जनहानि बाबा की कृपा से नही हुई।
खाटूश्याम मन्दिर में श्रीमद्भागवत कथा का द्वितीय दिवस
कथा के दूसरे दिन देवी हेमलता शास्त्री ने राजा परीक्षित के जन्म और उससे जुड़ी कथा सुनाई
लखनऊ: खाटूश्याम मन्दिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन देवी हेमलता शास्त्री ने राजा परीक्षित के जन्म और उससे जुड़ी कथा सुनाई। राजा परीक्षित को क्रमिक मुनि से सात दिवस में मृत्यु का श्राप मिला जिसके निवारण हेतु सुकदेव जी महाराज का आगमन हुआ।
देवी हेमलता शास्त्री ने कहा कि जीवन में दृष्टिकोण को बदलने की आवश्यकता है। नज़रिया बदलेंगे तो दुख में भी सुख की अनुभूति होगी। मन्दिर में पत्थर है किन्तु प्रेम उस पत्थर को भी भगवान बना देता है। देवी हेमलता ने कहा कि हमें प्रभु को निरन्तर धन्यवाद देना चाहिए। ईश्वर ने शरीर अच्छा दिया किन्तु हम शरीर के प्रति लापरवाह हुए तो रोग मिला। रिश्ते प्रेम से जुड़ते हैं किन्तु उनमें कटुता हमारी गलतियों से आती है। हमें चिन्तन करना होगा और दृष्टिकोण बदलना होगा। जब तक आप स्वयं हार नहीं मानेंगे तब तक आपको कोई हरा नहीं सकता। उन्होंने कहा कि संसार में अमृत भरा है किन्तु आपको उसमें से लेना आना चाहिए। संसार में बहुत आनन्द है किन्तु जीना आना चाहिए।
कथा के दौरान देवी हेमलता शास्त्री ने राधे किशोरी दया करो, जो पहले दिया है वही कम नहीं है उसी को निभाने के काबिल नहीं हूं तथा तुम न सुनोगे तो कौन सुनेगा जैसे भजनों से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। मुख्य यजमान सुनीता अग्रवाल एवं जगदीश अग्रवाल ने भागवत की आरती की। कथा में गिरिजा शंकर अग्रवाल, आशीष अग्रवाल, भारत भूषण गुप्ता सहित भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।