देश के पूर्वोत्तर राज्यों में चलाए गए विशेष स्वास्थ्य जांच अभियान के दौरान टीबी से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पैटर्न सामने आया है। जांच में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की पहचान हुई जिनमें संक्रमण मौजूद था, लेकिन बीमारी के सामान्य लक्षण दिखाई नहीं दे रहे थे।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, जोखिम वाले समूहों और संवेदनशील आबादी के बीच व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान हजारों लोगों में टीबी संक्रमण की पुष्टि हुई, जिनमें एक बड़ा हिस्सा ऐसे लोगों का था जिन्हें बीमारी का कोई स्पष्ट संकेत महसूस नहीं हो रहा था।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामले टीबी नियंत्रण के लिए चुनौती बन सकते हैं, क्योंकि लक्षण न होने के कारण लोग लंबे समय तक जांच या इलाज तक नहीं पहुंचते। इससे संक्रमण का पता देर से चल सकता है।
अभियान के तहत पूर्वोत्तर राज्यों में बड़े स्तर पर स्वास्थ्य जांच, एक्स-रे और अन्य स्क्रीनिंग प्रक्रियाएं अपनाई गईं। इससे उन मरीजों की भी पहचान संभव हुई जो सामान्य परिस्थितियों में चिकित्सा जांच नहीं कराते।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अब केवल अस्पताल आधारित पहचान पर्याप्त नहीं मानी जा रही है। इसी वजह से समुदाय आधारित जांच और सक्रिय स्क्रीनिंग पर अधिक जोर दिया जा रहा है, ताकि शुरुआती स्तर पर संक्रमण को पहचाना जा सके।
कई क्षेत्रों में बीमारी की जल्दी पहचान के लिए नई तकनीकों और डिजिटल टूल्स का भी उपयोग किया जा रहा है। इसका उद्देश्य संभावित मरीजों तक समय रहते पहुंचना और संक्रमण के प्रसार को कम करना है।
नोट: टीबी एक उपचार योग्य बीमारी है। लंबे समय तक खांसी, कमजोरी, वजन घटना या किसी भी संदिग्ध लक्षण की स्थिति में स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित होता है।
अगर गर्मी के मौसम में ठंडे और शांत वातावरण वाली जगह की तलाश है, तो उत्तराखंड का नैनीताल एक बेहतरीन विकल्प माना जा सकता है। कुमाऊँ क्षेत्र में स्थित यह पहाड़ी शहर अपनी झीलों, हरियाली और सुहाने मौसम के कारण हर साल बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करता है। खासकर जून के दौरान यहां का मौसम घूमने के लिए काफी आरामदायक माना जाता है।
नैनीताल की पहचान इसकी खूबसूरत झीलों और पहाड़ों से जुड़ी हुई है। शहर के बीच स्थित नैनी झील यहां आने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण रहती है। झील में बोटिंग करना, किनारों पर समय बिताना और शाम के समय आसपास के नजारों का आनंद लेना यात्रा को खास बना देता है।
यहां स्थित नैना देवी मंदिर भी प्रमुख आकर्षणों में शामिल है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके अलावा स्नो व्यू पॉइंट, टिफिन टॉप और केव गार्डन जैसे पर्यटन स्थल यात्रियों को अलग-अलग अनुभव देते हैं। ऊंचाई वाले स्थानों से आसपास के पहाड़ों और दूर दिखाई देने वाली हिमालयी चोटियों का दृश्य लोगों को काफी पसंद आता है।
नैनीताल केवल प्राकृतिक सुंदरता ही नहीं बल्कि अपने स्थानीय बाजार और पारंपरिक स्वाद के लिए भी जाना जाता है। मॉल रोड घूमने के लिए लोकप्रिय स्थानों में शामिल है, जहां स्थानीय हस्तशिल्प, सजावटी सामान और पारंपरिक उत्पाद खरीदे जा सकते हैं। स्थानीय व्यंजनों का स्वाद भी यहां की यात्रा का हिस्सा माना जाता है।
यह स्थान परिवारों, दोस्तों और कपल्स सभी के लिए पसंदीदा माना जाता है। शांत वातावरण, ठंडी हवा और पहाड़ी माहौल लोगों को शहरों की भागदौड़ से कुछ समय की राहत देता है।
यात्रा की सुविधा की बात करें तो नैनीताल सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम है, जहां से आगे टैक्सी और अन्य साधन उपलब्ध रहते हैं। यहां हर बजट के अनुसार ठहरने के विकल्प भी आसानी से मिल जाते हैं।
