HomeDaily Newsअंतरिक्ष बन रहा युद्ध का नया मोर्चा, भारत के युवाओं को Innovation...

अंतरिक्ष बन रहा युद्ध का नया मोर्चा, भारत के युवाओं को Innovation और R&D की शक्ति बनना होगा: डॉ. राजेश्वर सिंह

  • “कल तलवार थी, आज Code, Satellites और AI हैं”
  • सीमा पर जवान और Laboratory में वैज्ञानिक, दोनों राष्ट्र के रक्षक

लखनऊ : अंतरिक्ष में तेजी से बढ़ती सैन्य और तकनीकी क्षमताओं ने वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। आने वाले समय में युद्ध केवल जमीन, समुद्र और आकाश तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि Space और Cyber Space भी रणनीतिक संघर्ष के महत्वपूर्ण क्षेत्र बन सकते हैं। सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने बदलते युद्ध के स्वरूप पर चिंता जताते हुए भारत से अपनी Space Defence, Innovation, Research एवं Advanced Technology क्षमताओं को और मजबूत करने का आह्वान किया है।

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि दुनिया तेजी से ऐसे दौर की ओर बढ़ रही है, जहां किसी देश की सैन्य शक्ति का आकलन केवल उसके टैंक, मिसाइल या लड़ाकू विमानों से नहीं, बल्कि उसके Satellites, Artificial Intelligence, Cyber Capabilities, Data Networks और Space-Based Technologies से भी होगा। ऐसे में भारत के लिए अपनी तकनीकी आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा की तैयारियों को समानांतर रूप से मजबूत करना आवश्यक है।

Space अब केवल Research नहीं, National Security का भी अहम क्षेत्र

डॉ. सिंह ने कहा कि अमेरिका की Space-based military capabilities, चीन और रूस की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताएं तथा अमेरिका की Golden Dome missile-defence पहल वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में हो रहे बदलावों के संकेत हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार Golden Dome की प्रस्तावित architecture में space-based sensors और interceptors सहित land, sea और space आधारित technologies को एकीकृत करने की योजना शामिल है। (Defense.gov)

उन्होंने कहा कि आधुनिक सैन्य अभियानों में Satellites की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुकी है। Communication, Navigation, Surveillance, Intelligence और विभिन्न सैन्य प्रणालियां अंतरिक्ष आधारित infrastructure पर निर्भर हैं। ऐसे में किसी देश के महत्वपूर्ण space assets को निशाना बनाना उसकी communication और situational awareness क्षमताओं को प्रभावित कर सकता है।

अमेरिकी Space Force भी space domain awareness, resilient satellite architecture और counter-space capabilities को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में गिनाती है, जो यह दर्शाता है कि अंतरिक्ष अब वैश्विक सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। (Defense.gov)

Mission Shakti से SBS-3 तक, बढ़ रही भारत की Space Defence Capability

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि भारत ने भी अपनी अंतरिक्ष-आधारित सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। वर्ष 2019 में Mission Shakti के माध्यम से भारत ने Anti-Satellite (ASAT) क्षमता का सफल प्रदर्शन किया था।

इसके बाद भारत ने Space-Based Surveillance को मजबूत करने की दिशा में भी बड़े कदम उठाए हैं। Space-Based Surveillance-3 (SBS-3) programme के तहत 52 surveillance satellites की योजना को मंजूरी दी गई है। सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹26,968 करोड़ है और इसमें 21 satellites ISRO तथा 31 satellites private sector द्वारा बनाए जाने की योजना बताई गई है। (Hindustan Times)

यह programme भारत की land और maritime domain awareness को मजबूत करने तथा देश की surveillance capabilities को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। (MP-IDSA)

“युद्ध के हथियार बदल रहे हैं, इसलिए तैयारी का तरीका भी बदलना होगा”

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि तकनीक ने युद्ध की परिभाषा को तेजी से बदल दिया है। उन्होंने कहा,

“सीमा पर खड़ा जवान और Laboratory में काम करता वैज्ञानिक, दोनों देश के रक्षक हैं। युद्ध के हथियार और तरीके बदल रहे हैं- कल तलवार थी, आज Code, Satellites और AI हैं।”

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जिस देश के पास अत्याधुनिक Research, Artificial Intelligence, Cyber Security, Space Technology, Advanced Computing और Indigenous Defence Technologies की मजबूत क्षमता होगी, वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को बेहतर तरीके से मजबूत कर सकेगा।

R&D और Private Innovation में बढ़े निवेश पर जोर

डॉ. सिंह ने भारत में Research and Development (R&D) पर सार्वजनिक और निजी निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के Universities, Research Institutions, Start-ups, Defence Industry और Technology Companies को एक साथ लाकर ऐसी innovation ecosystem तैयार करने की जरूरत है, जो भविष्य की चुनौतियों के लिए अत्याधुनिक तकनीक विकसित कर सके।

उन्होंने Scientists, Engineers, Researchers और Innovators को बेहतर अवसर, संसाधन और प्रोत्साहन उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार केवल imported technology पर निर्भर रहने के बजाय भारत को अपनी strategic technologies के विकास में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

युवाओं से Innovation और Research को Career का हिस्सा बनाने का आह्वान

डॉ. राजेश्वर सिंह ने देश के युवाओं से केवल पारंपरिक career विकल्पों तक सीमित न रहने और Innovation, Coding, Artificial Intelligence, Robotics, Space Technology, Cyber Security, Electronics और Advanced Research जैसे क्षेत्रों में आगे आने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी technological strength बन सकती है। यदि युवाओं की ऊर्जा को Research और Innovation से जोड़ा जाए तो भारत न केवल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत कर सकता है, बल्कि वैश्विक Space और Technology ecosystem में भी अपनी भूमिका और बढ़ा सकता है।

डॉ. सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा की तैयारी केवल सीमा पर हथियारों से नहीं होती, बल्कि Research Laboratories, Universities और Innovation Centres में भी होती है। इसलिए भारत के लिए अपनी technological strength को लगातार बढ़ाना और भविष्य की चुनौतियों के लिए अभी से तैयार रहना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि भारत के लिए तैयारी का समय अभी है- क्योंकि भविष्य की सुरक्षा केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि Technology, Data, Cyber Space और Space में भी तय होगी।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments