Home Blog Page 1111

महाकुंभ-2025 के लिए स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां: ब्रजेश पाठक

महाकुंभ-2025 के लिए स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां: ब्रजेश पाठक
महाकुंभ-2025 के लिए स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां: ब्रजेश पाठक
  • महाकुंभ-2025 में 45 करोड़ श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य की व्यवस्था के लिए 6,000 बेड की व्यवस्था।
  • 125 एंबुलेंसों की तैनाती, 24 घंटे ऑनलाइन निगरानी के साथ।
  • महाकुंभ में चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ की 24 घंटे तैनाती, विशेष प्रशिक्षण से लैस।
  • मेला स्थल पर 3 लाख से अधिक जरूरतमंदों को नि:शुल्क चश्मे देने के लिए नेत्र कुंभ का आयोजन।
  • डिजास्टर कंट्रोल रूम और रिवर एंबुलेंस सहित सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर विशेष तैयारियां।

लखनऊ, 10 दिसम्बर 2024: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने महाकुंभ-2025 के लिए स्वास्थ्य विभाग की व्यापक तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों और प्रयागराज के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक में महाकुंभ के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तृत इंतजामों की समीक्षा की।

ब्रजेश पाठक ने कहा कि महाकुंभ में इस बार लगभग 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है, इसलिए इस विशाल संख्या के स्वास्थ्य संबंधी इंतजामों को बेहतर तरीके से लागू करना विभाग की सर्वोत्तम प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को यह निर्देश दिए कि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए सभी विभागों को पूरी तरह से तैयार रहना होगा।

बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं:

महाकुंभ में स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने के लिए 6,000 बेड की व्यवस्था की गई है। इनमें से 360 बेड मेला स्थल पर होंगे, जबकि 25-25 बेड के दो अस्पताल अरैल और झूसी में और 20-20 बेड के दो अस्पतालों की स्थापना की जाएगी। इसके अतिरिक्त 10-10 बेड के अस्पताल भी स्थापित किए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर, मेला स्थल के बाहर सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में 3,000 और 3,000 बेड की व्यवस्था की जाएगी।

नई सेवाएं:

स्वास्थ्य विभाग ने महाकुंभ में टेली आईसीयू सेवा का भी प्रबंध किया है, ताकि दूरदराज से आने वाले मरीजों को इलाज की सुविधा मिल सके। इसके साथ ही, 125 एंबुलेंसों की तैनाती की जाएगी, जिनकी 24 घंटे ऑनलाइन निगरानी की जाएगी। इसके अलावा, मेला परिसर के सभी सेक्टरों में चिकित्सकीय हेल्प डेस्क भी स्थापित की जाएगी।

चिकित्सा स्टाफ और सुविधाएं:

महाकुंभ में 24 घंटे चिकित्सक तैनात रहेंगे। इसके लिए 291 एमबीबीएस डॉक्टर, 90 आयुर्वेदिक और यूनानी डॉक्टर और 182 स्टाफ नर्स की नियुक्ति की जाएगी। इसके अलावा, महिला, पुरुष और बच्चों के लिए अलग-अलग वार्ड तैयार किए जाएंगे। नेत्र कुंभ का आयोजन भी होगा, जिसमें 3 लाख से अधिक लोगों को नि:शुल्क चश्मे प्रदान किए जाएंगे।

सुरक्षा इंतजाम:

स्वास्थ्य विभाग की सुरक्षा व्यवस्थाओं में भी कोई कमी नहीं रखी गई है। इस बार 7 रिवर एंबुलेंस और 1 एयर एंबुलेंस की तैनाती की जाएगी। इसके अलावा, डिजास्टर कंट्रोल रूम की स्थापना भी की जाएगी, जो किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत कार्यवाही कर सके। 15 दिसंबर से मॉक ड्रिल (मॉल ड्रिल) कराई जाएगी ताकि चिकित्सा और सुरक्षा विभाग की आपातकालीन प्रतिक्रिया को परखा जा सके।

चिकित्सकों और स्टाफ के लिए विशेष प्रशिक्षण:

