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जस्टिस एस. मुरलीधर क्यों हैं चर्चा में? भारत के अहम फैसलों से लेकर संयुक्त राष्ट्र की जांच तक का सफर

भारत के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एस. मुरलीधर हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में हैं। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े एक जांच आयोग की अगुवाई में तैयार रिपोर्ट ने वैश्विक स्तर पर बहस को तेज कर दिया है। रिपोर्ट में गाजा संघर्ष के दौरान बच्चों और नागरिकों पर पड़े प्रभाव को लेकर गंभीर निष्कर्ष सामने रखे गए, जिसके बाद जस्टिस मुरलीधर का नाम फिर चर्चा में आया।

कौन हैं जस्टिस एस. मुरलीधर?
जस्टिस श्रीनिवासन मुरलीधर भारतीय न्यायपालिका के उन नामों में शामिल रहे हैं जिन्हें संवैधानिक और मानवाधिकार से जुड़े मामलों में उनके दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। उनका जन्म 8 अगस्त 1961 को हुआ। उन्होंने विज्ञान विषय से स्नातक करने के बाद कानून की पढ़ाई पूरी की और आगे उच्च शिक्षा भी प्राप्त की।

उन्होंने वकालत की शुरुआत चेन्नई से की और बाद में दिल्ली में उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय में कानूनी प्रैक्टिस की। अपने शुरुआती कानूनी करियर में उन्होंने मानवाधिकार और जनहित से जुड़े मामलों में भी काम किया।

न्यायिक करियर और प्रमुख जिम्मेदारियां
वर्ष 2006 में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त किया गया। लंबे समय तक वहां सेवा देने के बाद उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट भेजा गया और बाद में वे उड़ीसा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे कानूनी और सार्वजनिक मामलों में सक्रिय रहे।

वे फैसले जिन्होंने उन्हें अलग पहचान दी
उनके कार्यकाल के दौरान कई ऐसे मामलों पर फैसले आए जिन्हें भारतीय न्यायिक इतिहास में महत्वपूर्ण माना जाता है। इनमें व्यक्तिगत स्वतंत्रता, मानवाधिकार, सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े मामलों और संवैधानिक मूल्यों से संबंधित फैसले शामिल रहे।

दिल्ली हाईकोर्ट में दिए गए एक चर्चित फैसले ने सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने पर राष्ट्रीय बहस को दिशा दी थी। बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस विषय पर व्यापक फैसला दिया।

इसके अलावा सामूहिक हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े मामलों में उनकी टिप्पणियां और फैसले भी व्यापक चर्चा का विषय बने।

संयुक्त राष्ट्र की जांच में भूमिका
हाल के वर्षों में उन्हें संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रणाली से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग में जिम्मेदारी दी गई। आयोग का उद्देश्य इजरायल और फिलिस्तीनी क्षेत्रों से जुड़े संघर्षों और संभावित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच करना है।

गाजा रिपोर्ट को लेकर वैश्विक बहस
आयोग की हालिया रिपोर्ट में संघर्ष के दौरान बच्चों और नागरिकों पर प्रभाव, बुनियादी ढांचे की क्षति और मानवीय स्थिति पर गंभीर टिप्पणियां की गईं। रिपोर्ट में विभिन्न पक्षों के आचरण पर सवाल उठाए गए और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

रिपोर्ट जारी होने के बाद इस पर अलग-अलग देशों और पक्षों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। जहां कुछ समूहों ने रिपोर्ट को महत्वपूर्ण बताया, वहीं इजरायल ने उसके निष्कर्षों को अस्वीकार करते हुए उस पर आपत्ति दर्ज की।

जस्टिस मुरलीधर ने सार्वजनिक रूप से कहा कि आयोग का उद्देश्य उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर मानवीय स्थिति का मूल्यांकन करना और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुपालन पर ध्यान आकर्षित करना है।

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