अगर जून की गर्मी से कुछ दिन राहत लेकर प्रकृति के बीच समय बिताने की योजना है, तो नैनीताल एक यादगार अनुभव दे सकता है।
लखनऊ, 17 जून। वीरता, स्वाभिमान, राष्ट्रभक्ति और त्याग के प्रतीक वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती बुधवार को राजधानी लखनऊ में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई। हुसैनगंज चौराहे स्थित महाराणा प्रताप प्रतिमा स्थल पर भारतीय क्षत्रिय समाज द्वारा आयोजित भव्य समारोह में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित वक्ताओं ने उनके अदम्य साहस, राष्ट्रप्रेम और आत्मसम्मान की भावना को आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
महाराणा प्रताप की स्मृतियों को संजोएगी योगी सरकार : जयवीर सिंह
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार महाराणा प्रताप की गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। उन्होंने घोषणा की कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में महाराणा प्रताप की प्रतिमाओं की स्थापना कराई जाएगी। इसके साथ ही उनके जीवन, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति को प्रदर्शित करने वाले स्मारकों तथा संग्रहालयों का भी निर्माण कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप केवल किसी एक समाज के नायक नहीं बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र के गौरव हैं। उनके आदर्श आज भी देशवासियों को स्वाभिमान, संघर्ष और मातृभूमि के प्रति समर्पण का संदेश देते हैं। मंत्री ने भारतीय क्षत्रिय समाज द्वारा किए जा रहे सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों की सराहना करते हुए कहा कि संगठन समाज को जागरूक और संगठित करने का सराहनीय कार्य कर रहा है।
महाराणा प्रताप की जयंती पूरे राष्ट्र का उत्सव : अनिल सिंह गहलोत
भारतीय क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष अनिल सिंह गहलोत ने कहा कि महाराणा प्रताप की जयंती किसी एक वर्ग या समुदाय का कार्यक्रम नहीं बल्कि प्रत्येक भारतीय के गौरव और आत्मसम्मान का पर्व है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार मेवाड़ और गुजरात में महाराणा प्रताप जयंती पर बड़े सांस्कृतिक उत्सव आयोजित किए जाते हैं, उसी प्रकार उत्तर प्रदेश में भी महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय क्षत्रिय समाज सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरण और राष्ट्र निर्माण की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। संगठन के पदाधिकारी प्रदेश के विभिन्न जिलों में जनजागरण अभियान चलाकर युवाओं को इतिहास और संस्कृति से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।
सरोजनीनगर में महाराणा प्रताप के आदर्शों को साकार कर रहे हैं डॉ. राजेश्वर सिंह : डॉ. अखिलेश सिंह
भारतीय क्षत्रिय समाज के संरक्षक एवं सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह के प्रतिनिधि डॉ. अखिलेश सिंह ने कहा कि महाराणा प्रताप के आदर्श केवल इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें समाज में उतारने का कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि सरोजनीनगर क्षेत्र में महिलाओं के आत्मनिर्भरता अभियान को मजबूत करने के लिए 162 से अधिक सिलाई प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 36 से अधिक डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की गई हैं। वहीं युवाओं के तकनीकी सशक्तीकरण के लिए रण बहादुर सिंह डिजिटल सशक्तीकरण केंद्र बनाए गए हैं। इसके अलावा 1500 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को टैबलेट और साइकिल वितरित कर शिक्षा को प्रोत्साहित किया गया है।