महाकुंभ के लिए चिकित्सकों और पैरा मेडिकल स्टाफ के लिए विशेष ट्रेनिंग का आयोजन किया गया है। इस प्रशिक्षण में सीबीआरएनई (केमिकल, बायलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल, न्यूक्लीयर, एक्सप्लोसिव) से संबंधित प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत, चिकित्सकों की एक टीम को नरौरा स्थित एटॉमिक पावर स्टेशन पर इन खतरनाक तत्वों से निपटने के लिए प्रशिक्षण दिया गया है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा बुजुर्गों के लिए भी विशेष स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। इसके अलावा, हर प्रकार की दवाइयां 24 घंटे उपलब्ध रहेंगी, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।

राष्ट्रीय लोक अदालत: न्याय प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में कदम

nyay
nyay
  • तारीख: 14 दिसंबर 2024 को आयोजित होगी।
  • मामले: दीवानी, फौजदारी, राजस्व, और वैवाहिक विवादों का निपटारा।
  • फ्री लिटिगेशन: आर्थिक रूप से कमजोर पक्षकारों को मुफ्त कानूनी सहायता मिलेगी।
  • अपील प्रतिबंध: सुलझाए गए मामलों पर अपील का अधिकार नहीं।
  • उद्देश्य: न्याय प्रक्रिया को सरल, सुलभ और त्वरित बनाना।

सरकार और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से 14 दिसंबर 2024 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इस दिन पूरे देश के सभी जिलों में एक साथ लोक अदालत लगाई जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य न्यायिक प्रणाली में लंबित मामलों का त्वरित समाधान करना है, ताकि न्याय पाने के लिए नागरिकों को वर्षों तक इंतजार न करना पड़े।

क्या है लोक अदालत?

लोक अदालत एक वैकल्पिक विवाद समाधान प्रक्रिया है, जिसमें विवादों का निपटारा सुलह-समझौते के माध्यम से किया जाता है। इसमें दोनों पक्ष आपसी सहमति से विवाद का समाधान करते हैं। लोक अदालत की सबसे खास बात यह है कि इसमें निपटाए गए मामलों पर किसी भी अन्य न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती, जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है।

कौन-कौन से मामले सुने जाएंगे?

लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के विवादों का निपटारा किया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:

  1. दीवानी मामले – संपत्ति विवाद, अनुबंध संबंधी विवाद, ऋण वसूली आदि।
  2. फौजदारी मामले – छोटे अपराध या ऐसे मामले जिनमें जेल की सजा का प्रावधान नहीं है।
  3. राजस्व मामले – भूमि रिकॉर्ड, बकाया वसूली, और अन्य राजस्व संबंधित विवाद।
  4. वैवाहिक विवाद – तलाक, भरण-पोषण, और अन्य घरेलू मामलों का निपटारा।
  5. फ्री लिटिगेशन केस – ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिनमें पक्षकार कानूनी सहायता के लिए आर्थिक रूप से अक्षम हैं।

लोक अदालत की प्रक्रिया

लोक अदालत में पेश किए जाने वाले मामलों का चयन पहले से किया जाएगा। संबंधित पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा, जहां दोनों पक्षों की सहमति से विवाद का समाधान होगा। इसमें वकील, न्यायिक अधिकारी और मध्यस्थ की भूमिका अहम होती है, जो निष्पक्षता से मामले को सुलझाते हैं।

लोक अदालत के फायदे

  1. समय की बचत: वर्षों तक चलने वाले मुकदमों का निपटारा कुछ ही घंटों या दिनों में हो जाता है।
  2. कम खर्च: लोक अदालत में विवादों का निपटारा बेहद कम खर्च पर किया जाता है।
  3. सुलह-समझौता: पक्षकारों के बीच आपसी सहमति से मामले का समाधान होता है, जिससे उनके संबंधों में तनाव कम होता है।
  4. अपील का अधिकार नहीं: लोक अदालत में निपटाए गए मामलों पर किसी अन्य न्यायालय में अपील नहीं की जा सकती, जिससे प्रक्रिया का अंतिम समाधान सुनिश्चित होता है।

सरकार की भूमिका

राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने के लिए सरकार और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। न्यायालयों में लंबित मुकदमों को कम करने और नागरिकों को सुलभ न्याय उपलब्ध कराने के लिए यह एक महत्वपूर्ण पहल है।

राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय प्रक्रिया को सरल, सुलभ और त्वरित बनाने का एक प्रभावी माध्यम है। यह पहल न केवल नागरिकों के लिए राहत लाती है, बल्कि न्यायपालिका के काम का बोझ भी कम करती है। 14 दिसंबर को आयोजित होने वाली लोक अदालत में दीवानी, फौजदारी, राजस्व और वैवाहिक विवादों का निपटारा सुलह-समझौते के माध्यम से किया जाएगा। इससे न्याय प्रक्रिया में तेजी आएगी और लोगों का न्यायपालिका पर विश्वास मजबूत होगा।

जानें कब है मोक्षदा एकादशी: तिथि, शुभ महूर्त, महत्व, पूजा विधि एवं कथा भी पढ़ें

मोक्षदा एकादशी तिथि शुभ महूर्त, महत्व, पूजा विधि एवं कथा
मोक्षदा एकादशी तिथि शुभ महूर्त, महत्व, पूजा विधि एवं कथा

हर महीने दो एकादशी तिथि पड़ती है. दिसंबर महीने में भी दो एकादशी व्रत रखे जाएंगे. दिसंबर महीने की पहली एकादशी मोक्षदा एकादशी है. पंचांग के अनुसार यह एकादशी मार्गशीर्ष या अगहन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को होती है। मोक्षदा एकादशी सभी एकादशी में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है. इसका कारण यह है कि इस एकादशी के दिन ही महाभारत की रणभूमि में भगवान श्रीकृष्ण में अर्जुन को गीता उपदेश दिए थे. इसलिए हर साल मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती का पर्व एक ही दिन मनाया जाता है. इस साल मोक्षदा एकादशी का व्रत 11 दिसंबर 2024 को है।

मोक्षदा एकादशी का महत्व

वैसे तो साल में पड़ने वाली सभी एकादशी तिथि खास होती है. लेकिन सनातन धर्म में मोक्षदा एकादशी का विशेष महत्व बताया गया है. क्योंकि इस एकादशी व्रत के प्रभाव से घर-परिवार का उद्धार तो होता ही है, साथ ही पितरों को भी मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पूर्वजों की आत्मा की शांति और घर-परिवार की सुख-समृद्धि के लिए मोक्षदा एकादशी का व्रत लाभकारी माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि मोक्षदा एकादशी का व्रत रखने वाले जातकों के सभी पाप कर्मों का नाश होता है और मृत्यु के बाद स्वर्ग लोक में स्थान प्राप्त होता है।

मोक्षदा एकादशी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि

मोक्षदा एकादशी 2024 शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, मोक्षदा एकादशी इस बार 11 दिसंबर को मनाई जाएगी. एकादशी तिथि का प्रारंभ 11 दिसंबर को सुबह 3 बजकर 42 मिनट पर होगी और तिथि का समापन 12 दिसंबर की रात 1 बजकर 09 मिनट पर होगा. मोक्षदा एकादशी का पारण इस बार सुबह 7 बजकर 07 मिनट से लेकर 9 बजकर 09 मिनट तक होगा.

मोक्षदा एकादशी पूजन विधि

एकादशी व्रत से एक दिन पहले यानि दशमी तिथि को दोपहर में सिर्फ एक बार ही भोजन करना चाहिए. ध्यान रहे एकादशी से पहले वाले दिन रात्रि में भोजन नहीं करना है. एकादशी के दिन प्रातः काल उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. व्रत का संकल्प लेने के बाद भगवान श्री कृष्ण की पूजा करें. उन्हें धूप, दीप, नैवेद्य इत्यादि अर्पित करें. इसके बाद रात्रि में भी पूजन और जागरण करें. अगले दिन यानी द्वादशी के दिन पूजा करें और उसके बाद जरूरतमंद व्यक्तियों को भोजन और दान दक्षिणा दें या किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं और उसके बाद ही भोजन करके अपना व्रत पूरा करें. गीता का सम्पूर्ण पाठ या अध्याय 11 का पाठ करें. अंत में अपनी कामनापूर्ति की प्रार्थना करें. इस दिन दान का फल अनंत गुना मात्र में प्राप्त होता है.

मोक्षदा एकादशी उपाय

मोक्षदा एकादशी के दिन शाम को तुलसी के पौधे के सामने घी का दीपक जरूर जलाएं. इसके साथ ही ॐ वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप करते हुए तुलसी के पौधे के आसपास 11 परिक्रमा करें. एकादशी के दिन तुलसी के पौधे पर जल न चढ़ाएं क्योंकि इस दिन तुलसी माता निर्जला व्रत रखती हैं. मोक्षदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करते समय पीले रंग के गेंदे के फूल चढ़ाएं. अगर गेंदे के फूल नहीं हों तो कोई भी पीले रंग के फूल चढ़ा सकते हैं।

मोक्षदा एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, चंपा नगरी में एक प्रतापी राजा वैखानस रहते थे, जो सभी वेदों का ज्ञानी था। उनके प्रताप और अच्छे स्वभाव के कारण उनकी जनता हमेशा प्रसन्न रहती थी। एक दिन राजा ने सपने में देखा कि उनके पिता नरक में यातनाएं झेल रहे हैं। अपने इस सपने के बारे में उन्होनें अपनी पत्नी को बताया और कहा कि मैं यहां सुख से हूं और मेरे पिता को इतना कष्ट है। इसपर राजा की पत्नी ने उन्हें आश्रम में जाने की सलाह दी। राजा जब आश्रम पहुंचे तो उन्होंने कई तपस्वियों को देखा।

राजा ने ऋषियों से अपनी बात वहां मौजूद पर्वत मुनि को बताई। राजा ने कहा कि पिता ने मुझसे कहा कि हे पुत्र, मैं नरक में पड़ा हूं। यहाँ से तुम मुझे मुक्त कराओ। जब से मैंने ये वचन पिता के मुख से सुने हैं तब से मैं बहुत बेचैन हूं। मैं बहुत ही अशांत महसूस कर रहा हूं। मुझे इस राज्य, धन, पुत्र, स्त्री, हाथी, घोड़े आदि में कुछ भी सुख प्रतीत नहीं होता। ऐसे में क्या करूँ? और अपनी परेशानी बताते हुए उनके आंखों से आंसू आने लगे।

आगे राजा ने कहा- हे ब्राह्मण देवताओं! इस स्वप्न के कारण इतना कष्ट पहुंच रहा है कि मेरा सारा शरीर जल रहा है। अब आप कृपा करके कोई तप, दान, व्रत आदि बताएं जिससे मैं अपने पिता को नरक से मुक्त करा सकूं। उस पुत्र का जीवन व्यर्थ है जो अपने माता-पिता का उद्धार न कर सके। एक उत्तम पुत्र जो अपने माता-पिता तथा पूर्वजों का उद्धार करता है, वह हजार मूर्ख पुत्रों से अच्छा है। तब ब्राह्मणों ने राजा से कहा- हे राजन! यहां पास ही भूत, भविष्य, वर्तमान के ज्ञाता पर्वत ऋषि का आश्रम है। आपकी समस्या का हल वे जरूर करेंगे। ऐसे में राजा पर्वत ऋषि के आश्रम पहुंचे।

राजा ने आश्रम में देखा कि अनेक शांत चित्त योगी और मुनि तपस्या कर रहे थे। उसी जगह पर्वत मुनि बैठे थे। राजा ने मुनि को देखते ही उन्हें साष्टांग दंडवत किया। मुनि ने राजा से सांगोपांग कुशल पूछी। राजा ने कहा कि महाराज आपकी कृपा से मेरे राज्य में सब कुशल हैं, लेकिन अकस्मात मेरे चित्त में अत्यंत अशांति होने लगी है। ऐसा सुनकर पर्वत मुनि ने आँखें बंद की और भूत विचारने लगे। इसके बाद पर्वत मुनि से सारा सच जाना और राजा को कहा कि तुम एक पुण्य आत्मा हो, जो अपने पिता के लिए इतने परेशान हो, लेकिन इसकी बिल्कुल भी जरूरत नहीं है, क्योंकि तुम्हारे पिता अपने कर्मों का फल भोग रहे हैं। तुम्हारे पिता ने तुम्हारी माता को बहुत यातनाएं दी हैं। इसी के कारण उन्हें नरक भोगना पड़ रहा है। राजा ने मुनि से इस परेशानी का हल पूछा, तो मुनि ने कहा कि तुम्हें मोक्षदा एकादशी व्रत का पालन करना चाहिए और इसे पिता को फल समर्पित करना चाहिए। इससे उनके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। राजा ने इसी विधि का पालन किया और उनके पिता सभी बुरे कर्मों से मुक्त हो गए। स्वर्ग में जाते हुए वे राजा अपने पुत्र से कहा कि हे पुत्र तेरा कल्याण हो।

