केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एक कार्यक्रम के दौरान लिवर से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए कहा कि समय रहते पहचान और जागरूकता इन समस्याओं से बचाव में अहम भूमिका निभा सकती है। उन्होंने स्वास्थ्य संस्थानों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उपचार के साथ-साथ लोगों को बीमारी से बचाव और स्वास्थ्य शिक्षा देना भी जरूरी है।
कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि फैटी लिवर जैसी स्थितियों के बारे में लोगों में चर्चा और जागरूकता बढ़ी है, जो सकारात्मक संकेत है। उन्होंने छात्रों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े युवाओं से अपील की कि वे अपने ज्ञान और अनुभव को समाज तक पहुंचाकर स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा दें।
स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए विस्तार का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि हाल के वर्षों में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे में वृद्धि हुई है। साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और शुरुआती स्तर पर जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
इस दौरान यह भी बताया गया कि देशभर में बड़ी संख्या में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और आयुष्मान आरोग्य सेवाएं संचालित हो रही हैं, जहां शुरुआती जांच और स्वास्थ्य परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है।
कार्यक्रम में संस्थान के नेतृत्व की ओर से लिवर रोगों के आंकड़ों और उपचार संबंधी उपलब्धियों की जानकारी साझा की गई। बताया गया कि बड़ी संख्या में मरीजों का उपचार और कई सफल लिवर ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं।
विशेषज्ञों ने चिंता जताई कि फैटी लिवर के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं और अनुमान के अनुसार बड़ी आबादी किसी न किसी स्तर पर इससे प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि संतुलित खानपान, नियमित जांच और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर लिवर संबंधी कई समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकता है।


































