बड़े शहरों में बढ़ता वायु प्रदूषण अब लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। सुबह की धुंध, धुआं और हवा में मौजूद जहरीले कण धीरे-धीरे फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि खराब हवा अस्थमा और सांस से जुड़ी बीमारियों के मामलों को तेजी से बढ़ा सकती है।
एक्सपर्ट ने क्या बताया?
Jaslok Hospital and Research Centre के वरिष्ठ डॉक्टर Nimish Shah के अनुसार, वायु प्रदूषण लंबे समय से बढ़ती समस्या है और इसका असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। उनका कहना है कि जहरीली हवा में लगातार रहना फेफड़ों के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है और इससे अस्थमा जैसी बीमारियां गंभीर हो सकती हैं।
शरीर पर कैसे असर डालता है प्रदूषण?
हवा में मौजूद बेहद छोटे प्रदूषित कण सांस के जरिए शरीर के भीतर पहुंचकर फेफड़ों की गहराई तक जमा हो जाते हैं। कई बार ये कण खून में मिलकर शरीर के दूसरे अंगों तक भी पहुंच जाते हैं। इससे सिर्फ सांस की परेशानी ही नहीं, बल्कि दिल और अन्य अंगों पर भी असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक प्रदूषण के कारण अस्थमा मरीजों में खांसी, सीने में जकड़न, घरघराहट और सांस फूलने जैसी समस्याएं अचानक बढ़ सकती हैं।
प्रदूषण के बड़े कारण
- वाहनों से निकलने वाला धुआं
- निर्माण कार्यों की धूल
- कूड़ा जलाने से उठने वाला धुआं
- घरों के अंदर बनने वाला धुआं
शहरों में रहने वाले लोग रोज इन प्रदूषकों के संपर्क में आते हैं, जिससे शरीर पर लगातार दबाव बना रहता है।
रिसर्च में क्या सामने आया?
कई स्टडी में पाया गया है कि लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से फेफड़ों की क्षमता कमजोर हो सकती है और सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। World Health Organization भी बाहरी वायु प्रदूषण को गंभीर स्वास्थ्य जोखिम और कैंसर के प्रमुख कारणों में शामिल कर चुका है।
बाहर निकलने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
- घर से निकलने से पहले एयर क्वालिटी जरूर जांचें
- ज्यादा प्रदूषण होने पर मास्क पहनें
- खुले में भारी एक्सरसाइज से बचें
- घर के अंदर साफ हवा बनाए रखें
- बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा मरीजों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए
जरूरी सलाह
यदि लगातार खांसी, सांस फूलना या सीने में जकड़न महसूस हो रही हो तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। प्रदूषण से बचाव और सही इलाज समय पर करना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
Disclaimer: यह जानकारी विशेषज्ञों की राय और रिसर्च पर आधारित है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

