शास्त्रों के अनुसार, मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की मोक्षदा एकादशी का जो व्रत करते हैं, तो उसे हर तरह के पाप नष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस कथा को पढ़ने या सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है। यह व्रत मोक्ष देने वाला तथा चिंतामणि के समान सब कामनाएं पूर्ण करने वाला है।

केजीएमयू में आयोजित हुआ अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान: भारत-अमेरिका ने साझा किए टीबी और सांस रोगों पर अपने अनुभव

केजीएमयू में आयोजित हुआ अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान, भारत-अमेरिका ने साझा किए टीबी और सांस रोगों पर अपने अनुभव,
केजीएमयू में आयोजित हुआ अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान, भारत-अमेरिका ने साझा किए टीबी और सांस रोगों पर अपने अनुभव,
  • वेंटिलेटर का विवेकपूर्ण उपयोग: डॉ फरहा ने बताया कि हर सांस रोगी को वेंटिलेटर पर रखना फायदेमंद नहीं है और यह कई बार मरीज के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
  • टीबी पर भारत की सफलता: डॉ सूर्यकांत ने बताया कि भारत ने टीबी रोगियों की संख्या में 17.3% और मृत्यु दर में 18% की कमी की है।
  • वायु प्रदूषण से सांस के रोग: प्रो. कमर रहमान ने वायु प्रदूषण और परोक्ष धूम्रपान को सांस संबंधी बीमारियों का बड़ा कारण बताया।
  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता: केजीएमयू की कुलपति ने भारत और अमेरिका के बीच अनुसंधान और अनुभव साझा करने पर जोर दिया।
  • व्यापक भागीदारी: कार्यक्रम में 100 से अधिक चिकित्सक और 400 से अधिक ऑनलाइन प्रतिभागी शामिल हुए।

लखनऊ, 10 दिसम्बर 2024: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ड्रग रेजिस्टेंस टीबी केयर और पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन सेंटर द्वारा आयोजित किया गया। यह पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन सेंटर उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा केंद्र है, जो सांस से जुड़ी बीमारियों के उपचार और पुनर्वास के लिए समर्पित है।

इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक और प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ फरहा खान ने भाग लिया। उन्होंने अपने अनुभव और विचार साझा करते हुए टीबी और सांस संबंधी अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज पर चर्चा की। इस व्याख्यान में 100 से अधिक चिकित्सक, शोध छात्र और स्वास्थ्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जबकि 400 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑनलाइन जुड़कर इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

डॉ फरहा का अनुभव और सुझाव

डॉ फरहा ने बताया कि उनके अस्पताल में कई बार अन्य देशों से गंभीर टीबी रोगी आते हैं, जिनका इलाज करने का उनके पास पर्याप्त अनुभव है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि भारत में टीबी के रोगियों की संख्या और उनके इलाज का तरीका विश्व स्तर पर अद्वितीय है। उन्होंने अपने अनुभव के एक कठिन एक्सडीआर (एक्सटेंसिवली ड्रग रेजिस्टेंट) टीबी रोगी का मामला प्रस्तुत किया और बताया कि कैसे उन्होंने इस चुनौतीपूर्ण रोगी का सफलतापूर्वक इलाज किया।

