महिलाओं में तेजी से बढ़ रही हारोनल समस्या PCOS को लेकर मेडिकल जगत में बड़ा बदलाव किया गया है। अब इस स्थिति को PMOS नाम से जाना जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराना नाम इस बीमारी के वास्तविक प्रभाव को पूरी तरह नहीं दर्शाता था, क्योंकि यह सिर्फ ओवरी तक सीमित समस्या नहीं बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करने वाली मेटाबॉलिक और हार्मोनल स्थिति है।
डॉक्टरों के अनुसार, नया नाम महिलाओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों को यह समझाने में मदद करेगा कि यह बीमारी पीरियड्स या ओवरी तक सीमित नहीं है। इसका असर वजन, ब्लड शुगर, हार्ट हेल्थ, मानसिक स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता तक पड़ सकता है।
PMOS में महिलाओं के शरीर में एंड्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इससे पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं, चेहरे पर बाल आ सकते हैं, वजन बढ़ सकता है और गर्भधारण में दिक्कत हो सकती है। पहले अल्ट्रासाउंड में दिखने वाले छोटे-छोटे फॉलिकल्स को सिस्ट माना जाता था, लेकिन अब विशेषज्ञ साफ कर चुके हैं कि ये असली सिस्ट नहीं होते।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई महिलाओं में सिस्ट दिखाई नहीं देते, फिर भी बीमारी मौजूद रहती है। यही वजह है कि पुराने नाम को भ्रम पैदा करने वाला माना गया। नया नाम यह दर्शाता है कि यह पूरी बॉडी से जुड़ी स्थिति है, जिसमें हार्मोनल और मेटाबॉलिक बदलाव साथ-साथ होते हैं।
इस समस्या के कारण मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। कई मामलों में बांझपन, प्रेग्नेंसी कॉम्प्लिकेशन और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। इसके अलावा चेहरे पर मुंहासे, बाल झड़ना और अतिरिक्त बाल उगना इसके सामान्य संकेत माने जाते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल बीमारी का नाम बदला है, इलाज की प्रक्रिया में तुरंत कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। हालांकि अब जांच के दौरान सिर्फ पीरियड्स और ओवरी ही नहीं, बल्कि ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और दूसरी मेटाबॉलिक समस्याओं पर भी ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।
PCOS से PMOS तक: महिलाओं की हार्मोनल हेल्थ को लेकर मेडिकल दुनिया का बड़ा बदलाव
महिलाओं में होने वाली हार्मोनल समस्या PCOS को अब नए नाम PMOS से पहचाना जाएगा। मेडिकल विशेषज्ञों का मानना है कि पुराना नाम इस बीमारी की गंभीरता को सीमित तरीके से पेश करता था, जबकि इसका असर शरीर के कई हिस्सों पर पड़ता है। इसी वजह से वैश्विक स्तर पर इसका नाम बदलने का फैसला लिया गया है।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह केवल ओवरी से जुड़ी परेशानी नहीं है, बल्कि हार्मोनल असंतुलन, मेटाबॉलिक गड़बड़ी और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी जटिल स्थिति है। AIIMS के डॉक्टरों का कहना है कि नया नाम महिलाओं को बीमारी की वास्तविक प्रकृति समझाने में मदद करेगा।
इस स्थिति में शरीर में एंड्रोजन हार्मोन ज्यादा बनने लगता है। इससे पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं, वजन तेजी से बढ़ सकता है, स्किन पर एक्ने बढ़ सकते हैं और गर्भधारण में परेशानी हो सकती है। अल्ट्रासाउंड में दिखाई देने वाले छोटे फॉलिकल्स को पहले सिस्ट समझा जाता था, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार ये पूरी तरह विकसित न हो पाने वाले फॉलिकल्स होते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि कई महिलाओं में सिस्ट नजर नहीं आते, फिर भी बीमारी मौजूद रहती है। ऐसे में PCOS नाम कई बार भ्रम पैदा करता था। PMOS नाम इस बात को स्पष्ट करता है कि यह बीमारी पूरे शरीर की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है।
इस समस्या के कारण हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज, खराब कोलेस्ट्रॉल, फैटी लिवर और हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है। मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर देखा जाता है, जिसमें एंग्जायटी, डिप्रेशन और आत्मविश्वास में कमी जैसी समस्याएं शामिल हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, अभी इलाज की प्रक्रिया वही रहेगी, लेकिन भविष्य में जांच और मॉनिटरिंग का दायरा बढ़ाया जा सकता है। अब मरीजों की हार्मोनल स्थिति के साथ-साथ मेटाबॉलिक हेल्थ पर भी ज्यादा फोकस किया जाएगा।


































