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मिडिल ईस्ट में US की बड़ी सैन्य घेराबंदी, 20+ वॉरशिप तैनात; ईरान को लेकर ट्रंप का क्या प्लान?

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका ने क्षेत्र में 20 से ज्यादा युद्धपोत तैनात किए हैं। इन अमेरिकी नौसैनिक जहाजों को कई अहम सैन्य अभियानों में लगाया गया है, जिनमें ईरान के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी को लागू करना भी शामिल है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत अभी निर्णायक स्तर तक नहीं पहुंची है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के मुताबिक, समुद्री नाकेबंदी लागू होने के बाद अमेरिकी सेना ने दर्जनों वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही को प्रभावित किया है। 9 अगस्त तक कम से कम 55 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदले जाने की बात कही गई है। इसके अलावा दो जहाजों को निष्क्रिय किए जाने और दो अन्य जहाजों पर कार्रवाई किए जाने का भी दावा किया गया है।

मध्य पूर्व में अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती बढ़ी

अमेरिकी नौसेना का युद्धपोत USS Ross भी इस मिशन का हिस्सा है। जहाज पर तैनात अमेरिकी नौसैनिक समुद्री गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं और अमेरिकी आदेशों को लागू कराने में जुटे हैं। क्षेत्र में मौजूद 20 से ज्यादा अमेरिकी युद्धपोतों को अलग-अलग सैन्य अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

अमेरिका की इस तैनाती का सबसे अहम केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है। फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाला यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया के तेल और गैस व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा इस रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां लंबे समय तक तनाव रहने का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और ऊर्जा कीमतों पर भी पड़ सकता है।

होर्मुज को लेकर ईरान और अमेरिका आमने-सामने

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपनी शर्तें स्पष्ट कर दी हैं। तेहरान का कहना है कि समुद्री मार्ग को सामान्य रूप से खोलने से पहले अमेरिका को उसकी कुछ प्रमुख मांगों पर सहमति बनानी होगी।

ईरान की मांगों में कथित नुकसान के लिए मुआवजा, प्रतिबंधों को हटाना और सैन्य दबाव तथा धमकियों को खत्म करना शामिल है। ईरान का यह भी कहना है कि इन मुद्दों पर ठोस प्रगति के बिना वह समुद्री रास्ते को लेकर अपनी मौजूदा नीति में बड़ा बदलाव नहीं करेगा।

दूसरी ओर, ईरान ने ओमान के साथ एक संभावित समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच होर्मुज क्षेत्र में अलग शिपिंग रूट तय किए जाने की संभावना है। हालांकि, इससे अमेरिका और ईरान के बीच मुख्य विवाद पूरी तरह खत्म होता नजर नहीं आ रहा है।

अमेरिका-ईरान के बीच सीधे बातचीत नहीं

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच सीधे तौर पर बातचीत नहीं हो रही है। उनका कहना है कि जब तक वॉशिंगटन जून में हुए अंतरिम समझौते से जुड़े प्रावधानों का उल्लंघन करता रहेगा, तब तक तेहरान सीधे वार्ता के लिए तैयार नहीं होगा।

हालांकि, दोनों देशों के बीच संपर्क पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। अराघची ने बताया कि मध्यस्थ देशों और अन्य चैनलों के जरिए दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है।

ट्रंप के सामने बड़ी चुनौती

मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और ईरान की सख्त शर्तों के बीच राष्ट्रपति ट्रंप के सामने एक मुश्किल संतुलन कायम करने की चुनौती है। एक तरफ अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर ट्रंप युद्ध को लंबा खींचने के बजाय किसी समझौते की संभावना तलाशने की बात करते रहे हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर जारी गतिरोध अब केवल अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव का मुद्दा नहीं रह गया है। इस समुद्री मार्ग पर लंबे समय तक किसी भी तरह की रुकावट से वैश्विक तेल आपूर्ति, शिपिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर व्यापक असर पड़ सकता है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत और समुद्री गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

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