डॉ फरहा ने गंभीर सांस रोगियों के लिए वेंटिलेटर के उपयोग पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि हर गंभीर सांस रोगी को वेंटिलेटर पर रखना आवश्यक नहीं है और यह कई बार नुकसानदेह हो सकता है। लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रखने से मरीज को वेंटिलेटर एसोसिएटेड निमोनिया होने का खतरा रहता है, जिससे रोगी की स्थिति और बिगड़ सकती है।

उन्होंने सीओपीडी (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) पर अमेरिका में किए जा रहे शोध और नवीनतम उपचार विधियों की भी जानकारी दी।

डॉ सूर्यकांत का वक्तव्य: भारत का टीबी नियंत्रण कार्यक्रम वैश्विक रोल मॉडल

रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष और कार्यक्रम संयोजक डॉ सूर्यकांत ने बताया कि भारत, टीबी नियंत्रण में वैश्विक नेता के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ की ग्लोबल टीबी रिपोर्ट 2024 के अनुसार, भारत ने 17.3% टीबी रोगियों की संख्या और 18% मृत्यु दर को कम करने में सफलता पाई है। यह भारत के मजबूत टीबी नियंत्रण कार्यक्रम का प्रमाण है, जिसे आज पूरी दुनिया मान्यता दे रही है।

डॉ सूर्यकांत ने यह भी बताया कि दुनिया के 29% एक्सडीआर टीबी रोगी भारत में पाए जाते हैं, जिससे भारत इस चुनौती का मुकाबला करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के पास इतने व्यापक अनुभव हैं कि वह न केवल अमेरिका बल्कि अन्य देशों को भी टीबी के इलाज में प्रशिक्षित कर सकता है।

वायु प्रदूषण और धूम्रपान से बचने की सलाह

कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजिकल रिसर्च की पूर्व उपनिदेशक प्रो. कमर रहमान ने वायु प्रदूषण और धूम्रपान को सांस की बीमारियों का बड़ा कारण बताया। उन्होंने परोक्ष धूम्रपान, लकड़ी के चूल्हे से निकलने वाले धुएं और वायु प्रदूषण को सांस संबंधी रोगियों के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने सभी को धूम्रपान न करने और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की सलाह दी।

केजीएमयू की कुलपति ने सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर

केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने डॉ फरहा और डॉ सूर्यकांत से भारत और अमेरिका के बीच टीबी और सांस रोगों पर अनुसंधान और अनुभव साझा करने का आग्रह किया। कुलपति ने कहा कि इस प्रकार के सहयोग से इन बीमारियों के इलाज में और अधिक प्रभावी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

अन्य प्रमुख चिकित्सकों और छात्रों की भागीदारी

कार्यक्रम में विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक, जैसे डॉ आर.ए.एस. कुशवाहा, डॉ राजीव गर्ग, डॉ अजय कुमार वर्मा, डॉ आनंद श्रीवास्तव, डॉ ज्योति बाजपेई, और कार्यक्रम समन्वयक डॉ पंखुड़ी और डॉ शिवम श्रीवास्तव ने भाग लिया। इसके अलावा, बड़ी संख्या में जूनियर डॉक्टर और शोध छात्र भी इस आयोजन में उपस्थित रहे।

आयोजन सचिव डॉ अंकित कुमार ने कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

डिजिटल इंडिया: भारत की डिजिटल क्रांति का वैश्विक प्रभाव

डिजिटल इंडिया: भारत की डिजिटल क्रांति का वैश्विक प्रभाव
डिजिटल इंडिया: भारत की डिजिटल क्रांति का वैश्विक प्रभाव
  • डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने भारत को ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था और सशक्त समाज की नींव प्रदान की।
  • यूपीआई, डिजीलॉकर और कोविन जैसी सेवाएँ करोड़ों जिंदगियों को सरल और सुगम बना रही हैं।
  • परिवेश पोर्टल ने पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रियाओं को तेज और पारदर्शी बनाया।
  • यूपीआई का उपयोग अब सात देशों में किया जा रहा है, जिसमें फ्रांस में इसका विस्तार यूरोप में पहली बार हुआ है।
  • डिजिटल इंडिया ने भारत को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई और अन्य देशों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।