उन्होंने कहा कि समाज सेवा और संगठन निर्माण के क्षेत्र में अनिल सिंह गहलोत का योगदान अनुकरणीय है तथा युवाओं को उनसे प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए।
युवाओं को नशे से दूर रहकर सिविल सेवा जैसे बड़े लक्ष्य तय करने चाहिए : प्रकाश सिंह
सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी प्रकाश सिंह ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहकर अपने जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल रोजगार प्राप्त करना ही जीवन का उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि युवाओं को सिविल सेवा और अन्य प्रतिष्ठित सेवाओं में जाकर समाज और राष्ट्र की सेवा करने का संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन संघर्ष, अनुशासन और आत्मसम्मान का सर्वोत्तम उदाहरण है, जिससे युवाओं को प्रेरणा लेकर अपने व्यक्तित्व का निर्माण करना चाहिए।
समाज के विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों ने की सहभागिता
इस अवसर पर विधान परिषद सदस्य , राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष , भोजपुरी समाज के राष्ट्रीय सचिव , उत्तर प्रदेश क्षत्रिय समन्वय समिति के प्रदेश संयोजक , कर्नल आर.पी. सिंह, मेजर ए.के. सिंह, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी प्रकाश सिंह, , , , भारतीय क्षत्रिय समाज के राष्ट्रीय संयोजक छेदी सिंह, राष्ट्रीय महासचिव एडवोकेट अरविंद सिंह, महिला प्राथमिक शिक्षक संघ की अध्यक्ष डॉ. सुलोचना मौर्य, प्रधान संघ की ब्लॉक माल अध्यक्ष संयोगिता सिंह, पीजीआई की चिकित्सक डॉ. निरुपमा सिंह, प्रो. मीनाक्षी सिंह, राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के जिला प्रभारी रितेश सिंह चौहान तथा भारतीय मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष कीर्तिवर्धन सिंह सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
वीरता, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति के संदेश के साथ संपन्न हुआ समारोह
समारोह में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन केवल इतिहास का अध्याय नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, त्याग, संघर्ष और आत्मसम्मान की ऐसी प्रेरक गाथा है, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान और महाराणा प्रताप के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने के संकल्प के साथ हुआ।
दिल्ली : के2 इन्फ्राजेन लिमिटेड को कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड से ₹158.58 करोड़ (जीएसटी सहित) का नया लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस (LOA) मिला है। इस प्रोजेक्ट के तहत नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे के प्रमुख सेक्शनों में रेल इलेक्ट्रिफिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड किया जाएगा। काम में 1×25 केवी से 2×25 केवी तक इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम का अपग्रेडेशन शामिल है, जिसमें डिजाइन, सप्लाई, इरेक्शन, टेस्टिंग और कमीशनिंग का काम किया जाएगा।
यह परियोजना जोधपुर डिवीजन के लूनी–एसएमआर–बीएलडीआई सेक्शन और जयपुर डिवीजन के जयपुर–सवाई माधोपुर सेक्शन में लागू होगी। कुल मिलाकर यह काम 403 रूट किलोमीटर और 497.65 ट्रैक किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। इस अपग्रेड का उद्देश्य रेलवे की ट्रैक्शन क्षमता को मजबूत करना है, ताकि 3000 एमटी लोडिंग लक्ष्य को सपोर्ट किया जा सके। लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस (LOA) के मुताबिक, परियोजना को 24 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
