बिहार के नालंदा से सामने आई एक घटना ने स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले मिड डे मील की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक सरकारी स्कूल में भोजन के साथ नमक की जगह गलती से डिटर्जेंट पाउडर दे दिया गया, जिसके बाद कई बच्चों की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा। घटना के बाद अभिभावकों के बीच भी चिंता का माहौल है।
बताया जा रहा है कि मामला नूरसराय प्रखंड के परासी मिडिल स्कूल का है। यहां बच्चों को मिड डे मील में चावल और सोयाबीन-आलू की सब्जी परोसी गई थी। खाना खाने के दौरान कुछ बच्चों को सब्जी में नमक कम लगा। इसके बाद उन्होंने अतिरिक्त नमक मांगा।
आरोप है कि इसी दौरान रसोई में मौजूद नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर बच्चों को दे दिया गया। बच्चों ने इसे नमक समझकर भोजन में मिला लिया। इसके कुछ समय बाद कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद स्कूल में अफरा-तफरी मच गई।
डिटर्जेंट निगलने से शरीर पर क्या असर पड़ सकता है?
डिटर्जेंट खाने के लिए बनाया गया पदार्थ नहीं है। इसमें मौजूद रसायन मुंह, गले और पाचन तंत्र में जलन पैदा कर सकते हैं। इसका असर डिटर्जेंट के प्रकार, उसकी मात्रा और बच्चे की उम्र पर निर्भर करता है।
डिटर्जेंट निगलने के बाद कुछ बच्चों में मुंह या गले में जलन, मतली, उल्टी, पेट दर्द या बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में झाग या उल्टी के कारण पदार्थ सांस की नली में जाने का खतरा भी रहता है।
अगर बड़ी मात्रा में कोई रासायनिक क्लीनिंग उत्पाद निगल लिया गया हो, तो गले और भोजन नली को नुकसान पहुंचने जैसी गंभीर समस्या भी हो सकती है।
बच्चों में खतरा क्यों अधिक हो सकता है?
छोटे बच्चों का शरीर और वजन वयस्कों की तुलना में कम होता है। इसलिए किसी रासायनिक पदार्थ की समान मात्रा का असर उनके शरीर पर अपेक्षाकृत अधिक गंभीर हो सकता है।
खासकर अगर बच्चे को सांस लेने में परेशानी, लगातार उल्टी, अत्यधिक सुस्ती, निगलने में कठिनाई, गले में तेज दर्द या सूजन जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे मेडिकल इमरजेंसी मानना चाहिए।
गलती से डिटर्जेंट खा लिया तो क्या करें?
अगर कोई बच्चा गलती से डिटर्जेंट या किसी अन्य क्लीनिंग केमिकल को निगल ले, तो बिना चिकित्सकीय सलाह के उल्टी कराने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। मुंह में पदार्थ बचा हो तो उसे साफ कर दें और बच्चे को तुरंत चिकित्सकीय सहायता दिलाएं।
जिस उत्पाद का सेवन हुआ है, उसकी पैकिंग या नाम डॉक्टर को दिखाना भी उपयोगी हो सकता है, क्योंकि अलग-अलग उत्पादों में अलग रसायन और उनकी सांद्रता हो सकती है।
स्कूलों में भोजन की सुरक्षा पर उठे सवाल
नालंदा की घटना ने स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की निगरानी और रसोई व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नमक और डिटर्जेंट जैसे पदार्थों को अलग-अलग और स्पष्ट रूप से रखने तथा भोजन परोसने से पहले सामग्री की जांच करने जैसी सावधानियां बेहद महत्वपूर्ण हैं।
सबसे अहम बात यह है कि डिटर्जेंट को भोजन में मिल जाना सामान्य गलती नहीं मानी जा सकती, क्योंकि इससे बच्चों की सेहत पर गंभीर असर पड़ने की आशंका रहती है। घटना की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी, लेकिन बच्चों के भोजन की सुरक्षा में किसी भी स्तर की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाना जरूरी है।


