केंद्रीय विदेश और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री, श्री कीर्ति वर्धन सिंह ने नई दिल्ली स्थित पर्यावरण भवन में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी पर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने डिजिटल इंडिया की सफलता और उसके प्रभावों पर विस्तार से प्रकाश डाला। श्री सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के कारण भारत में डिजिटल क्रांति संभव हुई है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम, जिसकी शुरुआत 01 जुलाई 2015 को हुई थी, का उद्देश्य देश को एक ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था और डिजिटल रूप से सशक्त समाज में परिवर्तित करना था। इस पहल ने भारत के डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत किया है और नागरिकों के जीवन को बदलने में अहम भूमिका निभाई है।

डिजिटल सेवाओं का व्यापक असर

श्री सिंह ने डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत शुरू की गई सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि ये सेवाएँ लोगों के जीवन को सरल बना रही हैं। यूपीआई, डिजीलॉकर, कोविन, आरोग्य सेतु, ई-संजीवनी, उमंग, जेम, दिक्षा, और ई-कोर्ट जैसे प्लेटफॉर्म ने भारत को डिजिटल युग में आगे बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि यूपीआई के माध्यम से एक क्लिक में भुगतान करना और डिजीलॉकर के जरिए दस्तावेज़ सुरक्षित रखना अब हर भारतीय के लिए संभव हो गया है। यह तकनीकी परिवर्तन न केवल सुविधा प्रदान करता है बल्कि भ्रष्टाचार को भी खत्म करने में सहायक सिद्ध हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर राजधानी से ₹100 निकलते हैं, तो वह पूरे ₹100 लाभार्थियों तक पहुँचते हैं।

पर्यावरणीय प्रक्रियाओं में डिजिटल क्रांति

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में डिजिटल प्रक्रियाओं के योगदान का उल्लेख करते हुए श्री सिंह ने परिवेश पोर्टल की सराहना की। उन्होंने कहा कि पहले पर्यावरणीय स्वीकृति (एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस) के लिए महीनों का समय लगता था, लेकिन अब इस प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से तेज और पारदर्शी बना दिया गया है। परिवेश पोर्टल के माध्यम से पर्यावरणीय क्लीयरेंस शीघ्रता से प्रदान की जा रही है, जिससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाएँ भी समाप्त हो गई हैं।

यूपीआई: भारत की वैश्विक पहचान

डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भारत की सफलता पर प्रकाश डालते हुए श्री सिंह ने बताया कि यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) ने न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है। वर्तमान में यूपीआई का उपयोग सात देशों- यूएई, सिंगापुर, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, फ्रांस और मॉरीशस में किया जा रहा है। फ्रांस में यूपीआई की शुरुआत विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पहली बार यूरोप में डिजिटल भुगतान प्रणाली के रूप में अपनी जगह बना पाया है। श्री सिंह ने बताया कि यूपीआई का वैश्विक विस्तार भारतीय उपभोक्ताओं और व्यवसायों को विदेशों में भी भुगतान करने और प्राप्त करने में सक्षम बनाता है।

डिजिटल इंडिया की वैश्विक सराहना

श्री सिंह ने कहा कि डिजिटल इंडिया ने न केवल भारत को वैश्विक मंच पर स्थापित किया है, बल्कि दूसरे देशों के लिए भी एक मिसाल कायम की है। जब वह विदेश दौरे पर जाते हैं, तो वहाँ के सरकारी प्रतिनिधि और आम लोग भारत की डिजिटल क्रांति की प्रशंसा करते हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन और दृढ़ संकल्प का परिणाम है कि आज पूरी दुनिया भारत की डिजिटल पहल की सराहना कर रही है।

डिजिटल इंडिया की उपलब्धियाँ

उन्होंने बताया कि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के कारण अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी इंटरनेट की पहुँच आसान हो गई है। यह पहल न केवल शहरी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी डिजिटल समावेशन को बढ़ावा दे रही है। इसके अलावा, भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) का उपयोग करने के लिए कई देशों ने भारत के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत का डिजिटल इकोसिस्टम अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विश्वसनीय और प्रशंसनीय हो गया है।