नया ऑर्डर मिलने से के2 इन्फ्राजेन के रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो को और मजबूती मिली है। यह भारत के रेलवे आधुनिकीकरण और इलेक्ट्रिफिकेशन कार्यक्रम में कंपनी की भागीदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। कंपनी रेलवे, पावर, रोडवेज और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी लगातार बढ़ा रही है और उसका फोकस एक्जीक्यूशन आधारित ग्रोथ पर है। दिसंबर 2025 से अब तक कंपनी को रेलवे और ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन (T&D) सेगमेंट में बोली प्रक्रिया के जरिए सीधे ₹570.49 करोड़ के नए ऑर्डर मिल चुके हैं।
इस मौके पर के2 इन्फ्राजेन लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर पंकज शर्मा ने कहा, “कोंकण रेलवे से मिला यह ऑर्डर हमारे लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे हमारी अनएक्जीक्यूटेड ऑर्डर बुक एक नए स्तर पर पहुंच गई है। इस ऑर्डर के साथ पिछले छह महीनों में सरकारी संस्थानों से सीधे मिले ऑर्डर्स का आंकड़ा लगभग ₹500 करोड़ के बेंचमार्क को पार कर चुका है। पावर सेगमेंट में मिल रहे लगातार अवसरों से भविष्य की आय को लेकर मजबूत विजिबिलिटी मिलती है और हमारी एक्जीक्यूशन क्षमता पर भरोसा और मजबूत होता है। पिछले कुछ महीनों में हमने अपने बोर्ड का पुनर्गठन किया है और इस ट्रांजिशन फेज में हमें कंपनी के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद है।” भारत के परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर में रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन और ट्रैक्शन अपग्रेडेशन प्रमुख फोकस क्षेत्रों में बने हुए हैं। रेलवे नेटवर्क को अधिक कुशल, अधिक लोड वहन करने में सक्षम और परिचालन के लिहाज से अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए इन क्षेत्रों पर लगातार काम किया जा रहा है। 1×25 केवी से 2×25 केवी ट्रैक्शन सिस्टम में बदलाव से अधिक पावर क्षमता उपलब्ध होगी और माल ढुलाई संचालन को भी अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलेगी।
कंपनी के अनुसार, यह ऑर्डर उसकी तकनीकी क्षमता और बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के लिए जटिल इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को सफलतापूर्वक निष्पादित करने की योग्यता को दर्शाता है। बढ़ती ऑर्डर बुक और रणनीतिक परियोजनाओं में बढ़ती भागीदारी के साथ कंपनी का लक्ष्य रेलवे और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में अपनी स्थिति को और मजबूत करना है।
के2 इन्फ्राजेन लिमिटेड के बारे में वर्ष 2015 में स्थापित के2 इन्फ्राजेन भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र की एक प्रमुख सूचीबद्ध कंपनी है। एक इंटीग्रेटेड EPC कंपनी के रूप में यह रोड, रेलवे, पावर ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन, सिविल कंस्ट्रक्शन, वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में बड़े प्रोजेक्ट्स की इंजीनियरिंग, एक्जीक्यूशन और डिलीवरी में विशेषज्ञता रखती है। कंपनी गुणवत्ता और समय पर परियोजनाओं को पूरा करने पर विशेष जोर देती है। कंपनी के ग्राहकों में नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे, राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड, कर्नाटक पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड, एनएचएआई, एचएसआईआईडीसी, केआरसीएल और हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड जैसी प्रमुख संस्थाएं शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा, बिहार, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में फैले अपने परिचालन के जरिए के2 इन्फ्राजेन ने मजबूत अनुकूलन क्षमता और बेहतर एक्जीक्यूशन का प्रदर्शन किया है। कंपनी गुणवत्ता, समय पर डिलीवरी और ग्राहकों की अपेक्षाओं से बेहतर प्रदर्शन के प्रति प्रतिबद्ध है, जिससे वह भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने की स्थिति में है। विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में कंपनी की मौजूदगी उसे किसी एक सेक्टर पर अत्यधिक निर्भर होने से बचाती है। साथ ही इससे बेहतर मार्जिन और विभिन्न कारोबारों के बीच तालमेल का लाभ मिलता है। कंपनी अपने सभी प्रमुख बिजनेस वर्टिकल्स में एक साथ कई परियोजनाओं पर काम कर रही है, जिससे विश्वसनीयता और उत्कृष्ट डिलीवरी के लिए उसकी पहचान लगातार मजबूत हो रही है।
