देश के कई हिस्सों में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी की खबरों के बीच लोगों के मन में एक बड़ा सवाल है—क्या अब हर बुखार होने पर स्वाइन फ्लू की जांच करानी चाहिए? विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसा जरूरी नहीं है। जांच की आवश्यकता मरीज के लक्षण, उनकी गंभीरता, बीमारी कितने समय से है और व्यक्ति को गंभीर संक्रमण का कितना जोखिम है, इन बातों पर निर्भर करती है।
हाल ही में मध्य प्रदेश के इंदौर में एक 60 वर्षीय महिला की स्वाइन फ्लू से मौत की खबर सामने आई। इसके बाद कई राज्यों में स्वास्थ्य विभागों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। कुछ शहरों में संक्रमण के मामले बढ़ने से भी चिंता बढ़ी है।
हालांकि, H1N1 को लेकर घबराने के बजाय इसके लक्षणों और बचाव के तरीकों को समझना ज्यादा जरूरी है।
मौसम बदलने पर क्यों बढ़ते हैं मामले?
फ्लू वायरस का प्रसार मौसम और लोगों के एक-दूसरे के संपर्क में आने जैसी परिस्थितियों से प्रभावित हो सकता है। बारिश, उमस और तापमान में बदलाव के दौरान श्वसन संक्रमण के मामलों में वृद्धि देखी जा सकती है।
इसी वजह से साल के कुछ महीनों में फ्लू के मामले बढ़ना असामान्य नहीं है। किसी इलाके में मामलों की संख्या बढ़ने पर स्वास्थ्य विभाग निगरानी और रोकथाम के उपाय भी बढ़ा सकते हैं।
स्वाइन फ्लू के लक्षण कैसे पहचानें?
H1N1 संक्रमण के लक्षण सामान्य फ्लू जैसे हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं:
- बुखार
- खांसी
- गले में खराश
- सिरदर्द
- शरीर में दर्द
- थकान और कमजोरी
- नाक बहना या बंद होना
- कुछ लोगों में उल्टी या दस्त
हर संक्रमित व्यक्ति में सभी लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है।
संक्रमण फैलता कैसे है?
फ्लू मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान निकलने वाली सांस की बूंदों के संपर्क से फैल सकता है। दूषित सतह को छूने के बाद आंख, नाक या मुंह छूने से भी संक्रमण का जोखिम हो सकता है।
संक्रमित व्यक्ति लक्षण शुरू होने से पहले भी वायरस फैला सकता है। बच्चों और कुछ अन्य लोगों में संक्रमण फैलाने की अवधि अधिक हो सकती है।
किन लोगों को गंभीर बीमारी का खतरा ज्यादा?
H1N1 संक्रमण किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में जटिलताओं का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक रहता है। इनमें शामिल हैं:
- छोटे बच्चे, खासकर 5 साल से कम उम्र के
- बुजुर्ग
- गर्भवती महिलाएं
- अस्थमा, डायबिटीज या हृदय रोग जैसी पुरानी बीमारियों वाले लोग
- कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग
- लंबे समय से अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोग
ऐसे लोगों में फ्लू के लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से जल्दी संपर्क करना बेहतर होता है।
क्या हर बुखार में H1N1 टेस्ट कराना चाहिए?
नहीं, हर बुखार में स्वाइन फ्लू की जांच जरूरी नहीं होती। हल्का बुखार, सामान्य खांसी या गले में खराश होने पर डॉक्टर लक्षणों और मरीज की स्थिति देखकर तय करते हैं कि जांच की जरूरत है या नहीं।
अगर बुखार लगातार बना रहे, स्थिति बिगड़ती जाए, सांस लेने में परेशानी हो या मरीज गंभीर जोखिम वाले समूह में आता हो, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार फ्लू की जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
H1N1 की पुष्टि के लिए मॉलिक्यूलर टेस्ट, जैसे RT-PCR, इस्तेमाल किया जा सकता है। जांच के लिए आमतौर पर नाक या गले से सैंपल लिया जाता है।
इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
फ्लू के दौरान अगर सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द या दबाव, लगातार चक्कर, भ्रम, अत्यधिक कमजोरी, होंठ या चेहरे का नीला पड़ना, या लक्षणों में अचानक गंभीर बढ़ोतरी हो, तो तुरंत मेडिकल सहायता लेनी चाहिए।
बच्चों में तेज सांस चलना, पानी की कमी के संकेत, अत्यधिक सुस्ती या बच्चा सामान्य रूप से प्रतिक्रिया न दे रहा हो तो भी तत्काल चिकित्सा सहायता जरूरी है।
क्या यह कोरोना जैसी नई महामारी है?
मौजूदा H1N1 संक्रमण को सिर्फ मामलों में वृद्धि के आधार पर कोरोना जैसी नई महामारी कहना सही नहीं होगा। H1N1 वायरस लंबे समय से मौसमी इन्फ्लुएंजा के रूप में लोगों को संक्रमित करता रहा है और इसके मामले अलग-अलग मौसमों में बढ़ या घट सकते हैं।
इसलिए घबराने के बजाय सावधानी बरतना बेहतर है। हाथों की स्वच्छता बनाए रखना, बीमार होने पर दूसरों से दूरी रखना, खांसते-छींकते समय मुंह ढकना और डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं न लेना महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष: हर बुखार का मतलब स्वाइन फ्लू नहीं है और हर मरीज को तुरंत H1N1 टेस्ट की आवश्यकता भी नहीं होती। लेकिन गंभीर या लगातार बढ़ते लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों में लक्षण दिखने पर समय पर डॉक्टर से सलाह लेना सबसे सुरक्षित कदम है।


