लखनऊ: एक समय ऐसा था जब भारत की नदियों से घड़ियालों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा था और उनकी संख्या महज कुछ सौ तक सिमट गई थी। लेकिन आज उत्तर प्रदेश का कुकरैल घड़ियाल पुनर्वास केंद्र न केवल देश बल्कि पूरी दुनिया के लिए वन्यजीव संरक्षण का सफल मॉडल बन चुका है। यहां पले-बढ़े घड़ियाल अमेरिका के न्यूयॉर्क, जापान, भूटान और पाकिस्तान तक पहुंच चुके हैं और वन्यजीव प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
विश्व घड़ियाल दिवस (17 जून) के अवसर पर उत्तर प्रदेश का यह संरक्षण अभियान एक ऐसी प्रेरक कहानी प्रस्तुत करता है, जिसने विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुके जीव को नया जीवन देने का काम किया है। यही वजह है कि नेशनल जियोग्राफिक सोसाइटी ने कुकरैल परियोजना को “Most Successful Conservation Project in India” की श्रेणी में शामिल किया है।
जब पूरे देश में बचे थे केवल 250 से 300 घड़ियाल
वर्ष 1970 में हुए सर्वेक्षण ने वन्यजीव विशेषज्ञों को चिंतित कर दिया था। उस समय पूरे भारत में घड़ियालों की संख्या घटकर मात्र 250 से 300 रह गई थी। नदियों में बढ़ते प्रदूषण, अवैध शिकार और प्राकृतिक आवासों के विनाश के कारण यह प्रजाति तेजी से समाप्ति की ओर बढ़ रही थी।
ऐसे कठिन समय में उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 1975 में लखनऊ स्थित कुकरैल में घड़ियाल पुनर्वास केंद्र की स्थापना कर संरक्षण अभियान की नींव रखी। प्रारंभिक चरण में चंबल नदी से घड़ियालों के अंडे लाकर वैज्ञानिक निगरानी में हैचिंग कराई गई और यहीं से शुरू हुई घड़ियालों की नई जिंदगी की कहानी।
कैप्टिव ब्रीडिंग ने बदली तस्वीर
घड़ियाल संरक्षण की सबसे बड़ी सफलता बंदी प्रजनन (कैप्टिव ब्रीडिंग) कार्यक्रम को माना जाता है। वर्ष 1976 में जन्मे घड़ियालों को मदर स्टॉक के रूप में विकसित किया गया और वर्ष 1988 से नियमित रूप से उनके अंडों की हैचिंग शुरू हुई।
अंडों से निकलने वाले बच्चों को लगभग ढाई वर्षों तक विशेष देखभाल और सुरक्षित वातावरण में पाला जाता है। इसके बाद उन्हें उनके प्राकृतिक आवासों में छोड़ा जाता है, जहां वे नदी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते हैं।
इसी वैज्ञानिक प्रक्रिया के कारण आज कुकरैल केंद्र में 466 घड़ियाल मौजूद हैं, जबकि प्रतिवर्ष 140 से 160 नए घड़ियालों की वृद्धि दर्ज की जा रही है।
उत्तर प्रदेश से दुनिया तक पहुंचा संरक्षण का संदेश
कुकरैल में विकसित घड़ियाल अब केवल उत्तर प्रदेश या भारत तक सीमित नहीं हैं। यहां से तैयार घड़ियालों को देश के विभिन्न राज्यों के अलावा भूटान, पाकिस्तान, जापान और अमेरिका के न्यूयॉर्क तक भेजा गया है।
यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश का संरक्षण मॉडल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्वीकार्यता प्राप्त कर चुका है। दुनिया के कई वन्यजीव संस्थान और संरक्षण विशेषज्ञ कुकरैल मॉडल को अध्ययन और अनुसरण के योग्य मानते हैं।
गंगा से चंबल तक लौट रही घड़ियालों की आबादी
कुकरैल में पाले गए घड़ियालों को बाद में गंगा, घाघरा, गेरुआ, चंबल और गंडक जैसी प्रमुख नदियों में छोड़ा जाता है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आवासों में उनकी संख्या बढ़ाना और नदियों के जैविक संतुलन को मजबूत करना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि घड़ियाल नदी पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वे मछलियों की प्रजातियों के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं और जल निकायों के स्वास्थ्य का संकेतक माने जाते हैं।
पर्यटकों के लिए बन चुका है आकर्षण का बड़ा केंद्र
लखनऊ का कुकरैल घड़ियाल पुनर्वास केंद्र अब केवल संरक्षण परियोजना नहीं, बल्कि एक प्रमुख ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन भी बन चुका है।
यहां आने वाले पर्यटकों के लिए म्यूजियम, इंटरप्रिटेशन सेंटर, घड़ियाल मॉडल, पेयजल व्यवस्था, शौचालय और विश्राम हेतु बेंच जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं। हर वर्ष लगभग दो लाख घरेलू पर्यटक और 100 से अधिक विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
वन्यजीव प्रेमियों, छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए यह केंद्र प्रकृति संरक्षण को समझने का जीवंत उदाहरण बन चुका है।
इन स्थानों पर भी देखे जा सकते हैं घड़ियाल
उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में कई ऐसे स्थान हैं जहां प्राकृतिक वातावरण में घड़ियालों को देखा जा सकता है। इनमें प्रमुख हैं—
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य
दुधवा नेशनल पार्क
कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य
हस्तिनापुर क्षेत्र
महराजगंज की नदियां
बाराबंकी क्षेत्र की नदी प्रणालियां
बहराइच के नदी क्षेत्र
इन स्थानों पर घड़ियालों के साथ-साथ कई दुर्लभ वन्यजीव और पक्षी भी देखने को मिलते हैं।
देवी गंगा के वाहन के रूप में भी मिलता है उल्लेख
भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में भी घड़ियाल और मगरमच्छ का विशेष महत्व है। हिन्दू धर्मग्रंथों में देवी गंगा का वाहन ‘मकर’ बताया गया है, जिसे मगरमच्छ के रूप में भी देखा जाता है।
मकर को जलीय जीवों में अत्यंत शक्तिशाली और तीव्र गति वाला प्राणी माना गया है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में भी इन जीवों का संरक्षण प्रकृति और आस्था दोनों से जुड़ा हुआ विषय माना जाता है।
देश-विदेश से पर्यटक आ रहे हैं: जयवीर सिंह
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश ईको-टूरिज्म की दृष्टि से देश का महत्वपूर्ण राज्य है। विश्व में जो वन्यजीव अत्यंत दुर्लभ हैं, उनमें घड़ियाल प्रमुख हैं और उत्तर प्रदेश में उनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। इसी वजह से देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक घड़ियालों को देखने यहां पहुंच रहे हैं।
इस वर्ष 500 अंडों की हैचिंग का लक्ष्य
वन संरक्षक के अनुसार, भारत सरकार की नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत वर्ष 2026 में 500 घड़ियाल अंडों को प्राकृतिक आवासों से लाकर कुकरैल में हैच कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे आने वाले वर्षों में घड़ियालों की संख्या में और उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
संरक्षण की वैश्विक मिसाल बना उत्तर प्रदेश
कभी केवल 250-300 की संख्या तक सिमट चुके घड़ियाल आज उत्तर प्रदेश की धरती से निकलकर दुनिया के कई देशों तक पहुंच चुके हैं। कुकरैल घड़ियाल पुनर्वास केंद्र ने यह साबित कर दिया है कि यदि वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मजबूत इच्छाशक्ति और दीर्घकालिक संरक्षण नीति के साथ कार्य किया जाए तो विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी प्रजातियों को भी नया जीवन दिया जा सकता है।
विश्व घड़ियाल दिवस पर यह सफलता केवल उत्तर प्रदेश की उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की जैव विविधता संरक्षण यात्रा की एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक कहानी है।